हमार मोद्दा

भात खैबेर फौस्येन लागी भै . पालंगक काप और झोई
गजब सवाद बड़ाई भै ईजैलि .. पेट में कटांस हुण जाणे खै
ली . खाई बाद हलकणैकि से उज नि भै तो मैं घाम में
पीठ लगै बेर चौंतार में तेरछीं गेयू . ह्यूनक
घाम भै आंख लागणै तैं बटी रछी तो ग्वैटन
बटी मितरो....ओ....ओ... कि आवाज उण बैठि . मैल
चाय तो मोद्दा भाय . नमस्कार पुरस्कार भै . मैल कोय हाय अचानक
कसिके आया हो मोद्दा ...? बैठो भीतर हिटो .
मोद्दा - यार मी सब काम अचानकै करूं . कां
बटी कां न्है जां कैकैई हाव ले नै लागण दिन्यू ..
मैल कौ बैठो पैं ...
मोद्दा - नै यार ऐल नै बैठन्यू आज मंगल छ .. तुमार पहाड़न में
मंगल मिलाप छन्जर छाड़ नै करन बल .
मैल कोय - के बात नि भै . तुम घरैके आदिम भया ...
मोद्दा - नै यार इत्ती भ्यैरै बटी बैठ जानू ..
मैल घरवाई कैं आवाज लगाई - सुणनैछी भौ ईजा .. यो
गुजरात वाल ज्याठज्यू ऐरईन .. जरा द्वि गिलास चाहा ला धें ..
स्यैणिलि भीतरै बटी आवाज लगै -
चीनी सगी रै . मैल को - क्वे
बात नै .. शुभम छैं मगै ल्ही हिरदा दुकान
बटी .
स्यैणि - कां बटी मगूं ... शुभम डबल निकावण बैकाक
लाईन में लागि रौ . बेलि बटी वैं छ .
तब तक मोद्दा कूण लाग - के बात नै दुल्हैणी .. गूड़
हुन्योल .. कटकी लि आ .. उसके ले जाड़न में गूड़
भल हूं ..
और मोद्दा लि झ्वालन बटी एक डाब पातंजलि बिस्कुट
और थ्वाड़ टौफी निकालिबेर नान चेली हाथ
द्याय और कूण लाग - ले चेली आपुण दद्दा कैं ले दिये
.
हमार फसक फराव चालू है ग्याय .
मैल पुछ - हाय तुम पैदल कां बटी उण लागि रौछा ..?
मोद्दा - यार बिजयपुर तब रोडवेज में आयूं .. बिजयपुर
बटी तुमार गौं खान्तोई तक एक टाटा सूमों में बैठ्यू .. टाटा
सूमो वाल कैं द्वि हजारक नोट दे तो वील को पचास रुपैं
खुली दिओ .. मेर पास खुली नि
छी तो वील मेकें बाटे उतारि दयो .. मन मनैं
मैक्यूण ले रौछी शैद रनकौन ... बस अदबाद
बटी पैदलै आयू ..
मैल को - पैं तुमैलि तौ द्वि हजारक नोट निकाल किलै .. तौ बज्यूणाक
तो खुली मिलणै मुश्किल हैगेई . एक बार दांतनैलि कांठि
आखोड़ फुटि जाल .. पर तौ द्वि हजाराक खुली ...
मोद्दा बीच में बात काटिबेर कूण लाग यो सब छाड़
त्वील बदलनै आपुण पुराण नोट ...?
मैल को - बदल तो हालन पर तुमार नोटनक साईज अड़कसै छ हो
... चूरनाक जास नोट छन और तनर साईज यस छ जाणि क्यापै क्वे
नानतिन छयां म्हैण पैद हई हुंछ . अगर तौ नोटन कें जेब में
क्रमवार सौ नोटनाक भ्यैर बटी लगाला तो पचास सौ नोट
ठुल और पांच सौ द्वि हजाराक नान . दगड़ै मिस्यूण लगाया तो यस
लागों लिहाफ ढगींण में खुट नांगड़ै रै गेयी .
( तब तक स्यैणि चाहा ल्हिबेर ऐ गे . वील म्यार हाथ
चाहा दी और मोद्दा क चाहा भीमैं धरि
दी और टपुक ले भीं में धरि
दी )
मोद्दा - हाय तेरि घरवाई मेर देखां ततु नाराज किलै हैरै कौ ? तैलि
चाहा म्यार हाथ नि दी . किलै तैक लुकाई डबल ले त्यार
हाथ पड़ गेई कि ..?
मैल को - ना ना नाराज नि हेरैई . जरा पुराण खयालनैकि छ .. हमार
पहाड़न में जेठ लै लागन ले नहातिन तो हाथ में कसिके
दिछीं .. यां पैलि बटी कूंछी नै -
ज्याठज्यू छूंत ज्याठज्यू छूंत ...
मोद्दा - अरे .. अच्छा अच्छा ..
मैल को - आब आज यें हैरया .. ब्याल गपशप मारूल ..
मोद्दा - नै यार म्यार खुटन में चक्र छ .. एक जाग कां रई मेर
बिती .. बस चाहा पी है आब जां .. लागूं
बाट ..
मोद्दा जाण बैठ गे .. जाण बखत मेरि चेलि कें आशीर्वाद
दी और जेब में हाथ डालौ .. फिर खाली
हाथ भ्यैर निकाल ल्ही .. डबल टूटी नि
छी शैद ..
मैल हालत सभालण लिजी कौ - हैगोय के बात नि भै ..
एकाद म्हैण बाद जब दुबार आला तो तब दि दिया .. उसके ले तौ नानू
भौ भै . डबलनैलि कि करें .. टाँफी खै हालन तैलि मस्त
भै .....
मोद्दा अघिल बाट लाग गे .

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