भिंचाल ( चलक )
रत्तिब्याण बिस्तर में पडी भयूं .. तब तक स्यैणि घचबचूण बैठ गे -
स्यैणि - सुणनौछा ,बेलि भिचाल भो बल .. तुमैलि चिताछै ..
मैं - जब बटी त्यार दगाड ब्या भो तब बटी यो भिचाल ,आँधी तूफान ,हाव बयाव , केकै पत्त नि चलन .
स्यैणि - कि कौ .. जरा जोरैकि कओ धैं ...?
मैं - -आब सार पडि गे कूण लागि रयूं .. त्यार दगाड रूण में ..
एक नानि नानि जसि सुनामी भयी तू .. त्यार सामणि यो भिचाल कां चिताइनन .
स्यैणि -हाकाहाक नि करो हां .
मैं - कतु बाजि आ बल तौ भूचाल ..?
स्यैणि - रात आठ बाजिबेर पन्चास मिनट में बल .
मैं - अरे !! मैलि धरती हलकन जसि तो चिताई छी . पर मैलि सोची तु चारपाई बटी भिमै घुरी गे हुनेलि . तब हिलणौ मकान कैबेर सोचो .. फिर जब त्वेकैं बिस्तरै में देखौ तो मैलि सोचो मेकें भैम हैगो हुन्योल ..
स्यैणि - तुम चुप रया हां तुम .. ज्यादा ओभर स्मार्ट झन बणिया .. तुमार बगल में पडि रछ्यू .. कसिके सोची ..
मैं - उसके जब तू हिटछी तब ले भीतर पन चार पांच रिक्टर स्केलक भूकम्प ऐ जां .. खैर छोड त्वेकैं पत्त लागछै भिंचाल भो कैबेर .
स्यैणि - नै नै मैलि ले नि चिताय . जरा आंख लागि गेछी .. पर तुमन तो नींन नि ऐरैछी . मोबाइल भितर टोप दि राखि हुनेलि .. हर बखत कि छ तौ मोबाइल में . फेसबुक फेसबुक .. दुन्नि में कि हुण लागि रौ के पत्त रूछै तुमन .
मैं - त्वेकैं तो बहान चें . खालि टैम पास भै यो .. दिन भर काम बटी आय तो जरा मन बहलाव हैजां . जरा भाल लोगनाक विचार पत्त लागि जानी .. त्योर कचकचाट तो जनमभरि लागियें रौल .
स्यैणि - होय होय .. मेरि बात तो आब कचकचाटै लागलि आब .. खाल्लि नै ऐरैयू तुमार पछिल . बरयात लिबेर आछा . तबै आयूं .. फ्यार लगै राखन म्यार दगाड .. मेरि कचकचाट तुम नि सुणला तो को सुणल .. भुलि गेछा उ सात बचन ..?
मैं - मत्ति मारी गेछी मेरि . और कास सात बचन .. उ सस्कृत में छी .. फिर हकाहाक ले हैरैछी उ बखत .. म्यार के समझ में नै आय .. खाल्लि मुनी हलकै दे मैलि .. नतरि तदुक भद्र को लगूंछी आपु लै .
स्यैणि - बामण ले तुमरै छी . कै दिना हिन्दी में समझा कैबेर .. उसके ले तुम कौन सा बचन निभूण लागि रौछा .. तुमार समझ में ले उना तो तो ले कौन सा मेरि सुणना ..
मैं - तेरि सुणनयूं और कैकि सुणूं ...
स्यैणि - पैं तौ हर बखत मोबाइल भितर कि छ .. चैटिंग में लागि रून हुनेला क्वे ढ्वाला दगाड ..
मैं - होय .. त्यार दिमाग में तो तसै रौल .. जकैं तू ढ्वाल समझण लागि रैछी .. उ ढ्वाल रनकौर निकलौ .. फेक आई डी बणैबेर म्यार तीन म्हैण खराब करि देयी कठु रनकारैलि .. मैं जैकें एंजल परुलि समझिबेर फसकन लागि रौछ्यू उ ग्वैट्टी खडकू निकलौ ... बेईमान हैगे यो दुन्नि .. दुसरैकि भावना क दगाड खिलवाड करनी कुकुरिच्याल ..
स्यैणि - भल भो .. यो बुड्याकाल तसिके उज्याड खाणैकि सोचला तो तसै होल .. शरमै नि भै .. इदुक भैलि स्यैणि मिल रै .. पर तुमन कदर कां भै ..
मैं - अरे छोड यार .. जरा चहा बणा धें ... ख्वारपीड हैगे ..
स्यैणि - उ एंजल परुलि छै बणै मागो चहा .. ह्वट्सऐप में मगै बेर पी ले लिया ... और एल बटी तौ मोबाइल भितर मुनिटोप देला तो बेलि वाल भूकम्पक अन्ताज आ या नि आय यस भिचाल देखै द्यूल तुमार तीन कुलाक पित्तर ले हलकण बैठ जाल ... खुद बणाओ चहा ...
हुह ..
हुह ..
स्यैणि - सुणनौछा ,बेलि भिचाल भो बल .. तुमैलि चिताछै ..
मैं - जब बटी त्यार दगाड ब्या भो तब बटी यो भिचाल ,आँधी तूफान ,हाव बयाव , केकै पत्त नि चलन .
स्यैणि - कि कौ .. जरा जोरैकि कओ धैं ...?
मैं - -आब सार पडि गे कूण लागि रयूं .. त्यार दगाड रूण में ..
एक नानि नानि जसि सुनामी भयी तू .. त्यार सामणि यो भिचाल कां चिताइनन .
स्यैणि -हाकाहाक नि करो हां .
मैं - कतु बाजि आ बल तौ भूचाल ..?
स्यैणि - रात आठ बाजिबेर पन्चास मिनट में बल .
मैं - अरे !! मैलि धरती हलकन जसि तो चिताई छी . पर मैलि सोची तु चारपाई बटी भिमै घुरी गे हुनेलि . तब हिलणौ मकान कैबेर सोचो .. फिर जब त्वेकैं बिस्तरै में देखौ तो मैलि सोचो मेकें भैम हैगो हुन्योल ..
स्यैणि - तुम चुप रया हां तुम .. ज्यादा ओभर स्मार्ट झन बणिया .. तुमार बगल में पडि रछ्यू .. कसिके सोची ..
मैं - उसके जब तू हिटछी तब ले भीतर पन चार पांच रिक्टर स्केलक भूकम्प ऐ जां .. खैर छोड त्वेकैं पत्त लागछै भिंचाल भो कैबेर .
स्यैणि - नै नै मैलि ले नि चिताय . जरा आंख लागि गेछी .. पर तुमन तो नींन नि ऐरैछी . मोबाइल भितर टोप दि राखि हुनेलि .. हर बखत कि छ तौ मोबाइल में . फेसबुक फेसबुक .. दुन्नि में कि हुण लागि रौ के पत्त रूछै तुमन .
मैं - त्वेकैं तो बहान चें . खालि टैम पास भै यो .. दिन भर काम बटी आय तो जरा मन बहलाव हैजां . जरा भाल लोगनाक विचार पत्त लागि जानी .. त्योर कचकचाट तो जनमभरि लागियें रौल .
स्यैणि - होय होय .. मेरि बात तो आब कचकचाटै लागलि आब .. खाल्लि नै ऐरैयू तुमार पछिल . बरयात लिबेर आछा . तबै आयूं .. फ्यार लगै राखन म्यार दगाड .. मेरि कचकचाट तुम नि सुणला तो को सुणल .. भुलि गेछा उ सात बचन ..?
मैं - मत्ति मारी गेछी मेरि . और कास सात बचन .. उ सस्कृत में छी .. फिर हकाहाक ले हैरैछी उ बखत .. म्यार के समझ में नै आय .. खाल्लि मुनी हलकै दे मैलि .. नतरि तदुक भद्र को लगूंछी आपु लै .
स्यैणि - बामण ले तुमरै छी . कै दिना हिन्दी में समझा कैबेर .. उसके ले तुम कौन सा बचन निभूण लागि रौछा .. तुमार समझ में ले उना तो तो ले कौन सा मेरि सुणना ..
मैं - तेरि सुणनयूं और कैकि सुणूं ...
स्यैणि - पैं तौ हर बखत मोबाइल भितर कि छ .. चैटिंग में लागि रून हुनेला क्वे ढ्वाला दगाड ..
मैं - होय .. त्यार दिमाग में तो तसै रौल .. जकैं तू ढ्वाल समझण लागि रैछी .. उ ढ्वाल रनकौर निकलौ .. फेक आई डी बणैबेर म्यार तीन म्हैण खराब करि देयी कठु रनकारैलि .. मैं जैकें एंजल परुलि समझिबेर फसकन लागि रौछ्यू उ ग्वैट्टी खडकू निकलौ ... बेईमान हैगे यो दुन्नि .. दुसरैकि भावना क दगाड खिलवाड करनी कुकुरिच्याल ..
स्यैणि - भल भो .. यो बुड्याकाल तसिके उज्याड खाणैकि सोचला तो तसै होल .. शरमै नि भै .. इदुक भैलि स्यैणि मिल रै .. पर तुमन कदर कां भै ..
मैं - अरे छोड यार .. जरा चहा बणा धें ... ख्वारपीड हैगे ..
स्यैणि - उ एंजल परुलि छै बणै मागो चहा .. ह्वट्सऐप में मगै बेर पी ले लिया ... और एल बटी तौ मोबाइल भितर मुनिटोप देला तो बेलि वाल भूकम्पक अन्ताज आ या नि आय यस भिचाल देखै द्यूल तुमार तीन कुलाक पित्तर ले हलकण बैठ जाल ... खुद बणाओ चहा ...
हुह ..
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