घुघुति त्यार

जब हम नानतिन छियां तब घुघुतियक बड उत्साह हुनेर भै . दिन भरि दगडू नाक दगाड योजना बणनेर भै कि मैं इक्यावन घुघुतनैकि माल बणून मैं एक सौ एक दांणनैकि माल् बणूल . दिन में बटी नारींगक दांण तोडिबेर धरी जानेर भै . स्यूड धाग आफि तैयार करि लिनेर भयां .
रात में ईज जब घुघूत बणालि तो हम ले चूलपन टांजि जानेर भयां .. ईज कदुक कौलि कि उथकै बैठ जा .. तेलक छिट पडाल .. जाग कम हैरै .. पर हम किलै सुणुल . फिर हम भै बैणीयन में कम्पटीशन हुनेर भै .. मेरि माल नानि हैगे .. तैकि  माल् में ज्यादे छन .. मेर नारींग नान् हैगो .. तौ दिदीक वालि माल् मेरि भै . रत्ति ब्याण फटाफट उठि बेर उदुक काले काले मुखलि नि करनेर भयां जदुक काले -काले घुघुत खांणा लिजी हुनेर भै . एक दूसराक माल् बटी घुघुत लूछण .. चोरण .. या दीन हीन कातर बणबेर मांगण .. एक मेकें दि दे .. फिर मैं ले दयूल .. या आपुण वाल खा .. माल डालिबेर पडौस पन घुमण .. एक अलगै रौनक है रूनेर भै .
बीच बीच में ईज कूनेर ले भै .. सब अल्लै झन खाये .. पेट में पीड होलि .पर हम कां सुणनेर भयां
एक साल कि बात भै . ईज घुघुत पकूण लागि भै . आब हमार खाप में पाणि उण लागि भै .
ईज छैं घुघुत मांग खांणा लिजी तो ईजलि बताय कि - ऐल नि खान् . भोल रत्ति ब्यांण कौव बुलैबेर खालै . एक इनन कैं बिटावन नहांतिन .
मैलि कौय कि एक दिदे .. आदु दि दे .. पर ईजैलि परम्परा कि दुहाई देते हुए घुघुत नि दी .
आब म्यार ईज क दगाड मनूणा क लिजी मचमचाट लागि गे . ईज भीतर गे तो मैं भीतर . ईज भ्यैर गे तो मैं वीकै पछिल भ्यैर .. मैलि आपुण घनघनाट लगाई भै .
ईजैलि घुघुत बणैबेर माल तैयार करिबेर एक परात में धरि दी . मैलि बटी कौव कैं दिणी वालि पुरि घुघुत चिपकाई वालि धरि दी . ताकि रत्ति ब्याण निकालण में आसानी होलि . .मैलि अन्तिम कोशिस करते हुए डाड मारते हुए ईज छैं घुघुत मांग . आब ईजकै दिल भै पिघल गे . वीलि द्वि घुघुत मेर हाथ में च्याप दि - ले रनकारा .. कोची ..
आब घुघुत खैबेर बाकि जै टपटपाट लागि गे . मैलि एक आजि मांगण लगाय लेकिन दोबारा घुघुताक जाग में गाल में ईजैकि फचैक पडि गे .आब में आँखन में आँस लिबेर सिति गेयूं ..
पर के करछा घुघुतक सवाद जिबाड में कुलबुलाट मचूण बैठ गे .. आब मैलि तय कर कि घुघुत चोरिबेर खाई जाओ .
आब में भ्यैर पिसाब जांणाक न्यैरैलि उठ्यूं .. तब आजकल चारी बिजली नि भै . टौर्च ले बाबूक सिरान भै . कसिके निकालूं .. मैं अन्यारै बाट लाग्यूं . आब में हतपलास लगै बेर रसोई तक पुजि गेयूं . मैलि परात में जबैं घुघुत धरि भै हाथ मार और द्वि चार घुघुत हाथ में और एकाद खाप डालि दी . आब वापस मुडयूं तो पत्त नै कसिके भान कुनन में खुट अल्जींण मैं धडम्म कैबेर उतांण है गेयूं . उत्ती बगसक मलि में छां धरि भै एक भान् में उ म्यार ख्वारन टोटिल हैगे . जाडनाक दिन मैं ख्वार बटी खुटन तक मैं नवाई गेयूं .. खटम भटम सुणिबेर ईज बौज्यू रिस्याउन ऐ गे .. म्यार डरैलि तरास हैगे . बाबू मैक्यूण बैठ गे ..
लैम्फू जगैबेर मेरि हालत देखण लाग तो हद्द यस हैई भै कि मैलि अलबलाट में  परातक मांथि बटी धरि कौवेकि पुरि घुधत आदू खै हालि .. आदू म्यार हाथ में भै .. हाथाक घुघुत भीपन छुटि भै ....
विनोद पन्त 'खन्तोली '

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