हरदा सौकार
अचानक उत्तरांखंडाक सौकार सैप (हरदा ) मिल गे .
मूख में चूख जस ढोली रई भै . द्वि तीन दिन बटी बाल ने कुटरी नि भै नाण ध्वैणैकि को कूछी .
घर जाणा लिजी सामानैकि पैकिंग चली भै . सौकार्याणी और च्योल हल्द मर्च दाल लूण अलग अलग डाबन में सैट करण लागि भै . चार पांचेक कपड़ नाक फांच पुन्तुर हई भै . एक टैंक में पासबुक जमीन नाक कागजात ढेपु टांक धरि बेर ताल लगाई भ्यो .
मैल कौ - हैगेछै तैयारी ठाकुर सैप वापस जाड़ैकि ?
सौकार - कि करीं हो गुरू जाणै भ्यो . तुम लोगनैलि कां कै नि धर .
मैं - घर जैबेर कि बिचार छ ? कि करला ?
सौकार - कि करूं .. बिरोधी न कैं मैक्यूल रत्तै ब्याल और दोफरी मैं कती बोटा जाड़ बैठ बेर दहल पकड़ खेलून .
मैं - पैं खर्च पाणी ?
सौकार - नै नै .. उ .... रेत . बजरी . खनन . शराब जमीन जायजाद .... म .... म ........म...... मेर मतलब डबल है जाल .. मैं गरीब पहाड़ि आदिम भयूं .. दर गुजर है जाली . मेकैं डबल कि चैनी ..
मैं - अच्छा अच्छा ..
यो बताओ और कि की प्रोग्राम छन भविष्याक ?
सौकार - गुरू म्यार द्याप्त बिगड़ी रईन . पैली जैबेर जागर लगूल
मैं - जागर तो तुमैलि पैलि ले लगाई बल . खैर . आब सरकारी पिनसिन पोस्ट जगरी लोगन छैं लगै मागिया . तुमारा आपुणैं भै . और डंगरी ले तुमार कम डबल में औतरी जाल . जस कौला उस बोलबच्चन कराल .
सौकार - नै हो आब कैकै भरोस नै रै गे . सब पुज तनैलि बिगाड़ी . चावल म्यार घर बटी लिजै बेर उचैण बिरोधी लोगनक धरि दे . म्यार द्याप्त मेरै लिजी भुती पड़ी . आब तो आफि एक कुकुड़ लिजैबेर कती गध्यार मसाण पुजि उल .
मै- मैलि सुणी सौकार तुमैलि घर जाण बखत कुरसी लुकै हाली बल ?
सौकार - यां मूख लूकूण मुश्किल हैरौ तु बामण कैं कुरसी क पड़ि रै .
मैं - अच्छा पैं . भलीकै जाया . सोमवार छन्जरा दिन नै जाया . पूरब उज्याण बारदोष हूं बल . गाड़ी बटी मूख भ्यैर झन निकालिया . बाटपन कैके दिई के झन खाया . गाड़ी में बैठण है पैलि उल्टी थामणी गोली खै लिया . बाटपन कैछैणी कज्जी झन करिया . जैबेर चिठ्ठी दिया
सौकार - होय ठीक छ गुरू .
मैं - बाटपना लिजी के खजुर सकरपाल सै वगैरह बणै द्यू पैं पन्थाणि छै कैबेर .
सौकार - नै नै गुरू .. तौ तेल पाक पचन ले नहां मेकैं . बाट में जसपुर अनुबन्धित ढाबा में चालीस रुपै वालि जनता थालि अस्सी रुपैं में मिल जां .. वैं खैबेर उखाई भरीन ..
( फिर भितर आपुणी घरवाई कैं आवाज लगैबेर )
सुणनैछै रे .. यो पंडित ज्यू कें दक्षिण दि दे . एक बैकर ले दि दिये . रत्तै रत्तै बामण मोल छैं ऐरौ .
जजमानि एक लिफाफ और द्वि माण कन्टोला चाओ मेकैं दी गे मैलि सामान पकड़ बेर सौकार छैं स्वस्ति कै . और बाट लाग्यू .
थ्वाड. दूर डोइवाला में एक घांच में जैबेर पिसाबा बहानैलि जैबेर दक्षिणा लिफाफ खोल तो -
वीक भितर एक परची में लेखी भै -
अघिल चुनाव में जीति जूल तब जरूर नकद डबल द्यूल .
मेकैं के कूणै नि आय . मैलि सोचि दक्षिणा में ले सौकार खालि मीठ मीठ वादा करि गो .
बज्जर पड़ि जाये तु जजमान
Copy Vinod Pant ji ki Wall se
मूख में चूख जस ढोली रई भै . द्वि तीन दिन बटी बाल ने कुटरी नि भै नाण ध्वैणैकि को कूछी .
घर जाणा लिजी सामानैकि पैकिंग चली भै . सौकार्याणी और च्योल हल्द मर्च दाल लूण अलग अलग डाबन में सैट करण लागि भै . चार पांचेक कपड़ नाक फांच पुन्तुर हई भै . एक टैंक में पासबुक जमीन नाक कागजात ढेपु टांक धरि बेर ताल लगाई भ्यो .
मैल कौ - हैगेछै तैयारी ठाकुर सैप वापस जाड़ैकि ?
सौकार - कि करीं हो गुरू जाणै भ्यो . तुम लोगनैलि कां कै नि धर .
मैं - घर जैबेर कि बिचार छ ? कि करला ?
सौकार - कि करूं .. बिरोधी न कैं मैक्यूल रत्तै ब्याल और दोफरी मैं कती बोटा जाड़ बैठ बेर दहल पकड़ खेलून .
मैं - पैं खर्च पाणी ?
सौकार - नै नै .. उ .... रेत . बजरी . खनन . शराब जमीन जायजाद .... म .... म ........म...... मेर मतलब डबल है जाल .. मैं गरीब पहाड़ि आदिम भयूं .. दर गुजर है जाली . मेकैं डबल कि चैनी ..
मैं - अच्छा अच्छा ..
यो बताओ और कि की प्रोग्राम छन भविष्याक ?
सौकार - गुरू म्यार द्याप्त बिगड़ी रईन . पैली जैबेर जागर लगूल
मैं - जागर तो तुमैलि पैलि ले लगाई बल . खैर . आब सरकारी पिनसिन पोस्ट जगरी लोगन छैं लगै मागिया . तुमारा आपुणैं भै . और डंगरी ले तुमार कम डबल में औतरी जाल . जस कौला उस बोलबच्चन कराल .
सौकार - नै हो आब कैकै भरोस नै रै गे . सब पुज तनैलि बिगाड़ी . चावल म्यार घर बटी लिजै बेर उचैण बिरोधी लोगनक धरि दे . म्यार द्याप्त मेरै लिजी भुती पड़ी . आब तो आफि एक कुकुड़ लिजैबेर कती गध्यार मसाण पुजि उल .
मै- मैलि सुणी सौकार तुमैलि घर जाण बखत कुरसी लुकै हाली बल ?
सौकार - यां मूख लूकूण मुश्किल हैरौ तु बामण कैं कुरसी क पड़ि रै .
मैं - अच्छा पैं . भलीकै जाया . सोमवार छन्जरा दिन नै जाया . पूरब उज्याण बारदोष हूं बल . गाड़ी बटी मूख भ्यैर झन निकालिया . बाटपन कैके दिई के झन खाया . गाड़ी में बैठण है पैलि उल्टी थामणी गोली खै लिया . बाटपन कैछैणी कज्जी झन करिया . जैबेर चिठ्ठी दिया
सौकार - होय ठीक छ गुरू .
मैं - बाटपना लिजी के खजुर सकरपाल सै वगैरह बणै द्यू पैं पन्थाणि छै कैबेर .
सौकार - नै नै गुरू .. तौ तेल पाक पचन ले नहां मेकैं . बाट में जसपुर अनुबन्धित ढाबा में चालीस रुपै वालि जनता थालि अस्सी रुपैं में मिल जां .. वैं खैबेर उखाई भरीन ..
( फिर भितर आपुणी घरवाई कैं आवाज लगैबेर )
सुणनैछै रे .. यो पंडित ज्यू कें दक्षिण दि दे . एक बैकर ले दि दिये . रत्तै रत्तै बामण मोल छैं ऐरौ .
जजमानि एक लिफाफ और द्वि माण कन्टोला चाओ मेकैं दी गे मैलि सामान पकड़ बेर सौकार छैं स्वस्ति कै . और बाट लाग्यू .
थ्वाड. दूर डोइवाला में एक घांच में जैबेर पिसाबा बहानैलि जैबेर दक्षिणा लिफाफ खोल तो -
वीक भितर एक परची में लेखी भै -
अघिल चुनाव में जीति जूल तब जरूर नकद डबल द्यूल .
मेकैं के कूणै नि आय . मैलि सोचि दक्षिणा में ले सौकार खालि मीठ मीठ वादा करि गो .
बज्जर पड़ि जाये तु जजमान
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