टमाटर प्याज
सब्जी खरीदने बाजार गया . बल्कि यूं कहिये भेजा गया . दरअसल मैं पत्नी को शाम की सब्जी के लिए सौ रुपये दिया करता था . पत्नी के लाख समझाने पर भी ये मानने को तैयार नहीं था कि आजकल सौ रुपये में सब्जी नहीं आती . खैर श्रीमती जी ने मेरे हाथ में बहत्तर रुपये दिये और सब्जी की लिस्ट पकडाते हुए कहा - जाओ सौ रुपये की सब्जी ले आओ . मैं अखबार तो पढता ही हूं तो ये समझ चुका था कि सौ रुपये में जी एस टी कट चुका है . बाजार गया तो देखा टमाटर को सब्जी के दुकानदारों ने अपने गल्ले के बिलकुल पास रखा था आम आदमी के पहुंच से दूर . मैने सब्जी वाले से विरोध किया - भाई ये टमाटर इतनी दूर क्यों रखे हैं ? सब्जीवाला दार्शनिक अन्दाज में बोला - हे फटीचर मेरा मतलब कविवर टमाटर का दूर रखा जाना इस बात का द्योतक है कि टमाटर आम आदमी की पहुंच से दूर जा चुका है . हर चीज के दिन फिरते हैं . जिन टमाटरों को तुम लोग पिलपिलाकर चैक किया करते थे वो आज तुम्हें और तुमारी जेब को चैक कर रहे हैं . तुम्हें और तुम्हारी औकात को पिलपिला रहे हैं . तुमने टमाटर को कभी गौर से देखा है ? उसके सिर पर ताज सजा होता है . वो एक प्रकार से सब्जियों का...
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