सौरी

अग्रेजो ने सौ साल तक हमारे देश में राज किया . हम सोने की चिडियां थे बल . अग्रेजों ने हमारी हालत लुत्ती कुकुर जैसी कर दी .  पर अग्रेज जाते जाते हमें एक पापनाशी गलतीनाशी भूल सुधार  रक्षा कवच थमा कर  चले गये ..  साँरी .. जिसका हमने शास्त्रोक्त विधि से शुद्धिकरण करके सौरी नामक मन्त्र बना दिया . सोचिये अगर अग्रेज ना होते तो सौरी की जगह हमें क्षमा कीजिएगा जैसा भारी भरकम शब्द प्रयोग करना पडता .. कल्पना कीजिए कहीं पर किसी पहलवान टाइप व्यक्ति से हम टकरा गये और  सौरी नामक रक्षा यन्त्र का प्रयोग कर दिया और पहलवान की पहलवानी और क्रोध का कीलन हो गया . वरना क्षमा कीजिएगा गलती से लग गया कहने तक पहलवान जी एक रैपटा हमारे कान के नीचे धर देते .  इस लिहाज से गौर करें तो ये समय भी बचाता है और ठुकाई से भी .
हालाकि हमारे यहां गलती  से बचाने के , कई उपाय पहले से मौजूद हैं और हम इनका प्रयोग समय समय पर करते भी रहते हैं .
मसलन अगर हमने पाप कर लिए तो हमारा मानना ये है कि गंगा में डुबकी लगा लें और अगले पिछले सब पाप छू मन्तर .  अगर कुछ रह भी गये तो पूजा पाठ जप तप से चले जाएगे .. मतलब लाइफबाय मारे सौ प्रतिशत कीटाणु टाइप .  कुछ विद्वानो ने इसे धार्मिक सौरी भी माना है . पाप करो फिर पूजा पाठ करे भगवान जी को सौरी बोलो .. अब आप फारिग हो गये .. आगे भगवान जी जाने या उनका काम . और तो और हमारे पास पिछले जनम की गलतियों के लिए भी एक सौरी है .
सौरी के कई प्रकार हैं . नेता लोग वायदे करते हैं चुनाव जीतते हैं फिर पांच साल कुछ नही करते बस सौरी बोल देते हैं .. हम भी उनका कहा सुना माफ कर देते हैं .
सौरी मन्त्र का सबसे ज्यादा उपयोग बाबा जी लोग करते हैॆ .. मतलब करवाते हैं . जब हम जीवन की भागदौड से तंग आ जाते हैं तो बाबाजी की शरण में जाते हैं . बाबा हमसे सौरी बुलवाकर हमारी आत्मा शान्त करवाते हैं . जब बाबाजी हमारी सौरी के बोझ से दब जाते हैॆ तो वो जेल तक जाते हैं . फिर जज साहब उन्हें जेल भेजकर सौरी करवाते हैं . जब बाबजी जेल में उकता जाते हैं तो उन्हें पेरोल नामक सौरी के माध्यम से बाहर निकाला जाता है .
तर्क दिया जाता है बाबाजी का चाल चलन जेल में बहुत अच्छा रहा इसलिए पेरोल दी जाती है .
अब इन्हें कौन समझाये कि - जेल में तो चाल चलन ठीक ही रहेगा .. चाल चलन तो बाहर खराब रहा था बाबाजी का ..
फिलहाल मेरा ये लेख लिखने के लिए - सौरी ..

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