प्रकृति के रंग
ये धरती कितनी प्यारी है कितने खूब नजारे हैं .
पल पल रंग बदलते मौसम कितने प्यारे प्यारे हैं .
कभी शाम सिंदूरी होती इन्द्रधनुष बन जाता है
कभी भास्कर चमक बिखेरे चन्दा प्यारा आता है .
नीला अम्बर छतरी जैसा कितने सारे तारे हैं
पल पल रंग बदलते मौसम कितने प्यारे प्यारे हैं
ये धरती कितनी प्यारी है कितने खूब नजारे हैं .
रिमझिम रिमझिम बरखा रानी जब फुहार बन आती है
छम छम नाचे मन मयूर कोयलिया गीत सुनाती है .
चन चन चिन चिन करते पंछी देखो कितने सारे हैं
पल पल रंग बदलते मौसम कितने प्यारे प्यारे हैं
ये धरती कितनी प्यारी है कितने खूब नजारे हैं .
आसमान को छूते पर्वत सागर की गहराई है
पेडों की है डालें कितनी कलियों की तरुणाई है .
कल कल नदियों का निनाद और झरना कही पुकारे हैं
पल पल रंग बदलते मौसम कितने प्यारे प्यारे हैं
ये धरती कितनी प्यारी है कितने खूब नजारे हैं .
शस्यश्यामला धरती पर है नवजीवन संचार कहीं
कही धधकती ज्वालाऐ है बियावान झंझाड कहीं
कहीं दूर तक हिमनद फैले सागर खारे खारे हैं
पल पल रंग बदलते मौसम कितने प्यारे प्यारे हैं
ये धरती कितनी प्यारी है कितने खूब नजारे हैं
कहीं लदे हैं वृक्ष फलों से फूल हंस रहे डाली पर
हरी भरी बेले इतरायें सतरंगी हरियाली पर
कुदरत के हर रंग रूप ये कितने अजब निराले हैं
पल पल रंग बदलते मौसम कितने प्यारे प्यारे हैं
ये धरती कितनी प्यारी है कितने खूब नजारे हैं .
पल पल रंग बदलते मौसम कितने प्यारे प्यारे हैं .
कभी शाम सिंदूरी होती इन्द्रधनुष बन जाता है
कभी भास्कर चमक बिखेरे चन्दा प्यारा आता है .
नीला अम्बर छतरी जैसा कितने सारे तारे हैं
पल पल रंग बदलते मौसम कितने प्यारे प्यारे हैं
ये धरती कितनी प्यारी है कितने खूब नजारे हैं .
रिमझिम रिमझिम बरखा रानी जब फुहार बन आती है
छम छम नाचे मन मयूर कोयलिया गीत सुनाती है .
चन चन चिन चिन करते पंछी देखो कितने सारे हैं
पल पल रंग बदलते मौसम कितने प्यारे प्यारे हैं
ये धरती कितनी प्यारी है कितने खूब नजारे हैं .
आसमान को छूते पर्वत सागर की गहराई है
पेडों की है डालें कितनी कलियों की तरुणाई है .
कल कल नदियों का निनाद और झरना कही पुकारे हैं
पल पल रंग बदलते मौसम कितने प्यारे प्यारे हैं
ये धरती कितनी प्यारी है कितने खूब नजारे हैं .
शस्यश्यामला धरती पर है नवजीवन संचार कहीं
कही धधकती ज्वालाऐ है बियावान झंझाड कहीं
कहीं दूर तक हिमनद फैले सागर खारे खारे हैं
पल पल रंग बदलते मौसम कितने प्यारे प्यारे हैं
ये धरती कितनी प्यारी है कितने खूब नजारे हैं
कहीं लदे हैं वृक्ष फलों से फूल हंस रहे डाली पर
हरी भरी बेले इतरायें सतरंगी हरियाली पर
कुदरत के हर रंग रूप ये कितने अजब निराले हैं
पल पल रंग बदलते मौसम कितने प्यारे प्यारे हैं
ये धरती कितनी प्यारी है कितने खूब नजारे हैं .
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