मथुरिक ड्यार
के काम क लिजी हल्द्वाणि जै रौछयू कूंछा वा जैबेर हमार यांक मथुरि का च्योल उरबी मिल गोय . उसके वीक नाम उर्बादत्त भै घरपन उरबी उरबी कूनेर भाय .. मैलि उरबियाक ड्यार में पुजिबेर घर फोन कर . फोन च्यालैलि उठाय मैलि कौ चेला हल्द्वाणि पुजि गेयूं यां उरबिया ड्यार में छ्यूं ऐल ..बस च्यालैलि फोन आपुणि मस्तारि कैं पकडै दी और वां बटी स्यैणि बागक जस गुगाट करण फैटि गे .
मैलि कौ के हैगो ? कूण लागि तौ उरबियाक लालाक ख्वार कि आग लाग यो उमर में तनन कैं कि मत्ति ऐ तसि जो ड्यार खोलिबेर बैठि रयी .. और तुमरि मत्ति ले कि भांग फुली हल्द्वाणि जैबेर तौ उरबियकै ड्यार मिलछै रूणा लिजी . तुमन कैं हाकणीं डालणी क्वे छै नैं . कास बेशरम छा . उल्लै वापस जाओ तौ ड्यार बटी . हमार खान्तोईक बहत्तर मवास रूनी बल तां . तुम यो बुड्यांकाल तसिके ड्यार में रौला तो मैंस कि कौल . क्वे देखलौ कि होल . तुमरि तो के इज्जत नहांति पर यां समाज में मेरि तो इज्जत छ ..
मैल कौय - अरे यार कास फसक करनौछी .
स्यैणि कूण लागि - कि करूं फसक करिबेर . बजर पडि जाल मेर ग्रहौ . यो उमर में मेर बुड तसिके ड्यारन में जाल कैबेर ज कि सोचि राखी छी .
मैलि कौ -भागवान जरा होश कि दवाई खा . कि हैगो त्वेकैं . तौ टी वी में राम रहीम क बार में देखि देखिबेर तु पगलि गेछै . जे ते नि बुला . सब ड्यार एकनसै ज कि हुनी . यो उरबियक ड्यार छ . उरबि घर परिवार वाल बाल बच्चेदार आदिम छ .
स्यैणि आब फोनैं में टिटाट पाणन फैगे .. होय मेकैं तुमलि अनपढ सोचि राखनेल .. मी ले आपुण जपानैकि पांच पास छ्यूं .. उ तो इसकूल जाणी बाट में गध्यार नि हुन तो ऐल मी ले कम से कम इण्टर तो करि हालन्यू .
मैलि कौ - बकवास नि कर हां . गध्यार मेकैं मालूम छ .. चौमास में चार दिन पाणि रूं उ गध्यार न .. नानां नानतिन ले फटक मारि बेर पार जै सकनी उमैं .
स्यैणि कूण लागि - तुमर दगाड को बुलै सकौं . पाणि वील ज कि नै गेयूं मी अघिल कै इसकूल . उ तो आमैलि नै जाण दे . गध्यारन छौव रूंछीं बल . भौ झसकि जालि कैबेर नि जाण देय .
मेलि कौ - चूख हालाल तेरि आमाक आंखन में . पांच पास करि चेलि भौ हुंछीं .. फिर त्वेंकै कि करन उ छौव .. तू तो ज्यून्नै चुडैल छी नानछना बटी .. बडि ऐरे छौव लागल वालि .
कूणैं की तो मैलि कै हाल आब स्यैणि मेरि लिजी बकुरी रयी बाग जसि हैगे .. वील मेछैं फोन में कूण नकूंण कै हाल . और मेकैं चेतावनी देते हुण कूण लागि - फटाफट तौ उरबि रनकाराक ड्यार बटी जाओ नतर तुमार ले और तौ उरबियाक ले गणु टोडि दयूल तैं ऐबेर ..
मैलि कौ - गुस्स किलै करनछी यार .. यां उरबियैकि घरवाई ले उरबियैकि दगाडै छ . ऐल इदुक रात में आब मी कैकि यां जूल . तू नि मानली तो भोल रत्ति ब्याण न्है जूल यां बटी .. ऐल प्रीती लि आलूक परौट ले बणै राखीं मेरी लिजी ..
बस तदुक सुणते ही स्यैणि भि पनै नि रयी .. अच्छा तो तदुकै कमी रै गेछी .. उरबियैलि एक हनी प्रीत ले धरि राखी ड्यार में . आब तो मेकैं पक्क यकीन हैगो ..कि तौ उरबि ले बाबा बण गो .. जरूर तैक ड्यार में एक गुफा ले हुनेलि ..
मैलि कौ - तेर बरमान छ गुफा .. यां एक कमराक किराय चार हजार छ .. वीमैं उरबि बिचार आपु जै रूछैं या गुफा बणूं .. मकान मालिक एक कील ठोकण में तो बोई जां . गुफा कां बटी बणूण द्योल ..और यां हनीप्रीन वनीप्रीत के नहां .
स्यैणि - पैं उ प्रीति ढ्वाल को छ ..?
मैलि कौ -अरे यार उ उरबियैकि स्यैणि परुलि छ . यां भाबर ऐबेर वील आपुण नाम प्रीती धरि हालौ .
स्यैणि - ओईज्या .. कि आग लाग् तौ परुलि ख्वार .. सुणो यस करनू यां आला तो मेर नाम ले चनुलि बटी बदई बेर चारुलता धरि ल्यून .. जब तुम प्यारैलि चारू कौला तो म्यार दिल में कसि कुतकालि जसि लागैलि .
मैलि कौ - चुप हैरौ .. आब बदलि छी नाम .. जन लागण पौ यो बुड्यांकाल त्वेकैं कुतकालि . जदिनान उमर छी उदिनान तो मेकैं काव बाकर जस देखछी .. आब नाम बदल तू .. तू नाम नैं आपुण तौर तरीक बदल .. तु मेछैं भली के बुलै ले जाली तो बहुत भै ..
स्यैणि कूण लागि - सुणो तौ परुलि कि करें ..
मैलि कौ - कुमाउनी गढवालि पिक्चर बणूं ..
स्यैणि - बस .. बस .. मेकैं सब पत्त लागि गो .हीरो ले तैक पिक्चर नक उरबियै हुन्योल ...
अल्लै आओ वापस ... खबर दार ... कति होटल में रुको .. स्टैशन में टोपि जाओ .. पर तां बटी जाओ ... तौ ड्यार .. पिक्चर ... प्रीती मेकैॆ सब मालूम छ ..
महाराज राताक बार बाजी झोल झन्टी पिठि लगै मी भ्यैर के निकल गयूं और रात भरि रोडवेजाक चुरैन बस अड्ड में खिती रयूं ..
विनोद पन्त 'खन्तोली '
मैलि कौ के हैगो ? कूण लागि तौ उरबियाक लालाक ख्वार कि आग लाग यो उमर में तनन कैं कि मत्ति ऐ तसि जो ड्यार खोलिबेर बैठि रयी .. और तुमरि मत्ति ले कि भांग फुली हल्द्वाणि जैबेर तौ उरबियकै ड्यार मिलछै रूणा लिजी . तुमन कैं हाकणीं डालणी क्वे छै नैं . कास बेशरम छा . उल्लै वापस जाओ तौ ड्यार बटी . हमार खान्तोईक बहत्तर मवास रूनी बल तां . तुम यो बुड्यांकाल तसिके ड्यार में रौला तो मैंस कि कौल . क्वे देखलौ कि होल . तुमरि तो के इज्जत नहांति पर यां समाज में मेरि तो इज्जत छ ..
मैल कौय - अरे यार कास फसक करनौछी .
स्यैणि कूण लागि - कि करूं फसक करिबेर . बजर पडि जाल मेर ग्रहौ . यो उमर में मेर बुड तसिके ड्यारन में जाल कैबेर ज कि सोचि राखी छी .
मैलि कौ -भागवान जरा होश कि दवाई खा . कि हैगो त्वेकैं . तौ टी वी में राम रहीम क बार में देखि देखिबेर तु पगलि गेछै . जे ते नि बुला . सब ड्यार एकनसै ज कि हुनी . यो उरबियक ड्यार छ . उरबि घर परिवार वाल बाल बच्चेदार आदिम छ .
स्यैणि आब फोनैं में टिटाट पाणन फैगे .. होय मेकैं तुमलि अनपढ सोचि राखनेल .. मी ले आपुण जपानैकि पांच पास छ्यूं .. उ तो इसकूल जाणी बाट में गध्यार नि हुन तो ऐल मी ले कम से कम इण्टर तो करि हालन्यू .
मैलि कौ - बकवास नि कर हां . गध्यार मेकैं मालूम छ .. चौमास में चार दिन पाणि रूं उ गध्यार न .. नानां नानतिन ले फटक मारि बेर पार जै सकनी उमैं .
स्यैणि कूण लागि - तुमर दगाड को बुलै सकौं . पाणि वील ज कि नै गेयूं मी अघिल कै इसकूल . उ तो आमैलि नै जाण दे . गध्यारन छौव रूंछीं बल . भौ झसकि जालि कैबेर नि जाण देय .
मेलि कौ - चूख हालाल तेरि आमाक आंखन में . पांच पास करि चेलि भौ हुंछीं .. फिर त्वेंकै कि करन उ छौव .. तू तो ज्यून्नै चुडैल छी नानछना बटी .. बडि ऐरे छौव लागल वालि .
कूणैं की तो मैलि कै हाल आब स्यैणि मेरि लिजी बकुरी रयी बाग जसि हैगे .. वील मेछैं फोन में कूण नकूंण कै हाल . और मेकैं चेतावनी देते हुण कूण लागि - फटाफट तौ उरबि रनकाराक ड्यार बटी जाओ नतर तुमार ले और तौ उरबियाक ले गणु टोडि दयूल तैं ऐबेर ..
मैलि कौ - गुस्स किलै करनछी यार .. यां उरबियैकि घरवाई ले उरबियैकि दगाडै छ . ऐल इदुक रात में आब मी कैकि यां जूल . तू नि मानली तो भोल रत्ति ब्याण न्है जूल यां बटी .. ऐल प्रीती लि आलूक परौट ले बणै राखीं मेरी लिजी ..
बस तदुक सुणते ही स्यैणि भि पनै नि रयी .. अच्छा तो तदुकै कमी रै गेछी .. उरबियैलि एक हनी प्रीत ले धरि राखी ड्यार में . आब तो मेकैं पक्क यकीन हैगो ..कि तौ उरबि ले बाबा बण गो .. जरूर तैक ड्यार में एक गुफा ले हुनेलि ..
मैलि कौ - तेर बरमान छ गुफा .. यां एक कमराक किराय चार हजार छ .. वीमैं उरबि बिचार आपु जै रूछैं या गुफा बणूं .. मकान मालिक एक कील ठोकण में तो बोई जां . गुफा कां बटी बणूण द्योल ..और यां हनीप्रीन वनीप्रीत के नहां .
स्यैणि - पैं उ प्रीति ढ्वाल को छ ..?
मैलि कौ -अरे यार उ उरबियैकि स्यैणि परुलि छ . यां भाबर ऐबेर वील आपुण नाम प्रीती धरि हालौ .
स्यैणि - ओईज्या .. कि आग लाग् तौ परुलि ख्वार .. सुणो यस करनू यां आला तो मेर नाम ले चनुलि बटी बदई बेर चारुलता धरि ल्यून .. जब तुम प्यारैलि चारू कौला तो म्यार दिल में कसि कुतकालि जसि लागैलि .
मैलि कौ - चुप हैरौ .. आब बदलि छी नाम .. जन लागण पौ यो बुड्यांकाल त्वेकैं कुतकालि . जदिनान उमर छी उदिनान तो मेकैं काव बाकर जस देखछी .. आब नाम बदल तू .. तू नाम नैं आपुण तौर तरीक बदल .. तु मेछैं भली के बुलै ले जाली तो बहुत भै ..
स्यैणि कूण लागि - सुणो तौ परुलि कि करें ..
मैलि कौ - कुमाउनी गढवालि पिक्चर बणूं ..
स्यैणि - बस .. बस .. मेकैं सब पत्त लागि गो .हीरो ले तैक पिक्चर नक उरबियै हुन्योल ...
अल्लै आओ वापस ... खबर दार ... कति होटल में रुको .. स्टैशन में टोपि जाओ .. पर तां बटी जाओ ... तौ ड्यार .. पिक्चर ... प्रीती मेकैॆ सब मालूम छ ..
महाराज राताक बार बाजी झोल झन्टी पिठि लगै मी भ्यैर के निकल गयूं और रात भरि रोडवेजाक चुरैन बस अड्ड में खिती रयूं ..
विनोद पन्त 'खन्तोली '
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