कुकुरी बाबा

कुकुरी बाबा
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आज बाबा जी के कारनामे और उनके अन्ध समर्थकों के अन्ध भक्ति पर एक पुराना वाकया याद आ रहा है . बाबा के दोषी साबित हो जाने पर भी उसके काले कारनामोॆ में साथ देना पता नहीं कहां की अक्लमन्दी है . दोष साबित न होने तक साथ देना समझ में आता है . पर कोर्ट द्वारा दोषसिद्ध होने पर ..
हां तो लगभग पैतीस चालीस साल पहले की बात होगी हमारे गांव से कुछ दूरी पर एक बाबा जी का आगमन हुवा .
अब मुझे ये तो याद नहीं कि बाबा कोई स्थानीय थे या कहीं मैदानी क्षेत्र से आये थे . पहाड़ में एक से एक अवतारी और सिद्ध पुरुष समय समय पर अवतरित होते आये हैं और बाहर से भी कुछ सिद्ध आत्माओं को देवभूमि की अलोकिक छटा आकर्षित करती आयी है . यहां पर आकर जप तप ध्यान आदि के लिए शान्त और सुरम्य वातावरण उन्हें बहुत भाता है
गांवों के लोग पहले से ही धर्मपरायण होते थे . कण कण में भगवान पर विश्वास करने वाले देवता के नाम पर पत्थर भी पूज दें . फिर कोई भगवावस्त्रधारी मिल जाय तो उस पर तो विशेष श्रद्धा दिखाते थे .
बाबाजी जल्दी ही इलाके में प्रसिद्ध हो गये . भक्तजन उनसे मिलने जाते अपनी सामर्थानुसार कुछ भेंट देते . कुछ अपने कष्ट निवारण की गुहार लगाते .
बाबाजी कुछ लोगों को आशीर्वाद तो कुछ तो प्रसाद के तौर पर रुद्राक्ष के दाने दिया करते थे .
पहाड में जब भी कोई बाबा आता है लोग एक दूसरे से जानकारी लेते थे - भाई बाबा जी ऐसे ही हैं जा कुछ जानने सुनने वाले भी हैं ?
ये बाबा भी कुछ बता दिया करते थे भक्तों को तो लोग विश्वास भी करने लगे .
एक बार की बात बाबजी के बारे में एक आश्चर्यजनक बात पता चली कि बाबा शराब पीते हैं . बस फिर क्या क्या था . लोगे ने जानकारी जुटाई तो पता चला कि बात सच थी .
अब लोग एक दूसरे से कहने लगे कि भाई पहले तो बाबा ठी था लेकिन अब कुकुरी गया .. मतलब भ्रष्ट हो गया .
अब लोगों ने बाबा का नया नामकरण कर दिया -कुकुरी बाबा .
बाबा के सारे भक्त गायब और बाबा लगा भीख मागने .
ये एक उदाहरण है गुण दोष के आधार पर भक्ति करना और आस्था दिखाने का .
विनोद पन्त 'खन्तोली

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