मैतैकि तैयारी

आदिम - अरे ! कि छ यो .. तदुक झ्वाल किलै करि राखन पैक ? किलै मकान मालिकैलि मकान खालि कर कै हालछै ??
स्यैणि -हाय के हैगो तुमन ?? किलै भुलि गोछा ? अमरु वक ब्या नहांति ??
आदिम - अमरू .... को अमरु ..??? अरे कति त्यार मैतक अमरु तो नहां जो एक साल चेलिनाक इसकूला भ्यैर बटी चेल्लिन छेडन में पुलिस वालनैलि थेचौ ... तेर मैतक अमरू ...
स्यैणि - हाल्ल नि करो हां .. मेर रिश्तेदार भै . वीक इजक और मेर आमक मैत एक्कै गौं में छी . आब न्यूत ऐरौ तो मानणै भै . यो बहानैलि आम् कें ले भेटि उल . बुडी मैंस भै ..
आदिम - (चिढाते हुए ) बुडी मैंस भै ... के नि हुन उ बुडी कैं अल्लै .. फिर तदुक दूरैकि रिश्तेदारी में को जां यो दिल्ली बटी . कदुक खर्च हूं .
स्यैणि - तस किलै कूंछा .. कदुक काम लागौं अमरु मेर मैतिनाक् ... मेर बाबू क कैका दगाड झकड भै तो हमर तरब बटी गालि मैक अमरुवै करौं ..
आदिम - के भाल काम ले करनी त्यार मैत्ती ..
स्यैणि - तुम जासन कें मैं जैसि चेलि दी राखी .. और के भल करनी . तुमर भल तो करि राखौ ..
आदिम - बज्जर पाडि राखौ .
स्यैणि - के को .. जरा जोरैलि बुलाओ धें ..
आदिम - बज्जर ..... मेर मतलब बजार जाणयू .. के लूण तो नहां वां बटी ..
स्यैणि - होय यो लिस्ट लिओ .. यो सब लि आया .. मैता क लिजी मिठाई लिजूल ..
आदिम - कि छ यो .. एक किलो रसगुल्ला . एक किलो बरफी . एक किलो सोहन हल्लू . एक डाब सोनपापडी . एक किलो रबडी ... एक किलो ........ यो मिठाई क लिस्ट छै या मसाण पुजै कि लिस्ट छ .. तीन पेजनैकि .. यदुक मिठाई लि कि करली .. दुकान खोलली गौं में जैबेर ..
स्यैणि -अरे उ रसगुल्ला और बरफी मेरि इज भल मानैं .बाबू कूडछी सोहन हल्लू लाया कैबेर . सोनपापणी मेरि बैणी क पराण भै .
आदिम - और रबडी ..
स्यैणि - रबडी आम खालि बिचारि ...दांत नि भै वीक . और मिठाई चबाईन नहांति आमें कैल ..
आदिम - (मूख ट्योड करिबेर ) दांत नहांतिन .. शिकार खाण बखत तो बाकरैकि मुनि ले बुकै दीं तेरि आम .. मेकें टुकुडै टुकुड दिया कूं .. और मिठाई नि चबाईन .. नखरु रनै बुडी ..
स्यैणि - मेरि आम में नि जाया हां ... और जरा मिठाई लिजाला तो तुमर कि बिगड जाल .. तुम जवैं भया .. ईज कूं जवैं लायी मिठ्ठै भौते स्वाद लागें ..
आदिम - त्वील आपुण बाब् छैं कैबेर आपुण ब्या खीम सिंह मोहन सिंह क च्याल दगाड किलै नि कर .. रोज खवूनी आपु ईज कें जवैं लायी मिठ्ठै .. दिमाग खराब करि राखौ म्योर .
स्यैणि - अरे तुमैलि भलि याद दिलै .. अलमाड जैबेर खीम सिंह मोहन सिंहा क दुकान बटी बाल मिठ्ठै और द्वि किलो सिगौडी ले धरणैं कि याद करिया .. गौं पन बांटणा काम लागैलि ..
आदिम - जरा भी पन चा ... पगलि गेछै कि ..सार गौं में किलै बांटली मिठाई .. मेर बाबू क ब्या ज कि हैरौ अलबेर ..
स्यैणि - तुम मिठाई ल्याला या नैं ..?? सीद्द सीद्द बताओ .. नतर तुम ऐकलै जाया .. मैं यें हैरू ..
आदिम - सुण .. यस करूल अलमाड बटी पौ पौ भरी क डाब बेसणा क लड्डू लिजूल .. सबन कैं दि दिये .. ज्यादा मिठाई खवाली तो त्यार मैती न कैं दस्त लागि जाल .. आजकल मिलावटी मावा मिलौ ..मिठाई बासि ले हैजां .. बेसणाक लड्डु हफ्तेक तक चलि जानी .
स्यैणि - रूण दिओ . तुमार मूख में रै जान तौ बेसणाक लड्डू ..
जब म्यार मैत बटी घ्यू क डाब लूंछा तब तुमन नि लागन दस्त ..??
आदिम - हुह ..
स्यैणि - हुह ....
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स्यैणि - सुणो .. मेकैं दस हजार रुपें दि जाया हां औपिस जाण बखत .. मील शौपिग करण छ ..
आदिम - कसि शौपिंग .. तदुक ब्वाज बादिबेर धौ नि भयी आजि .. आब कि रैगो ..
स्यैणि - किलै कपड नि लिजूल सबनाक लिजी .. ईजै लिजी साडि बिलौज . बाबू क लिजी कुर्त पैजाम .. सरदी ले ऐगेई .. हाडी आमा लिजी एक शौल ले लिजाल पडौल ..
आदिम - तेरि आम कैं अलबेर ग्यानपीठ पुरस्कार थोडी मिल रौ .. जो उ बुडी कैं शौल ढकाली .. पराल में आफि पडि रू बुडी ..
स्यैणि - खबरदार !!!!!! मेरि आम छैं बुडी कौला तो .. और हां भय्या लिजी जींस और टी शर्ट तो मैं भुली गेयूं ..
आदिम - आजि को भय्या ...??
स्यैणि - तुमरि याददास्त चलि गे या करि चांडौंछा ... किलै आपुण साल् कें ले भुलि गोछा ..
आदिम - अरे ... तेर भय्या ... होय होय .. याद ऐगो .. जो हमार ब्या दिन शराब पीबेर रात भर सिसूणा क घाँचन पडि रौछी ..??
स्यैणि - बकबास नि करो .. उ तो उ बिचारक खुट रडि पडौ कच्यार में ..आजकल वील शराब पींण ले छोडि हालौ .
आदिम - अत्तर पींण शुरू करि हालि हुन्योल शराब छोडिबेर .. सुधरणि दास क नहांति उ ..
स्यैणि - तुमर भै हैबेर तो भल छ .. पोरबेर घर जायी में बीडि पीणा लिजी मेर पर्स बटी डबल चोरि देयी तुमार भाई लि ..
आदिम - संस्कारवान भै मेर भाई .. आब त्वेछैं कसिके कूंछी डबल दिओ बीडि पीणा लिजी.. अधिकार समझिबेर निकाल हालिन्याल .. बोजि भयी तू ..
स्यैणि - होय किलै नै .. पुर परिवार सस्कारवान भै तुमर .. बैणि तुमरि .. मैंसनाक खेतन बटी घा चोरि बेर लूं .. तुमैरि ईज .. मैंसनाक बाडन बटी साग चोरणा लिजी अधराति में उठि जां . फिर रत्ति ब्याण गालि मैक सुणन पडैं पुर परिवार कें तुमार ..
आदिम - खाल्लि नि कये हां .. उसके ले साग पात चोरियैकि गालि नि लागनि ..
स्यैणि - होय बेशरम कें के नि लागनै ..
आदिम - के को ..?
स्यैणि - के नि कौय ..
आदिम - कसि स्यैणि छै यार तू .. आपुण सौरासिन छैं जे ते कूण लागि रछै .
स्यैणि - किलै तुम नि कूणया आपुण सौरासिन छे उल्ट सीद्द ..
आदिम - उ तो तसै कूण लकारिक छन ..
स्यैणि - तुम चुप रयां हां ..
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(घर जाण बखत )
आदिम - यार यो इतुक फांच पुन्तुरि कसिके जाल आघाण ..?
स्यैणि - गाडि लिजाली .. तुम बस इस्टेशन तक पुजै दिओ . तदुकै दिक्कत छ .
आदिम - इस्टेशन तक गाडी क पाख में धरण त्वील खाल्लि समझ राखि छै .. उसिके म्यार कमर पीड रूं ..कसिके उठूल यदुक भारि ..?
स्यैणि (शरमाते हुए ) - और बखत तो नि हुनि तुमरि कमर पीड ...दुष्ट रना ..
आदिम (रोमांटिंक हैबेर ) - अरे फिकर किलै करछी .. त्योर सब सामान पुजि जाल मैत .. यां इस्टेशन में कुल्ली करि ल्यून .. अलमाड डोट्याव करि द्यूल ..तु देखते रौ ..
स्यैणि - हाई !!!!! मेकैं के नि चैन उ कुल्ली हुल्ली .. मेकें तुम मिल गोछा बस .. मेरि लिजी तो तुमै कुल्ली भया .. तुमै डोट्याव भया .. बलै ल्यून तुमैरि .
चलो फटाफट सामान उठाओ ... गाडी क बखत हैगो .. फिर छाज वालि सीट ले नि मिलौ .. हिटो हिटो ..
आदिम - (मन मनैं ) बज्जर पडि जाल .. ब्या करिबेर यसि कुल्लीगिरी करण पडनै ... (स्यैणि छैं )
एकाद झोल तु ले पकड पैं ..
स्यैणि - कसि पकड कुडैछा . मेर हाथ खालि छना के .. देखण नि रया .. एक हाथ में मोबाइल और दूसार में पाणि बोतल पकडि राखी .. नखार नि करो .. हिटो फटाफट ...
****** विनोद पन्त 'खन्तोली '***********

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