रामचन्द्र जजमान

बहुत दिनन बटी कडकी चलि रैछी तो मैलि सोची कि आज के तूफानी जस करि जाओ .
रत्ति ब्याण नौ बाजी उठबेर नांण ध्वैण करि बेर मैलि चरबर जस पिठ्या लगाय पील चन्दनक एक ठुल्लो त्रिपुण्ड आपुण कपाव में बणाय . सफेट धोति छटकै माल आंग वास्कट पैर . वास्कटाक जेब में पातौड ठांस . आपुणि चुटिया कैं जैल लगैबेर मैलिबै सीद्द सैट कर ताकि लोगन कैं लागौ कि मैं भूप पण्डित छ्यूं .
आब मेरि तैयारी तो हैगे . पर यो तय नि है सक कि को जजमान कैं आज घपटन में लियी जाओ .
साचि कूंछा तो आजकला क जजमान ले भौतै छाव हैगेई . पोरु बेइयकि बात भै . एक जजमान कैं बेकूप बणूणा लिजी गेयूं तो वां यस है पडौ कि धो ज्यान बचूण हैगे .
मैलि सोचि कि जजमाना क यां जैबेर वीकैं ग्रहों नक डर देखैबेर थ्वाड खर्च पाणि निकालूं कैबेर .. पर वां तो औरी हैगे .
मैलि जसै जजमान छै कौय कि - ठाकुर सैप .. तुमन पर शनि कि महादशा चलि रै . शुक्र छन्जर अलगै बौई रइन . राहु केतु नैलि हकाहाक करि राखी . तुमन ऐल घोर कष्ट ऐरौ . तुमार हाथ में डबल ले नि टिकण लागि रै हुन्याल .
मैलि सोचि जजमान डर जाल और कौल कि -गुरू के उपाय बताओ .
पर जजमान ले बाईस गुरू क पढाई हुन भो . जोर जोरैलि हंसण भै गे . कूण लाग -
क्याप फसक करछा गुरू .. म्यार तो आजकल रंगत ऐरै . चैना क चुपाड हैरीन गुलबियाक ड्यौड हैरीन . पोरुवैं च्यालैलि बिदेश बटी बीस लाख रुपैं भेजि राखन .. दैल फैल हैरैल. डबलन कां धरूं हैरै . तुम कुनेर भया परेशानी हैरै . मेकें लागणौ परेशानी तुमन जै हैरे शैद ..
मैलि कौय - अरे यार मी थोडी कुणयूं यो पातौड बतूणौ .
जजमान कूण लाग - ढुंग में रैजौ तुमर पातौड .. तुम ले को दुन्नि में छाव.. जरा यां चाओ कैबेर वीलि आपुण लैपटौप निकाल और मेछैं कूण लाग - तुमर नाम कि छ ??
मैलि कौ - विनोद पन्त
जजमानैलि लैपटौप में खडखडाट करिबेर आनलाइन म्यार तीन कुला क पितर ठाड कर दयाय .. मैकें कां भांजूं हैगे.
खैर .. मैलि सोचि आज मी सीद्द राम ज्यू क यां जां .. बड सीद साद द्याप्त छन कै सुणी मैलि . जब तौ विष्णु अवतार में छी तो तनन कैं भृगु ज्यू लि लात मारी बल और तौ बिचारनैलि के नि कौय बल .. मैलि सोचि रामज्यू क पास जां और के ले कै द्यूल मानि हालाल और मेरि दक्षिणा पक्की .  उसके ले यो कलिकाल में रामज्यू दगाड भौते लोग सांचि झुठि बुलेबर आपुण ठुल ठुल काम निकलवै ल्हिरीन . मेकैं तो खालि डबलै चैनन .
आब मी रामज्यू क यां बाट लाग्यूं . एक खुली मैदान में रामज्यू क दरवार लागि भै . मैलिबटी रामज्यू क बैठण बराबर स्योव करि भै तिरपालैलि . मैं गेयूं तो द्वि बानर मेकैं दाडना लिजी ऐ गे .  कूण लाग - कां जाणौछै .. को छै तू ..
मैलि कौय - मैं हरिद्वार बटी पंडित विनोद पन्त छ्यूं . भारद्वाज मेर गोत्र छ . आजकला क जपाना क हिसाबैलि मेर माकोटी लोगनक गोत्र शाडिल्य गोत्र मेर असली गोत्र मान सकछा . मी बकलौल बामण छ्यूं .
गेटकीपर बानर कूण लाग - कि काम छ .
मैलि कौ - ठाकुर सैपनाक दगाड काम छी .
गेटकीपर कूण लाग - को ठाकुर सैप .. यां क्वे ठाकुर सैप नै रून .
तदुक में हकाहाक सुणबेर अंगद ज्यू ऐ ग्याय . कूण लाग - अरे रामचन्द्र ज्यू छै कूणौ तौ ठाकुर सैप .. कलियुगी लिन बामण साल् ..
गेट पर तैनात बानर कूण लाग - तुम रुको  जरा गेट में एन्ट्री करो .
मैलि कौ - हाय कसि एन्ट्री ?
बानर कूण लाग - अरे यार .. कलियुग छ . कतु टाइपाक कोट कच्छैरिक मामुल भाय .. तुमार समझ में नि आ . तुम एन्ट्री करो और यो बताओ यां क्वे जांण पछ्याण वाल छै तो वीक साइन कराओ .
मैलि कौ हनुमान ज्यू पछाडन हुन्यान . मी उनर भगत छ्यूं . हर मंगलवार दस रुपैं कि बूंदी चढूं उनन कैं . पक्क पछ्याण हालाल . तुम उनन बुलाओ .
बानर कूॅण लाग - उ ऐल जाति प्रमाण पत्र बणूण जैरीन .. उ नि मिल सकन .. क्वे दुसर आदिम बताओ .. भीतर जाणा लिजी गवाही जरूरी छ . नति नि मिल सकना .
मैलि सोची और तो क्वे नि पछ्याडन . खाली आवै हैगे . तब तक मेर दिमाग काम करि गोय मैलि जो बाट में खाणा लिजी क्याव धरि राखछी उ बानरन कैं दि और कौय कि ऐल जरा एडजस्ट करो फिर भितर बटी के मिललौ तो चहा पाणि क खर्च ले है जाल . बानरैलि मेकें भीतर जांणक इशार करि दी .
भीतर गेयूं तो रामज्यू आसन में बैठी भाय
मैलि कौय - स्वस्ति जजमान .
राम चन्द्र ज्यू गजबजी जास ग्याय   फिर कूण लाग . किलै आछा बामण ज्यू .
मैलि कौय - अरे बस मुलाकाताक लिजी ऐ रयूं ठाकुर सैप .
यदुक बातचीत चलि रैछी तो लक्षमण ज्यू फुंकार मारण बैठ ग्याय .  कूण लाग . कि बकण रौछै रे लुतरा बामण .. कि लगै राखी ठाकुर ठाकुर .. भगवान , प्रभु नै कै सकनै . यो साक्षात सच्चिदानन्द छन . इनरि जाति लि सम्बोधन करनौछै .
रामज्यू लि लक्षमण शान्त कराय - कूण लाग . यो कलिकाल छ भ्राता .. यां हमैरि जात खान सब देखियैलि .. तु टैन्शन नै ल्हि .
खैर तुम बताओ पौणज्यू .. कि कूंछिया
मैलि आब आपुण पातौड निकाल -
मैलि कौय जजमान - मैलि तुमार ग्रहौ चाइन .. जल्दी तुमर मन्दिर बणनी वाल छी . पर कुछ ग्रहौ खटपटाट करनई . तबै विलम्ब हैरौ . तुम एक ग्रहौ पुज कराओ . सब बिध्नबाधा दूर है जाली . ऐल साल पक्क बण जाल .
आब रामचन्द्र ज्यू कैं ले गुस्स ऐ गे .  कूण लाग .. त्वेकैं दक्षिण चैंछी तो लिजा .. पर आब मेकें बेवकूफ नि बणाओ .  रनकारो तुम लोगनैलि कदुक डेट दि हालीन . कदुक वादा करि हालन . कदुक सरकार बण गेई कदुक सरकार बिगड गेई .. तुमरन बसक नहां मेर मन्दिर बणूण .. कदिनै रीस आलि तो दोबार - लछिमन बांण सरासन आनू कूल .. तबै तुमन होश आलि .. नैता तो बेकूफ बणूणै लागि रौछी .. आब तू ले बणूणौछै .. चल भाज यां बटी .... नति अल्लै हनुमान आलौ तो त्यार भांट टोडि द्योल ....
मी उल्ट कै बाट लाग्यूं ..  आब मेकें चिन्ता हई भै .. गेटकीपर बानर कैं कि द्यूल कैबेर ....

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