अमडकी खुट
अमडकी खुट
(कुमाऊनी भाषा साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति द्वारा पुरस्कृत व्यंग )
.
ठुल मैंसनाक देखा देखी एक दिन मैलि ले मौरनिंग वौक करणैकि सोचि . जसै ग्वैटन पुज्यूं खुट रडी पडौ और खुट अमडकी गे .
भौते पीड हैगे . बडी मुश्किलैलि लच्यूं लच्यूं करिबेर घर आयूं तो बाबू लि पुछ - किलै रे तौ डुन बल्दैकि चारि किलै हिटण लागि रौछै ?
मैलि कौ ग्वैटन खुट अमडकी गो . मौरनिंग वौक करण जै रौ छ्यूं .
बाबू गरम हैगे . कूण लाग - ढांट जस हैगो छै . मति त्वेकैं आजि ले नि ऐ . रत्तै रत्तै नै ध्वे बेर पूज पाठ करनैं बामणक च्यल छिए . भितर पन शांक घांट बजूनैं . डोईण बाट लागै . ढूंग में रै जाल तौ वौक .. खुट टोडिबेर लि आ .
नानतिनन छैं बोरी मगैबेर आंगण में बैठ्यूं . तब तक नौव बची पाणि लिबेर घरवाई ले पुजि गे . मेकैं बैठि देख बेर कूण लागि -
तसिके आंगण में किलै खिति रौछा डनाकि जास रत्ति रत्ति ब्याण .. जरा तौ आंगण में झाडै झाडि दिना . सब काम मैलि करण भै यो कुडी क .
मैलि कौ - यार खुट अमडकी गो . चा धैं ओसै गो . हलकाईण ले नै रय .
स्यैणि लापरवाहि ल कूण लागि -
ऐल आफि रूं तौ खुट . फटाफट जैबेर चक्की में पिस्यू पिसैबेर लि आओ . भितर पिसुवैकि फांक नहां . नानतिनक भूकैलि टिटाट पडी रौ . फिर पछिल तुमार खुटक सेक ले करि दयूल .
मेकैं के कूण नि ऐ . मैलि बात बढूण नि चै .
तब तक भितर बटी ईज एक गिलास दूध में काच हल्द हालिबेर लि ऐ . दूद पिबेर आंखन छैं कुछ उज्याव जस चिताय . पीड ले कम हैगे थ्वाड .
मेरि खुटैकि खबर माल बाखई नरी का पास ले पुजि गे . नरी का ऐबेर कूण लाग -
कां अमडक्यै लाछै तौ खुट ??
मैल कौ - ग्वैटन .गजब पीड हैगे हो नरी का .
नरी का कूण लाग - यार तसै भये तू त्वील मेर पास बेई रातै ऐ जाण चैंछीं . ऐल तक तो हिटण बैठ जानैं .
मैलि मनै मन सोच खुट रत्तीब्याण अमडकीण रात में तुमार यां ट्वाल देखणा लिजी ज कि उंछी मैं .
तैलि कुडी क काखि ले ऐ गे . कूण लागि -
चेला तौ खुट अमडकीण में ठन्ड झन करिये . कति बटी पुराणि मसूर कि दाल में चडी लासण डालिबेर खा . तेर खुट छै म्हैण में ठीक नि होल तो म्यर नाम बदई दिये .
मैलि कौ -काखी तेरि तैसि दवाई नि चैनि .छै म्हैण में ठीक हुणी .
काखि कूण लागि - जि करछै च्याला . एक बार त्यार काकाक् ले तसै भो . मैलि मसूरै दाल खिलै . हद्द भै . आब् तेरि मरजी .
यो बातचीत चलि रैछी तब तक साव क ले फोन ऐ गे .
कूण लाग् - भिन्ज्यू दिदी छैं एक ठुल ठुल जस सिसूणक ढांक मगाओ और खुट में चपकै मागो . अल्लै ठीक है जाल .
मेकैं उसी के गुस्स आई भै . मैलि फोनैं में मैक्यै दी साल् कैं -
रनकारा हाकाहाक नि कर . नतर तैं ऐबेर त्यार मुख में हालि दयूल सिसूणक ढांक . फिर बणलै आयुर्वैदिक डौक्टर .
साल् कूण लाग् - आब कि कूं तुमन छैं . बैणि तुमार आँचव लगाई भै . नतर जवाब तो मेर पास ले भये . हमैरि दिदीकि तो किस्मतै खराब छी जो तुमन जस मैंस मिलौ . जरा ले दैज दिणैं तैं हमार पास हुनौं तो हमैरि दिदी ले कती हुन खानि घर हुनि .
मैलि हट्ट हुट्ट करिबेर फोन काटि दी .
आब भ्यैर घाम लागण बैठ गे . मैं भितर गेई . तब तक पाल भितरैकि बोजि ले ऐ गे .दौडनी भितर ऐ .
ओ ईजा ! लला ..तुमार खुट में कि भो ? बलै ल्यून मी आपुण देवरा क खुटैकि .
हाथ में एक पिरूलक मुठ्ठ लिबेर आई भै .कूण लागि -
लाओ खुट इथकै लाओ . यो काच पिरूवैकि चार सपैक तुमार खुट में मारुल तो खून फाटि जाल और अल्लै बटी कबड्डी खेलण बैठ जाला तौ खुटैलि .
एक हाथैलि म्यर हाथ पकडिबेर खुट में पिरूलैकि चपैक मारण बैठ गे .
म्यार पीडैलि बिडौव हैगे . ओ ईजा ओ बबा हैगे . तीन कुलाक पितर मूख लै ठाड हैगे .
बोजि कूण लागि - जतुक पीड थाला उतुक जल्दी ठीक होल . फिर और जोरैकि चपैक मारण भैगे . फिर जान् जानैं बोजिलि म्यार फांगुण में जोरैलि चिकोटि काटि और अल्लै ठीक हैजाला कै बेर जानी रय .
पिरूवैलि खून तो नि फाट् म्यर पैजामक एक बौंव जरूर फाटि गे . मैलि मनै मन कोय - भांग फुलि जौ तौ चलकू बलकू बोजि क ख्वार बांकि जै औसै गे खुट ...........
.
क्रमश: ..... अगले अंक में जारी .
विनोद पन्त 'खन्तोली .
(कुमाऊनी भाषा साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति द्वारा पुरस्कृत व्यंग )
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ठुल मैंसनाक देखा देखी एक दिन मैलि ले मौरनिंग वौक करणैकि सोचि . जसै ग्वैटन पुज्यूं खुट रडी पडौ और खुट अमडकी गे .
भौते पीड हैगे . बडी मुश्किलैलि लच्यूं लच्यूं करिबेर घर आयूं तो बाबू लि पुछ - किलै रे तौ डुन बल्दैकि चारि किलै हिटण लागि रौछै ?
मैलि कौ ग्वैटन खुट अमडकी गो . मौरनिंग वौक करण जै रौ छ्यूं .
बाबू गरम हैगे . कूण लाग - ढांट जस हैगो छै . मति त्वेकैं आजि ले नि ऐ . रत्तै रत्तै नै ध्वे बेर पूज पाठ करनैं बामणक च्यल छिए . भितर पन शांक घांट बजूनैं . डोईण बाट लागै . ढूंग में रै जाल तौ वौक .. खुट टोडिबेर लि आ .
नानतिनन छैं बोरी मगैबेर आंगण में बैठ्यूं . तब तक नौव बची पाणि लिबेर घरवाई ले पुजि गे . मेकैं बैठि देख बेर कूण लागि -
तसिके आंगण में किलै खिति रौछा डनाकि जास रत्ति रत्ति ब्याण .. जरा तौ आंगण में झाडै झाडि दिना . सब काम मैलि करण भै यो कुडी क .
मैलि कौ - यार खुट अमडकी गो . चा धैं ओसै गो . हलकाईण ले नै रय .
स्यैणि लापरवाहि ल कूण लागि -
ऐल आफि रूं तौ खुट . फटाफट जैबेर चक्की में पिस्यू पिसैबेर लि आओ . भितर पिसुवैकि फांक नहां . नानतिनक भूकैलि टिटाट पडी रौ . फिर पछिल तुमार खुटक सेक ले करि दयूल .
मेकैं के कूण नि ऐ . मैलि बात बढूण नि चै .
तब तक भितर बटी ईज एक गिलास दूध में काच हल्द हालिबेर लि ऐ . दूद पिबेर आंखन छैं कुछ उज्याव जस चिताय . पीड ले कम हैगे थ्वाड .
मेरि खुटैकि खबर माल बाखई नरी का पास ले पुजि गे . नरी का ऐबेर कूण लाग -
कां अमडक्यै लाछै तौ खुट ??
मैल कौ - ग्वैटन .गजब पीड हैगे हो नरी का .
नरी का कूण लाग - यार तसै भये तू त्वील मेर पास बेई रातै ऐ जाण चैंछीं . ऐल तक तो हिटण बैठ जानैं .
मैलि मनै मन सोच खुट रत्तीब्याण अमडकीण रात में तुमार यां ट्वाल देखणा लिजी ज कि उंछी मैं .
तैलि कुडी क काखि ले ऐ गे . कूण लागि -
चेला तौ खुट अमडकीण में ठन्ड झन करिये . कति बटी पुराणि मसूर कि दाल में चडी लासण डालिबेर खा . तेर खुट छै म्हैण में ठीक नि होल तो म्यर नाम बदई दिये .
मैलि कौ -काखी तेरि तैसि दवाई नि चैनि .छै म्हैण में ठीक हुणी .
काखि कूण लागि - जि करछै च्याला . एक बार त्यार काकाक् ले तसै भो . मैलि मसूरै दाल खिलै . हद्द भै . आब् तेरि मरजी .
यो बातचीत चलि रैछी तब तक साव क ले फोन ऐ गे .
कूण लाग् - भिन्ज्यू दिदी छैं एक ठुल ठुल जस सिसूणक ढांक मगाओ और खुट में चपकै मागो . अल्लै ठीक है जाल .
मेकैं उसी के गुस्स आई भै . मैलि फोनैं में मैक्यै दी साल् कैं -
रनकारा हाकाहाक नि कर . नतर तैं ऐबेर त्यार मुख में हालि दयूल सिसूणक ढांक . फिर बणलै आयुर्वैदिक डौक्टर .
साल् कूण लाग् - आब कि कूं तुमन छैं . बैणि तुमार आँचव लगाई भै . नतर जवाब तो मेर पास ले भये . हमैरि दिदीकि तो किस्मतै खराब छी जो तुमन जस मैंस मिलौ . जरा ले दैज दिणैं तैं हमार पास हुनौं तो हमैरि दिदी ले कती हुन खानि घर हुनि .
मैलि हट्ट हुट्ट करिबेर फोन काटि दी .
आब भ्यैर घाम लागण बैठ गे . मैं भितर गेई . तब तक पाल भितरैकि बोजि ले ऐ गे .दौडनी भितर ऐ .
ओ ईजा ! लला ..तुमार खुट में कि भो ? बलै ल्यून मी आपुण देवरा क खुटैकि .
हाथ में एक पिरूलक मुठ्ठ लिबेर आई भै .कूण लागि -
लाओ खुट इथकै लाओ . यो काच पिरूवैकि चार सपैक तुमार खुट में मारुल तो खून फाटि जाल और अल्लै बटी कबड्डी खेलण बैठ जाला तौ खुटैलि .
एक हाथैलि म्यर हाथ पकडिबेर खुट में पिरूलैकि चपैक मारण बैठ गे .
म्यार पीडैलि बिडौव हैगे . ओ ईजा ओ बबा हैगे . तीन कुलाक पितर मूख लै ठाड हैगे .
बोजि कूण लागि - जतुक पीड थाला उतुक जल्दी ठीक होल . फिर और जोरैकि चपैक मारण भैगे . फिर जान् जानैं बोजिलि म्यार फांगुण में जोरैलि चिकोटि काटि और अल्लै ठीक हैजाला कै बेर जानी रय .
पिरूवैलि खून तो नि फाट् म्यर पैजामक एक बौंव जरूर फाटि गे . मैलि मनै मन कोय - भांग फुलि जौ तौ चलकू बलकू बोजि क ख्वार बांकि जै औसै गे खुट ...........
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क्रमश: ..... अगले अंक में जारी .
विनोद पन्त 'खन्तोली .
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