रत्तिब्याण
रत्तिब्याणक टैम भै . बिस्तर में पड़ी भयूं . भला भाल स्वैण उण लागि भै . तात लागि भै लिहाफ भितर . तब तक घरवाईक आवाज पड़न बैठ गे कान न में . उठो हो . उठो . सुड़नौछा . उठो . मैलि सुड़ियैकि नि सुणी करि दी . घनघोर नींद आइयाक नखार लगै दी . घरवाई ले कम नि भै . वीलि मेर हाथ खींचबेर लझोड़न शुरू कर दी . मैल को - कि करनैछी तस . तमीज कां गे तेरि . बैग छ्यूं त्योर . प्यारैलि नि उठै सकनी . उठो जानूं उठो डार्लिंग कैबेर उठूनी . समयाक सांथ चली कर . देख धें दुन्नि कां पुजि गे . घरवाई - होय सब देखि रयूं मी दुन्नि कां पुजि गे . सारि दुन्नि नैध्वे बेर पुज पाठ करि बेर बैठ गे . तुमैरि चारि लिफाफ भीतर पाद नि मारड़य दुन्नि . उठो फटाफट नाण ध्वैण करो . मैल बिस्तर उठूण छ . क्वे भीतर आलौ कि कौल ? मैलि कौ - त्यार मुख बटी भलि बात कबै नि आलि . और यदुक ठंड में नाण क नाम झन लिये . ठंडैलि जुकाम लागि गे या बीमार पड़ि गेयूं तो को रौल जिम्मेदार . मैसैलि आपुण जतन आपुण हाथैलि करण चें . घरवाई - जि बजर पाड़छा पाड़ो . नाण नि लाग रया तो कम से कम तौ मूखक टाल तो खुकल लिओ . त्यार बारक दिन छ . और तौ चाहा धरि र...