श्राद्ध क बाद
रत्ति ब्यांण बटी आज बिसनदत्त ज्यू क चित्त परांणि अगास उज्यांणि लागि रै . आपुणि बुडी हरुलि कैं घजबजूण लागि रयीं .
हिट बुडिया . कि चै रै छै आब बुडिया , हिट फटाफट बटी आज वापस जांण छ .
हरुलि - जाग जाना कन . तदुक अलबलाट कि हैरौ .
बिसनदत्त - अरे यार आज बटी नौर्त लागि गेइन . सराद बेलियै खतम हैगेई . आब हमर धरती में रूणक टैम खतम हैगो . सरगलोक वापस जांण छ .
हरुलि - ऐल मौकैलि ऐ रयां . साल भर में यो सोलह दिनै कि तो छुट्टी मिलनेर भै . आब तो अघिल सालै कि बात भै .
बिसनदत्त - कि करीं यार यो दुनियक बिधान भै . फिर देर है जाली तो यमराज ज्यू नाराज है जाल . न मालूम कि दण्ड दि द्याल . उ तो चित्रगुप्त ज्यू क दगाड मेर जांण पछांण है गे तो एकाद दिन चलै दिनन . जांण बखत उनैलि कै राखछी कि पैलि नौर्त तक तो मी संभाल हालून पर दूसार नौर्त तक हर हालत में पुजि जाया . अगर कैलि मेरि घात ( शिकायत ) कै दी तो मेर लिजी मुश्किल है जाल . मेर ले नौकरी भै .
हरुलि - तुमार जै जांण पछ्याँण जै कसिके लागि तुमरि ?
बिसनदत्त - अरे यार मी ले आपुण डिपाटमेन्ट में लेखाअधिकारी भयूं और चित्रगुप्त ज्यू क ले तसै पोस्ट भै . कबै खालि टैम पर उनर काम करि द्यूं तो तबै जांण पछ्यांण हैगे . आब औफिस में बैठणा वीलि और ले अफसरन दगाड राम राम श्याम श्याम भयी . जरा काम निकल जानन .
हरुलि - ओईज्या .. पैलि किलै नि बताय पैं तुमलि . चित्रगुप्त ज्यूं छैं सिफारिस लगैबेर हम द्विनै कें दगाडै करै दिना कन . एक दगाड रून स्वर्ग में तो कदुक भल होल . .. तुम कथ्थ मैं कथ्थ . कदुक निस्वास लागौं तुमर मेंकें . द्विये दगाडै रूलो तो कदुक सुखैलि रूल हम द्विये .
बिसनदत्त - मेकें पागल कुकुरैलि ज कि काटि राखौ . पन्चास साल त्यार दगाड रै बेर देख हालौ . आब स्वर्ग ऐबेर जरा पराणि सुखैलि छ . त्यार दगाड रूण पर तू तो सुखी है जाली पर मेर तो निरूॅण है जाल . आहा एकलै कदुक मज छन म्यार . क्वे कचकचाट नै क्वे रोक टोक नै . कति बटी आय तो .. देर किलै भै , कैक दगाड छिया कूणी वाल क्वे नै . ..त्वेकैं दगाड बुलैबेर आपुण स्वर्ग कैं नरग को बणाल
हरुलि - तुम हकाहाक झन करिया हां . अगर मेकें गुस्स आल तो जां होला वैं ऐबेर तुमार भांट थेचि द्यूल . फिर रौला सुखैलि .
बिसनदत्त - अरे मजाक करनयूं यार .
हरुलि - मजाक हजाक के नै .. तुमार रंग ढंग मी भली कैबेर जांणूं . तुमन कि लागौं मेके के खबर नहांति . कुछ दिन पैली मेरि सहेली बसन्ती बतूण लागि रैछी कि तुम स्वर्ग लोकाक पुण्यात्मा पार्क में आपुणि इसकूलाक दिननैकि दगडू भगुली देबी क दगाड बैठि बेर हंस हंसि बेर बात करण लागि रौ छिया बल .
बिसन दत्त - अरे यार उ बिचारिक दगाड जरा दुख सुखा क फसक करण लागि रौछ्यूं . तुम स्यैणिन कैं बात क बतंगड बणूण उं .
हरुलि - दुख सुखाक फसक हंस हंस बेर को करौं .. मेकें उल्लू समझ राखौ .
बिसनदत्त - अरे यार पुरि बात समझ लियी कर . मैलि कौ तो दुख सुखा क फसक . पैलि दुखा क फसक करन . फिर सुखाक . जब तेरि सहेली लि देखि हुनेलां उ बखत सुखाक फसक चलि रैछी . तबै हंसि हंसि बेर करण लागि छियां .
हरुलि - पैं वीकि कन्ध में हाथ धरिबेर कि हुणौछील. फिर फसक बैंच में बेठिबेर ले है सकछी .. झाडि क पिछाडि बटी कि गुल खिलनैछी .
बिसनदत्त - तेरि सहेली बसन्ती पगली गे . इथकै क उथकै फसक करण में तकैं मज ऊं . मरि बाद ले चैन नहांति तौ ढ्वाल कैं .
हरुलि - बसन्ती कैं नाम धरणैं कि जरवत नहां . आपुण करम देखो . तुम बैग नैकि जातै तसि छ .
बिसनदत्त - यार आब पुर बैग मैंसनैकि जात पर कि हैगो . होस में रई कर . कि करौ बैगनैलि .
हरुलि - किलै .. आपुण त्याडि ज्यू . जलोटा ज्यू . कैं भुलि गोछा .कि गुल खिलूणी .
बिसनदत्त - तु ले आपुण राधे ढ्वाल और उ ....... कें भुलि गेछी ..
हरुलि - तुम बहस नि करो . खबर दार आज बटी पार्क उज्याण चै ले दी तो .. और उ भागुलि क मी झांकरि में आग हालून स्वर्ग जैबेर ..
बिसनदत्त - अरे यार आब बातन खतम कर . स्वर्ग जाते ही त्वेकैं आपुण दगाड शिफ्ट करै हालून . बज्जर पडि जाल . मेर लिजी वां ले चैन नि भै .
हरुलि - ठीक छ .
बिसनदत्त - चल आब पै .. तैयार है जा . लागनू स्वर्ग उज्याणि बाट् .
हरुलि - आज तो रुक जाओ पें . जरा लखनऊ पन घुमनू . मौल हौल जानूं . वां रातक डिनर करनूं . कि हैरे तदुक जल्दी . जी ते जी तो च्याल ब्वारिनाक दहाड लखनऊ नै आयां . मरी बात तो धुमि उनूं .
बिसनदत्त - हाय .. सरादक भात पातलि खैबेर नै भयी धौ त्वेकैं . कदुक भल खांण बणै राखछी .
हरुलि - ढुंग में रै जौ तनौर सराद . जी ते जी हमन उज्यांण चै ले नि दी . आब टटम करिबेर कि हूं . मी तो तुमार दगाडा वीलि ऐ गेयूं . मेर तो मनै नि छी सरादन मे उणक . कबै ब्वारिलि एक गास भलि कै नि दि ज्यून छनाल. आब पकवान बणैबेर कि हूं .
बिसनदत्त - होय तस तो तू ठीक कुणैछी . आब जे ले भै आपुणि औलाद भै . साल में एक बार उणै भै . मैंसनाक पितर कि कौल . स्वर्ग में नाम धराल . तनार च्याल ब्वारि तनन मरिबेर ले नै पुछन कौल . बेजत्ती तो हमरि हेलि . तु यस कर . मी न्है जां स्वर्ग तू ब्याल तक घुमिबेर ऐ जाये .
हरुलि - मैलि कां देखी भै लखनऊ . एकलि भोबरि नि जूलैं .
बिसनदत्त - पैं मैलि जै कां देखि राखौ . मैं ले जनमभर पहाडै रयी भयूं . एक बात छ . यो सरादाक चक्कर में लखनऊ जै देखी हालौ .
हरुलि - यस करनू पैं घर जै उनूं .. पहाड ... जरा देखि उनूं .. वांक निस्वास लागौं कबै कबै . हमकि जिन्दगी वैं बिति भै . दिगौ कस कारबार छी हमार . कस मक्कान छी .
बिसनदत्त - दै .. ऐ .ऐ .. हरुली .. आब के जांछी पहाड . जब तक हम ज्यून छियां तबै तक छी पहाड . हमार मरी बाद वां च्याल ब्वारिनैलि ढुंग फरकै हालौ .. हमर कुड उधरि गो . आँगण में स्यूंण जामि गो . गाड भिड बांज पडि छन . आब के नि रैगेय हरुली वां .. बस एक रोड ऐगे बल वां .. रोड देखण छ तो हिट .. आब तो वां जैबेर हम रूल कां ... तौ ते आफत छ . कैक यां जूल ..
हरुलि - किलै भुलि गोछाल. आब हम ज्यून ज के भयां . हम तो आत्मा भयां . कति पीपवा कै बोट में पडि जूल . रात तो काटण भै .
बिसनदत्त - चल ठीक छ पैं हिट . हमरि पितरनैकि थात भै . चै चितै उन . हमार द्यो द्याप्त ले वैं भाय . आब नोर्त ले लागि गेयी . देपातन कैं हाथ जोडि उल दूर बटी . कि अन्ताज गौं पन क्वे पुराण आत्मा हमार जास और आयी हवो भटकते भटकते . उनन दगाड ले मिलि उन ..
हरुलि - होय पें हिटो .
( बिसनदत्त और हरुलि लखनऊ अल्मोडा वालि उत्तराखंड परिवहन निगमाक गाडि क पाख में बैठिबेर अलमाड बाट लागि गेई .)
विनोद पन्त 'खन्तोली '
हिट बुडिया . कि चै रै छै आब बुडिया , हिट फटाफट बटी आज वापस जांण छ .
हरुलि - जाग जाना कन . तदुक अलबलाट कि हैरौ .
बिसनदत्त - अरे यार आज बटी नौर्त लागि गेइन . सराद बेलियै खतम हैगेई . आब हमर धरती में रूणक टैम खतम हैगो . सरगलोक वापस जांण छ .
हरुलि - ऐल मौकैलि ऐ रयां . साल भर में यो सोलह दिनै कि तो छुट्टी मिलनेर भै . आब तो अघिल सालै कि बात भै .
बिसनदत्त - कि करीं यार यो दुनियक बिधान भै . फिर देर है जाली तो यमराज ज्यू नाराज है जाल . न मालूम कि दण्ड दि द्याल . उ तो चित्रगुप्त ज्यू क दगाड मेर जांण पछांण है गे तो एकाद दिन चलै दिनन . जांण बखत उनैलि कै राखछी कि पैलि नौर्त तक तो मी संभाल हालून पर दूसार नौर्त तक हर हालत में पुजि जाया . अगर कैलि मेरि घात ( शिकायत ) कै दी तो मेर लिजी मुश्किल है जाल . मेर ले नौकरी भै .
हरुलि - तुमार जै जांण पछ्याँण जै कसिके लागि तुमरि ?
बिसनदत्त - अरे यार मी ले आपुण डिपाटमेन्ट में लेखाअधिकारी भयूं और चित्रगुप्त ज्यू क ले तसै पोस्ट भै . कबै खालि टैम पर उनर काम करि द्यूं तो तबै जांण पछ्यांण हैगे . आब औफिस में बैठणा वीलि और ले अफसरन दगाड राम राम श्याम श्याम भयी . जरा काम निकल जानन .
हरुलि - ओईज्या .. पैलि किलै नि बताय पैं तुमलि . चित्रगुप्त ज्यूं छैं सिफारिस लगैबेर हम द्विनै कें दगाडै करै दिना कन . एक दगाड रून स्वर्ग में तो कदुक भल होल . .. तुम कथ्थ मैं कथ्थ . कदुक निस्वास लागौं तुमर मेंकें . द्विये दगाडै रूलो तो कदुक सुखैलि रूल हम द्विये .
बिसनदत्त - मेकें पागल कुकुरैलि ज कि काटि राखौ . पन्चास साल त्यार दगाड रै बेर देख हालौ . आब स्वर्ग ऐबेर जरा पराणि सुखैलि छ . त्यार दगाड रूण पर तू तो सुखी है जाली पर मेर तो निरूॅण है जाल . आहा एकलै कदुक मज छन म्यार . क्वे कचकचाट नै क्वे रोक टोक नै . कति बटी आय तो .. देर किलै भै , कैक दगाड छिया कूणी वाल क्वे नै . ..त्वेकैं दगाड बुलैबेर आपुण स्वर्ग कैं नरग को बणाल
हरुलि - तुम हकाहाक झन करिया हां . अगर मेकें गुस्स आल तो जां होला वैं ऐबेर तुमार भांट थेचि द्यूल . फिर रौला सुखैलि .
बिसनदत्त - अरे मजाक करनयूं यार .
हरुलि - मजाक हजाक के नै .. तुमार रंग ढंग मी भली कैबेर जांणूं . तुमन कि लागौं मेके के खबर नहांति . कुछ दिन पैली मेरि सहेली बसन्ती बतूण लागि रैछी कि तुम स्वर्ग लोकाक पुण्यात्मा पार्क में आपुणि इसकूलाक दिननैकि दगडू भगुली देबी क दगाड बैठि बेर हंस हंसि बेर बात करण लागि रौ छिया बल .
बिसन दत्त - अरे यार उ बिचारिक दगाड जरा दुख सुखा क फसक करण लागि रौछ्यूं . तुम स्यैणिन कैं बात क बतंगड बणूण उं .
हरुलि - दुख सुखाक फसक हंस हंस बेर को करौं .. मेकें उल्लू समझ राखौ .
बिसनदत्त - अरे यार पुरि बात समझ लियी कर . मैलि कौ तो दुख सुखा क फसक . पैलि दुखा क फसक करन . फिर सुखाक . जब तेरि सहेली लि देखि हुनेलां उ बखत सुखाक फसक चलि रैछी . तबै हंसि हंसि बेर करण लागि छियां .
हरुलि - पैं वीकि कन्ध में हाथ धरिबेर कि हुणौछील. फिर फसक बैंच में बेठिबेर ले है सकछी .. झाडि क पिछाडि बटी कि गुल खिलनैछी .
बिसनदत्त - तेरि सहेली बसन्ती पगली गे . इथकै क उथकै फसक करण में तकैं मज ऊं . मरि बाद ले चैन नहांति तौ ढ्वाल कैं .
हरुलि - बसन्ती कैं नाम धरणैं कि जरवत नहां . आपुण करम देखो . तुम बैग नैकि जातै तसि छ .
बिसनदत्त - यार आब पुर बैग मैंसनैकि जात पर कि हैगो . होस में रई कर . कि करौ बैगनैलि .
हरुलि - किलै .. आपुण त्याडि ज्यू . जलोटा ज्यू . कैं भुलि गोछा .कि गुल खिलूणी .
बिसनदत्त - तु ले आपुण राधे ढ्वाल और उ ....... कें भुलि गेछी ..
हरुलि - तुम बहस नि करो . खबर दार आज बटी पार्क उज्याण चै ले दी तो .. और उ भागुलि क मी झांकरि में आग हालून स्वर्ग जैबेर ..
बिसनदत्त - अरे यार आब बातन खतम कर . स्वर्ग जाते ही त्वेकैं आपुण दगाड शिफ्ट करै हालून . बज्जर पडि जाल . मेर लिजी वां ले चैन नि भै .
हरुलि - ठीक छ .
बिसनदत्त - चल आब पै .. तैयार है जा . लागनू स्वर्ग उज्याणि बाट् .
हरुलि - आज तो रुक जाओ पें . जरा लखनऊ पन घुमनू . मौल हौल जानूं . वां रातक डिनर करनूं . कि हैरे तदुक जल्दी . जी ते जी तो च्याल ब्वारिनाक दहाड लखनऊ नै आयां . मरी बात तो धुमि उनूं .
बिसनदत्त - हाय .. सरादक भात पातलि खैबेर नै भयी धौ त्वेकैं . कदुक भल खांण बणै राखछी .
हरुलि - ढुंग में रै जौ तनौर सराद . जी ते जी हमन उज्यांण चै ले नि दी . आब टटम करिबेर कि हूं . मी तो तुमार दगाडा वीलि ऐ गेयूं . मेर तो मनै नि छी सरादन मे उणक . कबै ब्वारिलि एक गास भलि कै नि दि ज्यून छनाल. आब पकवान बणैबेर कि हूं .
बिसनदत्त - होय तस तो तू ठीक कुणैछी . आब जे ले भै आपुणि औलाद भै . साल में एक बार उणै भै . मैंसनाक पितर कि कौल . स्वर्ग में नाम धराल . तनार च्याल ब्वारि तनन मरिबेर ले नै पुछन कौल . बेजत्ती तो हमरि हेलि . तु यस कर . मी न्है जां स्वर्ग तू ब्याल तक घुमिबेर ऐ जाये .
हरुलि - मैलि कां देखी भै लखनऊ . एकलि भोबरि नि जूलैं .
बिसनदत्त - पैं मैलि जै कां देखि राखौ . मैं ले जनमभर पहाडै रयी भयूं . एक बात छ . यो सरादाक चक्कर में लखनऊ जै देखी हालौ .
हरुलि - यस करनू पैं घर जै उनूं .. पहाड ... जरा देखि उनूं .. वांक निस्वास लागौं कबै कबै . हमकि जिन्दगी वैं बिति भै . दिगौ कस कारबार छी हमार . कस मक्कान छी .
बिसनदत्त - दै .. ऐ .ऐ .. हरुली .. आब के जांछी पहाड . जब तक हम ज्यून छियां तबै तक छी पहाड . हमार मरी बाद वां च्याल ब्वारिनैलि ढुंग फरकै हालौ .. हमर कुड उधरि गो . आँगण में स्यूंण जामि गो . गाड भिड बांज पडि छन . आब के नि रैगेय हरुली वां .. बस एक रोड ऐगे बल वां .. रोड देखण छ तो हिट .. आब तो वां जैबेर हम रूल कां ... तौ ते आफत छ . कैक यां जूल ..
हरुलि - किलै भुलि गोछाल. आब हम ज्यून ज के भयां . हम तो आत्मा भयां . कति पीपवा कै बोट में पडि जूल . रात तो काटण भै .
बिसनदत्त - चल ठीक छ पैं हिट . हमरि पितरनैकि थात भै . चै चितै उन . हमार द्यो द्याप्त ले वैं भाय . आब नोर्त ले लागि गेयी . देपातन कैं हाथ जोडि उल दूर बटी . कि अन्ताज गौं पन क्वे पुराण आत्मा हमार जास और आयी हवो भटकते भटकते . उनन दगाड ले मिलि उन ..
हरुलि - होय पें हिटो .
( बिसनदत्त और हरुलि लखनऊ अल्मोडा वालि उत्तराखंड परिवहन निगमाक गाडि क पाख में बैठिबेर अलमाड बाट लागि गेई .)
विनोद पन्त 'खन्तोली '
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