पहाड़ी करवा चौथ

रत्ति ब्याण -
स्यैणि - उठना कन फटाफट नै ध्वे बेर तैयार है जाओ . आज करु चौथ छ .
पति - पड़ण दी .. क्याप बबाल छ . हमार पहाड़न में कां हुं तौ करु चौथ ? पैलि बटी हमैरि ईज और आमैलि कबै न कर तौ बर्त .. अाजकलाक नई जपान वालनाक टटम भै तौ .
स्यैणि - पैलि बटी तुमैरि बाबू और बूबू लि कबै मोटर साइकिल नि चलै . सब जाग पैदलै जांछीं . तुम तो सब जाग मोटर साइकिलै में किलै डोईंछा ... तुमार ईज बौज्यू टैम पर तो बहुत चीज नि हुंछी .. के के छोड़ला ?
पति - तु बहस करिबेर म्यार मूंड नि बिगाड़ यार रत्तै रत्तै .
स्यैणी - सुणो पैं .. मेर लिजी कि गिफ्ट लाला आज ?
पति - कस गिफ्ट यार रोज रोज .. पोरुवैं मैरिज एनभरसरी पर एक पौडर क डाब दे तो सही त्वेकैं कोहरयाई मुंडी डालिये कैबेर . किलै खतम करि हालौ ?
स्यैणि - तुमन में रै जौ उ गिफ्ट . कांहुं गे तुमैरि अकल ? गिफ्ट दिणक ले तमीज नहांति तुमन .. के भल भल चीज लूना .. पौडरक डाब .. शरम ले नि उड़य बतूण में .
पति - यार गिफ्ट दिणी वालैकि भावना देखीं जां . गिफ्ट नै .
स्यैणी - ततु लैकक गिफ्ट वी भावना कैं दि आया ..भावना देखीं राखी तुमैरि ..
पति - यार तु कचकचाट नि कर मेर पैन्ट कि जेब बटी सौ रुपै निकालि लिजा . जी ले पसन्द आल खरीद लिये .
स्यैणी - गिफ्ट खरीदण छ .. ब्यालक साग थोड़ी खरीदण छ . सौ रुपैं में पौ भरी साग ऊं . गिफ्ट नै उन . उसके ले गिफ्ट खरीदबेर लूनी . डबल नै दिन . मी क्वे पौंण थोड़ी छ्यूं सौ रुपै हाथ में च्यापो .
पति - अच्छा ब्याल बखत तक लि उल .याद रै जाली तो .
स्यैणी - रूण दिया एहसान नै करिया .. ब्या दिनन कास छिया तुम आब कास हैगेछा ...
पति - तु ले कि ब्या दिनन कसि छी हरि खुश्याणी जसि आब कसि हैगेछै सग्गी खुश्याणी जसि ..
स्यैणी - तुम ज्यादे हाकाहाक झन करिया हां .. आपुणी तामि खोरि चाओ आरसी में .. बड़ आईं मेकें नाम धरणी वाल .
पति - हुंह ...
स्यैणी - हुंह .....
दोपहर )
पति - किलै भूक लागि गे ?
स्यैणी - तुमन कि मतलब .. तुम तो भ्यैर बटी खै बेर ऐ गे हुनाला ..
पति - होय तेरि आम बैठ रछी बजार में रवाट लिबेर ..
स्यैणी - मेरी आम में झन जाया हां ... खबरदार ! पति - हुंह ..
( रात में )
स्यैणी - लाछा ...? गिफ्ट ?
पति - भुलि गेयू यार .. गिफ्टै हैरौ .. यो बुड्याकाल हुंछै गिफ्ट ? तौ चीज जवानी में ठीक लागनेर भै .
स्यैणी - तुम तौ फसक आपुण पास धरि करि करो . कमचूस रना ..
( रात चांद निकलणाक टैम पर )
स्यैणी - यो चांद कब निकलल ? आज तो बहुत देर करि है .
पति - चांद कें पत्त नि हुनेल त्वील बर्त करि राखौ कैबेर . फोन करि बेर बतै दिनी तो टैम पर ऐ जान . बेवकूफ स्यैणी . नि थाईंड़य भूक तो किलै करौ बर्त ... ऐ जाल आपुण टैम पर . तु हाकाहाक नि कर .
स्यैणी - देखो धें . बादल लागि गो आकाश में . चांद ढकी रौ हुनेल .. टैम तो हैगो .. मी यस करू चांद उज्याण बादलैकि सीध में अर्ध दी बेर ब्रत खोलि ल्यू कि ? .. न मालूम यो बादल कब तक हटौल ?
पति - नै नै तस झन करिये यार .. तेरी खुटी सलाम ... भलीके चांद देखीण दि ... तेर बबाल टलाई में मेर जै आफत ऐ रौली ... ले गिफ्टाक पांच हजार पकड़ ... पर चांद भलीके उण दे . बादल हट जाण दे .... मेरि खिमुली ... मेरी पराणी .... तेरी बलै ल्यून .....

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