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Showing posts from September, 2017

खडक दा क क्रिसमस

खड़क दा कि घरवालि क जोरदार मन्त्र चलि भै .एक साल क ( चीड़ ) बुन्नी बाड़ में गैंठि बेर सजाकई भै .हजारीक फूलनैकि माल डाली भै .. मैल पुछ कि बात हो ठकुराणि ज्यू आज कि चलि रौ तौ पुज पाठ ....? और बिन बामणैकि कस पूज करनौछा ..? खडकदा घरवालि हरुलि जरा शरमैबेर कूण लागि - हाय कस बामण छा हो पड़ज्यु तुम .. आज किसमिस क त्यार छ बल . रत्तै बटी बर्त करि राखौ . आब पुज करण लागि रयु .. पुज है जालि तो तुमर घर ले प्रसादक केक भेजुल ..तब तक खड़क दा कूण लाग हरूलि किसमिस नै क्रिसमस कूनन यो त्यार कैं ..मी चाइयैं रै गेयु महाराज .. खड़क दा कि स्यैणिक आरती चलि भै .....ऊँ जय किसमिस देवा ...स्वामी जय किशमिस देवा .... हे भगवान सैन्टा क्लाज ज्यू .. सबन कैं भली मत्ति दिया .. अलबेर पप्पु क ब्या है जो .. भाल दिन जल्दी ऐ जान .. सबन छैं दैण हया द्याप्तो .. नैट पैक सस्त हैजौ .. महंगाई कम हैजौ नरैणा .. अघिल साल तुमार थान में यैहैबेर ले ठुल बोट गैठि बेर पांच किलो क केट काटून ....खड़क दा क सांकौक टुटाट पड़ि गे ...नानतिन नैलि जयकारा लगाय ... बोले क्रिसमस त्यार की जय .... बोलो सैन्टा बड़बाज्यू की जय..... जय हो .... बिनोद पन्त ....

लाहौर यात्रा भाग २

(गतांक से आगे ) आब मोदी ज्यू और नवाज घर पुज । फटाफट नवाजैकि स्यैणि पालभितर जैबेर कूण लागि - हला फरीदै ईजा एक छिट दूदौक दि हाल । भारत बटी मोदी लाल ऐ रई । ढन्ड्याव मेँ सांकल लगूण भूलि गेयू आघाण बिरालुल दूद जुठ्यै हालौ । तब तक मोदी ज्यू ले भीतर बैठ गे । जेब बटी बिलैतमिठै क पैकेट निकाल बेर एक ठुल ठुल जस नानतिन कैँ दिबेर कूण लाग ले पोथी टौफि खा और सबन बाटिबेर खाये । चाहा पाणि पीबेर मोदी ज्यू मैलि ढई मेँ ग्याय वां नवाजैकि इज पङि भै । तैलि बटी पराल बिछाइ भै । वीक मैलिबटी एक फौजी कामव बिछैबेर आम पङाई भै । मोदी ज्यू लि आमा नमस्कार कैबेर खुटनमेँ हाथ लगाय । दीर्घै ईजा । को छ मैल नै पछाण । आख ले नै देखनयू । कूण लागि आम । नवाज बलाण तब तक - ईजा यो मोद्दि छ । भारत बटी ऐ रौ । पोरसाल शाँल भेज राखछी । याद उङैछी । आमैलि मोदी ज्यू कैँ अंगाव हालबेर खोर मलासण बैठ गे अरे ईजा मोदिया । भल छै ईजा तू । आज कसिके आये तू । कभै बटी बाट चै रछयू तेर । मरण है पैलि एक बार त्वेकैँ देखि हालछयू कै हैरैछी । भल करौ त्वील ऐ गोछै । आब मरी ले जूलो के दुख नै । मोदी - तस किलै कूण लागि रछी काखी । न...

लाहौर यात्रा भाग १

लाहौर यात्रा ............भाग - 1 मोदी ज्यू काबुल बटी गाङी मेँ बैठ । काबुल वालनैलि नाश्ता मेँ गडेरिक स्याव उबालि बेर लासणक लूण दगाङ खिलाइ भै बल रत्ते ब्याण । जाण बखत बाटपन भूख लागैलि कै द्वि माण काजू क गुद ले धरि भै एक रुमालाक गांठ मेँ । मोदी ज्यू लि काजू क गुद बाटै खै हाल । आब गाङी पाकिस्तान पुजि तो पेट मेँ गुङमुङाट जस हुण बैठ । मोदी ज्यूलि ड्राइबर छैँ कौय कि यार कति ढाबा ले गाङि रोकि दिये । तुम लोग चाहा पाणि पि लिया और मी जरा लोटी लिबेर कति झुताणि जस देखबेर हल्क ले है जूल । आब गाङि जसै लाहोर मेँ पुजि तो गाङी एक अनुबन्धित ढाबा लै रुकि गे । भ्यैर आवाज लागण भैगे - उत्तराखंड खटारा ट्रासंपोर्ट के अनुबन्धित जावेद ढाबा मेँ आपका स्वागत है । जिन यात्रियोँ को आल चाण रैत पकोङी खाना हो नीचे आ जायेँ । गाङी आधा घन्टा रुकेगी । मोदी ज्यू एक टीन क डाब पकङिबेर कान मेँ जन्यो हालबेर झुताणि बैठ ग्याय । थोङी देर मेँ झुताणि बटी ठूं ठुस्स जस आवाज उण भैगे । बाकि यात्री आल चाण खाण लागि ग्याय । आब मोदी ज्यू जरा हल्क है गे । उनैलि ले एक चाहा और बन्द खाय । तब तक सामैणि बटी नवाज ऐ गोय । नवा...

डोई पाण्डे ज्यू क ब्या

जैसा कि आप जानते ही हो हमारे डोई पाण्डे ज्यू हर साल लखनऊ से पहाड़ आते हैं अपनी फटफटिया पर . कहने को तो ये यात्रा पहाड़ घूमने के नाम पर होती है लेकिन असलियत ये है कि हमारे डोई जी पहाड़ एक लड़की ढूंढने आते हैं . इस साल भी आये थे ये जनाब . कुछ लड़कियों के इन्टरब्यू भी लिए . पेश है उनके साक्षातकार के मुख्य अंश - पहली लड़की देखने रानीखेत गये . लड़की प्राइमरी में शिक्षिका थी . डोइ जी ने लड़की को देखा तो मन आ गयी . डोई कुछ पूछते उससे पहले लड़की बोली - ये बताओ लखनउ में तुमारा घर कहां ठैरा ? डोई - कल्याणपुर .. लड़की - ये दुर्गम ठैरा या सुगम .. डोई - क्या मतलब ये सुगम दुर्गम क्या होता है . लड़की - देखो जी मैं मास्टरनी हूं . हमारी पोस्टिग दुर्गम सुगम में होती है . फिलहाल में एक दुर्गम स्कूल में हूं . अब में नहीं चाहती कि मेरी ससुराल दुर्गम में हो . अगर तुम्हारा घर स्टेशन के पास ही हो तो ठीक है . अगर स्टेशन से दूर हुवा तो दुर्गम में मैं नहीं जाउगी . तुम्हें एक घर सुगम में लेना पड़ेगा . डोई बेचारा चकरा गया .. बजर पड़ जाल यो दुरगम सुगम .. डोइ वहां से भाज गया .. अब एक जगह लड़की देखने गया .. ल...

शराब पीने की विधि

अगर आप ब्राह्मण हैँ और शराब पीनी हो निम्नलिखित बिधि से ही शराब पीयेँ । गिलास स्थापनम् - कपङेन भूमौ पोछा लगात्वा तदुपरि पुरालम् पुराल माथि मोस्टम् मोस्टो परि आसनम आसनस्यो परि जग मेँ जलम द्वि गिलासम ब्रान्डी , व्हिस्की चैव रम . देसी . ठर्रा जिन बीयर शराबे तस्मिन सन्निधिँग कुरु । संकल्प -ऊँ खङकु खङकु खङकु नमः भूतात्मने जम्बू द्वीपे भरतखण्डे अमुक मण्डलान्तर्गत टूटि मकाने बाँज गोठे शराबि गोत्रोत्पन्न (अहं कह लेना ) अमुक शर्मणः नव वर्ष उपलक्षे अप्राप्त शराब प्राप्त अर्थम प्राप्त शराव तत्काल भक्षणार्थम समस्त प्याज टमाटर सलाद नमकीन सहितं काकटेलम् करिस्यामि । (इस प्रकार बिधिपूर्वक मदिरापान करने से आपको हैँग नही होगा )

मेरी माँल यात्रा

बच्चों की जिद पर मॉल गया हो साब ... क्याप बना ठैरा . हमारा तो पूरा गाँव समा जाय. दरवाजे पर ही गड़बड़ हो गयी भीतर कै खुलैगे या भ्यैरकै गजबजी गया . भीतर जाकर देखा बड़ा ही चुपड़ फर्श ठैरा . रड़ते रड़ते बचा ... मैलि मंजिल मे जाने के लिये घूमने वाली सीड़ी .. आब कसके जाऊ ? बेटा मेरी हालत समझकर बोला पापा मेरा हाथ पकड़ो कुछ नही होगा ... फटक मार कर चढा ...पता नही कैसे भगवान की कृपा से बैलैन्स बन गया वरना मुख लै पतेड़ी जाता ..... खुटन में कम्ब जैसी छूट गयी ... बाहाहो गजब महंगाई ठैरी अन्दर ... नाम हुवा पैन्टागन माँल पर मेरे लिये पैन्ट गीली माँल हो गया ... बजर पड़ जाल इनसे अच्छी तो भोटिया मार्केट की दुकानें ठहरी ..... कुकुरीच्याले सर सर बोलकर पन्नी के डबल भी काट लेने वाले हुए .. भ्यैर निकलते समय खान तलासी भी दो जैसे हम जेब काटकर आये हैं ...... कसम से ईज्जत के साथ फुल बेईज्जती का अहसास होता है ..

शहर यात्रा

आज तो जमाना बदल गया है . मैं जब बच्चा था तो गां व के बच्चे सीधेसाधे ही होते थे .पाचवी तक तो गाँव से बाहर ही नहीं गया था . शहर के बारे में बस सुना ही था . शहर भी तब मेरे लिये अल्मोड़ा बागेश्वर नैनीताल तक ही था . खैर पहली बार पाँचवी छठी में पढता हूंगा तो पिताजी के साथ अल्मोंडा जाने का अवसर मिला . बस में भी पहली बार ही बैठा था तब . बस के अन्दर जाने पर ही पता चला कि बस में कुर्सियां ( सीट )भी होती है . मैं अपनी ताईजी के साथ ज्यादा रहता था .सारी जिग्यासाओं की पूर्ति वही किया करती थी . पहली बार शहर जाने का रोमांच चरम पर था . तब कपड़े भी एक दो जोड़ी थे . लोगों के पास इस्त्री थी तो मैने किसी से सुनकर रात तीन चार दिन से पैन्ट शर्ट तह बनाकर सिराहने रखी ताकि सिकुड़न दूर हो जाय . पर तह बनाने का कोइ तरीका नहीं था तो जब कपड़े निकाले उन पर कयी वर्गाकार क्रीज बन गयी . जिन्हें देखकर मैं फूला नहीं समा रहा था . जाने से पहले ताइजी ने शहर के बारे में अपनी समझ के अनुसार बातें बताई . शहर के कायदे कानून सिखाये . मसलन गाड़ी में जीभ बाहर मत निकालना .. जीभ कटने का डर है . गाड़ी से सिर बाहर मत निकालना .और जो स...

पहाडी बर्यात

आपको आज मैं पहाड़ी बारात के एक दृश्य से रूबरू कराता हूं . मेरी उम्र तक के लोगों ने अक्सर ये दृश्य अवश्य देखा होगा और महसूस भी किया होगा कि तब हमारे ग्रामीण जीवन में कितनी आत्मीयता थी . दरअसल वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना तो हमारे गांवों में ही थी . तब गांव मैं आयी बारात की कौन कहे . सुना है कि गांव से गुजरती अनजान बारात के सत्कार के लिए भी लोग तत्पर हो जाते थे . हमारे घर के कुछ दूर एक रास्ता पैदल पहले प्रचलन में था .. हम भी गांव को क्रास करती बारातों को देखने जाते थे . तब बारात के साथ एक परात में गुड लिये एक आदमी चलता था जो हमें गुड खिलाता था .हम गुड के लालच में बारात देखने जरूर जाते थे . एक चीज और जो आकर्षित करती थी वह थी बारात में चल रहे बीनबाजा तुरही वालों और छोलिया नर्तकों को देखना . बारात देखते दर्शकों के सामने थोडी देर के लिए ही सही ढोली छलरिया बाजा बजा देता और छलरिये नर्तक तलवार घुमा कर कुछ नाच कर ही देते थे . ईजा वगैरह डोली में बैठी दुलहन को देखते थे चाहे वह बारात कहीं की हो जानपहचान की भी ना हो ... थ्वाडै डोलि बिसाया हां ब्योलि देखनू .. ब्योलि महिलाओं को देखकर रोने लगती थी . ईज...

कुकुरी बाबा

कुकुरी बाबा ------+++++++++++++++++++----------- आज बाबा जी के कारनामे और उनके अन्ध समर्थकों के अन्ध भक्ति पर एक पुराना वाकया याद आ रहा है . बाबा के दोषी साबित हो जाने पर भी उसके काले कारनामोॆ में साथ देना पता नहीं कहां की अक्लमन्दी है . दोष साबित न होने तक साथ देना समझ में आता है . पर कोर्ट द्वारा दोषसिद्ध होने पर .. हां तो लगभग पैतीस चालीस साल पहले की बात होगी हमारे गांव से कुछ दूरी पर एक बाबा जी का आगमन हुवा . अब मुझे ये तो याद नहीं कि बाबा कोई स्थानीय थे या कहीं मैदानी क्षेत्र से आये थे . पहाड़ में एक से एक अवतारी और सिद्ध पुरुष समय समय पर अवतरित होते आये हैं और बाहर से भी कुछ सिद्ध आत्माओं को देवभूमि की अलोकिक छटा आकर्षित करती आयी है . यहां पर आकर जप तप ध्यान आदि के लिए शान्त और सुरम्य वातावरण उन्हें बहुत भाता है गांवों के लोग पहले से ही धर्मपरायण होते थे . कण कण में भगवान पर विश्वास करने वाले देवता के नाम पर पत्थर भी पूज दें . फिर कोई भगवावस्त्रधारी मिल जाय तो उस पर तो विशेष श्रद्धा दिखाते थे . बाबाजी जल्दी ही इलाके में प्रसिद्ध हो गये . भक्तजन उनसे मिलने जाते अपनी सामर्था...

मथुरिक ड्यार

के काम क लिजी हल्द्वाणि जै रौछयू कूंछा वा जैबेर हमार यांक मथुरि का च्योल उरबी मिल गोय . उसके वीक नाम उर्बादत्त भै घरपन उरबी उरबी कूनेर भाय .. मैलि उरबियाक ड्यार में पुजिबेर घर फोन कर . फोन च्यालैलि उठाय मैलि कौ चेला हल्द्वाणि पुजि गेयूं यां उरबिया ड्यार में छ्यूं ऐल ..बस च्यालैलि फोन आपुणि मस्तारि कैं पकडै दी और वां बटी स्यैणि बागक जस गुगाट करण फैटि गे . मैलि कौ के हैगो ? कूण लागि तौ उरबियाक लालाक ख्वार कि आग लाग यो उमर में तनन कैं कि मत्ति ऐ तसि जो ड्यार खोलिबेर बैठि रयी .. और तुमरि मत्ति ले कि भांग फुली हल्द्वाणि जैबेर तौ उरबियकै ड्यार मिलछै रूणा लिजी . तुमन कैं हाकणीं डालणी क्वे छै नैं . कास बेशरम छा . उल्लै वापस जाओ तौ ड्यार बटी . हमार खान्तोईक बहत्तर मवास रूनी बल तां . तुम यो बुड्यांकाल तसिके ड्यार में रौला तो मैंस कि कौल . क्वे देखलौ कि होल . तुमरि तो के इज्जत नहांति पर यां समाज में मेरि तो इज्जत छ .. मैल कौय - अरे यार कास फसक करनौछी . स्यैणि कूण लागि - कि करूं फसक करिबेर . बजर पडि जाल मेर ग्रहौ . यो उमर में मेर बुड तसिके ड्यारन में जाल कैबेर ज कि सोचि राखी छी . मैलि कौ -भाग...

फसक फराव

पद्मादत्त ज्यू रत्ति रत्ति ब्याण धरणीधरा क यां जैबेर - ओ धरणि . ओ धरणीधर ! धरणीधर - अरे पद्दा नमस्कार . आओ . आज कसिके भुलि गेछा इथकै बाट् ? पद्माद्त - अरे . नमस्कार पुरस्कार तो तसी है गे पैं यार धरणियां .. क्यै त्वीलि नै सुणी पारा भीडक टीकराम ले खतम हैगो बिचार . धरणीधर - ओहो . बड नक सुणै गेया हो पद्दा .. किलै खडाखडी कि भो टिकराम कैं . तसी के नै सुणी रैछी . के बीमार हिमार ले नि छी बल . पद्मादत्त - क्याप कुनेर भये यार तू . कस नि छी बीमार . उपसास क मरीज भै टिकराम पर चर्ज के ले नि करनेर भै . कतु कौ बीडी नै पिये कैबेर कैकि नि सुणनेर भै . पोरबेर ले एक बार मरण तरण भो . कतु क दवाई पुडी करी तब भल भो . भल ले कैहैबेर भो .. भीतर भीतरै मर्ज तो उसै भै . धरणीधर - आब जी कूंछा पैं . खाली कूणैकि बात भई . दाण पाणि पुर हैगे हुन्याल बिचाराक .न्यैर रै गे बीडी बन्डल पर . पद्मादत्त - होय तस तो तू ठीकै कूण लागि रौछै . ईसकूला दिनान ले तौ गध्यार लुकि बेर द्वि चार कस मारी ल्हिंछी . भगवान सिंह मास्टरै हाथैकि खूब मार खाई भै तैलि . धरणीधर - हा हा हा ठीक कूणौछा . उसके पढण में होशियार छी. गणितक कीड भै . तैकि...

रावण

अचानक रावण ज्यू मिल गये .- मैलि पछाण हाल . बिलकुल वी पुराण गेटअप में दस ख्वार बीस हाथ . भयंकर डील डौल . मेकें देखते ही हा हा हा हा हा हा हा करण बैठ गे . बाबाहो मेकें तो तरास जस लागि गे . आवाज इतुक गर्जना वालि भै कि कान टोव जसि पडि गे . जरा मी सामान्य भयूं तो मैलि कोय - बुबू पैलाग . रावण - को छै रे तू ...? और मैं तेर बुब कसिके भयूं रे . मेर तो खानदान रामचन्द्र ज्यू लि मारि हालछी . मैलि कौ - हाय , कसि बात करनौछा .. तुम ले बामण मैं ले बामण . यो रिश्तैलि तुम म्यार बडबाज्यू हैगेया . रावण - (गुस्स में ऐबेर ) - कां तु डेढ हड्डी क कां मी डील डौल वाल . कां तुम लिन् बामण और कां मी वेद शास्त्रनक पारंगत प्रकांड पडित .. कां जोडनछै रे मेर दगाड रिश्त ...त्वकें एक सकल्प करूण ले भलिके नि उन हुन्योल रनकारा . मील रावण संहिता जस ग्रन्थ रचि भै .. शिव तान्डव स्त्रोत क नाम सुणी राखछै नै . ? वीकि रचना मैलि करी . उ त्वेकैं शुद्ध पढण ले नि आ . मैं तो कवि ले छ्यूं .. कतु कला न में पारंगत .. मेर जस को भो यो ब्रह्माण्ड में . मैलि कौ - उ .. कवि तो मैं ले छ्यू . तुमरि चारि मैं ले उच्च कुल में पैद हयी छ्यूं . ...

शादी

भगवान कसम खाके बोल रहा हूं .. जब भी काग्रेसी लोग राहुल गाँधी जी को युवा नेता बोलते है मुझे अपने अन्दर नान्तिनों वाली फीलिंग आ जाती है .. दरअसल ये ये फीलिंग इसलिये आती है कि राहुल जी मुझसे चार पांच साल बडे हैं . अब ये बात अलग ठैरी कि राहुल जी का ब्या नहीं हुवा ठैरा .. राहुल जी मुझे समझदार आदमी लगते हैं ( राहुल जी को पप्पू कहने वाले क्षमा करें ) . ब्याह न करने के अपने ही फायदे हैं . ना बीबी के ताने ना बच्चों की किटपिट .. जब भी जी किया गांधी आश्रम का थैला टांगकर विदेश किसी अच्छी लोकेशन पर घूम आओ . यहां ये भी फायदा है कि देर से शादी करो तो बीबी  समझदार और परिपक्व मिलती है . जल्दी शादी करो तो बीबी नान्तिन्योई अकल वाली आ जाती है अगर शादी ना भी हुई तो कोई बात नहीं कह दो देशसेवा की खातिर शादी नहीं की ..  वैसे भी राहुल जी की उमर इतनी ज्यादा भी नहीं हुई है . मेरा मानना है कि शादी की कोई उमर होती ही नहीं है . दिग्बिजय जी की तरह साठ साल के बाद करो या नारायण दत्त जी की तरह पुत्र रत्न की प्राप्ति के बाद करो .. हां ये बात जरूर है कि अगर राहुल जी विवाह कर लेते तो लोकसभा में काग्रेस की ए...