सोनपापडी

आज राष्ट्रीय सोनपापडी वितरण दिवस है ... सोनपापडी खाता कोई नहीं है बस आगे सरका दी जाती है . बवाल तब होता है जब ज्यादातर घरों से एक ही प्रकार की एक ही ब्रान्ड की सोनपापडी आ जाती है .
अब ये एक कुशल गृहणी पर निर्भर करता है कि वो इन डब्बों को मैनेज कैसे करे . वैसे तो आसान है शर्मा जी का डिब्बा वर्मा जी को और वर्मा जी का डिब्बा शर्मा जी को चिपका दिया जाता है . पर ये बात महत्वपूर्ण है कि किसके यहां से कौन सा ब्रान्ड आया है वही वापस ना चला जाय .
बीकानो की सोनपापडी देने वाले को छज्जू हलवाई बिजनौर वाली की दे दो और जिसके यहां से छज्जू हलवाई की आयी है वहां हल्दीराम की भिजवा दो .
रिसर्च का विषय ये है कि सब जगह बांटने के बाद जो डिब्बा बच जाता है लोग उसका क्या करते हैं . आज तक मैने किसी को दिवाली की सोनपापडी खाते हुए नहीं देखा .
मुझे डर है कि किसी दिन कोई जागरूप सेकुलर व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट में सोनपापडी बाटने पर रोक लगाने सम्बन्धी याचिका ना दायर कर दे ,और माननीय कोर्ट त्वरित सुनवाई करते हुए सोनपापडी की बिक्री प्रतिबन्धित कर दे . हालाकि बाटने पर रोक नहीं लगेगी और कुछ प्रगतिशील सेकुलर ये भी तर्क देने लगें कि जब राम अयोध्या आये थे तब सोनपापडी थी ही नहीं . ऐसे में इसे बांटने का कोई औचित्य नहीं . कुछ जागरूप पलायन कर गये पहाडी ( मेरे जैसे ) ये भी कहेंगे कि ये सोनपापडी हमारे जमाने में पहाडों में नहीं होती थी . लोग चावल और खांड के खिलौने बाटते थे . कुछ बडे पूडी प्रसाद वगैरह भी .इसलिए ये सोनपापडी हमारी पहाडी सस्कृति के खिलाफ है . सेकुलर जहां सोनपापडी का बिरोध करेंगे तो कुछ कट्टर लोग सोनपापडी को राष्ट्रीय अस्मिता से जोडते हुए इसे राष्ट्रीय मिठाई घोषित करवाने की मुहिम भी चलाऐगे . . कुछ विवादित बोल भी आऐगे . टीवी चैनल एक्सपर्ट और कुछ भौंकू राजनीतिक प्रवक्ताओं को बैठाकर चीख पुकार कार्यक्रम प्राइम टाइम में चलाऐगे . मामला जब हाईलाइट हो जाऐगा तो सरकार सोनपापडी को प्रमोट करने के लिए एक सैलिब्रेटी को ब्रान्डएम्बेसडर बनाऐगी . कुछ बिरोधी इसका विरोध कराएगे . ये विरोध उस सैलिब्रेटी का डायरैक्ट न कर हलवाइयों से कराऐगे . कुछ बुद्धिजीवी तर्क देंगे कि जिस सैलिब्रेटी को ब्रान्डएम्बेसडर बनाया है वो डायबिटीज का मरीज है . ये देश की भोलीभाली जनता से किया गया मजाक है . कुछ स्वयंसेवी सस्थाऐं अपनी बेकार बची सोनपापडी को झोपडपट्टी में बटवाकर अखबारों की सुर्खियां बटोरेंगी और उन को निजी चैनल के करोडपति कार्यक्रम में अमिताभ पच्चीस पचास लाख जितवाकर हूटर बजाएगा .
पर्यावरणविद सोनपापडी के पैकिग अन्दर निकलने वाली प्लास्टिक से होने वाले नुकसान से चिंतित होकर सेमिनार करेंगे . कुछ विश्वविद्यालयों में सोनपापडी की होली जलाकर देशविरोधी नारे लगाये जाऐगे . बहन जी सोनपापडी को दलितों की मिठाई बताऐगी . राहुल जी चुनाव में मोदी द्वारा किया वादा याद दिलाकर कहेंगे कि अगर मोदी जी सोनपापडी गरीबों किसानों तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं तो मुझे प्रधानमन्त्री बनवा दें . सुषमा स्वराज पाकिस्तानी नागरिकों को मानवता के आधार पर सोनपापडी खाने के लिए विशेष वीजा दिलवाऐगी . कुछ बुद्धिजीवी लेखक अपना तिकडम लगाकर लिया हुवा अवार्ड वापसी का ऐलान करेंगे . काग्रेस काम के बदले सोनपापडी योजना में सरकार पर अडंगा लगाकर योजना को सही तरीके से ना चलाने का गम्भीर आरोप लगाऐगी . आर एस एस सोनपापडी का नाम पं दीन दयाल उपाध्याय मिष्ठान रखने की सलाह देगी .
सरकार बैंकों के माध्यम से सोनपापडी बिकवाऐगी . अगर खाताधारक हर महिने आधा किलो सोनपापडी ना खरीदे तो उसके खाते से पांच सौ रुपये कट जाऐगे .
बाबा जी अपनी सोनपापडी लेकर टी वी में स्वदेसी की अलख जगाते नजर आऐगे .. समाचार इस बात के आऐगे कि रामरहीम दीपावली पर कौन सी सोनपापडी हनीप्रीत बिटिया को देकर अपनी गुफा में बुलाते थे . आसाराम जेल में ही सोनपापडी की मांग करेगा . तेन्दुलर साहब राज्यसभा की जगह सोनपापडी के एड की शूटिंग में व्यस्त रहेंगे .
ये मैं क्या लिखने बैठ गया ... मुझे भी पडौस में सोनपापडी बाटने जाना है . फिर मिलते हैं ... बाय ..!

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