मुस
पांच सात दिन बटी एक मुसैलि बड तौयै राख्यू कूंछा . भीतर पन कपड ज्वात चप्पल जी ले छी सब कुतर गो . सागा लिजी आलू क दांण लै रैछ्यूं पैतीस रुपै किलो .. जो क्वाड लिगे हुन्योल . और तो और भीपन बिछूंणी बोरी दरि ले नि छोडि . आब गरीब लोगनाक पास तदुकै सम्पत्ति हुनेर भै . नतर मैलि सुणि राखौ कि मुस सुन क जेवर ले लिजाने रूं बल आपुण दार (बिल ) भितर .
कैके यां बटी चुदानि लायूं . पर मुस नैं फंस . एकैलि कौ स्यो टुकुड लगा कैबेर . आब एक बीस रुपैं किलो स्यो आपु खाणा लिजी दुर्लभ हैरीन मुसा लिजी कां बटी लूंछ्यूं . मुस ले आजकला क यदुक हेशियार हैगीन कि खालि सुखी रोटक टुकुड लगाला तो फंसनै नहांतिन . घ्यू लगाय रोट लै और चुदानि में लगाय तो तबै फँसों बल . आब ध्यू तो स्वैण देखण हैगो . मैलि सरकार वालि चाल चली कि मुस कैं नकली घ्यू देखै बेर फंसाई जाओ और रवाट लै रिफाइन्ड लगा पर मुस ले बाईस गुरू क पढाई हुन भो . म्यार घपटन में नि आय .
हालांकि मेकें यो बातक पक्क भरोस छी कि म्यार भितर मुस ज्यादे दिन तक नि बच . तकैं भाजण पडौल या भूकैलि मर जाल . किलै कि म्यार महंगाई लि यास भांट टोडि राखन कि बतूं . भीतरपन अनाजाक कन्टर बाजण लागि रयी .
एक पडौसी छै कै बैठ्यूं कि यार भीतर मुस ऐरौ एक भौते मोट्टि तो पडोसी हंसण बैठौ . कूण लागौ त्यार भितर कि खाल .
खैर पत्त नै बेलि रात मुस भूखैलि परेशान छी भलै या वीक ग्रहौ अचानक खराब है पडौ . उ सूखि रोट लगाई में ले फंस पडौ .
रत्ति ब्याण उठ्यू तो एक ढडू बराबर मुस चुदानि में देखिबेर बडि तसल्ली भै . मुस देखां मेकें भौते रीस आयी भै मन करनौय तौ मुस कैं मारि बेर काच्चै बुकै द्यूं . पर पत्त नै दया ऐ पडी और मैं मुस कैं दूर छोडना लिजी घर बटी बाट लागि गेयूं .
कालोनी बटी भ्यैर आयूं तो गली क लास्ट में खडक दा मकान भै . म्यार हाथ में चुदानि और वीक भीतर मुस देखिबेर खडक दा लि मेकें हाथ क इशारैलि रोक और क्याप कूण लाग . खडक दा पेस्ट करण लागि भै . मैलि कौय - यार खडक दा पैलि तौ पेस्ट थूकौ फिर बुलाओ के समझ नि उणय .
खडक दा कूण लाग - तौ मुस कां लिजाणछा ..
मैलि कौ - यार परेशान करि राखछी यो भ्योलहालणैलि .. यकैं कति नालि में खेडि उं . भीतर पर सब काटि बेर छिताल बणै हालि यैलि .
खडक दा क मूखक नक्श बिगड गे - कूण लाग - कस बामण छै यार तू . त्वेकैं धरम करम क के ग्यान छै नै .
मैलि कौ - हाय .. यमैं कस धरम करम .. कि बुलाणछै .. कैन्टीनैकि तो नै चढै लिरये रत्ति रत्ति ब्याण .
खडक दा कूण लाग - बकवास नै कर रे बामण . आजकल मीलि दिन में पीण छाडि राखी . और तू यो बता तू बामण कें अकल छै नै . पैलि तौ तू हमन शिक्षा दिनै अगर तदुक लकारिक नि छै तो खुद तो कम से कम बामण क जस काम करनै .
मैलि कौ - यार खडक दा सीद सीद फसक कर . म्यार समझ में तो के नै उणय
खडक दा आब समझूण बैठ - यार गुरू आज बटी गणेश ज्यू क सप्ताह चालू हैरौ . मैंस आपुण घर में गणेश थापण लाग रयीं . और तू पैली तो गणेश थापने अगर तस नि ले करणये तो कम से कम उनर वाहन मुस तो नि पकडने आज . तू तो शहर ऐबेर आपुण रीति रिवाजै भुल गोछै .
मैलि कौ - यार रिति रिवाज नै भुलि रयूं आपुण तबै आज गणेश नै थाप . म्यार भितर तो गणेशैकि मूर्ति छनै छ द्याप्ता अटाई में . मेर बुब हरिद्वार बटी लाछी .
खडक दा कूण लाग - के गलत चीज ज कि भै . आपुण सस्कृति दगाड अगर दुसरि चीज ले भल छ तो करण चैं . आपुण रीति रिवाज ले करो दगाड में .
मैलि कौ - पै तू पैं तू यां नन्दा सुनन्दा डोलि किलै नै उठूनै .
खडक दा कूण लाग - यार तू समझण नै रये . चल गणेश नै थाप पर कम से कम तौ मुस तो नै पकड . आजा क दिन भीतर पन मुसक उण शुभ हुनेर भै . आज मुस भीतर आईयांक शकून हुनेर भै .एक तू छै जबरदस्ती भीतर आयी मुस कैं भ्यैर निकालण में लागि रौछै .
आब मैलि जरा आपुण खुराफाती दिमाग चलूणैकि सोचि -
मै खडक दा क आंगण में गेयूं . और मैलि चुदानि क ढक्कन खोलिबेर मुस कैं खडक दा क आंगण में छेडि दी . और खडक सिंह छै कौय - लिओ हो खडक दा . यो मुस तुमर भोय .खडक दा - हाँ हाँ हाँ हाँ .. कि करनौछै तस कूण लाग .
मैलि कौ - लिओ तुमार भितर शकून है ग्याय .
खडक दा पेस्ट करण भुलि बेर ईंट लिबेर मुसाक पछिल पडि ग्याय और बीच बीच में मेकें ले मैक्यूण लागि भाय .
म्यार कुचौ क झाडन बयाव ल्हिनै गे . आदू किलोमीटर मुस छोडन जांण है बचि गोयूं .
खडक दा जो दार भितर मुस जाई भोय वां लाकौडैलि खचोरण में लागि गोय ..
विनोद पन्त 'खन्तोली '
कैके यां बटी चुदानि लायूं . पर मुस नैं फंस . एकैलि कौ स्यो टुकुड लगा कैबेर . आब एक बीस रुपैं किलो स्यो आपु खाणा लिजी दुर्लभ हैरीन मुसा लिजी कां बटी लूंछ्यूं . मुस ले आजकला क यदुक हेशियार हैगीन कि खालि सुखी रोटक टुकुड लगाला तो फंसनै नहांतिन . घ्यू लगाय रोट लै और चुदानि में लगाय तो तबै फँसों बल . आब ध्यू तो स्वैण देखण हैगो . मैलि सरकार वालि चाल चली कि मुस कैं नकली घ्यू देखै बेर फंसाई जाओ और रवाट लै रिफाइन्ड लगा पर मुस ले बाईस गुरू क पढाई हुन भो . म्यार घपटन में नि आय .
हालांकि मेकें यो बातक पक्क भरोस छी कि म्यार भितर मुस ज्यादे दिन तक नि बच . तकैं भाजण पडौल या भूकैलि मर जाल . किलै कि म्यार महंगाई लि यास भांट टोडि राखन कि बतूं . भीतरपन अनाजाक कन्टर बाजण लागि रयी .
एक पडौसी छै कै बैठ्यूं कि यार भीतर मुस ऐरौ एक भौते मोट्टि तो पडोसी हंसण बैठौ . कूण लागौ त्यार भितर कि खाल .
खैर पत्त नै बेलि रात मुस भूखैलि परेशान छी भलै या वीक ग्रहौ अचानक खराब है पडौ . उ सूखि रोट लगाई में ले फंस पडौ .
रत्ति ब्याण उठ्यू तो एक ढडू बराबर मुस चुदानि में देखिबेर बडि तसल्ली भै . मुस देखां मेकें भौते रीस आयी भै मन करनौय तौ मुस कैं मारि बेर काच्चै बुकै द्यूं . पर पत्त नै दया ऐ पडी और मैं मुस कैं दूर छोडना लिजी घर बटी बाट लागि गेयूं .
कालोनी बटी भ्यैर आयूं तो गली क लास्ट में खडक दा मकान भै . म्यार हाथ में चुदानि और वीक भीतर मुस देखिबेर खडक दा लि मेकें हाथ क इशारैलि रोक और क्याप कूण लाग . खडक दा पेस्ट करण लागि भै . मैलि कौय - यार खडक दा पैलि तौ पेस्ट थूकौ फिर बुलाओ के समझ नि उणय .
खडक दा कूण लाग - तौ मुस कां लिजाणछा ..
मैलि कौ - यार परेशान करि राखछी यो भ्योलहालणैलि .. यकैं कति नालि में खेडि उं . भीतर पर सब काटि बेर छिताल बणै हालि यैलि .
खडक दा क मूखक नक्श बिगड गे - कूण लाग - कस बामण छै यार तू . त्वेकैं धरम करम क के ग्यान छै नै .
मैलि कौ - हाय .. यमैं कस धरम करम .. कि बुलाणछै .. कैन्टीनैकि तो नै चढै लिरये रत्ति रत्ति ब्याण .
खडक दा कूण लाग - बकवास नै कर रे बामण . आजकल मीलि दिन में पीण छाडि राखी . और तू यो बता तू बामण कें अकल छै नै . पैलि तौ तू हमन शिक्षा दिनै अगर तदुक लकारिक नि छै तो खुद तो कम से कम बामण क जस काम करनै .
मैलि कौ - यार खडक दा सीद सीद फसक कर . म्यार समझ में तो के नै उणय
खडक दा आब समझूण बैठ - यार गुरू आज बटी गणेश ज्यू क सप्ताह चालू हैरौ . मैंस आपुण घर में गणेश थापण लाग रयीं . और तू पैली तो गणेश थापने अगर तस नि ले करणये तो कम से कम उनर वाहन मुस तो नि पकडने आज . तू तो शहर ऐबेर आपुण रीति रिवाजै भुल गोछै .
मैलि कौ - यार रिति रिवाज नै भुलि रयूं आपुण तबै आज गणेश नै थाप . म्यार भितर तो गणेशैकि मूर्ति छनै छ द्याप्ता अटाई में . मेर बुब हरिद्वार बटी लाछी .
खडक दा कूण लाग - के गलत चीज ज कि भै . आपुण सस्कृति दगाड अगर दुसरि चीज ले भल छ तो करण चैं . आपुण रीति रिवाज ले करो दगाड में .
मैलि कौ - पै तू पैं तू यां नन्दा सुनन्दा डोलि किलै नै उठूनै .
खडक दा कूण लाग - यार तू समझण नै रये . चल गणेश नै थाप पर कम से कम तौ मुस तो नै पकड . आजा क दिन भीतर पन मुसक उण शुभ हुनेर भै . आज मुस भीतर आईयांक शकून हुनेर भै .एक तू छै जबरदस्ती भीतर आयी मुस कैं भ्यैर निकालण में लागि रौछै .
आब मैलि जरा आपुण खुराफाती दिमाग चलूणैकि सोचि -
मै खडक दा क आंगण में गेयूं . और मैलि चुदानि क ढक्कन खोलिबेर मुस कैं खडक दा क आंगण में छेडि दी . और खडक सिंह छै कौय - लिओ हो खडक दा . यो मुस तुमर भोय .खडक दा - हाँ हाँ हाँ हाँ .. कि करनौछै तस कूण लाग .
मैलि कौ - लिओ तुमार भितर शकून है ग्याय .
खडक दा पेस्ट करण भुलि बेर ईंट लिबेर मुसाक पछिल पडि ग्याय और बीच बीच में मेकें ले मैक्यूण लागि भाय .
म्यार कुचौ क झाडन बयाव ल्हिनै गे . आदू किलोमीटर मुस छोडन जांण है बचि गोयूं .
खडक दा जो दार भितर मुस जाई भोय वां लाकौडैलि खचोरण में लागि गोय ..
विनोद पन्त 'खन्तोली '
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