फसक फराव
पद्मादत्त ज्यू रत्ति रत्ति ब्याण धरणीधरा क यां जैबेर -
ओ धरणि .
ओ धरणीधर !
धरणीधर - अरे पद्दा नमस्कार . आओ . आज कसिके भुलि गेछा इथकै बाट् ?
पद्माद्त - अरे . नमस्कार पुरस्कार तो तसी है गे पैं यार धरणियां .. क्यै त्वीलि नै सुणी पारा भीडक टीकराम ले खतम हैगो बिचार .
धरणीधर - ओहो . बड नक सुणै गेया हो पद्दा .. किलै खडाखडी कि भो टिकराम कैं . तसी के नै सुणी रैछी . के बीमार हिमार ले नि छी बल .
पद्मादत्त - क्याप कुनेर भये यार तू . कस नि छी बीमार . उपसास क मरीज भै टिकराम पर चर्ज के ले नि करनेर भै . कतु कौ बीडी नै पिये कैबेर कैकि नि सुणनेर भै . पोरबेर ले एक बार मरण तरण भो . कतु क दवाई पुडी करी तब भल भो . भल ले कैहैबेर भो .. भीतर भीतरै मर्ज तो उसै भै .
धरणीधर - आब जी कूंछा पैं . खाली कूणैकि बात भई . दाण पाणि पुर हैगे हुन्याल बिचाराक .न्यैर रै गे बीडी बन्डल पर .
पद्मादत्त - होय तस तो तू ठीकै कूण लागि रौछै . ईसकूला दिनान ले तौ गध्यार लुकि बेर द्वि चार कस मारी ल्हिंछी . भगवान सिंह मास्टरै हाथैकि खूब मार खाई भै तैलि .
धरणीधर - हा हा हा ठीक कूणौछा . उसके पढण में होशियार छी. गणितक कीड भै . तैकि नौकरी ले लागि गेछी उ जपान् में . आब घरपन क्वे ईज बाबू कि सेवा और खेति पाति समालणी क्वे नि भै तो तैलि नौकरी छाडि दे .
पद्मादत्त - होय भाई लेगनाक चक्कर में तैलि नौकरी छोडी . उनार नानतिनैकि ले देखभाल करि .पर जब तकैं परेशानी ऐ तो एक रनकौर चाणा लिजी नै ऐ . बिचार उनार लिजी हर उणी जाणी वालनाक हाथ फांच पुन्तुरी पहाड बटी भेजते रूंछी .
धरणीधर - उनैरि खेति पाति ले कि तैकै बान् लागि भै . कबै थ्वाड चार गद्दु काकड भेजि दी तो के फरक पडौं . ठुल भै तौ परिवारक , तदुक फर्ज तो बणनेरै भय तैक ले .
पद्मादत्त - खाल्ली समझि भये त्वील उ गद्दू काकाड . मणि -भांटि लगाई भै टिकरामैलि यो कारबार पर . तैक भै रनकार घर उण बखत एक कातर् ले नि लूंछी कपड क नाम पर .
धरणीधर - होय बात तो तुमरि ले सही छ . के हुनेर ज कि भै दिण लिण लि . बस मान पान है जानेर भै . के अटक ज कि भै उसके ले टिकरामैकि पास . जजमान बिरती भली भै तैकि ले . चीज बस्त लत्त कपड राशन पाणि दाम दक्षिण खूब मिलनेर भै तकैं .
पद्मादत्त - पर जरा कमचूस किस्मक ले छी . कैकैणी फाटि कच्छक नाड ले सुद्दे नि दिनेर भय .
धरणीधर - अरे यार पद्दा तैलि डबलनैकि वकत समझी भै . आपुण गुदाड मुदाड जस ले पैर तैलि पर नान्तिन लायक बणै दयाय . ऐल द्विये च्याल भाल नौकरी में छन बल . ठुल वालैकि पास तो कार ले छ बल .नान् वाल ले बम्बई छ शैद . वैं मक्कान ले बणै हालौ .
पद्मादत्त - पर तैक च्याल बिलकुल तैक जास नि भाय यार ! तौ तो दु:ख सुख में फिर ले ठाड हैई जांछी पर च्यालन कैं तो डबलनक भौतै घमण्ड हैगो . घर ऐबेर कैछैणी मुख बुलाण ले नै तकन .
धरणीधर - और जी हुंछी च्याल जै घर पुजनै नैं टिकरामाक .?
पद्मादत्त - ठुल च्याल ब्वारी तो रातोंरात पुजी गेयी .. नान् च्याल ब्वारी आजि नै पुज बाटपन छन बल .
पद्मादत्त - नान च्यालाक तो आपुण मनक ब्या छ बल . देसि छ बल ब्वारि . टीकराम ठुल्लो बामण बणनेर भै . आपु में पाणिक तोप ले नि पडन दिछी . पर नान् च्योल लि नाख कटै दे . कदुक साल तक टिकराम बुलाण ले नहां च्याल छैं . पछिल पछिल नाति नातिणनैकि माय भै उण जाण हैगेछी .
धरणीधर - यार पद्दा कूंछै जै तो मैस जसि तैकि नानि ब्वारी छ . जब ले घर ऐ ख्वार में पल्ल धरण . सबन छैं पैलाग कूण .. जसि ले छ खानदानि जसि तो नानी ब्वारि छ . पोरबेर नै देखै तुमैलि . टिकाराम क बीमारी में घर नानि वाली ऐ . कदुक सेवा टहल करी बिचारिली . गू मूत ले पोछि गे टीकरामैकि .
पद्मादत्त - होय यार त्वील सोल आन् भरि सही बात कै . ठुलि वालि तो मैसैकि चेलि नहां . तौयूण तौया वीलि टिकराम कैं . चार आखर पढी लेखी कि हैगे मुख ले लागछी टिकरामा क . टिकराम धार्मिक प्रवृत्ति वाल मैंस भै . ठुलि वालि आपु कैं बैरिस्टर समझछी . यस नै करो . तस किलै करछा . कि हूं तौ पुज पाठ करिबेर . तुम ले पुराण जमानाकै छा . सब ठकोसला छ . यस कत्ती लेखि राखौ . उस कत्ती लेखि राखौ . कबैर नरूण करी भै ठुलि वाली लि टिकरामाक ..
धरणीधर - होय समझदार भै टीकराम बिचार चुप लागी रूनेर भै .
पद्मादत्त - यार हम तो इत्ती फसकन् में रै गेयां . हिट वैं बैठुल .
धरणीधर - होय होय हिटो . यसै टैम पर चैन भै जण-मणि . तुम सयाण आदिम ले भया के अन्ताज पन्ताज ले बताला ..
(द्विये टिकरामाक घर उज्याण बाट लाग जानी )
विनोद पन्त 'खन्तोली '
ओ धरणि .
ओ धरणीधर !
धरणीधर - अरे पद्दा नमस्कार . आओ . आज कसिके भुलि गेछा इथकै बाट् ?
पद्माद्त - अरे . नमस्कार पुरस्कार तो तसी है गे पैं यार धरणियां .. क्यै त्वीलि नै सुणी पारा भीडक टीकराम ले खतम हैगो बिचार .
धरणीधर - ओहो . बड नक सुणै गेया हो पद्दा .. किलै खडाखडी कि भो टिकराम कैं . तसी के नै सुणी रैछी . के बीमार हिमार ले नि छी बल .
पद्मादत्त - क्याप कुनेर भये यार तू . कस नि छी बीमार . उपसास क मरीज भै टिकराम पर चर्ज के ले नि करनेर भै . कतु कौ बीडी नै पिये कैबेर कैकि नि सुणनेर भै . पोरबेर ले एक बार मरण तरण भो . कतु क दवाई पुडी करी तब भल भो . भल ले कैहैबेर भो .. भीतर भीतरै मर्ज तो उसै भै .
धरणीधर - आब जी कूंछा पैं . खाली कूणैकि बात भई . दाण पाणि पुर हैगे हुन्याल बिचाराक .न्यैर रै गे बीडी बन्डल पर .
पद्मादत्त - होय तस तो तू ठीकै कूण लागि रौछै . ईसकूला दिनान ले तौ गध्यार लुकि बेर द्वि चार कस मारी ल्हिंछी . भगवान सिंह मास्टरै हाथैकि खूब मार खाई भै तैलि .
धरणीधर - हा हा हा ठीक कूणौछा . उसके पढण में होशियार छी. गणितक कीड भै . तैकि नौकरी ले लागि गेछी उ जपान् में . आब घरपन क्वे ईज बाबू कि सेवा और खेति पाति समालणी क्वे नि भै तो तैलि नौकरी छाडि दे .
पद्मादत्त - होय भाई लेगनाक चक्कर में तैलि नौकरी छोडी . उनार नानतिनैकि ले देखभाल करि .पर जब तकैं परेशानी ऐ तो एक रनकौर चाणा लिजी नै ऐ . बिचार उनार लिजी हर उणी जाणी वालनाक हाथ फांच पुन्तुरी पहाड बटी भेजते रूंछी .
धरणीधर - उनैरि खेति पाति ले कि तैकै बान् लागि भै . कबै थ्वाड चार गद्दु काकड भेजि दी तो के फरक पडौं . ठुल भै तौ परिवारक , तदुक फर्ज तो बणनेरै भय तैक ले .
पद्मादत्त - खाल्ली समझि भये त्वील उ गद्दू काकाड . मणि -भांटि लगाई भै टिकरामैलि यो कारबार पर . तैक भै रनकार घर उण बखत एक कातर् ले नि लूंछी कपड क नाम पर .
धरणीधर - होय बात तो तुमरि ले सही छ . के हुनेर ज कि भै दिण लिण लि . बस मान पान है जानेर भै . के अटक ज कि भै उसके ले टिकरामैकि पास . जजमान बिरती भली भै तैकि ले . चीज बस्त लत्त कपड राशन पाणि दाम दक्षिण खूब मिलनेर भै तकैं .
पद्मादत्त - पर जरा कमचूस किस्मक ले छी . कैकैणी फाटि कच्छक नाड ले सुद्दे नि दिनेर भय .
धरणीधर - अरे यार पद्दा तैलि डबलनैकि वकत समझी भै . आपुण गुदाड मुदाड जस ले पैर तैलि पर नान्तिन लायक बणै दयाय . ऐल द्विये च्याल भाल नौकरी में छन बल . ठुल वालैकि पास तो कार ले छ बल .नान् वाल ले बम्बई छ शैद . वैं मक्कान ले बणै हालौ .
पद्मादत्त - पर तैक च्याल बिलकुल तैक जास नि भाय यार ! तौ तो दु:ख सुख में फिर ले ठाड हैई जांछी पर च्यालन कैं तो डबलनक भौतै घमण्ड हैगो . घर ऐबेर कैछैणी मुख बुलाण ले नै तकन .
धरणीधर - और जी हुंछी च्याल जै घर पुजनै नैं टिकरामाक .?
पद्मादत्त - ठुल च्याल ब्वारी तो रातोंरात पुजी गेयी .. नान् च्याल ब्वारी आजि नै पुज बाटपन छन बल .
पद्मादत्त - नान च्यालाक तो आपुण मनक ब्या छ बल . देसि छ बल ब्वारि . टीकराम ठुल्लो बामण बणनेर भै . आपु में पाणिक तोप ले नि पडन दिछी . पर नान् च्योल लि नाख कटै दे . कदुक साल तक टिकराम बुलाण ले नहां च्याल छैं . पछिल पछिल नाति नातिणनैकि माय भै उण जाण हैगेछी .
धरणीधर - यार पद्दा कूंछै जै तो मैस जसि तैकि नानि ब्वारी छ . जब ले घर ऐ ख्वार में पल्ल धरण . सबन छैं पैलाग कूण .. जसि ले छ खानदानि जसि तो नानी ब्वारि छ . पोरबेर नै देखै तुमैलि . टिकाराम क बीमारी में घर नानि वाली ऐ . कदुक सेवा टहल करी बिचारिली . गू मूत ले पोछि गे टीकरामैकि .
पद्मादत्त - होय यार त्वील सोल आन् भरि सही बात कै . ठुलि वालि तो मैसैकि चेलि नहां . तौयूण तौया वीलि टिकराम कैं . चार आखर पढी लेखी कि हैगे मुख ले लागछी टिकरामा क . टिकराम धार्मिक प्रवृत्ति वाल मैंस भै . ठुलि वालि आपु कैं बैरिस्टर समझछी . यस नै करो . तस किलै करछा . कि हूं तौ पुज पाठ करिबेर . तुम ले पुराण जमानाकै छा . सब ठकोसला छ . यस कत्ती लेखि राखौ . उस कत्ती लेखि राखौ . कबैर नरूण करी भै ठुलि वाली लि टिकरामाक ..
धरणीधर - होय समझदार भै टीकराम बिचार चुप लागी रूनेर भै .
पद्मादत्त - यार हम तो इत्ती फसकन् में रै गेयां . हिट वैं बैठुल .
धरणीधर - होय होय हिटो . यसै टैम पर चैन भै जण-मणि . तुम सयाण आदिम ले भया के अन्ताज पन्ताज ले बताला ..
(द्विये टिकरामाक घर उज्याण बाट लाग जानी )
विनोद पन्त 'खन्तोली '
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