Posts

Showing posts from December, 2017

घोटाला

दिल्ली के रामलीला मैदान में अर्जुन अपने रथ पर आरूढ हैं . भगवान श्रीकृष्ण उनके रथ पर सारथी हैं . कुछ कुछ द्वापर युग के रणभूमि का दृश्य सा प्रतीत हो रहा है . वही धूल धक्कड उड रहा है पर ये घोडों की टापों से नही मानव के पापों से हो रहा है मानव के प्रदूषण से हो रहा है . भगवान ने अपना मुह मास्क से ढका है . अर्जुन भगवान को रथ आगे ले जाने का आग्रह करते हैं पर रथ है कि ट्रैफिक जाम में फसने के आसार हैं . नारायण अन्तर्यामी हैं कहते हैं - हे पार्थ , यही से सब अवलोकन कर लो . आगे बढना सही नहीं है . ये कलियुग है . अर्जुनोवाच - हे केशव ! बताइये मैं ये बाण किस पर संधान करूं ..? यहां तो पता ही नहीं चल रहा कौन दागी है कौन घोटालेबाज है . कौन सा घोटाला है कौन सा नहीं है . क्या सब व्यर्थ का कोलाहल था .. यदि व्यर्थ का था तो फिर यह सब शोर क्यों मचा था . क्या फरक है प्रभू पुराने और नये लोगों में . मेरा मार्गदर्शन करें प्रभू . मेरी आँखो से ये परदा हटायें . श्री भगवानोवाच - हे पार्थ ! ये सी बी आई की तरह कन्फ्यूज ना हो . ये कलिकाल है पार्थ . यहां आकर कुछ राजनीति सीख . ये तेरा काम नहीं सोचना कि कौन दोषी है कौ...

मैतैकि तैयारी

आदिम - अरे ! कि छ यो .. तदुक झ्वाल किलै करि राखन पैक ? किलै मकान मालिकैलि मकान खालि कर कै हालछै ?? स्यैणि -हाय के हैगो तुमन ?? किलै भुलि गोछा ? अमरु वक ब्या नहांति ?? आदिम - अमरू .... को अमरु ..??? अरे कति त्यार मैतक अमरु तो नहां जो एक साल चेलिनाक इसकूला भ्यैर बटी चेल्लिन छेडन में पुलिस वालनैलि थेचौ ... तेर मैतक अमरू ... स्यैणि - हाल्ल नि करो हां .. मेर रिश्तेदार भै . वीक इजक और मेर आमक मैत एक्कै गौं में छी . आब न्यूत ऐरौ तो मानणै भै . यो बहानैलि आम् कें ले भेटि उल . बुडी मैंस भै .. आदिम - (चिढाते हुए ) बुडी मैंस भै ... के नि हुन उ बुडी कैं अल्लै .. फिर तदुक दूरैकि रिश्तेदारी में को जां यो दिल्ली बटी . कदुक खर्च हूं . स्यैणि - तस किलै कूंछा .. कदुक काम लागौं अमरु मेर मैतिनाक् ... मेर बाबू क कैका दगाड झकड भै तो हमर तरब बटी गालि मैक अमरुवै करौं .. आदिम - के भाल काम ले करनी त्यार मैत्ती .. स्यैणि - तुम जासन कें मैं जैसि चेलि दी राखी .. और के भल करनी . तुमर भल तो करि राखौ .. आदिम - बज्जर पाडि राखौ . स्यैणि - के को .. जरा जोरैलि बुलाओ धें .. आदिम - बज्जर ..... मेर मतलब बजार जाणयू...

भिंचाल ( चलक )

रत्तिब्याण बिस्तर में पडी भयूं .. तब तक स्यैणि घचबचूण बैठ गे - स्यैणि - सुणनौछा ,बेलि भिचाल भो बल .. तुमैलि चिताछै .. मैं - जब बटी त्यार दगाड ब्या भो तब बटी यो भिचाल ,आँधी तूफान ,हाव बयाव , केकै पत्त नि चलन . स्यैणि - कि कौ .. जरा जोरैकि कओ धैं ...? मैं - -आब सार पडि गे कूण लागि रयूं .. त्यार दगाड रूण में .. एक नानि नानि जसि सुनामी भयी तू .. त्यार सामणि यो भिचाल कां चिताइनन . स्यैणि -हाकाहाक नि करो हां . मैं - कतु बाजि आ बल तौ भूचाल ..? स्यैणि - रात आठ बाजिबेर पन्चास मिनट में बल . मैं - अरे !! मैलि धरती हलकन जसि तो चिताई छी . पर मैलि सोची तु चारपाई बटी भिमै घुरी गे हुनेलि . तब हिलणौ मकान कैबेर सोचो .. फिर जब त्वेकैं बिस्तरै में देखौ तो मैलि सोचो मेकें भैम हैगो हुन्योल .. स्यैणि - तुम चुप रया हां तुम .. ज्यादा ओभर स्मार्ट झन बणिया .. तुमार बगल में पडि रछ्यू .. कसिके सोची .. मैं - उसके जब तू हिटछी तब ले भीतर पन चार पांच रिक्टर स्केलक भूकम्प ऐ जां .. खैर छोड त्वेकैं पत्त लागछै भिंचाल भो कैबेर . स्यैणि - नै नै मैलि ले नि चिताय . जरा आंख लागि गेछी .. पर तुमन तो नींन नि ऐरैछी . ...

अध्यक्ष सैप

सोनियां ज्यू घर में आज कौतिक जस हई भै . सब गौं पना क स्यैणि भलि भट्यूणा लिजी आई भै . प्रियंका सबन कैं पिठ्या लगूण लागि भै . अम्बिका सोनी गूड बाटण लागि भै . स्यैणि भल भै हो प्रियंका ईजा तुमर च्योल अध्यक्ष बण गो कूण लागि भै . दगाडै तुमरि तबियत कसि छ आब कैबेर हालचाल ले पुछण लागि भ्या .. चाहा पाणी क इन्तजाम में अहमद पटेल ज्यू लागि भै . राज बब्बर सैप नमकीनाक पुडि फाडिबेर कागजाक प्लेट में डालण लागि भै . बुडी बुडी जस स्यैणिनाक लिजी शीला दीक्षित ज्यू सिगल पू पकूण में लागि भै . रणजीत सिंह सुरजेवाला ज्यू चाहा बाटण में लागि भै . राहुल ज्यू एक जाग कुरसी में बैठिबेर लोगन छैं बधाई लिण लीगि भै. उनार दगाड सचिन पायलट और जिंदल सैप ले बैठी भ्या . राहुल ज्यूक क्वे खुट छूवणाय क्वे नमस्कार कूणाय . राहुल ज्यू ब्या दिनाक बरै क चारी तन बेर मन्द मन्द मुस्कराण लागि भाय .एक किनार लै मनमोहन ज्यू ले गजबजी बेर जास ढाड हई भ्या . कैलि कुरसी दी और कौय कि यमैं बैठ जाओ . मनमोहन ज्यू लि सोनिया ज्यू क उज्याण चाय और वां बटी के इशार जस नि आय तो ठाडै रूण में भलाई जस चितै . गौं कि एक स्यैणि सोनिया ज्यू छैं कूण लागि - किलै...