पौण्येई

हमार पहाडन में कति पोण्योई में जाओ आओ तो के न के लिजाणक रिवाज छ . आदिम आपुण सामर्थानुसार के न के लिजानेरे भै .
 लेकिन कबै कबै यास मेजवान ले मिल जानी कि कि पौणा क लिजी बजि गजबजाट वालि स्थिति है जां ..
आब तुम कैकै यां जाओ और मिठाई लिजाओ और थ्वाड देर निठाई कैं झ्वालूनै रूण दिओ .. बस तुमन कैं तब तक चहा पाणि नि मिल जब तक झ्वाल बटी डाब नि निकाललाल. घर वाल तुमन कैं घेर बेर बैठ जाल .. और तो और नानतिन ले तुमन लै जेटी जाल . आम बटी लिबेर काखि तक सब तुमन छैं कुशल बात पुछाल पर नजर तुमार झ्वालै में होलि .. बीच बीच में तुमन याद ले दिलाल इनडायरैक्ट रूपैलि .. को गाडि में आछा .. बाटपन गाडि कती रुकछै नै .. बाटपन कां रुकी चहा पाणि तैं .. लोध्धि में रुक हुनेलि .. आब तुम कौला होय रुकी .. तो झट्ट वां बटी तुरुप चाल ऐ जालि - होय लोध्धि में मिठाई हिठाई लिणा लिजी तो तबले रुकनी छ गाडि . फिर बात कैं मिठाई में केन्द्रित कराल - अच्छ्यालन तो लोद्धि में ले भली मिठिठै मिलैं .. हमार यां सब उणी जांणी अच्छियालन लोधिये बटी लूनन .
तब तक एक बुडज्यू ले मिठ्ठै पुराण कैं अघिल बढाल - पैलि बटी कोसि क बाल फेमस भाय .. इताण ठुल चौकलेट हुनेर भाय .. चिमडा चिमड .. दहाई हौस लागनेर भै .
तुम अन्ताज करिया तौ फसकनाक बीच में जो नानतिन तुमन कैं घेर बेर बैठि रैछी उनार राव टपकण बैठ जालि और उ तुमार झ्वाल उज्याण लेपसीण जस बैठ जाल ..
आब बुडज्यु बात अघिल बढाल .. आहा .. माऊ पातैकि मिठ्ठै .. कतु सवाद हूंछी .. द्वि खै लिओ फिर दिन भर भूकै नि लागनेर भै .
आब तो तुमार खाप में ले पाणि उण बैठ जाल . और जसै तुम मिठ्ठै क डाब निकालि बेर घरै कि घरैणि या गुस्याणि उज्याणि डाब करला तो लगभग डाब कैं तुमार हाथ बटी छडाते हुए कौलि - हाय यो किलै लाछा .. यैकि कि जरवत छी .. उस्सी कैबेर ऐ जाना . तुम नोट करिया यस कूण बखत वीक मूख में पुन्यु कि जसि जून चमणक बैठि जालि और डाब पकडिबेर फरैक्क कैबेर फरकिबेर भीतरकै अलबलानी बाट लागि जालि .. इतुक अलबलानि भीतर जालि कि भीतर दरि क जो धाग निकलि रूनन उमै अल्जी बेर मूख लै पतैडीते पतेडीते बचैलि . वीकै पछिल नानतिन ले ओ ई  ओ ई कैबेर दौड लगै द्याल ..
आब तुमार मूख लै रै जाल द्वि बुड बाडि ..
बुडी जो ऐल तक मिठ्ठै नि लैरय कैबेर मूख अन्यार करिबेर बैठी छी आब ब्वारि कैं धत्यूण बैठि जालि .
अरे - दुल्हैणि .. हम तो फसकन में रै गेयां .. जरा चहा बंणा .. दूर बटी ऐरीन .. खाप सुकि रै हुनेलि .
आब बुडज्यू कौल - तौ मिठ्ठै हिठ्ठै खालि लाया तुम .. क्वे नि खान .. तैहेबेर भल तो नानतिनै चैं टौफी बिसकुट लि उना . भौते अकर हैरे हुनेलि मिठाई .. टौफी सस्त ले भाय और नानतिन टौफी लि खुशि हुनन कतुकै मिठ्ठै खिलै दिओ तनन . और कभतै मी ले खानी छ्यू टौफी .. जरा चूस तो खाप में पाणि जस ऐ जां . मतलब बुडज्यू तुमन सुणूण लागि रई कि नानतिनैते के नि लाये . कमचूस रनै छै तू .
तुमन जब तक खिसैनि पडैलि कि नानतिनन भुलि गेयूं .. तुमन पर बुडी दूसर प्रहार करैलि -
दै .. तौ टौफी हौफी मिठ्ठै को दि नानतिन . तैहै के फल फूल नि उना . मिठ्ठै अच्छालन बासि मिलैं . क्याव स्यो हप्तेक चलि जानन .
उसके ले मिठ्ठै आदुकै किलो लूना . पडौस पनलै बाटणा लिजी है जानि और बाकि के फल फूल धर ल्याय  हल्द्वाणि में क्याव सस्त हैरे हुन्याल . मतलब बुडी सेफ सौट खेलणै .. कि मिठ्ठै ले लाये और क्याव ले . बुडी कैं डर छ कि कैं अघिल बार खालि एक दर्जन क्यावै लिबेर नै पुजि जाओ .
आब बुडज्यू कौल ..तु बुडी कैं अकलै नहां . हल्द्वाणि बटी लाईनी क्याव .. बाट पन पेची पाची जानी .. हल्द्वाणि बची स्यो अनार जास फल लूण चैनी .. दगाड में क्याव तो जल्लै गाडि बटी उतर उत्ती बटी लूण चैनी . सब जाग दुकान भये आजकल . फिर कि अकर .. द्वि चार रुपैं क फरक होल .. हल्द्वाणि बटी बोकण हैबेर बचि जाला .
तुम आब हूं हा करला .. और सोचला .. ठीक कूणीन फल ले धरि लूण चैंछी .
तब तक भीतर बटी नानतिनक किकाट चालू है जाल - ओई .. मी ठुल वाल खूल .. ओ ई मीकैं पात वालि चैं ..
ईज मैक्यूण बैठैलि .. जाग पैलि एक टुकड द्याप्ता थान धरण दिओ .
तुम भ्यैर चहा तैं झुकी होला ब्वारि तुमार लाई मिठ्ठै क चुर जस बणै बेर दगाड में भितर बटी मिसिर चार कणिनक मिलैबेर आठ दसेक पुडी जस बणै बेर पडौस बांनण बाट लाग जालि . इथकै बुडी माचियेलि .. पैली चहा बणूलि .. जथकै गे हुनेलि .
ब्वारि वापस ऐबेर सफाई देलि .. मिठ्ठै बसैन जसि हैरै .. पछिल खितण हैबेर मैलि सोची पडोस पर बांटि ऊं .. तब तक बुडज्यू कौल .. ला एक चुर मेकैं ले दे ..माऊ पातैकि लाये .. बाल बुकाइन नहांतिन   ब्वाकि लड्डू लिबेर आलि और कौलि - माउ पातैकि एक्कै छी .. नानतिनैलि जभ टपकै हुनेलि .. लिओ लड्डू खाओ .. और तुमन छै कौलि .. अघिल बार बटी आला तो एक किलो मिक्स बाल नाक दगाड एक डाब यो सौरज्यू नैतें माऊ पातैकि आदू किलो अलग से लै दिया . बुड पराण भोय आघान .  मन जानेरै भै . मतलब तुमन बतै ले हालौ कि मिठाई बासि छ और अघिल बार क लिजी एडवांस बुकिंग ले करि हाली . तुमरि हालत ज्वेताई जस हैजालि .. मनै मन सोचला कि ओहो .. गलती हैगे  बुड बाडि नक ध्यान धरणैं चैंछी ..
फिर बुडी कौलि - पोरु हमार  खान्तोई वाल जवैं ऐ रैछी .. द्वि किलो मिठ्ठै लाई भाय .. को खाओ हैगे .. दगाड में स्यो अनार .क्याव नारींग . और तो और नानतिनैते उ कि कूनन लमचूस ले लाई भाय .  आजि बुड बाडि छन कैं एक एक पुडी काजू . और ठल्लो डाब चेवनपरकासक लाई भाय .. एक एक चमच रोज खाँ .. आंखन छै उज्याव जस चिंतूणूं आजकल ..  गजबै नीयत भै खान्तोई पौणज्यू कि .. जांण बखत ले हमैलि डबल पिठ्या लगाइन .. बिलकुलै नी पकड दी .. हद्द हाणि दी .. और तो और द्विये नानतिनाक हात में बऊ वै बव द्वि द्वि सौ रुपैं च्याप द्याय .. कतु नै नै कै लागी भयां .. पर मानै नी .. कूणैछी अघिल बखत नानतिनैते कपड ले लून कैबेर ..  दै .. उनरी कि काथ कूं .. बिलकुल द्याप्त भाय .. खाणैते ले जी दि दिंछा .. बिचार के नि कूनेर भाय .. तदुक सीद तो हमैलि मैसै नि देख .  बिचार गोठ नि बादा भितरै बाद .
मतलब तुमन कैं बतूण लागि रईन कि भोल जभत कै जाला पिठ्या डबल झन पकडिया . और नानतिनाक हाथ में के च्यापि जाया .
आब तुमरि हालत येसि है जालि कि नै तो तुमन चहा भल लागौल नै खाणै में सवाद आल . और रत्ति ब्याण पिठ्या डबल तदुक सुणि बेर पकडनै हिम्मत कैकि होलि . नानतिन नाक हाथ में च्यापणक डान अलग से भुगतला ..
और एक बात आज बटी कति पौणौई में जाण हैबेर पैली दस बार सोचला ..

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