कुबाट

#कुबाट --

जूनियर हाईस्कूल में    कक्षा छ:बटी आठ  तक म्यार दगाड पढणी हरुलि  अचानक फेसबुक में देखी गे कूंछा महराज . पुरांण दिन याद ऐ ग्याय . एकै दवात में डोब हालनेर भयां . मेर होल्डरक  टांक टुट गे तो हरुलि दिनेर भै हरुलिक टांक टुटि गे तो मेरि कलमैलि लेखनेर भै . हरुलिक जी निब कें घोसिबेर मी बणूनेर भयूं लेखणी लायक . हरुलि और मी अलग अलग चटाई में एक दुसराक बराबर में बैठनेर भयां . बिलकुल पडौस में जस .  पुर क्लास में हरुलि एक यसि चेलि भै जैक नांख बटी सिंगाडक तौड नि उनेर भै . भली भलि धीर गम्भीर जस वी भै बाकि चेलि वीकि सामणि में मेकैं छितरु  मितरु जास लागनेर भाय . पढण लेखण में जरा कमजोर भै ढ्वाल पर देखींण चांण कौला तौ काकडक जसि फुल्यूड भै . जब पणित्ज्यू (आजकल मासाब या सर कूनन ) उकैं डन्ड माराल तो सीद म्यार कल्जूल लै लागनेर भै . जब मासाब मेकैं मारला तो हरुलि क मूख निचोडी जानेर भै  मेछै पुछनेर भै खाडहानि - जोरैलि लागछी ?? बस वीक यदुक पुछण में सब पीड हरै जानेर भै . फिर मी बैगक पोथ ले भयूं खाल्ली फौंस मार दिनेर भयूं - नै नै के न हैरय . पर फिरले  वीकै भीतरै भीतर जो नक लागिरूनेर वीकि गभाई वीक मूख दि दिनेर भै . सिबौ बिचारिक गोर फनार मूख कई जानेर भै थ्वाड देर क लिजी . उ नानीं भां मास्टर कैं गालि दे दिनेर भै .. नांस हैजाल तू मास्टर क . पर मजै कि बात भै जब मास्टर वीकैं मारलौ तब वीकैं गालि दिंण मैलि कभै नि सुण .  यछैणी प्यार कून हुन्याल पैं .. आजि तुम मेकें जामनै बटी कामन झन समझिया यार . दिल भै क्वे ले उमर में धडक सकौं . उसके तो हरुलि क नाम हरिप्रिया भै पर वीक लाड क नाम (जछैं आजकल निक नेम कूनन ) हरुलि भै .
अहा क्या दिन छी . हरुलि क यां क्वे पौण पच्छी आय तो हरुलि बाल मिठ्ठै झ्वालून लुकैबेर मेर लिजी लि उनेर भै . वीकि ईजिके भिटोई ले आई होलि तो म्यर बान पक्क हुनेर भै . मी ले वीकि लिजी कटकि चहा बटी बची आदू मिसिरिक कणिक बचै बेर लूनेर भयूं और हाट्टाइम ( हाफ टाइम ) में इसकूलाक करयैडि जैबेर चीजनक आदान प्रदान हुनेर भै . कदिनै हरुलि इस्कूल नि आई तो म्यार धो दिन काटण है जांछी तसै हरुलि कैं ले हुन हुन्योल . दूसार दिन रत्ती ब्यांण पुछि हालनेर भै बेई कां छिये कैबेर . घर में कदुकै ले जरूरी काम हो इसकूल जरूर जानेर भयूं . इसकूल हरुलि क वीलि जांण हुनेर भै घर वाल सोचनेर भाय च्योल भौते भल छ छुट्टी नै करन .
तीन साल बिति ग्याय आब नौ में मी दुसार ईसकूल न्है गेयूं . हरुलि दुसार ईसकूल जांण भैगे . भौते दिन तक दुसार ईसकूल में मनै नि लाग . पर समय बलवान भै कि करींछी . कति वीक गौं क लौंड मौंड या चेलि देखी ग्याय तो वीक बार में पुछ बेर नराई फेडि लिनेर भयूं . एकाद बार देखीण ले आपुण ईज बाबू क दगाड . पर नै तो उ बुलाणि ना मी बुलाडयूं वीछैं . खालि आँखन देखी धौ करि हालि .
बाद में पत्त चलौ कि हाईस्कूल करी बाद वीक ब्या हैगो . मेर ले दिलैलि मनै मन वीकैं आशीक दे कि जां ले जै रैछी भलो घर बर मिल जौ ..
एक दिनै कि बात हरुलिक ब्या हई हफ्तेक है रौ हुन्योल मी आपुण गौं क नजदीक एक नानि नानि जसि बजार में बैठी भयूं तो पार बटी उनि हरुलि देखी गै . अहा रंगाई पिछौड में भौते बान लागण लागी भै . लाल लाल जसि साडि , लालै पिछौड , पैरी भै , तलि बटी मलि तक सुन में पिंगई हई भै . उसि गहिलि चाल में खुटन में पायलनैकि छम छम करनी म्यार मुख लै पुजि गे . पैली ले हरुलि मैलि देखिये भै पर आज इदुक भलि लागणै कि मेर कल्ज में धकधकाट हुण लागि गे . हरुलिक चकाचौंध में मी यो ले भुलि गेयूं कि क्वे वीक दगाड ले छ . हरुलि ऐबेर मेर सामणी वाल बैंच में बैठि गे . मेकैं एक बार चोर आँखनलि देखि बेर हरुलि लि नारी सुलभ लज्जा क कारण मुनि चौड करि दि . तब तक वीक दुल्हौ वीकैं उत्ती बैठैबेर सामान खरीदण दुसार दुकान में न्है गे .
मेर कल्जक धकधकाट बदस्तूर चलि भै . जब जरा सामान्य भयूं तो मैलि वीक मूख चाय और वीलि म्यार मूख . हमार बीच मूखैलि तो के फसक नि भाय पर आँखनै आँखन में धौ कै फसक फराव है ग्याय . शायद गिला शिकवा ले . तब तक वीक दुल्हौ ले पुजि गे . चाइयै रै गेयूं मी वीकैं . भल डील डौल वाल नौजवान भै . देखीण चांण ले . हरुलि क दगाड वीकि जोडि ले भली बणी भै . वीलि नजगीक ऐबेर हमन उज्यांण चाय .. तब तक हरुलि कूण लागि - यो फलांण गौं क बिन्दू  गुरू छन .. म्यार क्लास फैलो छी नानछना .  वीक दुल्हौ लि हाथ जोडिबेर कौय - गुरू पैलाग .. मैलि आशीष  दे ..  वीक दुल्हौ मेर तरफ देखण लाग तो मेर धकधकाट दुगुण हैगे . उ तो सामान्य तौर पर देखणय पर मेर मन भितरक चोरैलि तो डरणै भै .मी फटाफट उल्लै बटी दुसार जाग न्है गेयूं .
आज मेकें हरुलिक गुरू कूण ले भौते अजीब जस लाग .
खैर हरुलि राठनैलि सामान खरीद और बाट लाग गे . मी ले हरुलि कैं थ्वाड देर और देखणाक चक्कर में उनार पछिल एक निश्चित दुरी में बाट लाग गेयूं . हालाकि उनर मेर बाट एक नि भै फिर ले मी बाट हिटण भै गेयुं  . हरुलि बार बार पछिल चांण लागि भै . पर मैलि नोट कर कि हरुलि कैं यसिके मेर पछिल लागण बिलकुल ठीक नि लागी भै . पर मी ले कि करछ्यूं हरुलि क आकर्षण मेकैं खीचण लागि भै .
जरा अघिल जैबेर मैलि आब आपुण गौं उज्याणि क बाट पकडनैकि सोचि और  उनर बाट बटी जरा कच्च बाट उतरण बैठ्यू तो खुट रड बेर भडम्म कैबेर लोटि गेयूं .. शायद ध्यान हरुलि तरफ हुन्योल . हाथ खुट खरोडी ग्याय . मेर लोटीण कि आवाज हरुलि राठन तक ले पुजि गे . उ लोग दौडिबेर पछिल आय . हरुलिक दुल्हौलि मी उठायूं .. और कूण लाग - गुरू यो बाट जै कां जाणौछा .. मैलि कौय - शौटकट मारनछ्यू हो . हरुलिक दुल्हौलि कौय - अरे .. भली कै हिटिया पैं .. तब तक हरुलि ले नजदीक ऐगे .. वीक आँखन में मीलि उसै पीड देखि जस मेकें मास्टराक मारण में हरुलि क आंखन में ईसकूला दिनान देखींछी .. पर हरुलि क मूख बटी जो शब्द निकल उ मेर दिल पर जोर क असर कर ग्याय .
हरुलिलि बिलकुल मेर नजदीक ऐबेर कौय - कतु पीड हुणै ... मैलि कौय .. के नै केने .. नै लागि .
हरुलि कूण लागि - गुरु ठुल हैगे छा आब तसिके कुबाट नै हिटि करो .. नानतिन ज कि छा तुम . जाओ .. भलीकै  आपुण बाटै बाट और .. हम ले आब आपुण बाट लागनू . . 
मेकें खिसैनि पडि गे . मैलि सोच अरे .. सही कूणै हरुलि . आखिर मी यो बाट जैबेर कां पुजन्यु .. मी तो वास्तव में कुबाट जांण लागि रौछ्यूं ..
हरुलि क बात सुणि बेर मी सीद पछिल मुड्यूं और बिना पछिल कै चाइयें वापस चलते हुए आपुण गौं क उज्याणि बाट लाग गेयूं ...
विनोद पन्त 'खन्तोली '

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