डोई के बाराती

आज मैं आपको अपने मित्र डोई पाण्डे के ब्या में शामिल हुए महापुरुषों के जीवन के अनछुए पहलुओ पर प्रकाश डालूंगा .
Gyan Pant G - भारद्वाज गोत्रस्य ...... भारद्वाजाम् .......त्रिप्रवरस्य ........ श्रीमान पंडित ..... ग्यानचन्द शर्मण:  अर्थात हमारे ग्यान पन्त दाज्यू .(अरे यजुर्वेदाय अन्तर्गत जिम कार्बेट पार्काय शेरायध्यायन: .... लिखना भूल गया ). इनका जन्म भारतवर्ष के तत्कालीन उत्तरप्रदेश राज्य के बेडीनाग नामक  पौराणिक नगर के नजदीक स्थित गरांऊ नामक ग्राम में हुवा था . इनकी प्रारंभिक शिक्षा  लखनऊ नामक ऐतिहासिक नगर में हुई थी .  वही लखनऊ जिसको हमारे योगदा लक्षमणपुर करने की सोच रहे हैं . युवावस्था में ही इनको हमारी भाभीश्री ( नाम लेखक को मालूम नही ) के साथ ईलू ईलू हो गया और ये विवाह बन्धन में बध गये . ( ये बात अफवाह और लेखक के दिमाग की खुराफाती उपज  भी हो सकती है ) .  वर्तमान में ये लखनऊ ही रहते हैं . डोई की शादी के दिन ही दोपहर में उत्तराखंड के आये हुए कुछ उत्पाती नवयुवकों ने जबरदस्ती इनकी मेहमाननवाजी हासिल कर इनकी पुस्तक  बाटुई का बलपूर्वक बिमोचन भी कर डाला और नाश्ते के नाम पर खूब सारा पकौडे रसमलाई भकोर गये . इस घटना को कुमाउनी साहित्य के इतिहास में .. विमोचन की डकैती कहकर याद किया जाऐगा .
२- रिस्की पाठक - इनका जन्म पिठौरागढ जिले के दसौली नामक गांव में हुवा था . इनकी राशि का नाम हिमांशु था बाद में ये रिस्की नाम से प्रख्यात हो गये . इन्हें कुमाउनी गूगल भी कहा जाता है .  पहाड के हर ढूंग पाथर बांज बुरूस ध्यार कफ्फू  माट . उखव मुसव  धान ग्यूं मड्ड मसूर भट गहत पाठक पन्त जोशी पाण्डे सनवाल कनवाल रावत धामी राठौर चैहान अलमाड बागसेर जागसेर बेडीनाग धौलीनाग पीहलनाग घुघुति संगरांत मसांत जोत अजोत ग्रहौपुज भूतै पुज मसाणै पुज जागर घन्याई चांचरि भगनौल झ्वाड आण काथ  के बारे में इनको पता है ....वर्तमान में ये भारवर्ष की राजधानी दिल्ली में निवास करते हैं .
३- भास्कर जोशी - चौखुटिया गेवाड के निवासी जोशी जी को पागल जोशी जी भी कहा जाता है . ये उसी चौखुटिया गेवाड के हैं जहां के बारे में कहा जाता है कि वहां का बैल भी समझदार होता है . यही कारण है कि इनकी सारी समझदारी बैलों के पास चली गयी और ये पागल होकर आजकल कुमाउनी में साहित्य साधना में लगे हैं . डांसी ढूंग और लमथर इनका कापीराइट है . हाल ही में इनको कई वर्षों के तप के उपरान्त एक सुशील पत्नी मिली है जो कि ठेकुलि नाम से विश्विख्यात है .
४- शंकर दत्त जोशी - इनका जन्म सास्कृतिक नगरी अल्मोडा के समीप जैती नामक सुरम्य पर्वतीय नगर में हुवा था . ये बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे . रामलीला नाटकों में विभिन्न पात्रों का अभिनय करना इनका शौक था बल . बाद में इन्होने पनुवा को नाम लिखना सिखाया और अपना नाम भूल गये . वास्तविक नाम सतीश जोशी से शंकर जोशी हुए और कालान्तर में पनुवा नाम से कुमाऊ में विश्वप्रसिद्ध हो गये . डोई के ब्या में इन्होने खूब धमाल मचाया और आजकल पहाड में जहां भी वर्फबारी देखते हैं वहीं लाइव चले जाते हैं .  दिखने में इतने स्मार्ट कि मनोज बाजपेई फेल ठहरा इनके सामने
५- कमल जोशी - अब इनके बारे में क्या कहूं .. बाईस किलो साढेतीन सौ ग्राम वजनी ये महाशय पिठौरागढ के पोखरी ग्राम के जोशी हुए . आखों में चसम , हल्की दाढी वाला ये नौजवान जब गाता है तो रंगत आ जाती है . इनकी मुस्कान इतनी मोहक है कि लडकिया इन पर मरती नही जी उठती हैं .
६- नीतेश पन्त - सरोवर नगरी नैनीताल का यह बालक विलक्षण प्रतिभा का धनी बताया जाता है . फिलहाल ये  नैनीताल में रहकर अर्थशास्त्र की चीरफाड  कर रहा है मतलब पी एच डी कर रहा है . यह बालक फोटोग्राफी का भी बेहद शौकीन है . इतना शौकीन कि लखनऊ यात्रा के दौरान अपना डी एस एल आर घर ही भूलकर  आ गया .. इस अर्थशास्त्री बालक को भविष्य का मनमोहन सिंह बनने की कामना है .
७- हेम पन्त -   इनके बारे में मैं कुछ नही लिखूंगा क्योकि ये डोई की शादी को बीच में छोडकर चले गये थे . पिठौरागढ के मूल निवासी ये महाशय आजकल रुद्रपुर में रहकर पत्नी सेवा में तल्लीन हैं . इनके जीवन की हाईलाइट ये है कि ये और इनकी धर्मपत्नी दोनो नामराशी हैं .
८- उमेश पुजारी - ना ना .. इनके नाम पर मत जाइये . ये किसी मन्दिर के पुजारी नही हैं और ना ही इनका पूजा नाम की किसी कन्या से कभी जानपहचान रही है . क्षत्रियकुलभूषण असकोट नरेश ये मनुष्य लखनऊ भ्रमण के दौरान हमारे चारचक्रीय रथ का सारथी भी रहा . मुखमण्डल पर शोभायमान पालपोस कर बढाई गयी दाढी में यह मानव बिलकुल रिषि विश्वामित्र सा प्रतीत होता है .
९- कविता बिष्ट / गिरीश बिष्ट ,-   चन्द्रमुखी चंचल चितचोरी .. सुढड सांवरी सूरत भोरी .. श्यामाश्यम एक सी जोडी टाइप ये युगल पूरे लखनऊ में आकर्षण का केन्द्र था . ऐतिहा
९- डोई पाण्डे - बातों बातों में उस आदमी को तो भूल ही गया जिसके चक्कर में यह सब चक्कर हो रहा है . जी हां बैंककर्मी घुमक्कडी का शौकीन डोई पाण्डे . असल में बुजुर्गनुमा ये युवा शादी के सख्त खिलाफ था . पर लखनऊ में ही अचानक इसको एक ऐसी कन्या मिल गयी जो कि स्वयं भी शादी के सख्त खिलाफ थी .. बस यही विचार मिले और ये हो गये दो से एक .. और साथ में कर गये हमारे लखनऊ दर्शन का इन्तजाम .
१० - विनोद पन्त - यानि कि इस बकवास का लेखक . यानि कि मैं .... एक सीधा साधा अडतालीस वर्षीय नवयुवक .. ईसमाट डैसिंग आप अपने आप कह लेना ..

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