Posts

Showing posts from August, 2017

उठो लाल

उठो लाल आगे को देखो क्यों हारे थे इस पर सोचो . चहूं ओर हरदा का डंका . अपनों ने फिट कर दी लंका . जो अपने थे संगी साथी एक एक कर हो गये बागी खुद को खुदा समझ बैठे अब बैठ अकेले दाढी नोचो . उठो लाल आगे को देखो क्यों हारे थे इस पर सोचो . कहां गये वो जगरी भगरी क्यों ना औतर पाये डंगरी . फिर से द्याप्तों को औतराओ दोबारा से पूछ कराओ . कैसा था वो इस्टिंग हरदा जनता के पलडे में तोलो . उठो लाल आगे को देखो क्यों हारे थे इसपर सोचो . रोडवेज की खच्चाडा में बुडज्यू को जो सफर कराया . मधुली आमा को पिनसिन दी वो भी तेरे काम न आया . दो हजार बाईस की खातिर और नयी कुछ तिकडम सोचो . उठो लाल आगे को देखो क्यों हारे थे इसपर सोचो गैरसैण में टैन्ट लगाकर झूठे सपनों को दिखलाया . केदारेश्वर का सब पैसा सूफी गायक को भिजवाया . कैसे हों आबाद पहाड़ी कैसे रुके पलायन सोचो उठो लाल आगे को देखो क्यों हारे थे इसपर सोचो . गांव गांव सब उजड रहे थे फसल खा रहे सूअर बन्दर लोगों को तुम दिखा रहे थे गौलपार में खली का दंगल पब्लिक को मत उल्लू समझो जनता की तो नब्ज टटोलो उठो लाल आगे को देखो क्यों हारे थे ...

लालकिसन ज्यू दु:ख

लालकिसन ज्यू छाज में बैठी छन . पलतरबै पटखाट में रेडियो बाजण लागि रौ - हमसे का भूल हुई ...... जो ये सजा हमका मिली . लालकिसन ज्यूक आंख ओसै रई . लाल आगाक जास डकार हैरैई द्विये आंख . शायद तीन चार दिनक उनित् लागि रौ . नौकर चाहा धर गो . चाहा घुटुक लगै तो चाहा मीठ नै लाग . माची बेर नौकर छैं कूणीन .. कि चाहा बजर पाडि लिरौछै यस . चीनी कम हैरै . नौकर - चीनि सगी रै सैप . पटखाटाक ताल बटी कटोर में गूड धरि राखौ . ऐल टपुक लगै लिओ . पछिल जब कन्टोल में चीनि आलि तो तब पीला चीनि हाली चाहा . लालकिसन ज्यू - किलै पाल म्हैणैकि चीनि सगी गे ? नौकर - पाल म्हैण चीनि का मिली हमन कैं . तुमर आधार कार्ड जाम नै हैरय कूण लागि रौछी कन्टोल वाल . ग्यूं ले मी बाजपेई ज्यू क कार्ड में मागि लायूं . तुम आधार कार्ड जाम किलै नि करनया सैप ? लालकिसन ज्यू - कि बतूं यार .. मील सोचि राष्ट्रपति बण जून तो कि चैल तौ राशन क चीनि चाँओ .. पर क्याप हैगो . त्वेकैं आधार कार्डैकि हैरै यां मी निराधार हैगेयूं .. ( तब तक भ्यैर बटी मुरुलि धर ज्यू पुजि गे . भ्यैरे बटी घात लगूण लागि गे ) मुरुलिधर ज्यू - ओ लाल दा .. ओ लाल दा लालकिसन ज्यू -...

पहाड़ी करवा चौथ

रत्ति ब्याण - स्यैणि - उठना कन फटाफट नै ध्वे बेर तैयार है जाओ . आज करु चौथ छ . पति - पड़ण दी .. क्याप बबाल छ . हमार पहाड़न में कां हुं तौ करु चौथ ? पैलि बटी हमैरि ईज और आमैलि कबै न कर तौ बर्त .. अाजकलाक नई जपान वालनाक टटम भै तौ . स्यैणि - पैलि बटी तुमैरि बाबू और बूबू लि कबै मोटर साइकिल नि चलै . सब जाग पैदलै जांछीं . तुम तो सब जाग मोटर साइकिलै में किलै डोईंछा ... तुमार ईज बौज्यू टैम पर तो बहुत चीज नि हुंछी .. के के छोड़ला ? पति - तु बहस करिबेर म्यार मूंड नि बिगाड़ यार रत्तै रत्तै . स्यैणी - सुणो पैं .. मेर लिजी कि गिफ्ट लाला आज ? पति - कस गिफ्ट यार रोज रोज .. पोरुवैं मैरिज एनभरसरी पर एक पौडर क डाब दे तो सही त्वेकैं कोहरयाई मुंडी डालिये कैबेर . किलै खतम करि हालौ ? स्यैणि - तुमन में रै जौ उ गिफ्ट . कांहुं गे तुमैरि अकल ? गिफ्ट दिणक ले तमीज नहांति तुमन .. के भल भल चीज लूना .. पौडरक डाब .. शरम ले नि उड़य बतूण में . पति - यार गिफ्ट दिणी वालैकि भावना देखीं जां . गिफ्ट नै . स्यैणी - ततु लैकक गिफ्ट वी भावना कैं दि आया ..भावना देखीं राखी तुमैरि .. पति - यार तु कचकचाट नि कर मेर पैन्ट क...

पार्टी

गरीब आदमी गरीब ही होता है . वह कितनी भी कोशिस कर ले उसका रहन सहन चाल ढाल उसे गरीब धोषित कर ही देते हैं . अब मुझे ही लें किसी अमीर आदमी के लड़के की शादी का कार्ड आ गया . जिस पर प्रतिष्ठा में और मान्यवर जैसे शब्द मेरी नाम की शोभा बढा रहे थे . हालांकि ये शब्द कार्ड छपवाने वाले ने अपनी अमीर बिरादरी की शान में छपवाये होंगे . पर उसकी मेरे प्रति उदारता देखिये उसने मान्यवर और प्रतिष्ठा में जैसे शब्द मुझे दिये गये कार्ड में भी यथावत रहने दिये . हालाकि इन शब्दों की गरीब को आदत नहीं होती . उसका पाला तो अबे तबे जैसे शब्दों से पड़ता है . अब साहब कार्ड चूंकि सपरिवार था . मैं भी नियत समय पर नियत स्थान पर सपरिवार पहुंच गया . बच्चे खुश थे कि पार्टी में जा रहे हैं . गरीब के बच्चों के लिए यही एकमात्र पार्टी होती है . हम स्वरुचिभोज स्थल के गेट पहुंचे . गेट पर स्वागत के लिए एक तरफ शहनाई वादक और एक तरफ कार्टूननुमा संतरी था . कार्टून नुमा संतरी सभी मेहमानों का झुक कर अभिवादन कर रहा था . मैं ठिठक गया . संतरी झुका तो हर जगह झुकने की आदत के कारण मैं उससे ज्यादा झुक गया . मेरा परिवार डरकर मेरे पीछे पंक्तिबद्ध...

रोड शो

राहुल ज्यू रोड शो के लिये आये ठहरे हरिद्वार . अचानक मिल गये . मैने कहा नमस्कार दाज्यू .. आओ घर चलो . चाहा पाणि पीकर आओगे .थक गे हुन्याला रोड शो करिबेर ... राहुल ज्यू घर आय . भीतर बैठ .. मैलि नानतिनन छै कोय - देखो रे दिल्ली वाल ताऊजी ऐ रयी .. नानतिननैलि नमस्कार कै . तो राहुल ज्यू जेबन हाथ डालण बैठ . मैल को - क्वे बात नै राहुल दा .. रूण दिओ . नानतिनन ले पत्तै भै तुमैरि जेब फाटि छ कैबेर . राहुल ज्यु क मूख अड़कसै हैगे . दगाड़ आई सिक्योरिटी वाल छैं कोय . यार गली भ्यैर बटी द्वि पैकेट कुरकुरे लै दे नानतिनैतें . मैल पुछ - यार राहुल दा . कां बटी शुरू करौ आजक प्रचार ? राहुल - यार तुम राहुल दा किलै कूण रौछा .. हम तो स्वानिकैं हुनेला .. एकाद सालक हेर फेर हन्योल . मैल को - नै हो रिश्त ठुल हुनेर भै . तुम पांचेक साल ज्याठ होला मेर हैबेर . भले ही म्योर च्योल ऐल दस में पुजि गो . पर उमर तो तुमैरि ज्यादा भै . आब तुमैलि टैम पर ब्या नि कर तो मेरि कि गलती . ब्या नि हैरय कै तुम मेर हैबेर कांस् जि है जाला . राहुल - खैर छोड़ . और कि हैरीन हाल चाल ? मैल को - म्यार हाल कि हुनी . तुम सुणाओ .. एक बात और त...

वैलेन्टाइन त्यार

आज वैलेन्टाइन त्यार भै .. मैलि ले सोचि आज कुछ तूफानी करि जाऔ . मैं प्रोग्राम बणूण लाग्यूं . दिल में कुतकालि जस लागि गे . मैलि सोचि क्वे यस प्रोगाम बणाई जाओ कि मसालेदार यादगार बण जाऔ . मैलि आपुण घरवाई कैं आवाज लगै - अरे पंडिताइन . हैप्पी वैलेन्टाइन . स्यैणी शैद उसीके माचीन पितीन हैरै हुनेलि . म्यार शब्द भी छूटते ही सुदै परमाणु बम जसि फट गे . यां भीतर हल्द मर्च मस्याल सगी रई . तुमन यो वैलेन्टाइनैकि हैरै . फटाफट उठिबेर बजार बटी मस्याल लि आओ नतर तुमार भांटनाक खुश्याल निकालि द्यूल . बुड्याकाल होशफाम करो . भितरपन के काम करो . फुन लगाई बल्दैकि चार मेटाओ झन . उसीके म्यर मूंड आँफ हैरौ. मैल को - यार मस्याल नानतिनन छैं मगै ल्ही . आज प्यार करणी त्यार भै . जरा एक आंखर भल भल जस बुलानि कन . स्यैणि आंख ताणन बैठ गे . मैलि सोचि यैक मूख को लागौं .. यैक प्याराक स्याल सगी रई . कति और जाग उज्याड़न लागि जाऔ . स्यैणीक चक्कर में आपुण वैलेन्टाइन किलै खराब करी जाओ . मैं नै ध्वे बेर मूख लै वैसलीन क डाब घोसिबेर और कपड़न में स्यैणीक पर्स बटी सैन्ट चोरिबेर द्वि छरैक मार और बाल कैं मैलिके कुटरि बेर पाख उज्याण ब...

मजनूं पुराण

मजनू और रोमियो भले ही ऐतिहासिक दृष्टिकोण से अलग अलग प्रजाति के प्रेमी रहे हों पर कालान्तर में ये एक दुसरे के पर्यायवाची हो गये हैं . जबरन अपने प्यार का इजहार करने वाले . स्कूल कालेजों व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर हर अनजान या जान पहचान की लड़की को प्यार के लिए राजी करने या उनका ध्यान आकर्षण करने वाले . को मजनू या रोमियो कहा जाता है . पता नहीं क्यों पर समय समय पर रोमियो लोगों पर पुलिस की कुदृष्टि पड़ती रहती है .कई बार इन लोगों को पब्लिक का कहर भी झेलना पड़ता है . हद देखिये जब कोई रोमियो पब्लिक के हाथों पिटता है तो हाथ साफ करने वालों में वो लोग मुख्य होते हैं जो वहां से गुजर रहे हों और उन्हें ये भी नहीं पता कि मामला है क्या ? एक बात और एक रोमियो जब पिटता है तो उसको पीटने वालों वो शख्श भी होता है जो खुद उस जगह पर रोमियोगिरी करने आया हो . कहने का मतलब रोमियो समाजवादी होते हैं . भाई भतीजावाद या जातिवाद बिलकुल भी नहीं होता . अगर होता तो एक रोमियो पिटते हुए दूसरे रोमियो को कभी नहीं मारता . रोमियो बिरादरी पर गाने भी बने हैं . कभी अनिलकपूर रोमियो नाम मेरा चोरी है काम मेरा पर ठुमके लगाता है . ...

नारद विष्णु संवाद

भगवान बिष्णु श्रीरसागर में शेषसैय्या में विराजमान हैरेई . माता लक्ष्मी उनार खुटाणी बैठि रै . अचानक पृथ्वीलोक में हाकाहाक सुणिबेर प्रभु माता लक्ष्मी छैं कूण लागि रयी - कमला .. ओ कमला .. लक्ष्मी - कि कूण लागि रौछा स्वामी ? प्रभू - जरा यां आ और बात सुण .. लक्ष्मी - होय कओ कि कूण लागि रौछा ? प्रभू - तसिके खुटाणि किलै बैठ रछी . यां आ म्यार बराबर में बैठ . देख धैं जमान् कां पुजि गो . आब स्यैणी बैग बराबर छन . तू किलै खुटाणि बैठछी . मेकै ठीक नि लागन . मैं ले पुरुष और नारी क बराबरी क पक्षधर छ्यू . लक्ष्मी - तस के बात नहांति प्रभू . यां बटी समुद्रक सीन बड भल देखी और तुमार दगाड बैठ बेर आजकल गरमी लागड लागैं तुमर तौ शेषनाग जब फुंकार मारौं तो गरम हाव चलण बैठ जां .. उसीकै जेठा म्हैणा क घाम भै आजकल . प्रभु - अच्छा अच्छा . जरा नारद कैं फोन लगा धैं . धरती बटी नारायण नारायण करण लागि रौ . यां नि आय बहुत दिन बटी . के नयीं समाचार ले नि लै रय आजकल . ( माता लि नारद कैं फोन लगा . पर घण्टी जाते रै नारद ज्यू लि फोन नि उठै . तब माता लि नारद ज्यू कें ह्वट्सऐप में मैसेज छोड दे कि प्रभु बुलूण लागि रयीं . तु...

गुप्त मन्त्र

आज में आपको श्री श्री ४२० बाबा महालफन्डर दास जी के द्वारा सिद्ध किये हुए कुछ महामन्त्रों की जानकारी दे रहा हूं . मन्त्र अतिगोपनीय हैं . बाबजी ने इन मन्त्रों को गोवा के कुछ मनमोहक बीच में पूर्णमासी की चांदनी रात में सुरासुन्दरी की सुरूर वाली शाम में तकरीबन पूर्णरूपेण टल्ली होकर सिद्ध किया है . १- बुढापे में पुत्र प्राप्ति मन्त्र - ऊँ जवानी का झटका लगाये फटका . नारायण नारायण नमो डीऐनाय . ऊँ फट् लम्फट् . कुरु कुरु स्वाहा ... ( इस मन्त्र को राजभवन में एकान्त में सावधानी पूर्वक पाठ कर शिलाजीत और स्वर्ण भस्म के साथ सिद्ध करे. सावधानी और गोपनीयता परम आवश्यक है . ) २-मन्दबुद्धि निवारण मन्त्र - ऊं पोगो पोगो डिज्नी चैनलाय . कम अक्लाय गुरु की आग्या मां की आशीष . ऊँ फच. मन्दबुद्धियाय अक्लाय चाचा चौधरी कुरु ...स्वाहा ... ( इस मन्त्र का जाप चमचों से करायें . या मन्दबुद्धि पुत्र को चुपचाप विदेश गुप्तावाश में भेजकर जाप करने को कहें ) ३-पुत्र वशीकरण मन्त्र - ऊँ उत्त पदेश पुत्त पदेश छिप्पाल ओ का ओका स्वाहा .. (उक्त मन्त्र को टीवी चैनलों के सामने जाप कर सिद्ध करें . जोर से बोलें भले ही किसी का ब...

ईजक टेलीफोन

ठन्ठ हुण बैठ गे . गुजरात बटी मोद्दा ईजैलि मोद्दा कैं फोन कर . मोद्दा - हैलो .. नमस्कार ईजा .. ईज - बची रये .. ठुल्लो हैजाये चेला .. तेरि ५६ ईंच छाति ६० ईंच हैजो . मोद्दा - कसि हैरैछी ईजा तू ? ईज - मी तो ठीकै हैरयूं ईजा .. तु कस हैरौछै ? मोद्दा - मी ले ठीकै छ्यू . ईज - नरिया तु पोरबेर एक शाँल लाछिये मेर लिजी . आब उ फाट गो पोथी . कदिनै पाकिस्तान जालै तो एक शाँल और ल्यै दिये . जाड़नाक दिन छन बज्यूण . लाकाड़ पताड़ ले नहातिन आग तापड़तैं . शौल ढगी बेर घाम मैं बैठ रून .. आंग मैं जरा तात लागैली धैं . मौद्दा - ईजा आब पाकिस्तान जावै नि हौ तपार .. उ नवाज राठ कठु निकलन . उनार दगार म्यार झकौड़ हैगो . पोरु वैं जैबेर कुटि आयूं रनकारन .. ईज - ठीक करौ त्वील . मैलि त्वेछै पैलियै कौछी तौ रनकार मुख लगूण लैक नहातिन .. तौ तो जि ले बजर पड़न मेर शौल कां बटी आल आब ? मोद्दा - शौलैकि चिन्ता नै कर ईजा तू . मी तो बिदेश जाते रूं .. कती ले जैबेर वां प्रधानमन्त्री कैं एक धोति दी उन वी स्यैणी लिजी तो शरमा शरमी में एकाद शौल तो देलै ही सही .. बस मी त्यार लीजी भेजि दयूल . ईज - चेला तु तदुक बिदेश जांछै . के फैद...

हमार मोद्दा

भात खैबेर फौस्येन लागी भै . पालंगक काप और झोई गजब सवाद बड़ाई भै ईजैलि .. पेट में कटांस हुण जाणे खै ली . खाई बाद हलकणैकि से उज नि भै तो मैं घाम में पीठ लगै बेर चौंतार में तेरछीं गेयू . ह्यूनक घाम भै आंख लागणै तैं बटी रछी तो ग्वैटन बटी मितरो....ओ....ओ... कि आवाज उण बैठि . मैल चाय तो मोद्दा भाय . नमस्कार पुरस्कार भै . मैल कोय हाय अचानक कसिके आया हो मोद्दा ...? बैठो भीतर हिटो . मोद्दा - यार मी सब काम अचानकै करूं . कां बटी कां न्है जां कैकैई हाव ले नै लागण दिन्यू .. मैल कौ बैठो पैं ... मोद्दा - नै यार ऐल नै बैठन्यू आज मंगल छ .. तुमार पहाड़न में मंगल मिलाप छन्जर छाड़ नै करन बल . मैल कोय - के बात नि भै . तुम घरैके आदिम भया ... मोद्दा - नै यार इत्ती भ्यैरै बटी बैठ जानू .. मैल घरवाई कैं आवाज लगाई - सुणनैछी भौ ईजा .. यो गुजरात वाल ज्याठज्यू ऐरईन .. जरा द्वि गिलास चाहा ला धें .. स्यैणिलि भीतरै बटी आवाज लगै - चीनी सगी रै . मैल को - क्वे बात नै .. शुभम छैं मगै ल्ही हिरदा दुकान बटी . स्यैणि - कां बटी मगूं ... शुभम डबल निकावण बैकाक लाईन में लागि रौ . बेलि बटी वैं छ . तब तक मोद...

सैन्टा द्याप्त .

रत्तिब्याणक टैम भै . बिस्तर में पड़ी भयूं . भला भाल स्वैण उण लागि भै . तात लागि भै लिहाफ भितर . तब तक घरवाईक आवाज पड़न बैठ गे कान न में . उठो हो . उठो . सुड़नौछा . उठो . मैलि सुड़ियैकि नि सुणी करि दी . घनघोर नींद आइयाक नखार लगै दी . घरवाई ले कम नि भै . वीलि मेर हाथ खींचबेर लझोड़न शुरू कर दी . मैल को - कि करनैछी तस . तमीज कां गे तेरि . बैग छ्यूं त्योर . प्यारैलि नि उठै सकनी . उठो जानूं उठो डार्लिंग कैबेर उठूनी . समयाक सांथ चली कर . देख धें दुन्नि कां पुजि गे . घरवाई - होय सब देखि रयूं मी दुन्नि कां पुजि गे . सारि दुन्नि नैध्वे बेर पुज पाठ करि बेर बैठ गे . तुमैरि चारि लिफाफ भीतर पाद नि मारड़य दुन्नि . उठो फटाफट नाण ध्वैण करो . मैल बिस्तर उठूण छ . क्वे भीतर आलौ कि कौल ? मैलि कौ - त्यार मुख बटी भलि बात कबै नि आलि . और यदुक ठंड में नाण क नाम झन लिये . ठंडैलि जुकाम लागि गे या बीमार पड़ि गेयूं तो को रौल जिम्मेदार . मैसैलि आपुण जतन आपुण हाथैलि करण चें . घरवाई - जि बजर पाड़छा पाड़ो . नाण नि लाग रया तो कम से कम तौ मूखक टाल तो खुकल लिओ . त्यार बारक दिन छ . और तौ चाहा धरि र...

ड्रैसिग रूम

पाकिस्तान दगाड हार बाद भारताक ड्रैसिग रूम में गजब माहौल हई भै . हार्दिक पड्या और जडेजा में अंगाईजित्ती हई भै . पड्या जडेजा कि दाढी उचेडन लागी भै और जडेजा लि पड्या क हाथ में दातिंकि काटि बेर खून्योई करी भै . बुमराह उनन कैं छूटूण में लागि भै .मारामारी में एक लात बुमराह पेट में पडि गे . बुमराह पीडैलि बौई गे और मरो काणीच्यालो आपस में कैबेर द्वि द्वि फचैक द्विनै लै लगै बेर जानै रय . एक किनार में धोनी फोन में पहाड़ी गीत सुणन लागि भै - ओ लाली हो लाली होसिया .. पधानी लाली तीलै धारो बोला . कुम्बले आपुण कच्छ अन्डरशौर्ट तार बटी निकाल बेर नौव उज्याण बाट लागि गे नाणा लिजी . रोहित शर्मा क अलगै डाड. पडी भै . युवराज - यार घोनी तौ हर बखत पहाड़ी गीत नै चलाई कर . पंजाबी लगा दिलेर मेहंदी या हनी सिंह टाईप . धोनी - चुप हैरौ रे . रन बणूण बखत तेर भेल कामनन . दिलेर मेहंदी सुणनै हैरै .. तु अल्ताफ राजा सुण . युवराज - त्वील बड. फाडी लाकाडाक चार करन.. बात करनौ. लड्डू जस कैच उछालौ त्वील . बिराट - यार धोनी दा . लडै नै करो यार .मी कप्तान भयूं . मेरि बात तो मानो . धोनी - कप्तान ऐरौ बड चुरैन साल् .. उ तो ...

अपुड्याट

गोपाल सिंह - ओ पन्थ्याण ज्यू ... ओ पन्थ्याण ज्यू ... आम् - हो ओ ओ ओ .... गोपाल सिंह - ओ पन्थ्याण ज्यू पैलाग .. आम-आशीर्वाद .कांक छा ..?? गोपाल सिंह- पार दबक गौं क छ्यू .. गोपाल सिंह .. आम् कि- कूंछिया ..कां जाणी छिया के नै हो पन्थ्याणि ज्यू . इथैके कति कुमिना क सुद्याव लागि रौछ्यू .. कैलि कौ तुमार यां छ कैबेर . तबै आयूं . ह्वलै तुमार यां कुमिन .. नानू ले देला जब हैजाल . आम- होय क्यैने .. छ .. क्यै कि चैन पडौ तुमन कुमिन . कति पुज छ कि ? गोपाल सिंह- नै पन्थ्याण ज्यू बौज्यू बीमार हैरान . के नै पचणौय . कैलि कौ कुमिन न साग दिओ कैबेर . तबै चैन हैरौ . छ जबत दि हालौ . आम- होय होय क्यै नै छ . अल्लै दयू हां . गोपाल सिंह - होय पन्थ्याण ज्यू भल हैजौ तुमर . कतु छन नानतिन . आम- तीन छन गोपाल सिंग (अं ) .. एक च्योल द्वि चेल्ली . गोपाल सिंह- कां छ तुमर छ्यौड .. कि कनौं ..? आम- दिल्ली पन छ . गोपाल सिह- कि कनान तुमार छ्यौड. दिल्ली में . भली नौकरी में हुन्याल हाय . आम- बस पेट पावण रौ गोपाल सिंग ज्यू आपुण . जि करनन्योल . आपुणै ले पेट पाव हाललौ मस्तु भोय . गोपाल सिंह - हेय ! आम - तीन म्है...