घोटाला
दिल्ली के रामलीला मैदान में अर्जुन अपने रथ पर आरूढ हैं . भगवान श्रीकृष्ण उनके रथ पर सारथी हैं . कुछ कुछ द्वापर युग के रणभूमि का दृश्य सा प्रतीत हो रहा है . वही धूल धक्कड उड रहा है पर ये घोडों की टापों से नही मानव के पापों से हो रहा है मानव के प्रदूषण से हो रहा है . भगवान ने अपना मुह मास्क से ढका है . अर्जुन भगवान को रथ आगे ले जाने का आग्रह करते हैं पर रथ है कि ट्रैफिक जाम में फसने के आसार हैं . नारायण अन्तर्यामी हैं कहते हैं - हे पार्थ , यही से सब अवलोकन कर लो . आगे बढना सही नहीं है . ये कलियुग है . अर्जुनोवाच - हे केशव ! बताइये मैं ये बाण किस पर संधान करूं ..? यहां तो पता ही नहीं चल रहा कौन दागी है कौन घोटालेबाज है . कौन सा घोटाला है कौन सा नहीं है . क्या सब व्यर्थ का कोलाहल था .. यदि व्यर्थ का था तो फिर यह सब शोर क्यों मचा था . क्या फरक है प्रभू पुराने और नये लोगों में . मेरा मार्गदर्शन करें प्रभू . मेरी आँखो से ये परदा हटायें . श्री भगवानोवाच - हे पार्थ ! ये सी बी आई की तरह कन्फ्यूज ना हो . ये कलिकाल है पार्थ . यहां आकर कुछ राजनीति सीख . ये तेरा काम नहीं सोचना कि कौन दोषी है कौ...