पौंण
#पौंण
मेहमान क लिजी कुमांऊ में पौंण शब्द प्रयोग करी जां . पैली बटी जब संचार क साधन कम छी तब पौंण उणै कि सूचना ले नि मिलछी . आजकल तो पैलिये फोन में बात है जां . पौंण उणक क्वे निश्चित तिथि या सूचना नि मिलणक कारणैलि पौंण कें हिन्दी में अतिथि कूनेर भै . पैलि बटी चिठ्ठी पत्री द्वारा आपुण उणैकि सूचना दियी जानेर भै . कबै कबै पौण ऐबेर न्है जाल वीक ले दस बीस दिन बाद चिठ्ठी मिलनेर भै . कबै कबै तो यस तमाश ले है जांछी कि पौण आय और वापस न्है गे और वीक घर पुजि गेयूं कै चिठ्ठी ले पुजि गे तब मी उणी वाल छ्यूं कैबेरै कि चिठ्ठी पुजनेर भै .
एक बात कि बजहैलि पौंण उणी वालि छ कैबेर एक पूर्वानुमान यसिके ले लगूनेर भै कि घर क आंगण मेॆ अगर कौव बास गे तो मैस कूनेर भाय कि अरे भीतर पन जरा झाड हाड झाडि दिया हां . कौव बासणछी कि अन्ताज क्वे ऐगोय . उ टैम में गरीबी ले भै . कबै कौव बास तो क्वे बिचार कौव कें ढूंग मारिबेर भजूनेर ले भै . कौवा ... यां नि बास . यां आपुणै खांण धो हैरौ . पौंणन कां बटी खउल ..
जब नांज पाणि हुनेर भै फसला क टैम पर एक द्वि कन्टर अनाज अलग धर दियी जांछी बल . उ अनाज पौंणनाक लिजी भै . आपु तो खुद मोट माट अन्न खैबेर दिन काटाल पर मेहमानाक लिजी भल भल बचै राखनेर भै .
तसीके क्वे आखोड , खाज , च्यूड सिरौल वगैरह ले बचैबेर धरि राखनेर भै .
आहा क्या भल लागनेर भै पौंण क उण में . पौंण खालि वीकै नि भै जैक यां आई भै .. पुर बाखई वीक आवभगत करनेर भै . अगर मेजवान क यां धिनाई नि भै तो पास पडौस वाल दूद दै घ्यू पुज्यै दिनेर भाय . पौंण क रंगत ऐ जांछी .
तब आज क जस बखत ज के भै .. कि ना उणी वाल कैं टैम ना घर वालन टैम . पौण आल तो तीन चार दिन जरूर रुकनेर भाय .
पौंण उण पर सबसे ज्यादा खुश नानतिन हुनेर भाय . उनार लिजी टौफी . बिलैमिठ्ठै . बिसकुट उनेर भाय . क्वे खास पौंण जसिके माम या भिन्ज्यू आय तो लत्त कपड ले लूनेर भाय . कपड उनेर भाय अन्ताजैलि .. कबै छ्वाट ऐ जानेर भाय तो कबै कुथव जास फैली . हम तब उसै कुथव जास कपड पैरिबेर ग्वैटन दौड लगै दिनेर भयां . सबन कैं बतूण भै म्यार माम् लै रीन म्यार बुब भिन्ज्यू ( बुवा फूफाजी ) लै रीन . एकाद दिन कपडनक जतन ले करीनेर भै कि कत्ती माट नि लागौ . कती कमेट नि लागि जाओ . फिर द्वि दिन बाद आपुणै जस है जानेर भाय . अगर कपड संयोगवश बिलकुल ठीक फिटिंगक ऐ गे तो फिर उनन कैं घरवाल पैरणै नि दिनेर भाय . उ कपड उण जांणा लिजी भीतेरी बणै दियी जांछी और पौंणनाक झ्वाल बटी सीद्द काठक बगस पुजि जाल . साल छै म्हैंण में जब कति जांणा लिजी निकाल तो तब पत्त लागनेर भै कि अरे गजबजाट हैगो . ईज कूनेर भै अरे कपड छोट हैगेई ... आब ईज कैं को समझाओ कि ईजा कपड तो उतांणै छन .. हम ठुल हैगेया . फिर उ कपड बाखई मेॆ या पडौस में क्वे हमन है नान् बच्चन कें दियी जाल और उनरि ईज ले उ कपडन पर वी प्रक्रिया अपनालि जो हमरि ईज लि करी .. सीद बगस में .. और कबै यस ले हूंछी कि उ कपड सार गौं क नानतिन में घुमि जांछी पर पैरि क्वे सकछी .
अच्छा पौंणनकि ले कैटेगिरी हुनेर भै . अगर बिलकोट साइड बटी पौंण आय तो क्याव लाल . चिडगल बटी आल तो नारींग माल्टा लाल और नगौर बटी पपीत और आम लाल .. कैकै धिनाई ज्यादे तो एक हडपी घ्यू आल कैबेर आश हुनेर भै . बाकि मिसिरी , गाट्ट बगैरह तो भये . सबसे ज्यादा इज्जत तो अल्माड साइड बटी उणी पौंण कि हुनेर भै . किलै कि उ मिठ्ठै लिबेर उनेर भाय . ईज ले मिठ्ठै वाल पौंण कैं क्याव वाल पौंण है ज्यादे पिठ्या लगूनेर भै .
हालांकि सब अलमाड बटी उणी मिठाई लाल तस ले नि भै .. कयेक कमचूस जास कूनेर भाय .. अरे गाडि ईसटेशन में रुकि नहां कौ ... मिठ्ठे खरीदणक ले टैम नि लाग ... एक बार तो तस है ले सकनेर भै पर बार बार तस करणी पौंण ले हिसाब मेजवान करनेरै भाय ... अरे दुकान में ग्वाल नि मिल ... खाल्ली शकून करनयूं .. ऐल सुपारि कै दांण लिजाओ ...
असल में कूंछा तो नानतिनन कैं पौंण उण है ज्यादे जांण में खुशी हुनेर भै किलै कि जांण बखत नानतिनन एकाद डबल आन चारेक जस मिलनेर भाय और उ जपान में नानतिना क सिजी एकै डबल ले कौन बनेगा करोडपति क एक करोड क ईनाम जस हुनेर भै .
पर यो एक डबल ले खालि ज कि मिलनेर भै . यैक लिजी ले नानतिनन हौट सीट पर बैठण भै . पौण ले आजक जास ज भाय .. जसै नानतिन मुखलै आल तो तुरन्त सत्रह क या उन्नीसक पहाड पुछनेर भाय . उन्नीसक पहाड तो हमर लिजी ऐवरेस्ट जस भै . कयेक पौंण बाबू छैं कै दिनेर भाय शिकायत .. यैक ध्यान नि धरना .. सात में न्हैगो पर यकैं सत्र क पहाड ले नि उन .. अल्लै बटी जड कमजोर है जाली तो अघिल कै कि करौ ... यैस तो आठ पास हुण ले मुश्किल छ .
फिर बाबू क पार गरम है जानेर भै और उ पौंण कै सामणि में हमरि जड मजबूत करण लागि जानेर भाय . हम टिटाट पाडनै भ्यैर भाजनेर भयां .. एकौर कैबेर पौंण उज्याण चाय तो पौंण मन्द मन्द मुस्करानेर भै हम जब तक उ पौंण रौल उ रनकाराक मुखै लै नि जानेर भयां . आफत उ बिचाराक भै जनार एकै कमर भीतर चाख होल . हम तीन दिन तक भितराक क्वाड लुकि जानेर भयां .. क्वे पौंण इदुक शातिर हुनेर भाय कि हमन घात लगैबेर बुलाल और किताब खोलिबेर सस्कृताक रूप ... बालक .. बालको .. बालका याद करौ कौल .. बस हमर हंस पराण परचेत न्है जानेर भै .. पौंणकि लाई मिठ्ठै टुकुड ले तीत लागनेर भै . कबै कबै तो कब जाल यो पौंण है जांछी .. जब क्वे घर क सदस्य पौंण छै कौल कि एकाद दिन और रुक जाओ तो सबसे ठुल दुश्मण वी सदस्य लागनेर भै .
कयेक पौंण जांण बखत ले खून सुखैबेर जाने भाय .. जब चार आन हात में च्यापाल और कौल .. अघिल बखत बीस तक पहाड .. बालक क रूप और रेखागणिताक सूत्र सब याद हुण चैनन .. मी आते ही सुणुन .. तब हम मनै मन पौंण के खाप कुखाप कै दिनेर भयां ... पर डबलनक लालच देखो कि पौंण क अघिल बार उणक ले इन्तजार करनेर भयां .. किलैकि चार आन में द्वि चार फचैक बाबू हातैकि के गलत सौद नि भै ... उसके ले बाबू द्वि चार दिन में सर्विस करते रूनेर भाय .. उ ले फ्री में .. गारन्टी साथ ...
#विनोदपन्त #खन्तोली
मेहमान क लिजी कुमांऊ में पौंण शब्द प्रयोग करी जां . पैली बटी जब संचार क साधन कम छी तब पौंण उणै कि सूचना ले नि मिलछी . आजकल तो पैलिये फोन में बात है जां . पौंण उणक क्वे निश्चित तिथि या सूचना नि मिलणक कारणैलि पौंण कें हिन्दी में अतिथि कूनेर भै . पैलि बटी चिठ्ठी पत्री द्वारा आपुण उणैकि सूचना दियी जानेर भै . कबै कबै पौण ऐबेर न्है जाल वीक ले दस बीस दिन बाद चिठ्ठी मिलनेर भै . कबै कबै तो यस तमाश ले है जांछी कि पौण आय और वापस न्है गे और वीक घर पुजि गेयूं कै चिठ्ठी ले पुजि गे तब मी उणी वाल छ्यूं कैबेरै कि चिठ्ठी पुजनेर भै .
एक बात कि बजहैलि पौंण उणी वालि छ कैबेर एक पूर्वानुमान यसिके ले लगूनेर भै कि घर क आंगण मेॆ अगर कौव बास गे तो मैस कूनेर भाय कि अरे भीतर पन जरा झाड हाड झाडि दिया हां . कौव बासणछी कि अन्ताज क्वे ऐगोय . उ टैम में गरीबी ले भै . कबै कौव बास तो क्वे बिचार कौव कें ढूंग मारिबेर भजूनेर ले भै . कौवा ... यां नि बास . यां आपुणै खांण धो हैरौ . पौंणन कां बटी खउल ..
जब नांज पाणि हुनेर भै फसला क टैम पर एक द्वि कन्टर अनाज अलग धर दियी जांछी बल . उ अनाज पौंणनाक लिजी भै . आपु तो खुद मोट माट अन्न खैबेर दिन काटाल पर मेहमानाक लिजी भल भल बचै राखनेर भै .
तसीके क्वे आखोड , खाज , च्यूड सिरौल वगैरह ले बचैबेर धरि राखनेर भै .
आहा क्या भल लागनेर भै पौंण क उण में . पौंण खालि वीकै नि भै जैक यां आई भै .. पुर बाखई वीक आवभगत करनेर भै . अगर मेजवान क यां धिनाई नि भै तो पास पडौस वाल दूद दै घ्यू पुज्यै दिनेर भाय . पौंण क रंगत ऐ जांछी .
तब आज क जस बखत ज के भै .. कि ना उणी वाल कैं टैम ना घर वालन टैम . पौण आल तो तीन चार दिन जरूर रुकनेर भाय .
पौंण उण पर सबसे ज्यादा खुश नानतिन हुनेर भाय . उनार लिजी टौफी . बिलैमिठ्ठै . बिसकुट उनेर भाय . क्वे खास पौंण जसिके माम या भिन्ज्यू आय तो लत्त कपड ले लूनेर भाय . कपड उनेर भाय अन्ताजैलि .. कबै छ्वाट ऐ जानेर भाय तो कबै कुथव जास फैली . हम तब उसै कुथव जास कपड पैरिबेर ग्वैटन दौड लगै दिनेर भयां . सबन कैं बतूण भै म्यार माम् लै रीन म्यार बुब भिन्ज्यू ( बुवा फूफाजी ) लै रीन . एकाद दिन कपडनक जतन ले करीनेर भै कि कत्ती माट नि लागौ . कती कमेट नि लागि जाओ . फिर द्वि दिन बाद आपुणै जस है जानेर भाय . अगर कपड संयोगवश बिलकुल ठीक फिटिंगक ऐ गे तो फिर उनन कैं घरवाल पैरणै नि दिनेर भाय . उ कपड उण जांणा लिजी भीतेरी बणै दियी जांछी और पौंणनाक झ्वाल बटी सीद्द काठक बगस पुजि जाल . साल छै म्हैंण में जब कति जांणा लिजी निकाल तो तब पत्त लागनेर भै कि अरे गजबजाट हैगो . ईज कूनेर भै अरे कपड छोट हैगेई ... आब ईज कैं को समझाओ कि ईजा कपड तो उतांणै छन .. हम ठुल हैगेया . फिर उ कपड बाखई मेॆ या पडौस में क्वे हमन है नान् बच्चन कें दियी जाल और उनरि ईज ले उ कपडन पर वी प्रक्रिया अपनालि जो हमरि ईज लि करी .. सीद बगस में .. और कबै यस ले हूंछी कि उ कपड सार गौं क नानतिन में घुमि जांछी पर पैरि क्वे सकछी .
अच्छा पौंणनकि ले कैटेगिरी हुनेर भै . अगर बिलकोट साइड बटी पौंण आय तो क्याव लाल . चिडगल बटी आल तो नारींग माल्टा लाल और नगौर बटी पपीत और आम लाल .. कैकै धिनाई ज्यादे तो एक हडपी घ्यू आल कैबेर आश हुनेर भै . बाकि मिसिरी , गाट्ट बगैरह तो भये . सबसे ज्यादा इज्जत तो अल्माड साइड बटी उणी पौंण कि हुनेर भै . किलै कि उ मिठ्ठै लिबेर उनेर भाय . ईज ले मिठ्ठै वाल पौंण कैं क्याव वाल पौंण है ज्यादे पिठ्या लगूनेर भै .
हालांकि सब अलमाड बटी उणी मिठाई लाल तस ले नि भै .. कयेक कमचूस जास कूनेर भाय .. अरे गाडि ईसटेशन में रुकि नहां कौ ... मिठ्ठे खरीदणक ले टैम नि लाग ... एक बार तो तस है ले सकनेर भै पर बार बार तस करणी पौंण ले हिसाब मेजवान करनेरै भाय ... अरे दुकान में ग्वाल नि मिल ... खाल्ली शकून करनयूं .. ऐल सुपारि कै दांण लिजाओ ...
असल में कूंछा तो नानतिनन कैं पौंण उण है ज्यादे जांण में खुशी हुनेर भै किलै कि जांण बखत नानतिनन एकाद डबल आन चारेक जस मिलनेर भाय और उ जपान में नानतिना क सिजी एकै डबल ले कौन बनेगा करोडपति क एक करोड क ईनाम जस हुनेर भै .
पर यो एक डबल ले खालि ज कि मिलनेर भै . यैक लिजी ले नानतिनन हौट सीट पर बैठण भै . पौण ले आजक जास ज भाय .. जसै नानतिन मुखलै आल तो तुरन्त सत्रह क या उन्नीसक पहाड पुछनेर भाय . उन्नीसक पहाड तो हमर लिजी ऐवरेस्ट जस भै . कयेक पौंण बाबू छैं कै दिनेर भाय शिकायत .. यैक ध्यान नि धरना .. सात में न्हैगो पर यकैं सत्र क पहाड ले नि उन .. अल्लै बटी जड कमजोर है जाली तो अघिल कै कि करौ ... यैस तो आठ पास हुण ले मुश्किल छ .
फिर बाबू क पार गरम है जानेर भै और उ पौंण कै सामणि में हमरि जड मजबूत करण लागि जानेर भाय . हम टिटाट पाडनै भ्यैर भाजनेर भयां .. एकौर कैबेर पौंण उज्याण चाय तो पौंण मन्द मन्द मुस्करानेर भै हम जब तक उ पौंण रौल उ रनकाराक मुखै लै नि जानेर भयां . आफत उ बिचाराक भै जनार एकै कमर भीतर चाख होल . हम तीन दिन तक भितराक क्वाड लुकि जानेर भयां .. क्वे पौंण इदुक शातिर हुनेर भाय कि हमन घात लगैबेर बुलाल और किताब खोलिबेर सस्कृताक रूप ... बालक .. बालको .. बालका याद करौ कौल .. बस हमर हंस पराण परचेत न्है जानेर भै .. पौंणकि लाई मिठ्ठै टुकुड ले तीत लागनेर भै . कबै कबै तो कब जाल यो पौंण है जांछी .. जब क्वे घर क सदस्य पौंण छै कौल कि एकाद दिन और रुक जाओ तो सबसे ठुल दुश्मण वी सदस्य लागनेर भै .
कयेक पौंण जांण बखत ले खून सुखैबेर जाने भाय .. जब चार आन हात में च्यापाल और कौल .. अघिल बखत बीस तक पहाड .. बालक क रूप और रेखागणिताक सूत्र सब याद हुण चैनन .. मी आते ही सुणुन .. तब हम मनै मन पौंण के खाप कुखाप कै दिनेर भयां ... पर डबलनक लालच देखो कि पौंण क अघिल बार उणक ले इन्तजार करनेर भयां .. किलैकि चार आन में द्वि चार फचैक बाबू हातैकि के गलत सौद नि भै ... उसके ले बाबू द्वि चार दिन में सर्विस करते रूनेर भाय .. उ ले फ्री में .. गारन्टी साथ ...
#विनोदपन्त #खन्तोली
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