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Showing posts from May, 2020

मेरि सरकार

घरवालिक मूख आज रत्तिब्याण बटी चूखढोई जस हई भै . नांण ध्वैण ले करछै नि कर जि बज्या हुन्योल . के ले पूछणकि कोशिश करी तो कालिनाग कि जै चारि फुंकार मारनेर भै . रिस्याउन काम कम करणैई भानकुन कैं ज्यादे असैटण लागि भै . भीतर पन भानकुननैकि खडम्म भडम्म यसि सुणि रई भै मानो हमर घर अल्माड टमट्यूडा मौहल्ला में हुन्योल .  नानतिन के पुछला तो मैक्यूण लागि भै और मीलि जरा ले भीतरपन के हरकत करि तो बुकूणा लिजी उनेर भै . मतलब भीतरपन क वातावरण कश्मीर कि हालत जस हई भै कां बटी गोलि चलि जालि के अन्ताज नै . आदू दिन तो जसिके तसिके काट हाल पर दोपहर तक हालत बेकाबू हैगे . मैलि सोच कि कुछ सरकारैकि चारि कूटनीतिक कार्यवाही करि जाओ . नानतिन ले म्यार मुख चाई भाय . बीच बीच में हस्तक्षेप कि मांग करण  लागि भाय . मी सरकारै कि चारि लाचार भयूं , मैलि नानतिनन कैं जल्दी समस्या सुलझूणक आश्वासन देय और एक सर्वदलीय बैठक बुलूणकि सोचि . बीचाक कमर में हम सब लोग बैठ गेया . मेरि घरवालि , मेरि ईज , मेर बाबू , मेर च्योल और चेलि बैठ गे . बैठककि कार्यवाही शुरू हैगे . मैलि बाबू कैं बैठककि अध्यक्षता लिजी  आमन्त्रित कर पर बा...

पहाडी गणना

पहाड़ में समय की गणना बड़े दिलचस्प तरीके से होती है - १- अल्लै ऐ जूल - मतलब आदमी आधे पोने घन्टे बाद ही आऐगा . २- झिट घड़ि में ऐ जूल - यहां भी आदमी एक दो घन्टे के लिए गया . ३- बस उण जाण छ - आदमी कम से कम तीन घन्टे के लिए गया समझो . ४- एक मिनट में ऐ जूल - ये एक मिनट की अवधि आधे घन्टे की होती है . ५-एक सैकेन्ड में ऊं हां तु बैठ - मतलब दस मिनट तक इन्तजार करो . ६- घन्टेक में ऐ जूल - मतलब तीन चार घन्टे कम से कम . ७- पोरू या परसों - ये भूतकाल का आठ दस दिन से लेकर दस पन्द्रह साल का समय हो सकता है (उदाहरण - बताओ यार तैक ब्या पोरु हई भै . मेकैं भलीके याद छ . आज तैक च्योल दस में पुजि गो बल और चेलि बेउण हैलै बल ) ८- तत्ति कैं डाना परून लै - मतलब पूरे दिन भर का रास्ता . ९- पार सामैणि में देखि रौ - मतलब तीन चार घन्टे का रास्ता . इसी प्रकार मापने के लिए भी एक छिट दूध ( कम से कम आधा गिलास ) एक तुड़ुकि ( लगभग एक गिलास ) द्वि गुद चावलाक ( एक दो पाव चावल ) मूठेक चावल ( लगभग आधा किलो ) ये मात्राऐ देने वाले की नीयत और दरियादिली पर बढ भी जाती हैं .

नारद भेंट

कुमाउनी मासिक पत्रिका पहरू मे प्रकाशित ब्यंग - नारद भेंट - रत्ति ब्याण झुकमुक्कै पेट में गुड़गुड़ाट जस चितूण लाग्यू तो मैल टीना क डाब में जरा मनतात जस पाणि भरिबेर कान में जन्यो लपेटिबेर गध्यार उज्याण जाणौक बिचार कर . पर जसै बाट लाग्यू तो पेट भितर छां फानणैकि जैसि आवाज उण भैगै . मैल सोचि गध्यार जाण तक तो मेर पेट बटी छ्वा फुटि जाल .. लिहाजा मैल सोच कि फटाफट पार बाखैई हरकु दड़ा क बाड़ै में बैठ जां . ऐल को देखड़ौ . जसै ग्वैटून बाट लाग्यू तो एक बुड़ हाथ में घिघारू जांठ लिबेर मैलिकै उण लागि भै . म्यार हाथ खुट अरड़ी गे . कल्जून लै ह्यांक्क जस हैगै .. मैल सोची कि इज कूंछी रत्तै ब्याणाक टैम पर ग्वैटून लै छौव ले देखी कैबेर . मैल कौ आज तो सरसूंत्तै देखि गो .. मेरि पेटैकि गुड़गुड़ जां हराणि हुनेलि .. गौव सुकि गे .अलबलाट में हाथ बटी डाबक पाणि क द्वि घुटुक मारणै तै बटी रछ्यू .. तब तक उ बुड़ैलि आवाज दी .. को छै नाती तु और कां जाड़ौंछै यो अन्यार पट्ट .. मैल परसुदियां जस उल्ट बुड़ छैं पुछ दी .. तुम को छा ? बुड़ कूण लाग मी नारद छ्यू .. स्वर्ग लोक बटी बिहार चुनाव क कवरेज करणा लिजी ऐ...

दिवाली की खुमारी

हरदौल वाणी में प्रकाशित मेरी रचना - आभार ललित राठौर जी एवं आदरणीय देवीप्रसाद गुप्ता जी का १- दीपावली पर आज कलुवा खुश है . त्यौहार पर खूब मेहनत मजदूरी के बाद आज सेठजी ने आधा किलो मिठाई और दो सौ रुपये का इनाम दिया है . मिठाई नकली मावे की आ रही है बल इसलिए सेठजी ने कलुवा को पकड़ा दी . कोई गिला नहीं है कलुवा है . मिठाई बच्चे खा लेंगे . गरीब के बच्चों को नकली असली सब हजम हो जाती है . दो सौ रुपये से अपने लिए कलवा एक देसी की बोतल बन्डल माचिस ले आएगा . त्यौहार ठहरा . खुशी से मनना हुवा . ठीक ही ठहरा बल . २- सरकारी अधिकारी के घर गिफ्ट आयटम का ढेर लगा है . हर गिफ्ट लाने वाले से कह रहे हैं इसकी क्या जरूरत थी . पर मन ही मन कह रहे हैं साला क्या घटिया चीज लाया है . अब कोई काम फंसने दे मेरे नीचे . इन सब के बीच साहब का नौकर ललचाई आंखों से रंग बिरंगे गिफ्ट पैकेट देख रहा है . किसी के लिए कूड़ा किसी के लिए खट्टे अंगुर ठहरे . अब साहब अपने गिफ्ट को नौकर को कैसे दे दें ? छोटे आदमी को ज्यादा मुह लगाना भी ठीक नहीं ठैरा . ३- लाला अनोखेलाल की दुकानदारी अच्छी हो गई . बीबी के लिए हार ...

नौला

गर्मियों में पहाड़ में पानी की कमी हो जाती है . मैने सोचा एक नौला बनवा दिया जाय हल्द्वानी अल्मोड़ा के बीच में कहीं पर . जब ठेकेदार से बात की तो खरचा काफी बताया . मैने सोचा क्यों न चन्दा कर लिया जाय ? अब अपनी पहचान तो साहित्यकारों कवियों से ही है . सोचा चलो इसी बिरादरी से लेते हैं चन्दा . मैने कवियों की लिस्ट बनाई और पहुंच गया एक एक के घर .  वहां जाकर कवि मित्रों से जो सहयोग मिला वो सुनाता हूं उन्ही की जुबानी -- राजेन्द्र पन्त ' राजन ' - नमन है बन्दन है अभिनन्दन है इस नेक काम में नौले बनने चाहिये हर कस्बे हर ग्राम में .. पर बहुवों से कहना सस्कार दिखाना . पानी भरने हमेशा घूंघट में ही आना .. नौले के लिए चन्दा तो मैं नहीं दूंगा . मैं तो नौले पर कविता लिखूंगा . कविता के माध्यम से कमाल कर दूंगा . कविताऐ लिख लिख कर ही नौला भर दूंगा . रोली दूंगा तिलक दूंगा चन्दन दूंगा इस काम को . नमन है बन्दन है अभिनन्दन है इस नेक काम को . ( मेरी बोहनी तो खराब हो चुकी थी . फिर भी भगवान का नाम लेकर आगे बढा .  बारी थी ललित राठौर शौर्य जी की . सोचा युवा हैं ओजस्वी हैं जरा ज्यादा चन्दा मिलेग...

बड दिन

रत्तिब्याणक टैम भै . बिस्तर में पड़ी भयूं . भला भाल स्वैण उण लागि भै . तात लागि भै लिहाफ भितर . तब तक घरवाईक आवाज पड़न बैठ गे कान न में . उठो हो . उठो . सुड़नौछा . उठो . मैलि सुड़ियैकि नि सुणी करि दी . घनघोर नींद आइयाक नखार लगै दी . घरवाई ले कम नि भै . वीलि मेर हाथ खींचबेर लझोड़न शुरू कर दी . मैल को - कि करनैछी तस . तमीज कां गे तेरि . बैग छ्यूं त्योर . प्यारैलि नि उठै सकनी . उठो जानूं उठो डार्लिंग कैबेर उठूनी . समयाक सांथ चली कर . देख धें दुन्नि कां पुजि गे . घरवाई - होय सब देखि रयूं मी दुन्नि कां पुजि गे . सारि दुन्नि नैध्वे बेर पुज पाठ करि बेर बैठ गे . तुमैरि चारि लिफाफ भीतर पाद नि मारड़य दुन्नि . उठो फटाफट नाण ध्वैण करो . मैल बिस्तर उठूण छ . क्वे भीतर आलौ कि कौल ? मैलि कौ - त्यार मुख बटी भलि बात कबै नि आलि . और यदुक ठंड में नाण क नाम झन लिये . ठंडैलि जुकाम लागि गे या बीमार पड़ि गेयूं तो को रौल जिम्मेदार . मैसैलि आपुण जतन आपुण हाथैलि करण चें . घरवाई - जि बजर पाड़छा पाड़ो . नाण नि लाग रया तो कम से कम तौ मूखक टाल तो खुकल लिओ . त्यार बारक दिन छ . और तौ चाहा धरि र...

दाप चुनाव घोषणा पत्र २

व्यंग -  उत्तराखंड चुनावों के लिए हमारी ' दाप ' पार्टी का चुनाव घोषणा पत्र - १- पहाड़ों में पानी की समस्या से निबटने के लिए जहां जहां नल हैं सब नलों में बूजा लगा दिया जाएगा . ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी . २- हर जिले में बन्दर प्रजनन केन्द्र स्थापित किये जाऐगे . ताकि बन्दरों की जनसंख्या और बढ जाय . बन्दर रही सही फसल फटाफट उजाड़ दें . जो थोड़ी बहुत लोग खेती कर रहे हैं वो भी पलायन कर लें . ३- घुच्ची खेलने वाले घुच्चारियों और दहल पकड़ खेलने वाले जुवारियों के लिए ' घुच्चारी जुवारी पेन्शन योजना ' शुरू की जाऐगी . ४- खेलों को प्रोत्साहन देने के लिए अन्ठी ( कन्चा गोली ) प्रतियोगिता आजोजित की जाएगी . ५-खेती और बागवानी के विकास के लिए बकौल की खेती के लिए उन्नत किस्म के बकौल के बीज किसानों को मुहैय्या कराये जाऐगे . खिन के पेड़ लगाये जाऐगे . ६- गर्जिगान को राज्य फल तथा मोतिया को राज्य पुष्प घोषित किया जाऐगा . ७- राज्य में गरीब लोगों के लिए केन्द्र सरकार के सहयोग से ' ठन ठन गोपाल ' जन धन खाता खोला जाऐगा . ७- राशन की दुकानों में गेहूं का भूसा यानि ...

हरदा सौकार

अचानक उत्तरांखंडाक सौकार सैप (हरदा ) मिल गे . मूख में चूख जस ढोली रई भै . द्वि तीन दिन बटी बाल ने कुटरी नि भै नाण ध्वैणैकि को कूछी . घर जाणा लिजी सामानैकि पैकिंग चली भै . सौकार्याणी और च्योल हल्द मर्च दाल लूण अलग अलग डाबन में सैट करण लागि भै . चार पांचेक कपड़ नाक फांच पुन्तुर हई भै . एक टैंक में पासबुक जमीन नाक कागजात ढेपु टांक धरि बेर ताल लगाई भ्यो . मैल कौ - हैगेछै तैयारी ठाकुर सैप वापस जाड़ैकि ? सौकार - कि करीं हो गुरू जाणै भ्यो . तुम लोगनैलि कां कै नि धर . मैं - घर जैबेर कि बिचार छ ? कि करला ? सौकार - कि करूं .. बिरोधी न कैं मैक्यूल रत्तै ब्याल और दोफरी मैं कती बोटा जाड़ बैठ बेर दहल पकड़ खेलून . मैं - पैं खर्च पाणी ? सौकार - नै नै .. उ .... रेत . बजरी . खनन . शराब जमीन जायजाद .... म .... म ........म...... मेर मतलब डबल है जाल .. मैं गरीब पहाड़ि आदिम भयूं .. दर गुजर है जाली . मेकैं डबल कि चैनी .. मैं - अच्छा अच्छा .. यो बताओ और कि की प्रोग्राम छन भविष्याक ? सौकार - गुरू म्यार द्याप्त बिगड़ी रईन . पैली जैबेर जागर लगूल मैं - जागर तो तुमैलि पैलि ले लगाई बल . खैर . आब सरकारी...

कटप्पा लि बाहुबली कैं क्यै मारौ

हरदौलवाणी में प्रकाशित मेरा व्यंग . रचना को पत्रिका में स्थान देने के लिए   आदरणीय Devi Prasad Gupta जी एवं ललित शौर्य ( साहित्यिक सम्पादक ) जी का आभार . . . भगवान बिष्णु श्रीरसागर में शेषसैय्या में विराजमान हैरेई . माता लक्ष्मी उनार खुटाणी बैठि रै . अचानक पृथ्वीलोक में हाकाहाक सुणिबेर प्रभु माता लक्ष्मी छैं कूण लागि रयी - कमला .. ओ कमला .. लक्ष्मी - कि कूण लागि रौछा स्वामी ? प्रभू - जरा यां आ और बात सुण .. लक्ष्मी - होय कओ कि कूण लागि रौछा ? प्रभू - तसिके खुटाणि किलै बैठ रछी . यां आ म्यार बराबर में बैठ . देख धैं जमान् कां पुजि गो . आब स्यैणी बैग बराबर छन . तू किलै खुटाणि बैठछी . मेकै ठीक नि लागन . मैं ले पुरुष और नारी क बराबरी क पक्षधर छ्यू . लक्ष्मी - तस के बात नहांति प्रभू . यां बटी समुद्रक सीन बड भल देखी और तुमार दगाड बैठ बेर आजकल गरमी लागड लागैं तुमर तौ शेषनाग जब फुंकार मारौं तो गरम हाव चलण बैठ जां .. उसीकै जेठा म्हैणा क घाम भै आजकल . प्रभु - अच्छा अच्छा . जरा नारद कैं फोन लगा धैं . धरती बटी नारायण नारायण करण लागि रौ . यां नि आय बहुत दिन बटी . के नयीं समाचार ल...

टैक्स

हमैरि दाप पार्टी क बेलि ब्याल पाराइजर में ढुल डांसी ढुंग में एक मीटिग भै . जो मीटिंग में हमार पहाड़ में लागणी वाल जी एस टी पर चर्चा भै . जमें  मेर द्वारा भोंकर बजै बेर अधरात में जी एस टी लागू करी गो . मेर भोंकरकि आवाज सुणबेर पाल गध्याराक द्वि मुनि कटी छौल आपुण जाग छोडबेर भाजि पडीं . जी एस टी कि दर निम्न प्रकार धरी गे - १-अत्तर गांज टैक्स फ्री रौल .  भरी बीडि पर ५% टैक्स होल भांगाक गुद (साग में डालणी )पर २८% जी एस टी होल . २- जमाई क खाज टैक्स फ्री रौल और भुटी सिरौल च्यूड उमि पर १८% टैक्स होल . ३- चीन डालि चहा टैक्स फ्री रौल . कटकि चहा पर २८% टैक्स होल . ४- जो शराब ठ्याक बटी खरीदला वी पर ५% टैक्स होल . उत्तराखंड सरकार क महत्वाकाक्षी घर घर शराब पहुचाओ योजना क मोबाईल वैन पर शराब टैक्स फ्री रौल . ५- सौरास में जंवाई कें लागणी पिठ्या पर २८% जी एस टी होल .. जो कि आपुणी स्यैणि कैं दिण पडौल . मैत बटी चेलिन कैं लागणी पिठ्या पर क्वे टैक्स नि लागल . ६- बिरती बामण लोगन कैं आब २८% जी एस टी दक्षिणा पर दिण पडौल . बैकर चाओ पिस्यूं और के फल वगैरह जो जजमानाक यां बटी मिलाल उ टैक्स फ्री रौल...

टमाटर प्याज

सब्जी खरीदने बाजार गया . बल्कि यूं कहिये भेजा गया . दरअसल मैं पत्नी को शाम की सब्जी के लिए सौ रुपये दिया करता था . पत्नी के लाख समझाने पर भी ये मानने को तैयार नहीं था कि आजकल सौ रुपये में सब्जी नहीं आती . खैर श्रीमती जी ने मेरे हाथ में बहत्तर रुपये दिये और सब्जी की लिस्ट पकडाते हुए कहा - जाओ सौ रुपये की सब्जी ले आओ . मैं अखबार तो पढता ही हूं तो ये समझ चुका था कि सौ रुपये में जी एस टी कट चुका है . बाजार गया तो देखा टमाटर को सब्जी के दुकानदारों ने अपने गल्ले के बिलकुल पास रखा था  आम आदमी के पहुंच से दूर . मैने सब्जी वाले से विरोध किया - भाई ये टमाटर इतनी दूर क्यों रखे हैं ? सब्जीवाला दार्शनिक अन्दाज में बोला - हे फटीचर मेरा मतलब कविवर टमाटर का दूर रखा जाना इस बात का द्योतक है कि टमाटर आम आदमी की पहुंच से दूर जा चुका है . हर चीज के दिन फिरते हैं . जिन टमाटरों को तुम लोग पिलपिलाकर चैक किया करते थे वो आज तुम्हें और तुमारी जेब को चैक कर रहे हैं . तुम्हें और तुम्हारी औकात को पिलपिला रहे हैं . तुमने टमाटर को कभी गौर से देखा है ? उसके सिर पर ताज सजा होता है . वो एक प्रकार से सब्जियों का...

पहाडी व्यन्जन

अमडकी खुट (कुमाऊनी भाषा साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति द्वारा पुरस्कृत व्यंग ) . ठुल मैंसनाक देखा देखी एक दिन मैलि ले मौरनिंग वौक करणैकि सोचि . जसै ग्वैटन पुज्यूं खुट रडी पडौ और खुट अमडकी गे . भौते पीड हैगे . बडी मुश्किलैलि लच्यूं लच्यूं करिबेर घर  आयूं तो बाबू लि पुछ - किलै रे तौ डुन बल्दैकि चारि किलै हिटण लागि रौछै ? मैलि कौ ग्वैटन खुट अमडकी गो . मौरनिंग वौक करण जै रौ छ्यूं . बाबू गरम हैगे . कूण लाग - ढांट जस हैगो छै . मति त्वेकैं आजि ले नि ऐ . रत्तै रत्तै नै ध्वे बेर पूज पाठ करनैं बामणक च्यल छिए . भितर पन शांक घांट बजूनैं . डोईण बाट लागै . ढूंग में रै जाल तौ वौक .. खुट टोडिबेर लि आ . नानतिनन छैं बोरी मगैबेर आंगण में बैठ्यूं . तब तक नौव बची पाणि लिबेर घरवाई ले पुजि गे . मेकैं बैठि देख बेर कूण लागि - तसिके आंगण में किलै खिति रौछा डनाकि जास रत्ति रत्ति ब्याण .. जरा तौ आंगण में झाडै झाडि दिना . सब काम मैलि करण भै यो कुडी क . मैलि कौ - यार खुट अमडकी गो . चा धैं ओसै गो . हलकाईण ले नै रय .  स्यैणि लापरवाहि ल कूण लागि - ऐल आफि रूं तौ खुट . फटाफट जैबेर चक्की में पिस्...

अमडकी खुट

अमडकी खुट (कुमाऊनी भाषा साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति द्वारा पुरस्कृत व्यंग ) . ठुल मैंसनाक देखा देखी एक दिन मैलि ले मौरनिंग वौक करणैकि सोचि . जसै ग्वैटन पुज्यूं खुट रडी पडौ और खुट अमडकी गे . भौते पीड हैगे . बडी मुश्किलैलि लच्यूं लच्यूं करिबेर घर  आयूं तो बाबू लि पुछ - किलै रे तौ डुन बल्दैकि चारि किलै हिटण लागि रौछै ? मैलि कौ ग्वैटन खुट अमडकी गो . मौरनिंग वौक करण जै रौ छ्यूं . बाबू गरम हैगे . कूण लाग - ढांट जस हैगो छै . मति त्वेकैं आजि ले नि ऐ . रत्तै रत्तै नै ध्वे बेर पूज पाठ करनैं बामणक च्यल छिए . भितर पन शांक घांट बजूनैं . डोईण बाट लागै . ढूंग में रै जाल तौ वौक .. खुट टोडिबेर लि आ . नानतिनन छैं बोरी मगैबेर आंगण में बैठ्यूं . तब तक नौव बची पाणि लिबेर घरवाई ले पुजि गे . मेकैं बैठि देख बेर कूण लागि - तसिके आंगण में किलै खिति रौछा डनाकि जास रत्ति रत्ति ब्याण .. जरा तौ आंगण में झाडै झाडि दिना . सब काम मैलि करण भै यो कुडी क . मैलि कौ - यार खुट अमडकी गो . चा धैं ओसै गो . हलकाईण ले नै रय .  स्यैणि लापरवाहि ल कूण लागि - ऐल आफि रूं तौ खुट . फटाफट जैबेर चक्की में पिस्...

राधे माँ

दिन भर काम करिबेर वापस आयूं तो घरवालि लि आलू मुलक थेच्चू छां हाली साग पकाई भै . वीक दगाड रवाट भाय चार क्वाश हरीं खुश्याणी ले मेरि थालि में धरि दी . मैलि लौद फुटण तक खाय . आब नींन लागण बैठ गे . बिस्तर में लफाई जस गेयूं . थ्वाड देर में देखूं तो एक लाल  चटक कपड पैरी एक स्यैणी मेर कमर में ऐ गे . बाल खुली भाय . होठ लाल लाल मूख गोर फनार जस . अचानक मूख लै आयी तो मूख बटी ओईज्या कैबेर किकाट जस निकल गे . डरैलि हाथ खुट कामि ग्याय . गल सुकि गोय .. मैलि घरवाई कैं धात लगूण चाय तो गल बुजी जस गोय .पसीणांक नाव् जास छुटि ग्याय .मैलि डरते डरते पूछ ..को छै तु .. यां कि करनैछी ... मन मनै म्यार जय हनुमान ग्यान गुण सागर क पाठ ले चलि भै . उ स्यैणि कूण लागि - किलै मेकैं नि पछ्याण मैं राधे मां छ्यूं .. मैलि कौय - मेर रूम में किलै आछी .. अगर मेरि घरवाईल देख हाल त्वेकैं तो  तेर झाकौर उचेडी बेर त्यार ख्वार आग हालि देलि और मेर ले निरूण कर देलि घर में .. तसीके देलि द्वारन किलै घूमण लागि रैछी ..  जा यां बटी . राधे मां - अरे त्वेकैं दर्शन दिणा लिजी ऐ रयूं . मैं - बज्जर पड जाल तेर दर्शन .. और जरा धी...

पुरुष दिवस

पंगे सोच समझकर लेना चाहिये ... मरवा दिया ये फेसबुक ने . सुबह उठा तो पता लगा कि आज विश्व पुरुष दिवस है . बस मेरे अन्दर का पुरुषत्व जाग गया . जाग ही नहीं गया बल्कि हिलोरे मारने लग गया . नहीं आज नहीं .. कतई झाडू पोछा नहीं लगाउगा . कोई घर का काम नहीं करूंगा .. ये कोई छोटा मोटा दिवस नहीं .. विश्वस्तर का दिन है पुरुषों के लिए . मैने श्रीमती जी को साफ मना कर दिया कि आज हमारा दिवस है . तुम्हारा हुक्म नहीं चलेगा . आज मैं कोई काम नहीं करूंगा . पत्नी मुस्कराई .. हमारा दिल कम्पित हो गया . जब भी वो मुस्कराती हैं यही होता है . ये दामपत्य विग्यान की एक सामान्य  प्रक्रिया है. पत्नी ने कहा - हे पतिदेव ! आपको एवं आपके समस्त लफन्डर मित्रों सहित सभी पुरुष समाज को विश्व पुरुष दिवस की हार्दिक शुभकामनाऐं . आज मैं आपसे कोई भी महिलाओं वाले काम नहीं कराउगी .. आप पुरुष हो तो पुरुषों वाले काम करो ... ये लो चक्की जाकर गेहूं पिसवा दो . छत पर जगह जगह पलस्तर उखडा है उसे सीमेन्ट लाकर सही करो . ये बिस्तर घूप में सुखा दो . सभी गमलों से झाड झंकाड उखाड कर पानी दो . कुत्ते को टहलाकर लाओ . वगैरह वगैरह .. श्रीमान पत...

नातक

एक तो मेरि उसीके अग्रेजी क फीस माफ छू कूंछा . कति लै अग्रेजी लेखी भै तो पढन में पसीणाक नाव छुटि जानी . Know कैं नो पढन छै या क्नो मेकैं हाईस्कूल तक पत्त नै लाग . उसके ले अग्रेजी क उच्चारण में बबालै हूं . एक पिक्चर में धरमेन्द्र ले कूंछी कि To टू भय तो Go गू किलै नी भय .. खैर , म्यार दगाड ताजातरीन गजबजाट फेसबुक में भो . आजकल लोगबाग कुमाउनी ले रोमन में लेखनी . कबै कबै पढन में अर्थ क अनर्थ है जां . कमल लेखि राखौ या कमाल , अन्ताज लगूण धो है जां . मेर एक मित्र क मैसेज आ मेरि पास - Hamar ghar me natak hai ro . आब में साहित्य प्रेमी आदिम भयूं . मैलि रिप्लाई करौ - बहुत बढिया श्रीमान ! नाटक तो साहित्यैकि एक उत्तम विधा छ . भल कार्य करनौछा . जरा विस्तारैलि बताओ कि नाटक कैक लेखी छ ? को को लोग अभिनय करनयी .. कतु मंचन है गयी .. विषयवस्तु कि छ नाटकैकि . है सकलो तो मेरि पास रिकार्डिग भेजिया वीडियो बणैबेर . (मेर जवाबैलि आदिम गजबजी पडौ शैद . लगभग आदू घण्ट बाद वीक फिर रिप्लाई आ ) पन्त ज्यू भली कै पढो . नाटक नि हैरय .. हमार घर में 'नातक 'हैरौ . मेर च्यालक च्योल हैरो . मेर नाति हैरौ . मैलि म...

कुत्ता

किसी कवि ने कहा था कि मनुष्य होना भाग्य है और कवि होना सौभाग्य . पर मुझे लगता है आज की परिस्थितियों में कहावत कुछ यूं होनी चाहिये - मनुष्य होना भाग्य है और कुत्ता होना सौभाग्य . . आज हालत ये हो गयी है कि आप कुत्ते को कुत्ता नहीं कह सकते . कोई न कोई कुत्ताधिकार आयोग वाला आप पर केस कर सकता है . बुद्धिजीवी आप के खिलाफ हो जाएगे . आपके बयान के आधार पर आप पर केस हो सकता है . कोई श्वान सेना आपके बिरोध में सडक और रेल बाधित कर सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचा सकती है . दो चार दिन टी वी पर आपके बयान को लेकर कुत्तावादी और आदमीवादी लोग गुत्थमगुत्थी करते नजर आ सकते हैं . हो सकता है संसद का कामकाज प्रभावित हो जाय .कुछ लोग कुत्ते को हमारी सस्कृति से जोडते नजर आएगे . कुत्ता भैरो बाबा का वाहन है . हम सडक पर हो रहे कुत्तों के अत्याचार पर खामोश नहीं रहेंगे . कुछ कुत्ता रक्षक दल भी सक्रिय हो जाएगे . सोशल मीडिया पर कुत्तों पर अत्याचार के फोटो वायरल होने लगेगे . वालीवुड दो खेमो में बट जाएगा . हालांकि कुत्ते को कुत्ता अनादिकाल से बोला जाता है . पर आज स्थितियां भिन्न हैं . आप आदमी को कुत्ता कह सकते हैं पर क...

पहाडि होटल

अगर पहाडन में नियम लागू हुन कि सब होटलनाक नाम पहाडि में धरण पडाल तो .. कुछ प्रमुख होटलनाक नाम यास प्रकाराक हुन - १- होटल गार्डन - होटल झुतांणि २- होटल रिवेरा - होटल गध्यार . ३- होटल माउन्टेन - होटल डान् कान् ४- होटल लेक साइड - होटल चुपटौव उज्याणि ५- हिमालय व्यू होटल - हिमालय उज्याणि होटल ६- होटल गोल्डन - होटल सुन् ७- होटल पैराडाईज - होटल सरग ८- होटल महारानी - होटल गुस्याणी ९- क्लासिक होटल - भौते भल होटल १०- होटल मूनलाईट - होटल जुन्यालि रात ११- होटल पाइन - साल् होटल १२- होटल न्यू लाइट - छिलुक होटल १३- होटल सिटी हार्ट - होटल कल्ज १४- पैराडाइज होटल - बपौत्ति होटल १५- होटल राम ,, कृष्ण ,, शंकर वगैरह - गोल्ज्यू होटल .. नरसिंह होटल ..

मुस

पांच सात दिन बटी एक मुसैलि बड तौयै राख्यू कूंछा . भीतर पन कपड ज्वात चप्पल जी ले छी सब कुतर गो . सागा लिजी आलू क दांण लै रैछ्यूं पैतीस रुपै किलो .. जो क्वाड लिगे हुन्योल . और तो और भीपन बिछूंणी बोरी दरि ले नि छोडि . आब गरीब लोगनाक पास तदुकै सम्पत्ति हुनेर भै . नतर मैलि सुणि राखौ कि मुस सुन क जेवर ले लिजाने रूं बल आपुण दार (बिल ) भितर . कैके यां बटी चुदानि लायूं . पर मुस नैं फंस . एकैलि कौ स्यो टुकुड लगा कैबेर . आब एक बीस रुपैं किलो स्यो आपु खाणा लिजी दुर्लभ हैरीन मुसा लिजी कां बटी लूंछ्यूं . मुस ले आजकला क यदुक हेशियार हैगीन कि खालि सुखी रोटक टुकुड लगाला तो फंसनै नहांतिन . घ्यू लगाय रोट लै और चुदानि में लगाय तो तबै फँसों बल . आब ध्यू तो स्वैण देखण हैगो . मैलि सरकार वालि चाल चली  कि मुस कैं नकली घ्यू देखै बेर फंसाई जाओ और रवाट लै रिफाइन्ड लगा   पर मुस ले बाईस गुरू क  पढाई हुन भो . म्यार घपटन में नि आय . हालांकि मेकें  यो बातक पक्क भरोस छी कि म्यार भितर मुस ज्यादे दिन तक नि बच . तकैं भाजण पडौल या भूकैलि मर जाल . किलै कि म्यार महंगाई लि यास भांट टोडि राखन कि बतूं...

घुघुति त्यार

जब हम नानतिन छियां तब घुघुतियक बड उत्साह हुनेर भै . दिन भरि दगडू नाक दगाड योजना बणनेर भै कि मैं इक्यावन घुघुतनैकि माल बणून मैं एक सौ एक दांणनैकि माल् बणूल . दिन में बटी नारींगक दांण तोडिबेर धरी जानेर भै . स्यूड धाग आफि तैयार करि लिनेर भयां . रात में ईज जब घुघूत बणालि तो हम ले चूलपन टांजि जानेर भयां .. ईज कदुक कौलि कि उथकै बैठ जा .. तेलक छिट पडाल .. जाग कम हैरै .. पर हम किलै सुणुल . फिर हम भै बैणीयन में कम्पटीशन हुनेर भै .. मेरि माल नानि हैगे .. तैकि  माल् में ज्यादे छन .. मेर नारींग नान् हैगो .. तौ दिदीक वालि माल् मेरि भै . रत्ति ब्याण फटाफट उठि बेर उदुक काले काले मुखलि नि करनेर भयां जदुक काले -काले घुघुत खांणा लिजी हुनेर भै . एक दूसराक माल् बटी घुघुत लूछण .. चोरण .. या दीन हीन कातर बणबेर मांगण .. एक मेकें दि दे .. फिर मैं ले दयूल .. या आपुण वाल खा .. माल डालिबेर पडौस पन घुमण .. एक अलगै रौनक है रूनेर भै . बीच बीच में ईज कूनेर ले भै .. सब अल्लै झन खाये .. पेट में पीड होलि .पर हम कां सुणनेर भयां एक साल कि बात भै . ईज घुघुत पकूण लागि भै . आब हमार खाप में पाणि उण लागि भै . ईज छैं ...

आलूक थेच्चू

आवश्यकता आविष्कारैकि जननी हूं . जब जब जरूरत पडी लोगबाग आपुण जरूरता क हिसाबैलि आविष्कार करि दिनन . तसै एक आविष्कार छ थेच्चू .. थेच्चू हमर पहाडक आविष्कार छ . हमार यां कतू प्रकाराक थेच्चू बणनन . आलू क थेच्चू . मुलक थेच्चू . मूलक थेच्चुवक प्रयोग सलाद में . झोली में और साग बणूण में हूं . एक थेच्चू किलमौडाक फूल नक ले बणौं . जछैं सांनण ले कूनी . किरमौडाक फूल और पांलगाक बलाड कूटि बेर .. मतलब थेचि बेर सांनण बणाई जां . कबै कबै मी सोचूं कि यो थेचुवक आविषिकार कसी भो हुन्योल   कैलि करि हुन्योल . भली कैबेर काटि बेर जै खान् धें . भला भाल टुकुड बणून . मतलब तरीकैलि खान .. यो कि बात भै सिल लोड में थेचिबेर खाण  तब मैलि सोचो कि हमर पहाड में स्यैणी बहुत कर्मठ हुनी . खेति पाति क सब काम इनारै कन्ध न पर हूंछी . रत्ति ब्याण उठि बेर पाणि लूण . बुड बाडि नानतिनाक लिजी पाणि ततूण . द्याप्त पुजण नानतिन बट्यूण .ठुलतिन बट्यूण  ईसकूल लगूण .  लाकाड लूण . घा पात निराई गुडाई भितर झाड पात झाडन .. मतलब .. सब कामनक ठ्याक स्यैणिनक भै . बहुत ज्यादा काम और समयैकि कमी . तब क्वे स्यैणि लि फटाफट क चक्क...

वैलेन्टाइन वीक

कुबाट

#कुबाट -- जूनियर हाईस्कूल में    कक्षा छ:बटी आठ  तक म्यार दगाड पढणी हरुलि  अचानक फेसबुक में देखी गे कूंछा महराज . पुरांण दिन याद ऐ ग्याय . एकै दवात में डोब हालनेर भयां . मेर होल्डरक  टांक टुट गे तो हरुलि दिनेर भै हरुलिक टांक टुटि गे तो मेरि कलमैलि लेखनेर भै . हरुलिक जी निब कें घोसिबेर मी बणूनेर भयूं लेखणी लायक . हरुलि और मी अलग अलग चटाई में एक दुसराक बराबर में बैठनेर भयां . बिलकुल पडौस में जस .  पुर क्लास में हरुलि एक यसि चेलि भै जैक नांख बटी सिंगाडक तौड नि उनेर भै . भली भलि धीर गम्भीर जस वी भै बाकि चेलि वीकि सामणि में मेकैं छितरु  मितरु जास लागनेर भाय . पढण लेखण में जरा कमजोर भै ढ्वाल पर देखींण चांण कौला तौ काकडक जसि फुल्यूड भै . जब पणित्ज्यू (आजकल मासाब या सर कूनन ) उकैं डन्ड माराल तो सीद म्यार कल्जूल लै लागनेर भै . जब मासाब मेकैं मारला तो हरुलि क मूख निचोडी जानेर भै  मेछै पुछनेर भै खाडहानि - जोरैलि लागछी ?? बस वीक यदुक पुछण में सब पीड हरै जानेर भै . फिर मी बैगक पोथ ले भयूं खाल्ली फौंस मार दिनेर भयूं - नै नै के न हैरय . पर फिरले  वीकै भी...

चुनाव घोषणा पत्र

आगामी चुनावों के मध्यनजर DAP( दमची अतरी पार्टी ) की एक बैठक पारभीडा के झुताणि में आयोजित की गयी . चिलम की धुग्योई के बीच मेरी अध्यक्षता में चुनाव लडने के लिए उम्मीदवारों के चयन और टिकट वितरण पर खोरफूटाफूट मंथन हुवा . बैठक के बाद हमारे चमचे चैनलों को बैठक की रिपोर्टिंग करने को कहा गया . बैठक में उम्मीदवार चयन के लिए कुछ मापदण्ड तय किये गये . इन मापदण्डों पर खरा उतरने वाले उम्मीदवार आवेदन करें . आवेदन पत्र एक सूटकेस में नोट भरकर , किसी की सिफारिस के साथ निम्न पते पर जमा करने होंगे - अखिल भारतीय दाप पार्टी  पाराभीडा झुतांणी  गली नम्बर - ४२० घोडिया रोड नंग मुहल्ला बदमाशनगर . उम्मीदवार के लिए योग्यताए -  १- किसी भी पार्टी के निकाले , लत्याए , जोत्याए , भगाये , दलबदलुओं को प्राथमिकता दी जाएगी . जो अपनी पुरानी पार्टी को लांसण बुका बुका कर मैक्या सकें .(. ऐसे दलबदलू नेताओं के लिए वर्षों से  घुन घोषकर बैठे अपने वफादार  नेताओं को भी भ्योल धुरयाने में हम देर नहीं करेंगे ) २-  गावागाव मैकामैक करने वाले , एक दूसरे के बरमान में ज्वात मारने में सक्षम , बिवादित ब...

सौरी

अग्रेजो ने सौ साल तक हमारे देश में राज किया . हम सोने की चिडियां थे बल . अग्रेजों ने हमारी हालत लुत्ती कुकुर जैसी कर दी .  पर अग्रेज जाते जाते हमें एक पापनाशी गलतीनाशी भूल सुधार  रक्षा कवच थमा कर  चले गये ..  साँरी .. जिसका हमने शास्त्रोक्त विधि से शुद्धिकरण करके सौरी नामक मन्त्र बना दिया . सोचिये अगर अग्रेज ना होते तो सौरी की जगह हमें क्षमा कीजिएगा जैसा भारी भरकम शब्द प्रयोग करना पडता .. कल्पना कीजिए कहीं पर किसी पहलवान टाइप व्यक्ति से हम टकरा गये और  सौरी नामक रक्षा यन्त्र का प्रयोग कर दिया और पहलवान की पहलवानी और क्रोध का कीलन हो गया . वरना क्षमा कीजिएगा गलती से लग गया कहने तक पहलवान जी एक रैपटा हमारे कान के नीचे धर देते .  इस लिहाज से गौर करें तो ये समय भी बचाता है और ठुकाई से भी . हालाकि हमारे यहां गलती  से बचाने के , कई उपाय पहले से मौजूद हैं और हम इनका प्रयोग समय समय पर करते भी रहते हैं . मसलन अगर हमने पाप कर लिए तो हमारा मानना ये है कि गंगा में डुबकी लगा लें और अगले पिछले सब पाप छू मन्तर .  अगर कुछ रह भी गये तो पूजा पाठ जप तप से चले जाए...

घ्यूत्यार

#घ्यूत्यार त्यार बारक दिन भै . पुर मुहल्ल पडौस बटी चोंचेन भुबैन आई भै .. कति बटी लगडनैकि तो कति बटी हल्लू पुरि कि खुशबू उण लागि भै . कति मांसाक बाड और बेडू पूरि कि महक फैलणै .. मी ले हरि का क चौंतार बटी दहल पकड क खेल अतपुर छोडिबेर घर उज्याणि गेयू .. मनै मन पकवान क ध्यान करण में खाप बटी राव टपकण बैठ गे . खापैकि राव कुर्ताक बोंवैलि पोछि बेर आपुण आंगण में पुज्यूं . सैर हई भै महाराज .. पकवानैकि चौंचेनि भुबैनि तो छोडो साग जवणकि बास ले नि आई भै . च्याल छैं पुछ तेरि ईज कां छ ... च्योल मोबाईल में परचेत हई भोय .. वीक टिक टौक क बीडियो चलि भाय ... हा हा हा हा .. खी खी खी खी खु खु खु करण लागि गोय .. मी चाइयै रै गोयूं .. मेके अन्ताजे नि आय कि मेके देख बेर हंसणौछे ... पगलि गोछै .. या के छल - छिद्र तो नै लागि गोय .. मैलि दुबार पुछ - कि भो रे ... वीलि कान बटी लीड निकालि बेर कौय - हां पापा क्या हुवा ... मैलि कौय - बरमान हुवा तेरा .. तसिके पगालनैकि चारि किलै हंसणौछै ... च्योल कूण लाग ... अरे पापा .. आपके समझ नही आएगा ... ये टिक टौक है .... ब्रो .... कैबेर वीलि आपुण हाथाक द्वि आंगू भ्यैर कै निकाल...

चन्द्रयान २

#चन्द्रयान 2 मैलि सोचि कि घरवालि क दगड प्यार व्यार बहुत हैगो . आब उमर ले हैगे आब प्यार मोहब्बत क जाग पर कुछ ग्यान बिग्यानाक क फसक करी जाओ .  लेकिन मेरि बिती एक महान गलती है पडी . जो विषय में जानकारी नि भै उ पर कबै ले फसक नि करण चैनि . आब मी हिन्दी क विद्यार्थी साइंस तो कक्षा आठ तकै पढी भै .  मीलि शुरुआत करी कि देख धें रे हमर भारतैलि कदुक तरक्की करि हाली आज .. आदू रात  में हमर चन्द्रयान चन्द्रमा में उतरल . स्यैणि कूण लागि होय मेकें पत्त छ . मैलि ले अखबार में पढौ . पर एक बात बताओ तौ चन्द्रयान तो धरती बटी भौते पैल्ली बाट लाग गोछी बल . इदुक दिनन बाद किलै पुजणौ . मैलि तौ - दूर छ बल चन्द्रमा भौते . स्यैणि कूण लागि - दै बज्जर हाई तुमरि अकल .. दूर कां बटी छ . हमार पाख् ( छत ) बटी साफ देखी रूं . आब मेरि अकल चकरै गे . मैलि सोचि यो बात तो ठीकै कुणै . पाख बटी तो नजीकै जस चिताई रूं. तदुक टैम किलै लाग हुन्योल . आब स्यैणि कैं के न के तो जवाब दिणै छी . मैलि कौ - यार चन्द्रयान बाट पन कती चहा पाणि पीणा लिजी या खांण खांणा लिजी रुक गे हुन्योल . जसिके हम जब हरिद्वार बटी घर जानू तो जसपु...

चुनावक बाद

चुनावक -उमाव . . दिगौ ... लौडा शिवदत्त कां ग्याय उ दिन .. बेलि तक खुटन में मुनिटोप दिबेर दण्डवत करणी योग्य शिक्षित जुझारू कर्मठ लोग आज भीपनै नै चै दिणाय . बेई तक सबन छैं ईजा , बाबू , आमा , बुबू , दीदी , भुली कैबेर मतूणी आज मुखै नै लगूणाय बल . आहा उ वादा कां गे हुन्याल जो कुणैछी ... बस जितै दिओ .. तुमर गोठक गुबर ले मी निकालि दयूल , तुमर सगड में आग जगूणै तैं छिलुक फाडि दयूल , ह्यूना म्हैण तुमन तैं लाकड क भारि मी आफि लूल , तुमर चेली क ब्या दिन भनपान मी करि द्यूल , तुमन च्याला क ब्या दिन ब्योलि पिटार मी आफि बोकुल ,  होईन में एक एक बोतल पक्क द्यूल , अरे भुला दिवालि न में जु खेलणा लिजी कर्ज मी आफि द्यूल , तुमार नानतिन टट्टी पिशाब करला सीद्द मेकें धात लहाया .. भेल ध्वेणै ड्यूटि मेरि भै , तुमार खेत बटी बानर हकै दयूल ... सासू क ब्वारि दगाड .. देवरे कि भौजि दगाड , ननदैकि भौजि दगाड , वाल बाखई पाल बाखई दगाड .. कबै ले लडै होली बताया . गाई मैक मी आफि करुल .. दगाड में आपुणि स्यैणि ले लूल .. दिगौ .. लौडा शिबदत्त यास वादा करणी आज कां अलोप भै हुन्याल .. जैकें मीलि भोट दे वीकि पत्त नहां .. जनन...

पौंण

#पौंण मेहमान क लिजी कुमांऊ में पौंण शब्द प्रयोग करी जां . पैली बटी जब संचार क साधन कम छी तब पौंण उणै कि सूचना ले नि मिलछी . आजकल तो पैलिये फोन में बात है जां . पौंण उणक क्वे निश्चित तिथि या सूचना नि मिलणक कारणैलि पौंण कें हिन्दी में अतिथि कूनेर भै . पैलि बटी चिठ्ठी पत्री द्वारा आपुण उणैकि सूचना दियी जानेर भै . कबै कबै पौण ऐबेर न्है जाल वीक ले दस बीस दिन बाद चिठ्ठी मिलनेर भै . कबै कबै तो यस तमाश ले है जांछी कि पौण आय और वापस न्है गे और वीक घर पुजि गेयूं कै चिठ्ठी ले पुजि गे तब मी उणी वाल छ्यूं कैबेरै कि चिठ्ठी पुजनेर भै . एक बात कि बजहैलि पौंण उणी वालि छ कैबेर एक पूर्वानुमान यसिके ले लगूनेर भै कि घर क आंगण मेॆ अगर कौव बास गे तो  मैस कूनेर भाय कि अरे भीतर पन जरा झाड हाड झाडि दिया हां . कौव बासणछी कि अन्ताज क्वे ऐगोय . उ टैम में गरीबी ले भै . कबै कौव बास तो क्वे बिचार कौव कें ढूंग मारिबेर भजूनेर ले भै . कौवा ... यां नि बास . यां आपुणै खांण धो हैरौ . पौंणन कां बटी खउल .. जब नांज पाणि हुनेर भै फसला क टैम पर एक द्वि कन्टर अनाज अलग धर दियी जांछी बल . उ अनाज पौंणनाक लिजी भै . आपु तो खु...

साहित्यिक कूडा

ये कविता लिखना लेख लिखना भी गजब ख्वारपीड़ का काम ठहरा हो . लोगों को लगता है ये भी कोई मुश्किल काम है क्या ? कविता लिखना भले ही मुश्किल ना हो पर इसके साइड इफैक्ट बड़े खतरनाक हैं अब कल की ही बात लो बेटे ने कुछ पूछा मैने सहमति दे दी पर मैं कविता में घुसा पड़ा था ..सोचने लगा बेटे ने क्या पूछा होगा ..जब तक याद आया बेटा तब तक मेरे मोबाइल के अंजर पंजर कर चुका था ..मेरी साहित्य साधना का लाभ उठाकर पत्नी जी इस महिने चार साड़ियां खरीदकर अपने मायके भिजवा चुकी हैं हर बार मेरी सहमति लेकर .. हालांकि ये सहमति अर्ध चेतन अवस्था में प्रदान की गयी होती हैं . बच्चों की कापी के पन्ने फाड़ने के जुर्म में अक्सर डांट खाना मेरी नियति बन चुकी है . जब कभी कोइ लाइन याद आती है कागज के टुकड़े पर उतारना मजबूरी है .. डस्टबिन में कागजों के ढेर देखकर सफाई वाले ने मेरे घर से कूड़ा उठाने से साफ मना कर दिया .. पत्नी ने घर में तीन कूड़ेदान रखे हैं जिन पर बकायदा चिट चिपका रखी है - जैविक कूड़ा ... अजैविक कूड़ा ... और साहित्यिक कूड़ा . साहित्यिक कूड़े वाला कूड़ेदान काम पर जाते समय मेरी साइकिल पर टांग दिया जाता है . अब ...

दिखावे की आजादी

सुना था जब बीबी मायके जाती है तो शादी शुदा आदमी को आजादी मिलती है .हालांकि पुराणों में ये भी लिखा है कि जो शादीशुदा है वो आदमी ही कहां . पर यहां आदमी ही लिखा जायेगा . ना जाने कितने कवियों ने इस अल्पकालिक आजादी पर कविताऐ लिखी . लेखकों ने लेख लिखे . साल भर इन्तजार रहता है इस घड़ी का . मैं भी जब बीबी को मायके छोड़कर आया तो मारे खुशी के पागल था . दो चार घण्टे तो आजादी के इस महोत्सव को मनाने के तरीकों पर ही सोचता रहा . अब तो मेरा राज था . आराम से सुबह उठा जायेगा . नहाने का मूड हुवा तो नहाया नही हुवा तो नही नहाया . जो मरजी खाओ .. पीओ .. कोइ रोक टोक नहीं . पहला दिन तो आराम से बीता . सुबह दस बजे उठकर बाजार जाकर चाय नाश्ता किया . दिन का खाना . रात का खाना सब होटल से आया .पर यह क्या गांधीजी का पांच सौ रुपये का फोटो जेब से बिदाइ ले चुका था . अब अगले दिन से खुद अपना हाथ जगन्नाथ करने की ठानी . आखिर मर्द क्या नहीं कर सकता ? आज का पुरुष नारी से किसी मायने में कम नहीं . सिर के केश बिन्यास को ही लीजिये गौर से देखना पड़ता है नारी है कि नर . मैने भी घर गृहस्थी के कामों में दक्षता दिखाकर पत्नी की बर...

स्मार्टफोन वाल स्यैणी

पहाडक एक गौं .. कुछ स्यैणि ब्याल बखत इवनिंग वौक में रोड पनलै घुमण लागि रयी . कुछ बुड बाडि ले जांठ पकडिवेर लच्यूं लच्यूं कैबेर घुमण लागरीन . अचानक स्यैणिनैकि बातचीत हुण लागी - हवे परुलि ईजा , सलमान कैं पांच सालैकि सजा हैगे बल . परुलि क ईज - अरे ! कब भै सजा . हमर डिस टीवी रिचार्ज खतम हैरौ . सरुलि क ईज - हाय . त्वील ह्वट्सऐप में नि देखो . मैलि दोफरी में ' माडर्न घसारी ग्रुप ' में फोटो दगाड डालि राखछी . परुलि क ईज - अरे यार पोरु बेई ग्वैटन जाण में फेसबुक में गुड मार्निग मैसेज भेजण लागि रौछ्यूं . तो हाथ बटी स्मार्टफोन घुरी पडौ कौ .. टच टुटि गो .  परु क बाबु फोन कैं बागसेर देखूण जैरैछी . टच तो नि मिल . वां जैबेर शराबैलि खुद टच हैबेर घर पुजी ब्याल बखत और वाटपन कती लोटीण लफाईण हुन्याल आपुण मूखक टच जै फोडि लाईं . आब मेर फोन बिना गावगाव ऐरै . बेई बटी आपुणि बैणि और भौजि क दगाड ले चैटिंग नि भै . सरुलि क ईज - पैं ज्यादे तो नि लागि रय परु वा क बौज्यू कैं ? परुलि क ईज - लागि रै हुनेलि यार .. मैं तो परेशान हैगेयूं . बेलियै फौल लगैबेर नई साडि तैयार करि राखछी . वीक दगाडक बिलौज ले सिलवै ह...

बोज्यू नक कुकुर

आजतक मी समझछ्यूं कि कुकुर कुकुरै हूं . पर एक यस वाकया भो कि मेकैं कुकुरनाक बार में दिव्यग्यान है पडौ . दरअसल कुकुर उ नै हुन जनन कैं हम कुकुर समझनू .कुकुर उ ले है सकनी जनन कैं हम मैंस समझनू . असल में कूंछा तो  कुकुर तो हम लोग हुनू . हमार पडौस में एक परिवार क पास ठुल्लो भाल् जस भोट्टि कुकुर भै . जब उ हुकनेर भै तो अगास पंताव  गजै दिनेर भै . यस लागनेर भै कैकैणी बुकाल जब तो भाल भाल मैंसनक एकै गास करौल . जब जिबड भ्यैर कै निकालनेर भै तो लाल जिबड बांजाक क्वैलनक डकार जस देखीने भै . हूंकण में जब वीक तीख्ख दांत भ्यैरकै देखीनेर भाय तो कल्ज कामण बैठ जानेर भै .  उ कुकुराक नजदीक जाण मल्लब आपुण दास् आफि खराब करण जस भै . पर के करछा आब पडौसक मामुल भै तो पडोसी नाक यां के न के काम पडते रूनेर भै . उनर कुकुर हमेशा खुली रूनेर भै . चुपचाप एक कुण लै पडी रूनेर भै . जब ले क्वे उनार यां गे तो सीद्द ऐबेर ख्वारन फटक मारनेर भै . एक दिन उनार यां गेयूं तो कुकुरैलि हुकण शुरु करि दी . मैलि धात लगै - ओ बोज्यू जरा कुकुर पकडि दिओ . तुमार दगाड क्याप काम छ . बोज्यू कूण लाग - ऐ जाओ देवरा .. के नि करन खाल्ली ह...

पौण्येई

हमार पहाडन में कति पोण्योई में जाओ आओ तो के न के लिजाणक रिवाज छ . आदिम आपुण सामर्थानुसार के न के लिजानेरे भै .  लेकिन कबै कबै यास मेजवान ले मिल जानी कि कि पौणा क लिजी बजि गजबजाट वालि स्थिति है जां .. आब तुम कैकै यां जाओ और मिठाई लिजाओ और थ्वाड देर निठाई कैं झ्वालूनै रूण दिओ .. बस तुमन कैं तब तक चहा पाणि नि मिल जब तक झ्वाल बटी डाब नि निकाललाल. घर वाल तुमन कैं घेर बेर बैठ जाल .. और तो और नानतिन ले तुमन लै जेटी जाल . आम बटी लिबेर काखि तक सब तुमन छैं कुशल बात पुछाल पर नजर तुमार झ्वालै में होलि .. बीच बीच में तुमन याद ले दिलाल इनडायरैक्ट रूपैलि .. को गाडि में आछा .. बाटपन गाडि कती रुकछै नै .. बाटपन कां रुकी चहा पाणि तैं .. लोध्धि में रुक हुनेलि .. आब तुम कौला होय रुकी .. तो झट्ट वां बटी तुरुप चाल ऐ जालि - होय लोध्धि में मिठाई हिठाई लिणा लिजी तो तबले रुकनी छ गाडि . फिर बात कैं मिठाई में केन्द्रित कराल - अच्छ्यालन तो लोद्धि में ले भली मिठिठै मिलैं .. हमार यां सब उणी जांणी अच्छियालन लोधिये बटी लूनन . तब तक एक बुडज्यू ले मिठ्ठै पुराण कैं अघिल बढाल - पैलि बटी कोसि क बाल फेमस भाय .. इताण ...