नातक

एक तो मेरि उसीके अग्रेजी क फीस माफ छू कूंछा . कति लै अग्रेजी लेखी भै तो पढन में पसीणाक नाव छुटि जानी . Know कैं नो पढन छै या क्नो मेकैं हाईस्कूल तक पत्त नै लाग . उसके ले अग्रेजी क उच्चारण में बबालै हूं . एक पिक्चर में धरमेन्द्र ले कूंछी कि To टू भय तो Go गू किलै नी भय ..
खैर , म्यार दगाड ताजातरीन गजबजाट फेसबुक में भो . आजकल लोगबाग कुमाउनी ले रोमन में लेखनी . कबै कबै पढन में अर्थ क अनर्थ है जां . कमल लेखि राखौ या कमाल , अन्ताज लगूण धो है जां .
मेर एक मित्र क मैसेज आ मेरि पास - Hamar ghar me natak hai ro .
आब में साहित्य प्रेमी आदिम भयूं .
मैलि रिप्लाई करौ - बहुत बढिया श्रीमान ! नाटक तो साहित्यैकि एक उत्तम विधा छ . भल कार्य करनौछा . जरा विस्तारैलि बताओ कि नाटक कैक लेखी छ ? को को लोग अभिनय करनयी .. कतु मंचन है गयी .. विषयवस्तु कि छ नाटकैकि . है सकलो तो मेरि पास रिकार्डिग भेजिया वीडियो बणैबेर .
(मेर जवाबैलि आदिम गजबजी पडौ शैद . लगभग आदू घण्ट बाद वीक फिर रिप्लाई आ )
पन्त ज्यू भली कै पढो . नाटक नि हैरय .. हमार घर में 'नातक 'हैरौ . मेर च्यालक च्योल हैरो . मेर नाति हैरौ . मैलि मैलि नाटक नै लेखि राख 'नातक ' लेखि राखौ . हर बखत साहित्य में नै घुसी रओ .. दीन दुनियैकि ले फिकर करो ..
( मेकैं के कूण नि ऐ हो महाराज . मन मनै आपु कैं आफि मैक्या बज्यूण )
विनोद पन्त 'खन्तोली '

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