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सरकार कसिके चलैं

 #सरकार_कसिके_चलैं पहाडन में जब क्वे कामकाज हूं तो सार गौं न्यूत करी जां    . कई प्रकराक पकवान बणनन .  जब खाण खिलूणकि बारि उं तो एक दृश्य आम हूं    रसोई क पास आंगण में पैलि धोति लगाई बामण लोग बैठाई जानी .  सबसे पैली उ लोग खिलाई जानन . फिर नम्बर उं उ सयाण लोग जो धोति लगैबेर नि खाम   वी बाद स्यैणि और नानतिननैकि पंगत बैठाई जां . एक विशिष्ठजन ले हुनन जनर लिजी थाळलि सजैबेर भीतर मगाई जां . और प्रकराक मैंस यास ले हुनन जो बहुत खटरागि किसमाक हुनन उ घर बैठि बैठिये काम काज करणी वाल कें नाम ले धराल और आपुणि घरवालि कें थालि दिबेर ले भेजाल कि जा .  मेर लिजी परोस माग लाये  .  आज मैलि बारीकी क साथ सोचो और तुलना करी तो यो समझ में आ कि यो जो पहाडन में खाण परोसणकि ब्यवस्था छ देश ले तसीके चलण लागि रौ . सरकार ले चाहे जो ले हवो तसी के काम करैॆ .  गजबजी गेछा नै .. चलो मी बतूं .. जरा ध्यानैलि पढिया - आब देखो - न्यूत करण बटी शुरुआत करनू .. सुवाल पथाई क न्यूत सार गौं स्यैणिन करी जां . किलै कि यमें के विशेष खर्च नि भै . स्यैँणिन कें दस रुपें दुणआँचव...

मेरि सरकार

घरवालिक मूख आज रत्तिब्याण बटी चूखढोई जस हई भै . नांण ध्वैण ले करछै नि कर जि बज्या हुन्योल . के ले पूछणकि कोशिश करी तो कालिनाग कि जै चारि फुंकार मारनेर भै . रिस्याउन काम कम करणैई भानकुन कैं ज्यादे असैटण लागि भै . भीतर पन भानकुननैकि खडम्म भडम्म यसि सुणि रई भै मानो हमर घर अल्माड टमट्यूडा मौहल्ला में हुन्योल .  नानतिन के पुछला तो मैक्यूण लागि भै और मीलि जरा ले भीतरपन के हरकत करि तो बुकूणा लिजी उनेर भै . मतलब भीतरपन क वातावरण कश्मीर कि हालत जस हई भै कां बटी गोलि चलि जालि के अन्ताज नै . आदू दिन तो जसिके तसिके काट हाल पर दोपहर तक हालत बेकाबू हैगे . मैलि सोच कि कुछ सरकारैकि चारि कूटनीतिक कार्यवाही करि जाओ . नानतिन ले म्यार मुख चाई भाय . बीच बीच में हस्तक्षेप कि मांग करण  लागि भाय . मी सरकारै कि चारि लाचार भयूं , मैलि नानतिनन कैं जल्दी समस्या सुलझूणक आश्वासन देय और एक सर्वदलीय बैठक बुलूणकि सोचि . बीचाक कमर में हम सब लोग बैठ गेया . मेरि घरवालि , मेरि ईज , मेर बाबू , मेर च्योल और चेलि बैठ गे . बैठककि कार्यवाही शुरू हैगे . मैलि बाबू कैं बैठककि अध्यक्षता लिजी  आमन्त्रित कर पर बा...

पहाडी गणना

पहाड़ में समय की गणना बड़े दिलचस्प तरीके से होती है - १- अल्लै ऐ जूल - मतलब आदमी आधे पोने घन्टे बाद ही आऐगा . २- झिट घड़ि में ऐ जूल - यहां भी आदमी एक दो घन्टे के लिए गया . ३- बस उण जाण छ - आदमी कम से कम तीन घन्टे के लिए गया समझो . ४- एक मिनट में ऐ जूल - ये एक मिनट की अवधि आधे घन्टे की होती है . ५-एक सैकेन्ड में ऊं हां तु बैठ - मतलब दस मिनट तक इन्तजार करो . ६- घन्टेक में ऐ जूल - मतलब तीन चार घन्टे कम से कम . ७- पोरू या परसों - ये भूतकाल का आठ दस दिन से लेकर दस पन्द्रह साल का समय हो सकता है (उदाहरण - बताओ यार तैक ब्या पोरु हई भै . मेकैं भलीके याद छ . आज तैक च्योल दस में पुजि गो बल और चेलि बेउण हैलै बल ) ८- तत्ति कैं डाना परून लै - मतलब पूरे दिन भर का रास्ता . ९- पार सामैणि में देखि रौ - मतलब तीन चार घन्टे का रास्ता . इसी प्रकार मापने के लिए भी एक छिट दूध ( कम से कम आधा गिलास ) एक तुड़ुकि ( लगभग एक गिलास ) द्वि गुद चावलाक ( एक दो पाव चावल ) मूठेक चावल ( लगभग आधा किलो ) ये मात्राऐ देने वाले की नीयत और दरियादिली पर बढ भी जाती हैं .

नारद भेंट

कुमाउनी मासिक पत्रिका पहरू मे प्रकाशित ब्यंग - नारद भेंट - रत्ति ब्याण झुकमुक्कै पेट में गुड़गुड़ाट जस चितूण लाग्यू तो मैल टीना क डाब में जरा मनतात जस पाणि भरिबेर कान में जन्यो लपेटिबेर गध्यार उज्याण जाणौक बिचार कर . पर जसै बाट लाग्यू तो पेट भितर छां फानणैकि जैसि आवाज उण भैगै . मैल सोचि गध्यार जाण तक तो मेर पेट बटी छ्वा फुटि जाल .. लिहाजा मैल सोच कि फटाफट पार बाखैई हरकु दड़ा क बाड़ै में बैठ जां . ऐल को देखड़ौ . जसै ग्वैटून बाट लाग्यू तो एक बुड़ हाथ में घिघारू जांठ लिबेर मैलिकै उण लागि भै . म्यार हाथ खुट अरड़ी गे . कल्जून लै ह्यांक्क जस हैगै .. मैल सोची कि इज कूंछी रत्तै ब्याणाक टैम पर ग्वैटून लै छौव ले देखी कैबेर . मैल कौ आज तो सरसूंत्तै देखि गो .. मेरि पेटैकि गुड़गुड़ जां हराणि हुनेलि .. गौव सुकि गे .अलबलाट में हाथ बटी डाबक पाणि क द्वि घुटुक मारणै तै बटी रछ्यू .. तब तक उ बुड़ैलि आवाज दी .. को छै नाती तु और कां जाड़ौंछै यो अन्यार पट्ट .. मैल परसुदियां जस उल्ट बुड़ छैं पुछ दी .. तुम को छा ? बुड़ कूण लाग मी नारद छ्यू .. स्वर्ग लोक बटी बिहार चुनाव क कवरेज करणा लिजी ऐ...

दिवाली की खुमारी

हरदौल वाणी में प्रकाशित मेरी रचना - आभार ललित राठौर जी एवं आदरणीय देवीप्रसाद गुप्ता जी का १- दीपावली पर आज कलुवा खुश है . त्यौहार पर खूब मेहनत मजदूरी के बाद आज सेठजी ने आधा किलो मिठाई और दो सौ रुपये का इनाम दिया है . मिठाई नकली मावे की आ रही है बल इसलिए सेठजी ने कलुवा को पकड़ा दी . कोई गिला नहीं है कलुवा है . मिठाई बच्चे खा लेंगे . गरीब के बच्चों को नकली असली सब हजम हो जाती है . दो सौ रुपये से अपने लिए कलवा एक देसी की बोतल बन्डल माचिस ले आएगा . त्यौहार ठहरा . खुशी से मनना हुवा . ठीक ही ठहरा बल . २- सरकारी अधिकारी के घर गिफ्ट आयटम का ढेर लगा है . हर गिफ्ट लाने वाले से कह रहे हैं इसकी क्या जरूरत थी . पर मन ही मन कह रहे हैं साला क्या घटिया चीज लाया है . अब कोई काम फंसने दे मेरे नीचे . इन सब के बीच साहब का नौकर ललचाई आंखों से रंग बिरंगे गिफ्ट पैकेट देख रहा है . किसी के लिए कूड़ा किसी के लिए खट्टे अंगुर ठहरे . अब साहब अपने गिफ्ट को नौकर को कैसे दे दें ? छोटे आदमी को ज्यादा मुह लगाना भी ठीक नहीं ठैरा . ३- लाला अनोखेलाल की दुकानदारी अच्छी हो गई . बीबी के लिए हार ...

नौला

गर्मियों में पहाड़ में पानी की कमी हो जाती है . मैने सोचा एक नौला बनवा दिया जाय हल्द्वानी अल्मोड़ा के बीच में कहीं पर . जब ठेकेदार से बात की तो खरचा काफी बताया . मैने सोचा क्यों न चन्दा कर लिया जाय ? अब अपनी पहचान तो साहित्यकारों कवियों से ही है . सोचा चलो इसी बिरादरी से लेते हैं चन्दा . मैने कवियों की लिस्ट बनाई और पहुंच गया एक एक के घर .  वहां जाकर कवि मित्रों से जो सहयोग मिला वो सुनाता हूं उन्ही की जुबानी -- राजेन्द्र पन्त ' राजन ' - नमन है बन्दन है अभिनन्दन है इस नेक काम में नौले बनने चाहिये हर कस्बे हर ग्राम में .. पर बहुवों से कहना सस्कार दिखाना . पानी भरने हमेशा घूंघट में ही आना .. नौले के लिए चन्दा तो मैं नहीं दूंगा . मैं तो नौले पर कविता लिखूंगा . कविता के माध्यम से कमाल कर दूंगा . कविताऐ लिख लिख कर ही नौला भर दूंगा . रोली दूंगा तिलक दूंगा चन्दन दूंगा इस काम को . नमन है बन्दन है अभिनन्दन है इस नेक काम को . ( मेरी बोहनी तो खराब हो चुकी थी . फिर भी भगवान का नाम लेकर आगे बढा .  बारी थी ललित राठौर शौर्य जी की . सोचा युवा हैं ओजस्वी हैं जरा ज्यादा चन्दा मिलेग...

बड दिन

रत्तिब्याणक टैम भै . बिस्तर में पड़ी भयूं . भला भाल स्वैण उण लागि भै . तात लागि भै लिहाफ भितर . तब तक घरवाईक आवाज पड़न बैठ गे कान न में . उठो हो . उठो . सुड़नौछा . उठो . मैलि सुड़ियैकि नि सुणी करि दी . घनघोर नींद आइयाक नखार लगै दी . घरवाई ले कम नि भै . वीलि मेर हाथ खींचबेर लझोड़न शुरू कर दी . मैल को - कि करनैछी तस . तमीज कां गे तेरि . बैग छ्यूं त्योर . प्यारैलि नि उठै सकनी . उठो जानूं उठो डार्लिंग कैबेर उठूनी . समयाक सांथ चली कर . देख धें दुन्नि कां पुजि गे . घरवाई - होय सब देखि रयूं मी दुन्नि कां पुजि गे . सारि दुन्नि नैध्वे बेर पुज पाठ करि बेर बैठ गे . तुमैरि चारि लिफाफ भीतर पाद नि मारड़य दुन्नि . उठो फटाफट नाण ध्वैण करो . मैल बिस्तर उठूण छ . क्वे भीतर आलौ कि कौल ? मैलि कौ - त्यार मुख बटी भलि बात कबै नि आलि . और यदुक ठंड में नाण क नाम झन लिये . ठंडैलि जुकाम लागि गे या बीमार पड़ि गेयूं तो को रौल जिम्मेदार . मैसैलि आपुण जतन आपुण हाथैलि करण चें . घरवाई - जि बजर पाड़छा पाड़ो . नाण नि लाग रया तो कम से कम तौ मूखक टाल तो खुकल लिओ . त्यार बारक दिन छ . और तौ चाहा धरि र...