सैन्टा द्याप्त .
रत्तिब्याणक टैम भै . बिस्तर में पड़ी भयूं . भला भाल
स्वैण उण लागि भै . तात लागि भै लिहाफ भितर .
तब तक घरवाईक आवाज पड़न बैठ गे कान न में . उठो हो . उठो .
सुड़नौछा . उठो .
मैलि सुड़ियैकि नि सुणी करि दी . घनघोर
नींद आइयाक नखार लगै दी . घरवाई ले
कम नि भै . वीलि मेर हाथ खींचबेर
लझोड़न शुरू कर दी .
मैल को - कि करनैछी तस . तमीज कां गे
तेरि . बैग छ्यूं त्योर . प्यारैलि नि उठै सकनी . उठो जानूं
उठो डार्लिंग कैबेर उठूनी . समयाक सांथ
चली कर . देख धें दुन्नि कां पुजि गे .
घरवाई - होय सब देखि रयूं मी दुन्नि कां पुजि गे . सारि
दुन्नि नैध्वे बेर पुज पाठ करि बेर बैठ गे . तुमैरि चारि लिफाफ
भीतर पाद नि मारड़य दुन्नि . उठो फटाफट नाण ध्वैण
करो . मैल बिस्तर उठूण छ . क्वे भीतर आलौ कि
कौल ?
मैलि कौ - त्यार मुख बटी भलि बात कबै नि आलि . और
यदुक ठंड में नाण क नाम झन लिये . ठंडैलि जुकाम लागि गे या
बीमार पड़ि गेयूं तो को रौल जिम्मेदार . मैसैलि आपुण
जतन आपुण हाथैलि करण चें .
घरवाई - जि बजर पाड़छा पाड़ो . नाण नि लाग रया तो कम से कम तौ
मूखक टाल तो खुकल लिओ . त्यार बारक दिन छ . और तौ चाहा धरि
राखौ .... पी लिया ..नतर टौणी जाल .
मैलि चाहा घुटुक मूख लै लगै . तब तक प्रेशर ले बण गे . मैलि सोचि
तौ कूण लागि रैछी आज त्यार छ . कि हुन्योल .. खैर मैं
फटाफट बाथरूम भीतर घुस गेईं .
फ्रैश हई बाद आब नाणैकि बारि भै . मेर कल्ज कामण बैठ गे .
मरता क्या न करता . पाणीकि लोटि लिबेर
दीवारन में पाणी तौड़्यूण लागि गेयू . खाप
बटी हू...हू ... ऊ ...ऊ ... हा ....आ ....आ ...
निकलण बैठ गे .
अचानक याद ऐ अरे ! मी तो बामण क पोथ भयूं . यस कि
करण लागि रयूं .
आब मैलि अपवित्र पवित्रो वा . गंगे जमुनेश्चैव गोदावरी
सरस्वती . टाइपाक चार पांच खानदानी मन्त्र
नकि हाकाहाक पाड़ि दी बाथरूम भितर . दगाड़ दगाड़ै द्वि
चार पाणीक छिट ले आंग में खित ली .
आब भ्यैर आयूं तो स्यैणी चाहा गिलास दन्न कैबेर
भरिबेर और एक तश्तैरि में मांसैकि दालाक बाड़ बणैबेर लाई भै .
बड़ खैबेर गैस बण जानेर भै . मैलि कोय . कि बज्या यो रत्तै रत्तै ..
बड़ किलै बणाईन . त्वेकैं तो पत्त छ ....
मेरि बात बीचै में काटिबेर स्यैणि कूण लागि -
कस बामण हुनेला तुम . होश फाम के छ या नै .. आज
पच्चीस दिसम्बर छ . बड़ दिन भै आज . तबै यो बड़
बणै राखन . आब आज बड़ नि बड़ूल तो कब बड़ूल .
मैं पत्त नै किलै रोमान्टिक हैगेयू . मैल आदु बड़ आपु खैबेर आदु
घरवाई क तरफ बढाय तो उ भुती गे .कि करनौछा तस
ओच्छ्याट . आज म्यार बर्त छ .
मैलि कौ - आब बर्त क्याक छ ?
घरवाई - सन्टा दयाप्तक .
आब तुम यस करो फटाफट बजार बटी सामान लि आओ .
ब्याल बखत संटा बुबुकि पुज करिबेर फराल खूल . आलू गुटुक और
रैत बड़ूल . महाप्रसादैते मिल्क केक लि आया . बाटणा
लिजी पाइन ऐप्पल केक लाया अंखड़
मोमबत्ती लि आया एक ठुल ठुल जै . आज दि जगून
बल . संता बुब नाराज है जानी बल . और हां फेसबुक
में ऐ रौछी आज तुलसी पूजा दिवस ले छ
बल . आपुणी ईज छैं कै दिया करि लिया . तास टटम मेरि
बिती नै हुन .
मेरी बुद्धि चकरै गे . मैं झोल और आपुण मूख द्विये
लटकै बेर बजार पुजैकि सामान लुण बाट लागि गेयूं .
(
स्वैण उण लागि भै . तात लागि भै लिहाफ भितर .
तब तक घरवाईक आवाज पड़न बैठ गे कान न में . उठो हो . उठो .
सुड़नौछा . उठो .
मैलि सुड़ियैकि नि सुणी करि दी . घनघोर
नींद आइयाक नखार लगै दी . घरवाई ले
कम नि भै . वीलि मेर हाथ खींचबेर
लझोड़न शुरू कर दी .
मैल को - कि करनैछी तस . तमीज कां गे
तेरि . बैग छ्यूं त्योर . प्यारैलि नि उठै सकनी . उठो जानूं
उठो डार्लिंग कैबेर उठूनी . समयाक सांथ
चली कर . देख धें दुन्नि कां पुजि गे .
घरवाई - होय सब देखि रयूं मी दुन्नि कां पुजि गे . सारि
दुन्नि नैध्वे बेर पुज पाठ करि बेर बैठ गे . तुमैरि चारि लिफाफ
भीतर पाद नि मारड़य दुन्नि . उठो फटाफट नाण ध्वैण
करो . मैल बिस्तर उठूण छ . क्वे भीतर आलौ कि
कौल ?
मैलि कौ - त्यार मुख बटी भलि बात कबै नि आलि . और
यदुक ठंड में नाण क नाम झन लिये . ठंडैलि जुकाम लागि गे या
बीमार पड़ि गेयूं तो को रौल जिम्मेदार . मैसैलि आपुण
जतन आपुण हाथैलि करण चें .
घरवाई - जि बजर पाड़छा पाड़ो . नाण नि लाग रया तो कम से कम तौ
मूखक टाल तो खुकल लिओ . त्यार बारक दिन छ . और तौ चाहा धरि
राखौ .... पी लिया ..नतर टौणी जाल .
मैलि चाहा घुटुक मूख लै लगै . तब तक प्रेशर ले बण गे . मैलि सोचि
तौ कूण लागि रैछी आज त्यार छ . कि हुन्योल .. खैर मैं
फटाफट बाथरूम भीतर घुस गेईं .
फ्रैश हई बाद आब नाणैकि बारि भै . मेर कल्ज कामण बैठ गे .
मरता क्या न करता . पाणीकि लोटि लिबेर
दीवारन में पाणी तौड़्यूण लागि गेयू . खाप
बटी हू...हू ... ऊ ...ऊ ... हा ....आ ....आ ...
निकलण बैठ गे .
अचानक याद ऐ अरे ! मी तो बामण क पोथ भयूं . यस कि
करण लागि रयूं .
आब मैलि अपवित्र पवित्रो वा . गंगे जमुनेश्चैव गोदावरी
सरस्वती . टाइपाक चार पांच खानदानी मन्त्र
नकि हाकाहाक पाड़ि दी बाथरूम भितर . दगाड़ दगाड़ै द्वि
चार पाणीक छिट ले आंग में खित ली .
आब भ्यैर आयूं तो स्यैणी चाहा गिलास दन्न कैबेर
भरिबेर और एक तश्तैरि में मांसैकि दालाक बाड़ बणैबेर लाई भै .
बड़ खैबेर गैस बण जानेर भै . मैलि कोय . कि बज्या यो रत्तै रत्तै ..
बड़ किलै बणाईन . त्वेकैं तो पत्त छ ....
मेरि बात बीचै में काटिबेर स्यैणि कूण लागि -
कस बामण हुनेला तुम . होश फाम के छ या नै .. आज
पच्चीस दिसम्बर छ . बड़ दिन भै आज . तबै यो बड़
बणै राखन . आब आज बड़ नि बड़ूल तो कब बड़ूल .
मैं पत्त नै किलै रोमान्टिक हैगेयू . मैल आदु बड़ आपु खैबेर आदु
घरवाई क तरफ बढाय तो उ भुती गे .कि करनौछा तस
ओच्छ्याट . आज म्यार बर्त छ .
मैलि कौ - आब बर्त क्याक छ ?
घरवाई - सन्टा दयाप्तक .
आब तुम यस करो फटाफट बजार बटी सामान लि आओ .
ब्याल बखत संटा बुबुकि पुज करिबेर फराल खूल . आलू गुटुक और
रैत बड़ूल . महाप्रसादैते मिल्क केक लि आया . बाटणा
लिजी पाइन ऐप्पल केक लाया अंखड़
मोमबत्ती लि आया एक ठुल ठुल जै . आज दि जगून
बल . संता बुब नाराज है जानी बल . और हां फेसबुक
में ऐ रौछी आज तुलसी पूजा दिवस ले छ
बल . आपुणी ईज छैं कै दिया करि लिया . तास टटम मेरि
बिती नै हुन .
मेरी बुद्धि चकरै गे . मैं झोल और आपुण मूख द्विये
लटकै बेर बजार पुजैकि सामान लुण बाट लागि गेयूं .
(
Agile khani le sunao pe kakA
ReplyDeleteBhote bhal lago pdhi ber kak jyu..
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