दिवाली की खुमारी

हरदौल वाणी में प्रकाशित मेरी रचना - आभार ललित राठौर जी एवं आदरणीय देवीप्रसाद गुप्ता जी का
१-
दीपावली पर आज कलुवा खुश है .
त्यौहार पर खूब मेहनत मजदूरी के बाद आज
सेठजी ने आधा किलो मिठाई और दो सौ रुपये का इनाम दिया
है . मिठाई नकली मावे की आ
रही है बल इसलिए सेठजी ने कलुवा को
पकड़ा दी . कोई गिला नहीं है कलुवा है .
मिठाई बच्चे खा लेंगे . गरीब के बच्चों को
नकली असली सब हजम हो
जाती है . दो सौ रुपये से अपने लिए कलवा एक
देसी की बोतल बन्डल माचिस ले आएगा .
त्यौहार ठहरा . खुशी से मनना हुवा .
ठीक ही ठहरा बल .
२-
सरकारी अधिकारी के घर गिफ्ट आयटम का
ढेर लगा है . हर गिफ्ट लाने वाले से कह रहे हैं
इसकी क्या जरूरत थी . पर मन
ही मन कह रहे हैं साला क्या घटिया
चीज लाया है . अब कोई काम फंसने दे मेरे
नीचे . इन सब के बीच साहब का नौकर
ललचाई आंखों से रंग बिरंगे गिफ्ट पैकेट देख रहा है .
किसी के लिए कूड़ा किसी के लिए खट्टे
अंगुर ठहरे . अब साहब अपने गिफ्ट को नौकर को कैसे दे दें ?
छोटे आदमी को ज्यादा मुह लगाना भी
ठीक नहीं ठैरा .
३-
लाला अनोखेलाल की दुकानदारी
अच्छी हो गई . बीबी के लिए
हार खरीदकर लाऐंगे . लाँजिक ये है कि हार देकर
बीबी को खुश करेंगे . बाकी नोट
सोने की शक्ल में तिजोरी में ही
रहे . माल अन्दर चल जलन्धर .
४-
शर्मा जी को दीवाली का बोनस
मिला है . रास्ते भर दीपावली
की शाँपिग की लिस्ट बनाते रहे . चौराहे पर
चार यार मिल गये . आधे घन्टे शकुनीलीला
में बोनस दोस्तों की जेब में चला गया . शर्मा
जी फकत . तनख्वाह से छेड़ाखानी
सम्भव नहीं . वो तो आटे दाल को भी
पूरी नहीं . समस्या ये है घर जाकर बच्चों
से क्या कहेंगे . बीबी तो चार गालियों में सब
समझ जाएगी . चलों झेल लेंगे . ठीक ठैरा
सब .
४-
बाप रे पूरे पचास साठ हजार के पटाखे लाया है सोनू .. पता
नहीं कौन सा खजाना हाथ लगा है . सोनू का बाप ताजा -
ताजा रईस बना है . तो मोहल्ले वालों को दिखाना पड़ेगा ना कि हम
भी जिगर रखते हैं . रात भर ना सोएगा ना सोने देगा .
पूरी रात गली में परमाणु युद्ध होता रहा .
दीवाली ठैरी .
६-
दो छोटे बच्चे बारह से पन्द्रह साल के बमों के शोरगुल और
रोशनी की चमचमाहट के बीच
बड़ा सा बोरा लेकर बाजारों गलियों की खाक छान रहे हैं .
आज बाजारों में खरीददारी जम कर हुई बल
. सो प्लास्टिक की पन्नियां और गत्ते के डिब्बे खूब
मिलेंगे . हजार रुपये का कबाड़ तो हो ही जाऐगा .
हैप्पी दिवाली तो आज ही
होगी .
७-
स्लम एरिया . नत्थू अपनी झोपड़ी में परिवार
के साथ सोने की तैयारी कर रहा है .
कभी भी दीवाली
पर कुछ खास नही होता यहां . पर आज कुछ खास
हो गया . कहीं से उड़ता हुआ राकेट आया और नत्थू
के साथ साथ पड़ोस की झोपड़िया भी स्वाहा
कर गया . चलो ठीक ही ठैरा . नत्थू को
मुवाबजा दिलाने के लिए कल एक मीटिंग करेंगे . पर नत्थू
तो अवैध कब्जाधारी हुवा .
८- ये घर कुछ खास लग रहा है . पारम्परिक तरीके
से दिवाली मनाई जा रही है . परात में
चावल भरे हैं . खील बतासे और खांड के खिलौने .
मिट्टी के दीपक जले हैं . पूरे बिधिबिधान ने
महालक्ष्मी की पूजा हो
रही है . अपने हाथों से रंगोली
बनी है . पर इतने सालों से देख रहा हूं कि इस घर
में लक्ष्मी जी पहुंचती
ही नहीं . हां लक्ष्मी
जी की बहन जी
सरस्वती जी से ही खुश हैं
ये लोग . जय लक्ष्मी माता .. मैय्या जय
लक्ष्मी माता .. जो नर तुमको ध्याता ,...
बाकी भाग्य पर डिपेन्ड ठैरा . ऐसी मान्यता
है बल .
९-
कहीं दूर पहाड़ का गाँव . यहां रामायण
की उर्मिला रहती है . जी
हां सही पढ रहे हैं आप . रामायण की
उर्मिला . दीपावली का प्रधान
दीपक जलाकर पल्लू से उसकी रक्षा कर
रही है . याद है न आपको . जब लक्ष्मण
जी वन गये थे तो उर्मिला उनकी याद में
दीपक जलाया करती थी . यहां
भी दीवान सिंह फौज में हैं आजकल
सरहद पर तैनात हैं . उनकी पत्नी
सरुली देवी का मन भी सरहद
पर ही लगा है . यहां पूजा तो सरुली
लक्ष्मी जी की कर
रही है पर बोल रही है - हे गोल्ज्यू
मेरे पति की रक्षा करना .

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