लालकिसन ज्यू दु:ख
लालकिसन ज्यू छाज में बैठी छन . पलतरबै पटखाट में रेडियो बाजण लागि रौ -
हमसे का भूल हुई ...... जो ये सजा हमका मिली .
लालकिसन ज्यूक आंख ओसै रई . लाल आगाक जास डकार हैरैई द्विये आंख . शायद तीन चार दिनक उनित् लागि रौ . नौकर चाहा धर गो . चाहा घुटुक लगै तो चाहा मीठ नै लाग . माची बेर नौकर छैं कूणीन .. कि चाहा बजर पाडि लिरौछै यस . चीनी कम हैरै .
नौकर - चीनि सगी रै सैप . पटखाटाक ताल बटी कटोर में गूड धरि राखौ . ऐल टपुक लगै लिओ . पछिल जब कन्टोल में चीनि आलि तो तब पीला चीनि हाली चाहा .
लालकिसन ज्यू - किलै पाल म्हैणैकि चीनि सगी गे ?
नौकर - पाल म्हैण चीनि का मिली हमन कैं . तुमर आधार कार्ड जाम नै हैरय कूण लागि रौछी कन्टोल वाल . ग्यूं ले मी बाजपेई ज्यू क कार्ड में मागि लायूं . तुम आधार कार्ड जाम किलै नि करनया सैप ?
लालकिसन ज्यू - कि बतूं यार .. मील सोचि राष्ट्रपति बण जून तो कि चैल तौ राशन क चीनि चाँओ .. पर क्याप हैगो . त्वेकैं आधार कार्डैकि हैरै यां मी निराधार हैगेयूं ..
( तब तक भ्यैर बटी मुरुलि धर ज्यू पुजि गे . भ्यैरे बटी घात लगूण लागि गे )
मुरुलिधर ज्यू - ओ लाल दा .. ओ लाल दा
लालकिसन ज्यू - अरे .. आ रे मुरुलिया .. भल हैरौछै .. आज कि बात . त्यार कपाव पिठ्या ले नै देखण लागि रयूं
मुरुलिधर ज्यू - कि आग हालूं यो चनण पिठ्या .. के करिबेर के नि हुन . मैल तो दयाप्त पुजण ले छाडि हाली . कि भल करि राखौ यो दयाप्तनैलि ले . बुढापा में अचैन है रयां माजद् .
लालकिसन ज्यू - होय यार भुला तस तो ठीक कूण लागि रौछै . आब मेकेणी देख . जनमभर राम -राम कैबेर दिन काटन . आब बुड्यांकाल गोबिंद गोबिन्द जपणक टैम आ तो ख्वारा क मैली बटी कोबिन्द बैठ गो .
मुरुली धर ज्यू - आस् तो मैलि ले लगै राखछी हो .. पर कि करूं आपुण बसक तो के नि भै ..
तुम ले भुल जाओ .
लालकिसन ज्यू - कसिके भुल जा कूण लागि रौछै .. पैलि प्रधानमन्त्री बणन बखत ले तसै करौ म्यार दगाड . ऐल तो मैन पक्क सोचि राखछी .. तौ रनकारन म्यार आँस लागाल . हे धरती धरमराज हे ईष्ट देबो .. आब तुमैं करिया मेर न्याय .
मुरुलिधर ज्यू - तसिके आँस नै लफाओ हो .. द्वाई झन फोको . भया तो तौ ले आपुणै परिवाराक .
लालकिलन ज्यू - ढुंग में रैजौ तस परिवार .
मुरुलिधर ज्यू - धक्क तो म्यार दिल में लागि रै . पर मन पत्यूण भै . यै समझ बेर मन मनै लिनूं कि मार्गदर्शक मण्डल तो हमन कैं बणैं राखौ कम से कम .
लालकिसन ज्यू - मार्गदर्शक नै मूकदर्शक मण्डल कओ मुरुलि भुला . बस हमार हाथ लमचूस दि राखौ ... लिओ आब तुमार दाँत नहांतिन चूसो यकैं कैबेर . यो पार्टी बणूण में मणभांटि हमैलि लगै .. ऐल .. हर हर मोदी हर हर योगी हैरे ..
मुरुलि धर ज्यू - होय तदुक मेहनत कोई और पार्टी में रैबेर करी हुनी तो ऐल राष्ट्रपति नै सही कती राजभवन में ऐश करण लागि रूना .
लालकिसन ज्यू - और पार्टी में ले तसै बजर पडि रौ हाई .. किकाड मिकाड बेअकलीक छ्वार म्वार नैकि चमचागिरी करण पडैं .
मुरुलिधर ज्यू - पैं आब अघिल कै कि प्रोग्राम छ ??
लालकिसन ज्यू - कि करनू . तपार मूकदर्शक मण्डल में लागि रूनू ब्याँवन जस .. उसिके ले कतु बचुन आब .. चार दिनैकि जिन्दगी में तीन दिन जसिके तसिके घ्वेडि हालीं .. बाकि दिन ले तसिके काटि जाल . खैर तु कि करलै यार मुरुलिया आब ??
मुरुलिधर ज्यू - रायसीना हिल तो यो जनम में स्वैण देखण हैगो . आपुण अल्मोडा हिल न्है जाण होल .. वैं पुराण मकान छ एक पाख् टुटी . पाख सुदारि मांगूं कैछैणी .. कदिनें चितई कदिनैं जागसेर ... तसिके दिन कटी जाल ..
लालकिसन ज्यू - यार म्यर तो तस बाट ले नि भै ... म्यार तो सिंध ले कथ्थ रै गे आब ... यार भुला कती अलमाड बागसेर पन नाली द्वियेक क एक खेत मेकें ले दिलै दिनैं कन ..बुड्याकाल वैं रै जान्यूं मी ले .. दगड ले है जान् त्यर म्योर ... कोश्यारि ले बुडीं रौ खंडूरी ले ..तनन ले लगै लिना दगाड .. चार जाणी है जाना ..फिर कति बाजाँक बोटा क जाड बैठबेर दहल पकड खेलुन .. दिन काटी जाल ..
मुरुलिधर ज्यू ..होय ठीक छ ... भोलै करू तस ...
लालकिसन ज्यू - जी रये यार ...
मुरुलिधर ज्यू - अच्छा पैं ऐल हिटूं ....
(रेडियो में आब नई गीत उण बैठ गे - एक मैं और एक तू ..... दोनो मिले इस तरह ...और तन मन में हो रहा है . ये तो होना ही था .......)
विनोद पन्त 'खन्तोली ' हरिद्वार
हमसे का भूल हुई ...... जो ये सजा हमका मिली .
लालकिसन ज्यूक आंख ओसै रई . लाल आगाक जास डकार हैरैई द्विये आंख . शायद तीन चार दिनक उनित् लागि रौ . नौकर चाहा धर गो . चाहा घुटुक लगै तो चाहा मीठ नै लाग . माची बेर नौकर छैं कूणीन .. कि चाहा बजर पाडि लिरौछै यस . चीनी कम हैरै .
नौकर - चीनि सगी रै सैप . पटखाटाक ताल बटी कटोर में गूड धरि राखौ . ऐल टपुक लगै लिओ . पछिल जब कन्टोल में चीनि आलि तो तब पीला चीनि हाली चाहा .
लालकिसन ज्यू - किलै पाल म्हैणैकि चीनि सगी गे ?
नौकर - पाल म्हैण चीनि का मिली हमन कैं . तुमर आधार कार्ड जाम नै हैरय कूण लागि रौछी कन्टोल वाल . ग्यूं ले मी बाजपेई ज्यू क कार्ड में मागि लायूं . तुम आधार कार्ड जाम किलै नि करनया सैप ?
लालकिसन ज्यू - कि बतूं यार .. मील सोचि राष्ट्रपति बण जून तो कि चैल तौ राशन क चीनि चाँओ .. पर क्याप हैगो . त्वेकैं आधार कार्डैकि हैरै यां मी निराधार हैगेयूं ..
( तब तक भ्यैर बटी मुरुलि धर ज्यू पुजि गे . भ्यैरे बटी घात लगूण लागि गे )
मुरुलिधर ज्यू - ओ लाल दा .. ओ लाल दा
लालकिसन ज्यू - अरे .. आ रे मुरुलिया .. भल हैरौछै .. आज कि बात . त्यार कपाव पिठ्या ले नै देखण लागि रयूं
मुरुलिधर ज्यू - कि आग हालूं यो चनण पिठ्या .. के करिबेर के नि हुन . मैल तो दयाप्त पुजण ले छाडि हाली . कि भल करि राखौ यो दयाप्तनैलि ले . बुढापा में अचैन है रयां माजद् .
लालकिसन ज्यू - होय यार भुला तस तो ठीक कूण लागि रौछै . आब मेकेणी देख . जनमभर राम -राम कैबेर दिन काटन . आब बुड्यांकाल गोबिंद गोबिन्द जपणक टैम आ तो ख्वारा क मैली बटी कोबिन्द बैठ गो .
मुरुली धर ज्यू - आस् तो मैलि ले लगै राखछी हो .. पर कि करूं आपुण बसक तो के नि भै ..
तुम ले भुल जाओ .
लालकिसन ज्यू - कसिके भुल जा कूण लागि रौछै .. पैलि प्रधानमन्त्री बणन बखत ले तसै करौ म्यार दगाड . ऐल तो मैन पक्क सोचि राखछी .. तौ रनकारन म्यार आँस लागाल . हे धरती धरमराज हे ईष्ट देबो .. आब तुमैं करिया मेर न्याय .
मुरुलिधर ज्यू - तसिके आँस नै लफाओ हो .. द्वाई झन फोको . भया तो तौ ले आपुणै परिवाराक .
लालकिलन ज्यू - ढुंग में रैजौ तस परिवार .
मुरुलिधर ज्यू - धक्क तो म्यार दिल में लागि रै . पर मन पत्यूण भै . यै समझ बेर मन मनै लिनूं कि मार्गदर्शक मण्डल तो हमन कैं बणैं राखौ कम से कम .
लालकिसन ज्यू - मार्गदर्शक नै मूकदर्शक मण्डल कओ मुरुलि भुला . बस हमार हाथ लमचूस दि राखौ ... लिओ आब तुमार दाँत नहांतिन चूसो यकैं कैबेर . यो पार्टी बणूण में मणभांटि हमैलि लगै .. ऐल .. हर हर मोदी हर हर योगी हैरे ..
मुरुलि धर ज्यू - होय तदुक मेहनत कोई और पार्टी में रैबेर करी हुनी तो ऐल राष्ट्रपति नै सही कती राजभवन में ऐश करण लागि रूना .
लालकिसन ज्यू - और पार्टी में ले तसै बजर पडि रौ हाई .. किकाड मिकाड बेअकलीक छ्वार म्वार नैकि चमचागिरी करण पडैं .
मुरुलिधर ज्यू - पैं आब अघिल कै कि प्रोग्राम छ ??
लालकिसन ज्यू - कि करनू . तपार मूकदर्शक मण्डल में लागि रूनू ब्याँवन जस .. उसिके ले कतु बचुन आब .. चार दिनैकि जिन्दगी में तीन दिन जसिके तसिके घ्वेडि हालीं .. बाकि दिन ले तसिके काटि जाल . खैर तु कि करलै यार मुरुलिया आब ??
मुरुलिधर ज्यू - रायसीना हिल तो यो जनम में स्वैण देखण हैगो . आपुण अल्मोडा हिल न्है जाण होल .. वैं पुराण मकान छ एक पाख् टुटी . पाख सुदारि मांगूं कैछैणी .. कदिनें चितई कदिनैं जागसेर ... तसिके दिन कटी जाल ..
लालकिसन ज्यू - यार म्यर तो तस बाट ले नि भै ... म्यार तो सिंध ले कथ्थ रै गे आब ... यार भुला कती अलमाड बागसेर पन नाली द्वियेक क एक खेत मेकें ले दिलै दिनैं कन ..बुड्याकाल वैं रै जान्यूं मी ले .. दगड ले है जान् त्यर म्योर ... कोश्यारि ले बुडीं रौ खंडूरी ले ..तनन ले लगै लिना दगाड .. चार जाणी है जाना ..फिर कति बाजाँक बोटा क जाड बैठबेर दहल पकड खेलुन .. दिन काटी जाल ..
मुरुलिधर ज्यू ..होय ठीक छ ... भोलै करू तस ...
लालकिसन ज्यू - जी रये यार ...
मुरुलिधर ज्यू - अच्छा पैं ऐल हिटूं ....
(रेडियो में आब नई गीत उण बैठ गे - एक मैं और एक तू ..... दोनो मिले इस तरह ...और तन मन में हो रहा है . ये तो होना ही था .......)
विनोद पन्त 'खन्तोली ' हरिद्वार
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