वैलेन्टाइन त्यार

आज वैलेन्टाइन त्यार भै .. मैलि ले सोचि आज कुछ तूफानी करि जाऔ . मैं प्रोग्राम बणूण लाग्यूं . दिल में कुतकालि जस लागि गे . मैलि सोचि क्वे यस प्रोगाम बणाई जाओ कि मसालेदार यादगार बण जाऔ .
मैलि आपुण घरवाई कैं आवाज लगै - अरे पंडिताइन . हैप्पी वैलेन्टाइन . स्यैणी शैद उसीके माचीन पितीन हैरै हुनेलि . म्यार शब्द भी छूटते ही सुदै परमाणु बम जसि फट गे . यां भीतर हल्द मर्च मस्याल सगी रई . तुमन यो वैलेन्टाइनैकि हैरै . फटाफट उठिबेर बजार बटी मस्याल लि आओ नतर तुमार भांटनाक खुश्याल निकालि द्यूल . बुड्याकाल होशफाम करो . भितरपन के काम करो . फुन लगाई बल्दैकि चार मेटाओ झन . उसीके म्यर मूंड आँफ हैरौ.
मैल को - यार मस्याल नानतिनन छैं मगै ल्ही . आज प्यार करणी त्यार भै . जरा एक आंखर भल भल जस बुलानि कन .
स्यैणि आंख ताणन बैठ गे .
मैलि सोचि यैक मूख को लागौं .. यैक प्याराक स्याल सगी रई . कति और जाग उज्याड़न लागि जाऔ . स्यैणीक चक्कर में आपुण वैलेन्टाइन किलै खराब करी जाओ .
मैं नै ध्वे बेर मूख लै वैसलीन क डाब घोसिबेर और कपड़न में स्यैणीक पर्स बटी सैन्ट चोरिबेर द्वि छरैक मार और बाल कैं मैलिके कुटरि बेर पाख उज्याण बाट लागि गेयू . मनाक ध्वाक भाय आघाण . कि अन्ताज कति क्वे पड़ोसनैलि फूल फाल दि हाल .
मैं छत में गेयू . वार पार चाय . थोड़ी देर में पड़ोस में बर्मा ज्यू घरवाई पाख् में लुकुड़ घाम डालण ऐगे .
मैल वीक उज्याण चाय वाल मेरि उज्याण चाय . मैर मन में खीम सिंह मोहन सिंहा क लड्डू फुटण बैठ गे दगाड़ में बाल मिठ्ठै कि जस खुशबू जसि चितूण बैठ गेयूं . मेर खाप बटी के निकलन वी हैबेर पैलिये कानन में डाव जसि पड़ि गे . वील घात लगै - नमस्ते अंकल .
मैलि मने मन वीकै मैक्याक - त्यार ख्वार पड़ि जौ बजर . आठ दसै साल नानि हुनेलि ढ्वाल फिर ले यो वर्ष दिना दिन अंकल कूण लागि रै .
मेर दिलाक अरमानन में तुस्यार पड़ि गे . पर फिर ले दिलैकि ठरक कम नि हई भै. मैलि फिर महा बेशरमाई दिखाते हुए गु खाईयांक जास गिज बणैबेर वी छैं पूछ -
अरे आज तो बड़ खूबसूरत देखि रौछा .. कि बात ?
पड़ोसन कूण लागि - आज वेलैन्टाइन त्यार छ . चिन्टू क पापा दगाड़ कती घुमण जूल . तबै ब्यूटी पार्लर बटी तैयार हैबेर ऐ रयू . तुम ले एक काम करो अंकल . तौ बालन कैं डाई करै बेर लि आओ . बाल काल करला तो कम से कम पचास सालाक जस लागला. और ब्याल बखत आंटी जी क दगाड़ कति घूमण जाया नानतिनन ले लिजाया . तुमर तो आब तसै वैलन्टाइन है सकौ . अच्छा अंकल बाय .
तस कैबेर उ फरैक्कि कैबेर फरकि बेर जानै रयी .
म्यार दिलाक सब अरमान यसिक घुरि गे जसिक बानर पाख् में धरि गद्दू घुर्यै दिनी .
( वैधानिक चेतावनी - उपरोक्त घटना को अपने अन्दर भी कसौटी पर कस लें . क्या पता कोई उपरोक्त चरित्र का मालिक अभी भी आत्मा में घुसपैठ किया हुवा हो ) विनोद पन्त ' खन्तोली

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