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Showing posts from 2017

घोटाला

दिल्ली के रामलीला मैदान में अर्जुन अपने रथ पर आरूढ हैं . भगवान श्रीकृष्ण उनके रथ पर सारथी हैं . कुछ कुछ द्वापर युग के रणभूमि का दृश्य सा प्रतीत हो रहा है . वही धूल धक्कड उड रहा है पर ये घोडों की टापों से नही मानव के पापों से हो रहा है मानव के प्रदूषण से हो रहा है . भगवान ने अपना मुह मास्क से ढका है . अर्जुन भगवान को रथ आगे ले जाने का आग्रह करते हैं पर रथ है कि ट्रैफिक जाम में फसने के आसार हैं . नारायण अन्तर्यामी हैं कहते हैं - हे पार्थ , यही से सब अवलोकन कर लो . आगे बढना सही नहीं है . ये कलियुग है . अर्जुनोवाच - हे केशव ! बताइये मैं ये बाण किस पर संधान करूं ..? यहां तो पता ही नहीं चल रहा कौन दागी है कौन घोटालेबाज है . कौन सा घोटाला है कौन सा नहीं है . क्या सब व्यर्थ का कोलाहल था .. यदि व्यर्थ का था तो फिर यह सब शोर क्यों मचा था . क्या फरक है प्रभू पुराने और नये लोगों में . मेरा मार्गदर्शन करें प्रभू . मेरी आँखो से ये परदा हटायें . श्री भगवानोवाच - हे पार्थ ! ये सी बी आई की तरह कन्फ्यूज ना हो . ये कलिकाल है पार्थ . यहां आकर कुछ राजनीति सीख . ये तेरा काम नहीं सोचना कि कौन दोषी है कौ...

मैतैकि तैयारी

आदिम - अरे ! कि छ यो .. तदुक झ्वाल किलै करि राखन पैक ? किलै मकान मालिकैलि मकान खालि कर कै हालछै ?? स्यैणि -हाय के हैगो तुमन ?? किलै भुलि गोछा ? अमरु वक ब्या नहांति ?? आदिम - अमरू .... को अमरु ..??? अरे कति त्यार मैतक अमरु तो नहां जो एक साल चेलिनाक इसकूला भ्यैर बटी चेल्लिन छेडन में पुलिस वालनैलि थेचौ ... तेर मैतक अमरू ... स्यैणि - हाल्ल नि करो हां .. मेर रिश्तेदार भै . वीक इजक और मेर आमक मैत एक्कै गौं में छी . आब न्यूत ऐरौ तो मानणै भै . यो बहानैलि आम् कें ले भेटि उल . बुडी मैंस भै .. आदिम - (चिढाते हुए ) बुडी मैंस भै ... के नि हुन उ बुडी कैं अल्लै .. फिर तदुक दूरैकि रिश्तेदारी में को जां यो दिल्ली बटी . कदुक खर्च हूं . स्यैणि - तस किलै कूंछा .. कदुक काम लागौं अमरु मेर मैतिनाक् ... मेर बाबू क कैका दगाड झकड भै तो हमर तरब बटी गालि मैक अमरुवै करौं .. आदिम - के भाल काम ले करनी त्यार मैत्ती .. स्यैणि - तुम जासन कें मैं जैसि चेलि दी राखी .. और के भल करनी . तुमर भल तो करि राखौ .. आदिम - बज्जर पाडि राखौ . स्यैणि - के को .. जरा जोरैलि बुलाओ धें .. आदिम - बज्जर ..... मेर मतलब बजार जाणयू...

भिंचाल ( चलक )

रत्तिब्याण बिस्तर में पडी भयूं .. तब तक स्यैणि घचबचूण बैठ गे - स्यैणि - सुणनौछा ,बेलि भिचाल भो बल .. तुमैलि चिताछै .. मैं - जब बटी त्यार दगाड ब्या भो तब बटी यो भिचाल ,आँधी तूफान ,हाव बयाव , केकै पत्त नि चलन . स्यैणि - कि कौ .. जरा जोरैकि कओ धैं ...? मैं - -आब सार पडि गे कूण लागि रयूं .. त्यार दगाड रूण में .. एक नानि नानि जसि सुनामी भयी तू .. त्यार सामणि यो भिचाल कां चिताइनन . स्यैणि -हाकाहाक नि करो हां . मैं - कतु बाजि आ बल तौ भूचाल ..? स्यैणि - रात आठ बाजिबेर पन्चास मिनट में बल . मैं - अरे !! मैलि धरती हलकन जसि तो चिताई छी . पर मैलि सोची तु चारपाई बटी भिमै घुरी गे हुनेलि . तब हिलणौ मकान कैबेर सोचो .. फिर जब त्वेकैं बिस्तरै में देखौ तो मैलि सोचो मेकें भैम हैगो हुन्योल .. स्यैणि - तुम चुप रया हां तुम .. ज्यादा ओभर स्मार्ट झन बणिया .. तुमार बगल में पडि रछ्यू .. कसिके सोची .. मैं - उसके जब तू हिटछी तब ले भीतर पन चार पांच रिक्टर स्केलक भूकम्प ऐ जां .. खैर छोड त्वेकैं पत्त लागछै भिंचाल भो कैबेर . स्यैणि - नै नै मैलि ले नि चिताय . जरा आंख लागि गेछी .. पर तुमन तो नींन नि ऐरैछी . ...

अध्यक्ष सैप

सोनियां ज्यू घर में आज कौतिक जस हई भै . सब गौं पना क स्यैणि भलि भट्यूणा लिजी आई भै . प्रियंका सबन कैं पिठ्या लगूण लागि भै . अम्बिका सोनी गूड बाटण लागि भै . स्यैणि भल भै हो प्रियंका ईजा तुमर च्योल अध्यक्ष बण गो कूण लागि भै . दगाडै तुमरि तबियत कसि छ आब कैबेर हालचाल ले पुछण लागि भ्या .. चाहा पाणी क इन्तजाम में अहमद पटेल ज्यू लागि भै . राज बब्बर सैप नमकीनाक पुडि फाडिबेर कागजाक प्लेट में डालण लागि भै . बुडी बुडी जस स्यैणिनाक लिजी शीला दीक्षित ज्यू सिगल पू पकूण में लागि भै . रणजीत सिंह सुरजेवाला ज्यू चाहा बाटण में लागि भै . राहुल ज्यू एक जाग कुरसी में बैठिबेर लोगन छैं बधाई लिण लीगि भै. उनार दगाड सचिन पायलट और जिंदल सैप ले बैठी भ्या . राहुल ज्यूक क्वे खुट छूवणाय क्वे नमस्कार कूणाय . राहुल ज्यू ब्या दिनाक बरै क चारी तन बेर मन्द मन्द मुस्कराण लागि भाय .एक किनार लै मनमोहन ज्यू ले गजबजी बेर जास ढाड हई भ्या . कैलि कुरसी दी और कौय कि यमैं बैठ जाओ . मनमोहन ज्यू लि सोनिया ज्यू क उज्याण चाय और वां बटी के इशार जस नि आय तो ठाडै रूण में भलाई जस चितै . गौं कि एक स्यैणि सोनिया ज्यू छैं कूण लागि - किलै...

सोनपापडी

आज राष्ट्रीय सोनपापडी वितरण दिवस है ... सोनपापडी खाता कोई नहीं है बस आगे सरका दी जाती है . बवाल तब होता है जब ज्यादातर घरों से एक ही प्रकार की एक ही ब्रान्ड की सोनपापडी आ जाती है . अब ये एक कुशल गृहणी पर निर्भर करता है कि वो इन डब्बों को मैनेज कैसे करे . वैसे तो आसान है शर्मा जी का डिब्बा वर्मा जी को और वर्मा जी का डिब्बा शर्मा जी को चिपका दिया जाता है . पर ये बात महत्वपूर्ण है कि किसके यहां से कौन सा ब्रान्ड आया है वही वापस ना चला जाय . बीकानो की सोनपापडी देने वाले को छज्जू हलवाई बिजनौर वाली की दे दो और जिसके यहां से छज्जू हलवाई की आयी है वहां हल्दीराम की भिजवा दो . रिसर्च का विषय ये है कि सब जगह बांटने के बाद जो डिब्बा बच जाता है लोग उसका क्या करते हैं . आज तक मैने किसी को दिवाली की सोनपापडी खाते हुए नहीं देखा . मुझे डर है कि किसी दिन कोई जागरूप सेकुलर व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट में सोनपापडी बाटने पर रोक लगाने सम्बन्धी याचिका ना दायर कर दे ,और माननीय कोर्ट त्वरित सुनवाई करते हुए सोनपापडी की बिक्री प्रतिबन्धित कर दे . हालाकि बाटने पर रोक नहीं लगेगी और कुछ प्रगतिशील सेकुलर ये भी तर्क द...

खडक दा क क्रिसमस

खड़क दा कि घरवालि क जोरदार मन्त्र चलि भै .एक साल क ( चीड़ ) बुन्नी बाड़ में गैंठि बेर सजाकई भै .हजारीक फूलनैकि माल डाली भै .. मैल पुछ कि बात हो ठकुराणि ज्यू आज कि चलि रौ तौ पुज पाठ ....? और बिन बामणैकि कस पूज करनौछा ..? खडकदा घरवालि हरुलि जरा शरमैबेर कूण लागि - हाय कस बामण छा हो पड़ज्यु तुम .. आज किसमिस क त्यार छ बल . रत्तै बटी बर्त करि राखौ . आब पुज करण लागि रयु .. पुज है जालि तो तुमर घर ले प्रसादक केक भेजुल ..तब तक खड़क दा कूण लाग हरूलि किसमिस नै क्रिसमस कूनन यो त्यार कैं ..मी चाइयैं रै गेयु महाराज .. खड़क दा कि स्यैणिक आरती चलि भै .....ऊँ जय किसमिस देवा ...स्वामी जय किशमिस देवा .... हे भगवान सैन्टा क्लाज ज्यू .. सबन कैं भली मत्ति दिया .. अलबेर पप्पु क ब्या है जो .. भाल दिन जल्दी ऐ जान .. सबन छैं दैण हया द्याप्तो .. नैट पैक सस्त हैजौ .. महंगाई कम हैजौ नरैणा .. अघिल साल तुमार थान में यैहैबेर ले ठुल बोट गैठि बेर पांच किलो क केट काटून ....खड़क दा क सांकौक टुटाट पड़ि गे ...नानतिन नैलि जयकारा लगाय ... बोले क्रिसमस त्यार की जय .... बोलो सैन्टा बड़बाज्यू की जय..... जय हो .... बिनोद पन्त ....

लाहौर यात्रा भाग २

(गतांक से आगे ) आब मोदी ज्यू और नवाज घर पुज । फटाफट नवाजैकि स्यैणि पालभितर जैबेर कूण लागि - हला फरीदै ईजा एक छिट दूदौक दि हाल । भारत बटी मोदी लाल ऐ रई । ढन्ड्याव मेँ सांकल लगूण भूलि गेयू आघाण बिरालुल दूद जुठ्यै हालौ । तब तक मोदी ज्यू ले भीतर बैठ गे । जेब बटी बिलैतमिठै क पैकेट निकाल बेर एक ठुल ठुल जस नानतिन कैँ दिबेर कूण लाग ले पोथी टौफि खा और सबन बाटिबेर खाये । चाहा पाणि पीबेर मोदी ज्यू मैलि ढई मेँ ग्याय वां नवाजैकि इज पङि भै । तैलि बटी पराल बिछाइ भै । वीक मैलिबटी एक फौजी कामव बिछैबेर आम पङाई भै । मोदी ज्यू लि आमा नमस्कार कैबेर खुटनमेँ हाथ लगाय । दीर्घै ईजा । को छ मैल नै पछाण । आख ले नै देखनयू । कूण लागि आम । नवाज बलाण तब तक - ईजा यो मोद्दि छ । भारत बटी ऐ रौ । पोरसाल शाँल भेज राखछी । याद उङैछी । आमैलि मोदी ज्यू कैँ अंगाव हालबेर खोर मलासण बैठ गे अरे ईजा मोदिया । भल छै ईजा तू । आज कसिके आये तू । कभै बटी बाट चै रछयू तेर । मरण है पैलि एक बार त्वेकैँ देखि हालछयू कै हैरैछी । भल करौ त्वील ऐ गोछै । आब मरी ले जूलो के दुख नै । मोदी - तस किलै कूण लागि रछी काखी । न...

लाहौर यात्रा भाग १

लाहौर यात्रा ............भाग - 1 मोदी ज्यू काबुल बटी गाङी मेँ बैठ । काबुल वालनैलि नाश्ता मेँ गडेरिक स्याव उबालि बेर लासणक लूण दगाङ खिलाइ भै बल रत्ते ब्याण । जाण बखत बाटपन भूख लागैलि कै द्वि माण काजू क गुद ले धरि भै एक रुमालाक गांठ मेँ । मोदी ज्यू लि काजू क गुद बाटै खै हाल । आब गाङी पाकिस्तान पुजि तो पेट मेँ गुङमुङाट जस हुण बैठ । मोदी ज्यूलि ड्राइबर छैँ कौय कि यार कति ढाबा ले गाङि रोकि दिये । तुम लोग चाहा पाणि पि लिया और मी जरा लोटी लिबेर कति झुताणि जस देखबेर हल्क ले है जूल । आब गाङि जसै लाहोर मेँ पुजि तो गाङी एक अनुबन्धित ढाबा लै रुकि गे । भ्यैर आवाज लागण भैगे - उत्तराखंड खटारा ट्रासंपोर्ट के अनुबन्धित जावेद ढाबा मेँ आपका स्वागत है । जिन यात्रियोँ को आल चाण रैत पकोङी खाना हो नीचे आ जायेँ । गाङी आधा घन्टा रुकेगी । मोदी ज्यू एक टीन क डाब पकङिबेर कान मेँ जन्यो हालबेर झुताणि बैठ ग्याय । थोङी देर मेँ झुताणि बटी ठूं ठुस्स जस आवाज उण भैगे । बाकि यात्री आल चाण खाण लागि ग्याय । आब मोदी ज्यू जरा हल्क है गे । उनैलि ले एक चाहा और बन्द खाय । तब तक सामैणि बटी नवाज ऐ गोय । नवा...

डोई पाण्डे ज्यू क ब्या

जैसा कि आप जानते ही हो हमारे डोई पाण्डे ज्यू हर साल लखनऊ से पहाड़ आते हैं अपनी फटफटिया पर . कहने को तो ये यात्रा पहाड़ घूमने के नाम पर होती है लेकिन असलियत ये है कि हमारे डोई जी पहाड़ एक लड़की ढूंढने आते हैं . इस साल भी आये थे ये जनाब . कुछ लड़कियों के इन्टरब्यू भी लिए . पेश है उनके साक्षातकार के मुख्य अंश - पहली लड़की देखने रानीखेत गये . लड़की प्राइमरी में शिक्षिका थी . डोइ जी ने लड़की को देखा तो मन आ गयी . डोई कुछ पूछते उससे पहले लड़की बोली - ये बताओ लखनउ में तुमारा घर कहां ठैरा ? डोई - कल्याणपुर .. लड़की - ये दुर्गम ठैरा या सुगम .. डोई - क्या मतलब ये सुगम दुर्गम क्या होता है . लड़की - देखो जी मैं मास्टरनी हूं . हमारी पोस्टिग दुर्गम सुगम में होती है . फिलहाल में एक दुर्गम स्कूल में हूं . अब में नहीं चाहती कि मेरी ससुराल दुर्गम में हो . अगर तुम्हारा घर स्टेशन के पास ही हो तो ठीक है . अगर स्टेशन से दूर हुवा तो दुर्गम में मैं नहीं जाउगी . तुम्हें एक घर सुगम में लेना पड़ेगा . डोई बेचारा चकरा गया .. बजर पड़ जाल यो दुरगम सुगम .. डोइ वहां से भाज गया .. अब एक जगह लड़की देखने गया .. ल...

शराब पीने की विधि

अगर आप ब्राह्मण हैँ और शराब पीनी हो निम्नलिखित बिधि से ही शराब पीयेँ । गिलास स्थापनम् - कपङेन भूमौ पोछा लगात्वा तदुपरि पुरालम् पुराल माथि मोस्टम् मोस्टो परि आसनम आसनस्यो परि जग मेँ जलम द्वि गिलासम ब्रान्डी , व्हिस्की चैव रम . देसी . ठर्रा जिन बीयर शराबे तस्मिन सन्निधिँग कुरु । संकल्प -ऊँ खङकु खङकु खङकु नमः भूतात्मने जम्बू द्वीपे भरतखण्डे अमुक मण्डलान्तर्गत टूटि मकाने बाँज गोठे शराबि गोत्रोत्पन्न (अहं कह लेना ) अमुक शर्मणः नव वर्ष उपलक्षे अप्राप्त शराब प्राप्त अर्थम प्राप्त शराव तत्काल भक्षणार्थम समस्त प्याज टमाटर सलाद नमकीन सहितं काकटेलम् करिस्यामि । (इस प्रकार बिधिपूर्वक मदिरापान करने से आपको हैँग नही होगा )

मेरी माँल यात्रा

बच्चों की जिद पर मॉल गया हो साब ... क्याप बना ठैरा . हमारा तो पूरा गाँव समा जाय. दरवाजे पर ही गड़बड़ हो गयी भीतर कै खुलैगे या भ्यैरकै गजबजी गया . भीतर जाकर देखा बड़ा ही चुपड़ फर्श ठैरा . रड़ते रड़ते बचा ... मैलि मंजिल मे जाने के लिये घूमने वाली सीड़ी .. आब कसके जाऊ ? बेटा मेरी हालत समझकर बोला पापा मेरा हाथ पकड़ो कुछ नही होगा ... फटक मार कर चढा ...पता नही कैसे भगवान की कृपा से बैलैन्स बन गया वरना मुख लै पतेड़ी जाता ..... खुटन में कम्ब जैसी छूट गयी ... बाहाहो गजब महंगाई ठैरी अन्दर ... नाम हुवा पैन्टागन माँल पर मेरे लिये पैन्ट गीली माँल हो गया ... बजर पड़ जाल इनसे अच्छी तो भोटिया मार्केट की दुकानें ठहरी ..... कुकुरीच्याले सर सर बोलकर पन्नी के डबल भी काट लेने वाले हुए .. भ्यैर निकलते समय खान तलासी भी दो जैसे हम जेब काटकर आये हैं ...... कसम से ईज्जत के साथ फुल बेईज्जती का अहसास होता है ..

शहर यात्रा

आज तो जमाना बदल गया है . मैं जब बच्चा था तो गां व के बच्चे सीधेसाधे ही होते थे .पाचवी तक तो गाँव से बाहर ही नहीं गया था . शहर के बारे में बस सुना ही था . शहर भी तब मेरे लिये अल्मोड़ा बागेश्वर नैनीताल तक ही था . खैर पहली बार पाँचवी छठी में पढता हूंगा तो पिताजी के साथ अल्मोंडा जाने का अवसर मिला . बस में भी पहली बार ही बैठा था तब . बस के अन्दर जाने पर ही पता चला कि बस में कुर्सियां ( सीट )भी होती है . मैं अपनी ताईजी के साथ ज्यादा रहता था .सारी जिग्यासाओं की पूर्ति वही किया करती थी . पहली बार शहर जाने का रोमांच चरम पर था . तब कपड़े भी एक दो जोड़ी थे . लोगों के पास इस्त्री थी तो मैने किसी से सुनकर रात तीन चार दिन से पैन्ट शर्ट तह बनाकर सिराहने रखी ताकि सिकुड़न दूर हो जाय . पर तह बनाने का कोइ तरीका नहीं था तो जब कपड़े निकाले उन पर कयी वर्गाकार क्रीज बन गयी . जिन्हें देखकर मैं फूला नहीं समा रहा था . जाने से पहले ताइजी ने शहर के बारे में अपनी समझ के अनुसार बातें बताई . शहर के कायदे कानून सिखाये . मसलन गाड़ी में जीभ बाहर मत निकालना .. जीभ कटने का डर है . गाड़ी से सिर बाहर मत निकालना .और जो स...

पहाडी बर्यात

आपको आज मैं पहाड़ी बारात के एक दृश्य से रूबरू कराता हूं . मेरी उम्र तक के लोगों ने अक्सर ये दृश्य अवश्य देखा होगा और महसूस भी किया होगा कि तब हमारे ग्रामीण जीवन में कितनी आत्मीयता थी . दरअसल वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना तो हमारे गांवों में ही थी . तब गांव मैं आयी बारात की कौन कहे . सुना है कि गांव से गुजरती अनजान बारात के सत्कार के लिए भी लोग तत्पर हो जाते थे . हमारे घर के कुछ दूर एक रास्ता पैदल पहले प्रचलन में था .. हम भी गांव को क्रास करती बारातों को देखने जाते थे . तब बारात के साथ एक परात में गुड लिये एक आदमी चलता था जो हमें गुड खिलाता था .हम गुड के लालच में बारात देखने जरूर जाते थे . एक चीज और जो आकर्षित करती थी वह थी बारात में चल रहे बीनबाजा तुरही वालों और छोलिया नर्तकों को देखना . बारात देखते दर्शकों के सामने थोडी देर के लिए ही सही ढोली छलरिया बाजा बजा देता और छलरिये नर्तक तलवार घुमा कर कुछ नाच कर ही देते थे . ईजा वगैरह डोली में बैठी दुलहन को देखते थे चाहे वह बारात कहीं की हो जानपहचान की भी ना हो ... थ्वाडै डोलि बिसाया हां ब्योलि देखनू .. ब्योलि महिलाओं को देखकर रोने लगती थी . ईज...

कुकुरी बाबा

कुकुरी बाबा ------+++++++++++++++++++----------- आज बाबा जी के कारनामे और उनके अन्ध समर्थकों के अन्ध भक्ति पर एक पुराना वाकया याद आ रहा है . बाबा के दोषी साबित हो जाने पर भी उसके काले कारनामोॆ में साथ देना पता नहीं कहां की अक्लमन्दी है . दोष साबित न होने तक साथ देना समझ में आता है . पर कोर्ट द्वारा दोषसिद्ध होने पर .. हां तो लगभग पैतीस चालीस साल पहले की बात होगी हमारे गांव से कुछ दूरी पर एक बाबा जी का आगमन हुवा . अब मुझे ये तो याद नहीं कि बाबा कोई स्थानीय थे या कहीं मैदानी क्षेत्र से आये थे . पहाड़ में एक से एक अवतारी और सिद्ध पुरुष समय समय पर अवतरित होते आये हैं और बाहर से भी कुछ सिद्ध आत्माओं को देवभूमि की अलोकिक छटा आकर्षित करती आयी है . यहां पर आकर जप तप ध्यान आदि के लिए शान्त और सुरम्य वातावरण उन्हें बहुत भाता है गांवों के लोग पहले से ही धर्मपरायण होते थे . कण कण में भगवान पर विश्वास करने वाले देवता के नाम पर पत्थर भी पूज दें . फिर कोई भगवावस्त्रधारी मिल जाय तो उस पर तो विशेष श्रद्धा दिखाते थे . बाबाजी जल्दी ही इलाके में प्रसिद्ध हो गये . भक्तजन उनसे मिलने जाते अपनी सामर्था...

मथुरिक ड्यार

के काम क लिजी हल्द्वाणि जै रौछयू कूंछा वा जैबेर हमार यांक मथुरि का च्योल उरबी मिल गोय . उसके वीक नाम उर्बादत्त भै घरपन उरबी उरबी कूनेर भाय .. मैलि उरबियाक ड्यार में पुजिबेर घर फोन कर . फोन च्यालैलि उठाय मैलि कौ चेला हल्द्वाणि पुजि गेयूं यां उरबिया ड्यार में छ्यूं ऐल ..बस च्यालैलि फोन आपुणि मस्तारि कैं पकडै दी और वां बटी स्यैणि बागक जस गुगाट करण फैटि गे . मैलि कौ के हैगो ? कूण लागि तौ उरबियाक लालाक ख्वार कि आग लाग यो उमर में तनन कैं कि मत्ति ऐ तसि जो ड्यार खोलिबेर बैठि रयी .. और तुमरि मत्ति ले कि भांग फुली हल्द्वाणि जैबेर तौ उरबियकै ड्यार मिलछै रूणा लिजी . तुमन कैं हाकणीं डालणी क्वे छै नैं . कास बेशरम छा . उल्लै वापस जाओ तौ ड्यार बटी . हमार खान्तोईक बहत्तर मवास रूनी बल तां . तुम यो बुड्यांकाल तसिके ड्यार में रौला तो मैंस कि कौल . क्वे देखलौ कि होल . तुमरि तो के इज्जत नहांति पर यां समाज में मेरि तो इज्जत छ .. मैल कौय - अरे यार कास फसक करनौछी . स्यैणि कूण लागि - कि करूं फसक करिबेर . बजर पडि जाल मेर ग्रहौ . यो उमर में मेर बुड तसिके ड्यारन में जाल कैबेर ज कि सोचि राखी छी . मैलि कौ -भाग...

फसक फराव

पद्मादत्त ज्यू रत्ति रत्ति ब्याण धरणीधरा क यां जैबेर - ओ धरणि . ओ धरणीधर ! धरणीधर - अरे पद्दा नमस्कार . आओ . आज कसिके भुलि गेछा इथकै बाट् ? पद्माद्त - अरे . नमस्कार पुरस्कार तो तसी है गे पैं यार धरणियां .. क्यै त्वीलि नै सुणी पारा भीडक टीकराम ले खतम हैगो बिचार . धरणीधर - ओहो . बड नक सुणै गेया हो पद्दा .. किलै खडाखडी कि भो टिकराम कैं . तसी के नै सुणी रैछी . के बीमार हिमार ले नि छी बल . पद्मादत्त - क्याप कुनेर भये यार तू . कस नि छी बीमार . उपसास क मरीज भै टिकराम पर चर्ज के ले नि करनेर भै . कतु कौ बीडी नै पिये कैबेर कैकि नि सुणनेर भै . पोरबेर ले एक बार मरण तरण भो . कतु क दवाई पुडी करी तब भल भो . भल ले कैहैबेर भो .. भीतर भीतरै मर्ज तो उसै भै . धरणीधर - आब जी कूंछा पैं . खाली कूणैकि बात भई . दाण पाणि पुर हैगे हुन्याल बिचाराक .न्यैर रै गे बीडी बन्डल पर . पद्मादत्त - होय तस तो तू ठीकै कूण लागि रौछै . ईसकूला दिनान ले तौ गध्यार लुकि बेर द्वि चार कस मारी ल्हिंछी . भगवान सिंह मास्टरै हाथैकि खूब मार खाई भै तैलि . धरणीधर - हा हा हा ठीक कूणौछा . उसके पढण में होशियार छी. गणितक कीड भै . तैकि...

रावण

अचानक रावण ज्यू मिल गये .- मैलि पछाण हाल . बिलकुल वी पुराण गेटअप में दस ख्वार बीस हाथ . भयंकर डील डौल . मेकें देखते ही हा हा हा हा हा हा हा करण बैठ गे . बाबाहो मेकें तो तरास जस लागि गे . आवाज इतुक गर्जना वालि भै कि कान टोव जसि पडि गे . जरा मी सामान्य भयूं तो मैलि कोय - बुबू पैलाग . रावण - को छै रे तू ...? और मैं तेर बुब कसिके भयूं रे . मेर तो खानदान रामचन्द्र ज्यू लि मारि हालछी . मैलि कौ - हाय , कसि बात करनौछा .. तुम ले बामण मैं ले बामण . यो रिश्तैलि तुम म्यार बडबाज्यू हैगेया . रावण - (गुस्स में ऐबेर ) - कां तु डेढ हड्डी क कां मी डील डौल वाल . कां तुम लिन् बामण और कां मी वेद शास्त्रनक पारंगत प्रकांड पडित .. कां जोडनछै रे मेर दगाड रिश्त ...त्वकें एक सकल्प करूण ले भलिके नि उन हुन्योल रनकारा . मील रावण संहिता जस ग्रन्थ रचि भै .. शिव तान्डव स्त्रोत क नाम सुणी राखछै नै . ? वीकि रचना मैलि करी . उ त्वेकैं शुद्ध पढण ले नि आ . मैं तो कवि ले छ्यूं .. कतु कला न में पारंगत .. मेर जस को भो यो ब्रह्माण्ड में . मैलि कौ - उ .. कवि तो मैं ले छ्यू . तुमरि चारि मैं ले उच्च कुल में पैद हयी छ्यूं . ...

शादी

भगवान कसम खाके बोल रहा हूं .. जब भी काग्रेसी लोग राहुल गाँधी जी को युवा नेता बोलते है मुझे अपने अन्दर नान्तिनों वाली फीलिंग आ जाती है .. दरअसल ये ये फीलिंग इसलिये आती है कि राहुल जी मुझसे चार पांच साल बडे हैं . अब ये बात अलग ठैरी कि राहुल जी का ब्या नहीं हुवा ठैरा .. राहुल जी मुझे समझदार आदमी लगते हैं ( राहुल जी को पप्पू कहने वाले क्षमा करें ) . ब्याह न करने के अपने ही फायदे हैं . ना बीबी के ताने ना बच्चों की किटपिट .. जब भी जी किया गांधी आश्रम का थैला टांगकर विदेश किसी अच्छी लोकेशन पर घूम आओ . यहां ये भी फायदा है कि देर से शादी करो तो बीबी  समझदार और परिपक्व मिलती है . जल्दी शादी करो तो बीबी नान्तिन्योई अकल वाली आ जाती है अगर शादी ना भी हुई तो कोई बात नहीं कह दो देशसेवा की खातिर शादी नहीं की ..  वैसे भी राहुल जी की उमर इतनी ज्यादा भी नहीं हुई है . मेरा मानना है कि शादी की कोई उमर होती ही नहीं है . दिग्बिजय जी की तरह साठ साल के बाद करो या नारायण दत्त जी की तरह पुत्र रत्न की प्राप्ति के बाद करो .. हां ये बात जरूर है कि अगर राहुल जी विवाह कर लेते तो लोकसभा में काग्रेस की ए...

उठो लाल

उठो लाल आगे को देखो क्यों हारे थे इस पर सोचो . चहूं ओर हरदा का डंका . अपनों ने फिट कर दी लंका . जो अपने थे संगी साथी एक एक कर हो गये बागी खुद को खुदा समझ बैठे अब बैठ अकेले दाढी नोचो . उठो लाल आगे को देखो क्यों हारे थे इस पर सोचो . कहां गये वो जगरी भगरी क्यों ना औतर पाये डंगरी . फिर से द्याप्तों को औतराओ दोबारा से पूछ कराओ . कैसा था वो इस्टिंग हरदा जनता के पलडे में तोलो . उठो लाल आगे को देखो क्यों हारे थे इसपर सोचो . रोडवेज की खच्चाडा में बुडज्यू को जो सफर कराया . मधुली आमा को पिनसिन दी वो भी तेरे काम न आया . दो हजार बाईस की खातिर और नयी कुछ तिकडम सोचो . उठो लाल आगे को देखो क्यों हारे थे इसपर सोचो गैरसैण में टैन्ट लगाकर झूठे सपनों को दिखलाया . केदारेश्वर का सब पैसा सूफी गायक को भिजवाया . कैसे हों आबाद पहाड़ी कैसे रुके पलायन सोचो उठो लाल आगे को देखो क्यों हारे थे इसपर सोचो . गांव गांव सब उजड रहे थे फसल खा रहे सूअर बन्दर लोगों को तुम दिखा रहे थे गौलपार में खली का दंगल पब्लिक को मत उल्लू समझो जनता की तो नब्ज टटोलो उठो लाल आगे को देखो क्यों हारे थे ...

लालकिसन ज्यू दु:ख

लालकिसन ज्यू छाज में बैठी छन . पलतरबै पटखाट में रेडियो बाजण लागि रौ - हमसे का भूल हुई ...... जो ये सजा हमका मिली . लालकिसन ज्यूक आंख ओसै रई . लाल आगाक जास डकार हैरैई द्विये आंख . शायद तीन चार दिनक उनित् लागि रौ . नौकर चाहा धर गो . चाहा घुटुक लगै तो चाहा मीठ नै लाग . माची बेर नौकर छैं कूणीन .. कि चाहा बजर पाडि लिरौछै यस . चीनी कम हैरै . नौकर - चीनि सगी रै सैप . पटखाटाक ताल बटी कटोर में गूड धरि राखौ . ऐल टपुक लगै लिओ . पछिल जब कन्टोल में चीनि आलि तो तब पीला चीनि हाली चाहा . लालकिसन ज्यू - किलै पाल म्हैणैकि चीनि सगी गे ? नौकर - पाल म्हैण चीनि का मिली हमन कैं . तुमर आधार कार्ड जाम नै हैरय कूण लागि रौछी कन्टोल वाल . ग्यूं ले मी बाजपेई ज्यू क कार्ड में मागि लायूं . तुम आधार कार्ड जाम किलै नि करनया सैप ? लालकिसन ज्यू - कि बतूं यार .. मील सोचि राष्ट्रपति बण जून तो कि चैल तौ राशन क चीनि चाँओ .. पर क्याप हैगो . त्वेकैं आधार कार्डैकि हैरै यां मी निराधार हैगेयूं .. ( तब तक भ्यैर बटी मुरुलि धर ज्यू पुजि गे . भ्यैरे बटी घात लगूण लागि गे ) मुरुलिधर ज्यू - ओ लाल दा .. ओ लाल दा लालकिसन ज्यू -...

पहाड़ी करवा चौथ

रत्ति ब्याण - स्यैणि - उठना कन फटाफट नै ध्वे बेर तैयार है जाओ . आज करु चौथ छ . पति - पड़ण दी .. क्याप बबाल छ . हमार पहाड़न में कां हुं तौ करु चौथ ? पैलि बटी हमैरि ईज और आमैलि कबै न कर तौ बर्त .. अाजकलाक नई जपान वालनाक टटम भै तौ . स्यैणि - पैलि बटी तुमैरि बाबू और बूबू लि कबै मोटर साइकिल नि चलै . सब जाग पैदलै जांछीं . तुम तो सब जाग मोटर साइकिलै में किलै डोईंछा ... तुमार ईज बौज्यू टैम पर तो बहुत चीज नि हुंछी .. के के छोड़ला ? पति - तु बहस करिबेर म्यार मूंड नि बिगाड़ यार रत्तै रत्तै . स्यैणी - सुणो पैं .. मेर लिजी कि गिफ्ट लाला आज ? पति - कस गिफ्ट यार रोज रोज .. पोरुवैं मैरिज एनभरसरी पर एक पौडर क डाब दे तो सही त्वेकैं कोहरयाई मुंडी डालिये कैबेर . किलै खतम करि हालौ ? स्यैणि - तुमन में रै जौ उ गिफ्ट . कांहुं गे तुमैरि अकल ? गिफ्ट दिणक ले तमीज नहांति तुमन .. के भल भल चीज लूना .. पौडरक डाब .. शरम ले नि उड़य बतूण में . पति - यार गिफ्ट दिणी वालैकि भावना देखीं जां . गिफ्ट नै . स्यैणी - ततु लैकक गिफ्ट वी भावना कैं दि आया ..भावना देखीं राखी तुमैरि .. पति - यार तु कचकचाट नि कर मेर पैन्ट क...

पार्टी

गरीब आदमी गरीब ही होता है . वह कितनी भी कोशिस कर ले उसका रहन सहन चाल ढाल उसे गरीब धोषित कर ही देते हैं . अब मुझे ही लें किसी अमीर आदमी के लड़के की शादी का कार्ड आ गया . जिस पर प्रतिष्ठा में और मान्यवर जैसे शब्द मेरी नाम की शोभा बढा रहे थे . हालांकि ये शब्द कार्ड छपवाने वाले ने अपनी अमीर बिरादरी की शान में छपवाये होंगे . पर उसकी मेरे प्रति उदारता देखिये उसने मान्यवर और प्रतिष्ठा में जैसे शब्द मुझे दिये गये कार्ड में भी यथावत रहने दिये . हालाकि इन शब्दों की गरीब को आदत नहीं होती . उसका पाला तो अबे तबे जैसे शब्दों से पड़ता है . अब साहब कार्ड चूंकि सपरिवार था . मैं भी नियत समय पर नियत स्थान पर सपरिवार पहुंच गया . बच्चे खुश थे कि पार्टी में जा रहे हैं . गरीब के बच्चों के लिए यही एकमात्र पार्टी होती है . हम स्वरुचिभोज स्थल के गेट पहुंचे . गेट पर स्वागत के लिए एक तरफ शहनाई वादक और एक तरफ कार्टूननुमा संतरी था . कार्टून नुमा संतरी सभी मेहमानों का झुक कर अभिवादन कर रहा था . मैं ठिठक गया . संतरी झुका तो हर जगह झुकने की आदत के कारण मैं उससे ज्यादा झुक गया . मेरा परिवार डरकर मेरे पीछे पंक्तिबद्ध...

रोड शो

राहुल ज्यू रोड शो के लिये आये ठहरे हरिद्वार . अचानक मिल गये . मैने कहा नमस्कार दाज्यू .. आओ घर चलो . चाहा पाणि पीकर आओगे .थक गे हुन्याला रोड शो करिबेर ... राहुल ज्यू घर आय . भीतर बैठ .. मैलि नानतिनन छै कोय - देखो रे दिल्ली वाल ताऊजी ऐ रयी .. नानतिननैलि नमस्कार कै . तो राहुल ज्यू जेबन हाथ डालण बैठ . मैल को - क्वे बात नै राहुल दा .. रूण दिओ . नानतिनन ले पत्तै भै तुमैरि जेब फाटि छ कैबेर . राहुल ज्यु क मूख अड़कसै हैगे . दगाड़ आई सिक्योरिटी वाल छैं कोय . यार गली भ्यैर बटी द्वि पैकेट कुरकुरे लै दे नानतिनैतें . मैल पुछ - यार राहुल दा . कां बटी शुरू करौ आजक प्रचार ? राहुल - यार तुम राहुल दा किलै कूण रौछा .. हम तो स्वानिकैं हुनेला .. एकाद सालक हेर फेर हन्योल . मैल को - नै हो रिश्त ठुल हुनेर भै . तुम पांचेक साल ज्याठ होला मेर हैबेर . भले ही म्योर च्योल ऐल दस में पुजि गो . पर उमर तो तुमैरि ज्यादा भै . आब तुमैलि टैम पर ब्या नि कर तो मेरि कि गलती . ब्या नि हैरय कै तुम मेर हैबेर कांस् जि है जाला . राहुल - खैर छोड़ . और कि हैरीन हाल चाल ? मैल को - म्यार हाल कि हुनी . तुम सुणाओ .. एक बात और त...

वैलेन्टाइन त्यार

आज वैलेन्टाइन त्यार भै .. मैलि ले सोचि आज कुछ तूफानी करि जाऔ . मैं प्रोग्राम बणूण लाग्यूं . दिल में कुतकालि जस लागि गे . मैलि सोचि क्वे यस प्रोगाम बणाई जाओ कि मसालेदार यादगार बण जाऔ . मैलि आपुण घरवाई कैं आवाज लगै - अरे पंडिताइन . हैप्पी वैलेन्टाइन . स्यैणी शैद उसीके माचीन पितीन हैरै हुनेलि . म्यार शब्द भी छूटते ही सुदै परमाणु बम जसि फट गे . यां भीतर हल्द मर्च मस्याल सगी रई . तुमन यो वैलेन्टाइनैकि हैरै . फटाफट उठिबेर बजार बटी मस्याल लि आओ नतर तुमार भांटनाक खुश्याल निकालि द्यूल . बुड्याकाल होशफाम करो . भितरपन के काम करो . फुन लगाई बल्दैकि चार मेटाओ झन . उसीके म्यर मूंड आँफ हैरौ. मैल को - यार मस्याल नानतिनन छैं मगै ल्ही . आज प्यार करणी त्यार भै . जरा एक आंखर भल भल जस बुलानि कन . स्यैणि आंख ताणन बैठ गे . मैलि सोचि यैक मूख को लागौं .. यैक प्याराक स्याल सगी रई . कति और जाग उज्याड़न लागि जाऔ . स्यैणीक चक्कर में आपुण वैलेन्टाइन किलै खराब करी जाओ . मैं नै ध्वे बेर मूख लै वैसलीन क डाब घोसिबेर और कपड़न में स्यैणीक पर्स बटी सैन्ट चोरिबेर द्वि छरैक मार और बाल कैं मैलिके कुटरि बेर पाख उज्याण ब...

मजनूं पुराण

मजनू और रोमियो भले ही ऐतिहासिक दृष्टिकोण से अलग अलग प्रजाति के प्रेमी रहे हों पर कालान्तर में ये एक दुसरे के पर्यायवाची हो गये हैं . जबरन अपने प्यार का इजहार करने वाले . स्कूल कालेजों व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर हर अनजान या जान पहचान की लड़की को प्यार के लिए राजी करने या उनका ध्यान आकर्षण करने वाले . को मजनू या रोमियो कहा जाता है . पता नहीं क्यों पर समय समय पर रोमियो लोगों पर पुलिस की कुदृष्टि पड़ती रहती है .कई बार इन लोगों को पब्लिक का कहर भी झेलना पड़ता है . हद देखिये जब कोई रोमियो पब्लिक के हाथों पिटता है तो हाथ साफ करने वालों में वो लोग मुख्य होते हैं जो वहां से गुजर रहे हों और उन्हें ये भी नहीं पता कि मामला है क्या ? एक बात और एक रोमियो जब पिटता है तो उसको पीटने वालों वो शख्श भी होता है जो खुद उस जगह पर रोमियोगिरी करने आया हो . कहने का मतलब रोमियो समाजवादी होते हैं . भाई भतीजावाद या जातिवाद बिलकुल भी नहीं होता . अगर होता तो एक रोमियो पिटते हुए दूसरे रोमियो को कभी नहीं मारता . रोमियो बिरादरी पर गाने भी बने हैं . कभी अनिलकपूर रोमियो नाम मेरा चोरी है काम मेरा पर ठुमके लगाता है . ...

नारद विष्णु संवाद

भगवान बिष्णु श्रीरसागर में शेषसैय्या में विराजमान हैरेई . माता लक्ष्मी उनार खुटाणी बैठि रै . अचानक पृथ्वीलोक में हाकाहाक सुणिबेर प्रभु माता लक्ष्मी छैं कूण लागि रयी - कमला .. ओ कमला .. लक्ष्मी - कि कूण लागि रौछा स्वामी ? प्रभू - जरा यां आ और बात सुण .. लक्ष्मी - होय कओ कि कूण लागि रौछा ? प्रभू - तसिके खुटाणि किलै बैठ रछी . यां आ म्यार बराबर में बैठ . देख धैं जमान् कां पुजि गो . आब स्यैणी बैग बराबर छन . तू किलै खुटाणि बैठछी . मेकै ठीक नि लागन . मैं ले पुरुष और नारी क बराबरी क पक्षधर छ्यू . लक्ष्मी - तस के बात नहांति प्रभू . यां बटी समुद्रक सीन बड भल देखी और तुमार दगाड बैठ बेर आजकल गरमी लागड लागैं तुमर तौ शेषनाग जब फुंकार मारौं तो गरम हाव चलण बैठ जां .. उसीकै जेठा म्हैणा क घाम भै आजकल . प्रभु - अच्छा अच्छा . जरा नारद कैं फोन लगा धैं . धरती बटी नारायण नारायण करण लागि रौ . यां नि आय बहुत दिन बटी . के नयीं समाचार ले नि लै रय आजकल . ( माता लि नारद कैं फोन लगा . पर घण्टी जाते रै नारद ज्यू लि फोन नि उठै . तब माता लि नारद ज्यू कें ह्वट्सऐप में मैसेज छोड दे कि प्रभु बुलूण लागि रयीं . तु...

गुप्त मन्त्र

आज में आपको श्री श्री ४२० बाबा महालफन्डर दास जी के द्वारा सिद्ध किये हुए कुछ महामन्त्रों की जानकारी दे रहा हूं . मन्त्र अतिगोपनीय हैं . बाबजी ने इन मन्त्रों को गोवा के कुछ मनमोहक बीच में पूर्णमासी की चांदनी रात में सुरासुन्दरी की सुरूर वाली शाम में तकरीबन पूर्णरूपेण टल्ली होकर सिद्ध किया है . १- बुढापे में पुत्र प्राप्ति मन्त्र - ऊँ जवानी का झटका लगाये फटका . नारायण नारायण नमो डीऐनाय . ऊँ फट् लम्फट् . कुरु कुरु स्वाहा ... ( इस मन्त्र को राजभवन में एकान्त में सावधानी पूर्वक पाठ कर शिलाजीत और स्वर्ण भस्म के साथ सिद्ध करे. सावधानी और गोपनीयता परम आवश्यक है . ) २-मन्दबुद्धि निवारण मन्त्र - ऊं पोगो पोगो डिज्नी चैनलाय . कम अक्लाय गुरु की आग्या मां की आशीष . ऊँ फच. मन्दबुद्धियाय अक्लाय चाचा चौधरी कुरु ...स्वाहा ... ( इस मन्त्र का जाप चमचों से करायें . या मन्दबुद्धि पुत्र को चुपचाप विदेश गुप्तावाश में भेजकर जाप करने को कहें ) ३-पुत्र वशीकरण मन्त्र - ऊँ उत्त पदेश पुत्त पदेश छिप्पाल ओ का ओका स्वाहा .. (उक्त मन्त्र को टीवी चैनलों के सामने जाप कर सिद्ध करें . जोर से बोलें भले ही किसी का ब...

ईजक टेलीफोन

ठन्ठ हुण बैठ गे . गुजरात बटी मोद्दा ईजैलि मोद्दा कैं फोन कर . मोद्दा - हैलो .. नमस्कार ईजा .. ईज - बची रये .. ठुल्लो हैजाये चेला .. तेरि ५६ ईंच छाति ६० ईंच हैजो . मोद्दा - कसि हैरैछी ईजा तू ? ईज - मी तो ठीकै हैरयूं ईजा .. तु कस हैरौछै ? मोद्दा - मी ले ठीकै छ्यू . ईज - नरिया तु पोरबेर एक शाँल लाछिये मेर लिजी . आब उ फाट गो पोथी . कदिनै पाकिस्तान जालै तो एक शाँल और ल्यै दिये . जाड़नाक दिन छन बज्यूण . लाकाड़ पताड़ ले नहातिन आग तापड़तैं . शौल ढगी बेर घाम मैं बैठ रून .. आंग मैं जरा तात लागैली धैं . मौद्दा - ईजा आब पाकिस्तान जावै नि हौ तपार .. उ नवाज राठ कठु निकलन . उनार दगार म्यार झकौड़ हैगो . पोरु वैं जैबेर कुटि आयूं रनकारन .. ईज - ठीक करौ त्वील . मैलि त्वेछै पैलियै कौछी तौ रनकार मुख लगूण लैक नहातिन .. तौ तो जि ले बजर पड़न मेर शौल कां बटी आल आब ? मोद्दा - शौलैकि चिन्ता नै कर ईजा तू . मी तो बिदेश जाते रूं .. कती ले जैबेर वां प्रधानमन्त्री कैं एक धोति दी उन वी स्यैणी लिजी तो शरमा शरमी में एकाद शौल तो देलै ही सही .. बस मी त्यार लीजी भेजि दयूल . ईज - चेला तु तदुक बिदेश जांछै . के फैद...

हमार मोद्दा

भात खैबेर फौस्येन लागी भै . पालंगक काप और झोई गजब सवाद बड़ाई भै ईजैलि .. पेट में कटांस हुण जाणे खै ली . खाई बाद हलकणैकि से उज नि भै तो मैं घाम में पीठ लगै बेर चौंतार में तेरछीं गेयू . ह्यूनक घाम भै आंख लागणै तैं बटी रछी तो ग्वैटन बटी मितरो....ओ....ओ... कि आवाज उण बैठि . मैल चाय तो मोद्दा भाय . नमस्कार पुरस्कार भै . मैल कोय हाय अचानक कसिके आया हो मोद्दा ...? बैठो भीतर हिटो . मोद्दा - यार मी सब काम अचानकै करूं . कां बटी कां न्है जां कैकैई हाव ले नै लागण दिन्यू .. मैल कौ बैठो पैं ... मोद्दा - नै यार ऐल नै बैठन्यू आज मंगल छ .. तुमार पहाड़न में मंगल मिलाप छन्जर छाड़ नै करन बल . मैल कोय - के बात नि भै . तुम घरैके आदिम भया ... मोद्दा - नै यार इत्ती भ्यैरै बटी बैठ जानू .. मैल घरवाई कैं आवाज लगाई - सुणनैछी भौ ईजा .. यो गुजरात वाल ज्याठज्यू ऐरईन .. जरा द्वि गिलास चाहा ला धें .. स्यैणिलि भीतरै बटी आवाज लगै - चीनी सगी रै . मैल को - क्वे बात नै .. शुभम छैं मगै ल्ही हिरदा दुकान बटी . स्यैणि - कां बटी मगूं ... शुभम डबल निकावण बैकाक लाईन में लागि रौ . बेलि बटी वैं छ . तब तक मोद...

सैन्टा द्याप्त .

रत्तिब्याणक टैम भै . बिस्तर में पड़ी भयूं . भला भाल स्वैण उण लागि भै . तात लागि भै लिहाफ भितर . तब तक घरवाईक आवाज पड़न बैठ गे कान न में . उठो हो . उठो . सुड़नौछा . उठो . मैलि सुड़ियैकि नि सुणी करि दी . घनघोर नींद आइयाक नखार लगै दी . घरवाई ले कम नि भै . वीलि मेर हाथ खींचबेर लझोड़न शुरू कर दी . मैल को - कि करनैछी तस . तमीज कां गे तेरि . बैग छ्यूं त्योर . प्यारैलि नि उठै सकनी . उठो जानूं उठो डार्लिंग कैबेर उठूनी . समयाक सांथ चली कर . देख धें दुन्नि कां पुजि गे . घरवाई - होय सब देखि रयूं मी दुन्नि कां पुजि गे . सारि दुन्नि नैध्वे बेर पुज पाठ करि बेर बैठ गे . तुमैरि चारि लिफाफ भीतर पाद नि मारड़य दुन्नि . उठो फटाफट नाण ध्वैण करो . मैल बिस्तर उठूण छ . क्वे भीतर आलौ कि कौल ? मैलि कौ - त्यार मुख बटी भलि बात कबै नि आलि . और यदुक ठंड में नाण क नाम झन लिये . ठंडैलि जुकाम लागि गे या बीमार पड़ि गेयूं तो को रौल जिम्मेदार . मैसैलि आपुण जतन आपुण हाथैलि करण चें . घरवाई - जि बजर पाड़छा पाड़ो . नाण नि लाग रया तो कम से कम तौ मूखक टाल तो खुकल लिओ . त्यार बारक दिन छ . और तौ चाहा धरि र...

ड्रैसिग रूम

पाकिस्तान दगाड हार बाद भारताक ड्रैसिग रूम में गजब माहौल हई भै . हार्दिक पड्या और जडेजा में अंगाईजित्ती हई भै . पड्या जडेजा कि दाढी उचेडन लागी भै और जडेजा लि पड्या क हाथ में दातिंकि काटि बेर खून्योई करी भै . बुमराह उनन कैं छूटूण में लागि भै .मारामारी में एक लात बुमराह पेट में पडि गे . बुमराह पीडैलि बौई गे और मरो काणीच्यालो आपस में कैबेर द्वि द्वि फचैक द्विनै लै लगै बेर जानै रय . एक किनार में धोनी फोन में पहाड़ी गीत सुणन लागि भै - ओ लाली हो लाली होसिया .. पधानी लाली तीलै धारो बोला . कुम्बले आपुण कच्छ अन्डरशौर्ट तार बटी निकाल बेर नौव उज्याण बाट लागि गे नाणा लिजी . रोहित शर्मा क अलगै डाड. पडी भै . युवराज - यार घोनी तौ हर बखत पहाड़ी गीत नै चलाई कर . पंजाबी लगा दिलेर मेहंदी या हनी सिंह टाईप . धोनी - चुप हैरौ रे . रन बणूण बखत तेर भेल कामनन . दिलेर मेहंदी सुणनै हैरै .. तु अल्ताफ राजा सुण . युवराज - त्वील बड. फाडी लाकाडाक चार करन.. बात करनौ. लड्डू जस कैच उछालौ त्वील . बिराट - यार धोनी दा . लडै नै करो यार .मी कप्तान भयूं . मेरि बात तो मानो . धोनी - कप्तान ऐरौ बड चुरैन साल् .. उ तो ...

अपुड्याट

गोपाल सिंह - ओ पन्थ्याण ज्यू ... ओ पन्थ्याण ज्यू ... आम् - हो ओ ओ ओ .... गोपाल सिंह - ओ पन्थ्याण ज्यू पैलाग .. आम-आशीर्वाद .कांक छा ..?? गोपाल सिंह- पार दबक गौं क छ्यू .. गोपाल सिंह .. आम् कि- कूंछिया ..कां जाणी छिया के नै हो पन्थ्याणि ज्यू . इथैके कति कुमिना क सुद्याव लागि रौछ्यू .. कैलि कौ तुमार यां छ कैबेर . तबै आयूं . ह्वलै तुमार यां कुमिन .. नानू ले देला जब हैजाल . आम- होय क्यैने .. छ .. क्यै कि चैन पडौ तुमन कुमिन . कति पुज छ कि ? गोपाल सिंह- नै पन्थ्याण ज्यू बौज्यू बीमार हैरान . के नै पचणौय . कैलि कौ कुमिन न साग दिओ कैबेर . तबै चैन हैरौ . छ जबत दि हालौ . आम- होय होय क्यै नै छ . अल्लै दयू हां . गोपाल सिंह - होय पन्थ्याण ज्यू भल हैजौ तुमर . कतु छन नानतिन . आम- तीन छन गोपाल सिंग (अं ) .. एक च्योल द्वि चेल्ली . गोपाल सिंह- कां छ तुमर छ्यौड .. कि कनौं ..? आम- दिल्ली पन छ . गोपाल सिह- कि कनान तुमार छ्यौड. दिल्ली में . भली नौकरी में हुन्याल हाय . आम- बस पेट पावण रौ गोपाल सिंग ज्यू आपुण . जि करनन्योल . आपुणै ले पेट पाव हाललौ मस्तु भोय . गोपाल सिंह - हेय ! आम - तीन म्है...