ठन ठन योजना
बैंक मैनेजर सैप आपुण केबिन में बैठी छन . टेबुल में भौते देर बटी चाहा क गिलास ढकिबेर धरि राखौ . चाहा लगभग एक घण्ट पैलि धर गो चपडांसि , मगर मैनेजर सैपनैलि चाहा उज्याणि चै ले नि दी . चाहा अरडिबेर कैलाश पुजि गो . मैनेजर सैपनक ध्यान फाइलन चांण में लागि रौ . चांण ले के छ खाल्लि पन्न पलटूण हैरैई . कबै कबै कम्प्यूटर में खटखटाट जस ले करण लागि रयीं .बीच बीच में नजर सी सी टी वी फुटेज में जाण लागि रै . दगाडै घण्टी बजैबेर चपणांसि कैं ले बुलाते रूंणीन . अरे सुण उ वालि फाइल निकालि ला . और यो जो पैल्ली लै रौछिये यकैं वैं धरि आ . दौडिबेर जा भाजिबेर आये . फिर यो फाइल जो ऐल लैरौछे यकें वैं धरि आलै . चपणांसि होय कैबेर मुनि हलकूण लाग . बिचारैकि जबान हलकि ले नि . . चपणांसि जाण बैठौ तो मैनेजर सैपनैलि फिर कौय - और सुण .. यो चाहा बेकार हैगो . यकैं भ्यैर लिजा और नई चहा लिबेर आ गरम गरम . और ध्यान धरिये एक घण्ट बाद आये और जब यो वाल चाहा ठन्ड है जाल बिना कइयैं नई चहा धरि जाये . चपणांसि कूण लाग - सैप चहा पी किलै नै तुमैलि ? मैनेजर सैप - चुप .. सैपा क दगाड जुबान चलूछै . जतुक काम बतू उतु कर . मूख नि लागि कर . ...