उठो लाल
उठो लाल आगे को देखो क्यों हारे थे इस पर सोचो . चहूं ओर हरदा का डंका . अपनों ने फिट कर दी लंका . जो अपने थे संगी साथी एक एक कर हो गये बागी खुद को खुदा समझ बैठे अब बैठ अकेले दाढी नोचो . उठो लाल आगे को देखो क्यों हारे थे इस पर सोचो . कहां गये वो जगरी भगरी क्यों ना औतर पाये डंगरी . फिर से द्याप्तों को औतराओ दोबारा से पूछ कराओ . कैसा था वो इस्टिंग हरदा जनता के पलडे में तोलो . उठो लाल आगे को देखो क्यों हारे थे इसपर सोचो . रोडवेज की खच्चाडा में बुडज्यू को जो सफर कराया . मधुली आमा को पिनसिन दी वो भी तेरे काम न आया . दो हजार बाईस की खातिर और नयी कुछ तिकडम सोचो . उठो लाल आगे को देखो क्यों हारे थे इसपर सोचो गैरसैण में टैन्ट लगाकर झूठे सपनों को दिखलाया . केदारेश्वर का सब पैसा सूफी गायक को भिजवाया . कैसे हों आबाद पहाड़ी कैसे रुके पलायन सोचो उठो लाल आगे को देखो क्यों हारे थे इसपर सोचो . गांव गांव सब उजड रहे थे फसल खा रहे सूअर बन्दर लोगों को तुम दिखा रहे थे गौलपार में खली का दंगल पब्लिक को मत उल्लू समझो जनता की तो नब्ज टटोलो उठो लाल आगे को देखो क्यों हारे थे ...