मजनूं पुराण


मजनू और रोमियो भले ही ऐतिहासिक दृष्टिकोण से अलग अलग प्रजाति के प्रेमी रहे हों पर कालान्तर में ये एक दुसरे के पर्यायवाची हो गये हैं . जबरन अपने प्यार का इजहार करने वाले . स्कूल कालेजों व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर हर अनजान या जान पहचान की लड़की को प्यार के लिए राजी करने या उनका ध्यान आकर्षण करने वाले . को मजनू या रोमियो कहा जाता है .
पता नहीं क्यों पर समय समय पर रोमियो लोगों पर पुलिस की कुदृष्टि पड़ती रहती है .कई बार इन लोगों को पब्लिक का कहर भी झेलना पड़ता है . हद देखिये जब कोई रोमियो पब्लिक के हाथों पिटता है तो हाथ साफ करने वालों में वो लोग मुख्य होते हैं जो वहां से गुजर रहे हों और उन्हें ये भी नहीं पता कि मामला है क्या ? एक बात और एक रोमियो जब पिटता है तो उसको पीटने वालों वो शख्श भी होता है जो खुद उस जगह पर रोमियोगिरी करने आया हो . कहने का मतलब रोमियो समाजवादी होते हैं . भाई भतीजावाद या जातिवाद बिलकुल भी नहीं होता . अगर होता तो एक रोमियो पिटते हुए दूसरे रोमियो को कभी नहीं मारता .
रोमियो बिरादरी पर गाने भी बने हैं . कभी अनिलकपूर रोमियो नाम मेरा चोरी है काम मेरा पर ठुमके लगाता है . गौरतलब बात ये है कि गीतकार ने रोमियो का धन्धा ही बदलकर रख दिया . आपने कब किस रोमियो को चोरी करते देखा है ? पर रोमियो लोगों की सहिष्णुता देखिये कभी उक्त गाने की शिकायत नहीं की . ना ही फिल्म का प्रदर्शन बन्द कराया ना ही सिनेमाघर में तोड़फोड़ की . जबकि उक्त गाने की पंक्तियां सीधे सीधे मानहानि का केस करने लायक थी .
रोमियो गिरी को भले ही लोग हिराकत की दृष्टि से देखते हों पर देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है . यह परोक्ष रूप से लोगों में रोजगार का साधन उपलब्ध कराता है . कालेज . हास्टल या कालेज के मुख्य मार्गों पर जो आपको पान बीड़ी गुटखे की दुकानें दिखती हैं वो रोमियों लोगों के कारण ही फलती फूलती हैं . रोमियो लड़कियों को प्रभावित करने के लिए सिगरेट के कश खींचकर छल्ले बनाने की अद्भुद कला का प्रदर्शन करते हैं . पान इस आशा के साथ खाते हैं कि क्या पता कोई सजनी पान खाये सैंया हमारे का गाना गा दे . वरना उसके पास पान सिगरेट का कोई अधिकृत बजट नहीं होता . वो बेचारा घर के सामान में पैसों की डन्डी मारकर इस बजट की व्यवस्था करता है . कालेज के आसपास चाय की दुकानों पर टाइमपास के साथ एक दो चाय खुद और एक दो दोस्तो को पिलाकर चाय वाले के धन्धे को चलाने में सहायता करते हैं . चवन्नी छाप सैन्ट डालकर जब ये निकलते हैं तो पसीने की बदबू से मिक्स होकर सैन्ट भी आयोडैक्स की खुशबू प्रदान करता है . भांति भांति की केशसज्जा करके नाई को रोजगार देते हैं .
होना तो यह चाहिये था कि सरकार को रोमियो लोगों को कुछ भत्ता देकर प्रोत्साहन देना चाहिये था . आखिर इन रोमियो लोगों ने भी आपको वोट दिया है . पर आप हो कि इन पर पुलिसिया कार्यवाही कर रहे हो .
सच्ची में सरकार ! हाय लगेगी तुमको ..

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