ग्रहण स्नान

थकि हारि बेर साढे पांच बाजि औफिस बटी आयूं . मैलि सोचि घर जैबेर एक घुटुकि कटकि चहा पीन मर्चक धुस डालि बेर . जसै भीतर पुज्यूं तो भीतर पन धुंग्योई हई भै . मैलि घरवालि छैं पुछ कि करि राखौ यो .. कढाई में साग भड्यै हालछै कि बज्यै राखौ यस . डामर जलाइयैकि जसि बास क्यै ऐरै ..
स्यैणि कूण लागि - बज्जर पडि जाल .. कि हैरौ तुमार नाक कैं .. डामर नै जलै राख . धूप जगै राखौ दयापनाक थान् में .
मैलि कौ - आज बेटैम में ज कि जगा धूप . मांछर लागणी कि .. चल जे ले करि राखौ .. फटाफट एक गिलास चहा बणा .. बाबाहो भौते ठन्ड हैरौ . स्कूटर चलै बेर उण में हाथ खुट लकडी गेई .
स्यैणि - हाय ! कस चहा कुडौछा ..?? पत्त नहाति चन्द्रग्रहण लागि रौ . चहा पाणि के नै . ग्रहणकाल को खां . चलो फटाफट नाणैकि तैयारी करो .
मैलि कौ - पागल तो नै है गेयी . ऐल किलै नाणा लिजी कुणैछी . रत्तै नै तो राखौ .यदुक ठन्ड में नांण में बीमार थोडी हुण छ .
स्यैणि - हाय ! तुम बामण छा कि छा . जरा ले बेद शास्त्र नि पढ राखै कि .. ग्रहण काल स्नान करियक भौतै पुण्य हूं . ग्रहण काल तीन स्नान बतै राखीं . शुरु हुण बखत स्नान . मध्यान्ह स्नान और खतम हई बाद उप स्नान . चलो फटाफट कपड उतारो .
मैलि कौ - यार टंणक हैरौ ठन्डक . तीन बखत स्नान करण में भांट भली के लकडि जाल् . यो जाडनाक दिनन रत्तै ब्याण नाँण में तो कम्ब छुटि जां . तु मेछैं रात में नांणा लिजी कूण लागि रैछै . उ ले तीन बार . जरा चहा पिला यार और के नमकीन बिस्कुट छन तो उ ले ला . भूक ले लागि रै . तौ नाण ध्वैण क बार में बाद में बहस करुल ..
स्यैणि - तौ चहा पाणि बिस्कुट हिस्कुट क नाम ले झन लिया . ऐल को खां . देखो धें . ग्रहण लागि रौ . चन्द्रमा कैं कष्ट ऐरौ . ऐल तो भजन कीर्तन करनेर भाय . पुज पाठ करनेर भाय .
मैलि कौ - कस उटपटांग फसक करनैछी . रत्ति बटी सूतक लागि रौ ग्रहणक . और सब मन्दिर ले बन्द छन . फिर बन्द मन्दिरन में पुजपाठ करियक कि फैद . और त्यार भजन कीर्तन चन्द्रमा तक थोडी पुजण लागरीन . के कष्ट हस्ट नि हैरय चन्द्रमा कैं . यो एक खगोलीय घटना छ . जरा बैग्यागिक दृष्टिकोणैलि सोचि कर .
स्यैणि आब बौई गे . कूण लागि . तुमर बैग्यानिक दृष्टिकोण देखि राखौ मैलि हाईस्कूलाक मार्कशीट में . प्रैक्टिकलाक नम्बर मिलैबेर ले तैतीस नम्बर नि छी . फटाफट नाणैकि तैयारी करो . बामण जूनि में ऐरौछा .. के तो धरम करम करो .
आब मैलि दुसर पैतरा अजमूणि सोचि . भजन कीर्तन तो करि ले लियीन .. पर मुख्य समस्या नाणैकि भै . मैलि दिमाग दौडाय . मैलि स्यैणि छै कौय - पैलि तु जा नाँणा लिजी . मैं फिर सोचुल .
स्यैणि हंसते हुए कूण लागि - तमैं सोचण साचण के नहाति . स्नान करण छ मतलब करण छ . और मेकें स्नान करणैकि जरूरत नहांति . मैं तुमैरि अर्धांगिनी भयूं . तुमर स्नान करि मेर हिस्स क ले है जाल .
मेर पैंतरा बेकार है गे . मैलि दुसर चाल चलि . मैलि कौ - नानतिनन कैं ले करा पैं स्नान .
स्यैणि पुर वेद शास्त्र कन्ठस्त करि बेर मेकें स्नान करूणा क तर्कन कैं पयै बेर बैठि भै . कूण लागि - बालक बृद्ध और रोगी यो तीन न कैं ग्रहणकाल सब माफ हूं . यो के ले खै सकनी . नाण ले जरूरी नि भै . तुमन तो चहापाणि खाणि पीण सब उपग्रहण स्नानाक बादै मिलौल .
आबै मैलि इमोशनल बात करण शुरू करि - यार जरा ठन्ड दिमागैलि सोच धें . कीर्तन भजन करण तो ठीक भै . यदुक ठन्ड में स्नान करिबेर बीमार हुणक डर ले भै . पाणि देख धें हाथ ध्वैणें में आफत उण लागि रै .
स्यैणि क दगाड आज तक को जित् . स्यैणिनैकि पास सब ब्रह्मास्त्र तैयार रूनेर भाय पति लिजी . कूण लागि -
बस जरा ठन्ड पाणि देखां तरसि गेछा . सीमा पर बीर जवानाक बार में सोचो . बरफ में ले मुस्तैद रूनी . तुमार चारि ठन्ड देखां डर जान तो देशैकि रक्षा कसिके हुनि . बहान नि बणाओ .
मैलि कौ - जवानन कैं बरफ में ड्यूटि दिणक डबल मिलनन और सम्मान ले मिलौं .मेकैं कि मिलौं .. सुरती खाणतैं डबल ले त्वेछैं मांगण पडनन . फिर जवानन कैं प्रमोशन ले मिलों . मैं तो पैली ले भितरपन पोछा लगूंछ्यूं . भोल बटी ले पोछा इ लगूण पडौल . मेकें के फैद यो ठन्ड में नैबेर .
स्यैणि कूण लागि - सब चीज प्रमोशन या डबलनाकै लिजी नै हुन . इहलोक परलोक ले के चीज छ . बडी मुश्किलैलि मैंसैकि योनि ऐरौछा . कुछ अघिल जनम ले सुधारो .
मैलि कौ - मेरि आब क्वे जनम सुधरणा क चांस नहांतिन . त्यार दगाड ब्या करण बखत सात जनम क बचन दि राखौ . आब सात जनम तक त्यारै दगाड जिन्दगी क गाडि घ्वेरण पडैलि . कां बटी सुधरौं अघिल जनम .
आब स्यैणि मेकैं मतूण भैगे . स्नानक महत्व समझूण बैठि - ग्रहणकाल स्नानक विशेष पुण्य हूं . सब पाप कटि जानी . आजाक दिन स्नान करिबेर सब ग्रह शान्त है जानी . जिद छोडो . जल्दी करो .
मैलि कौ - ग्रह न कैं मैं ग्रहौ पुज करिबेर मनै ल्यून . पर ऐल यो ठन्ड में कस्सिके स्नान नि करूं . देख धें . आंगांक कान बकुरि गेयी म्यार जाडैलि . मी यसिके पडि जां . भले ही तू आज खाण नि दे . मी भूखै पडि जूल . पर नाणक नाम नि ल्यूं .
आब स्यैणिक मूख तमतमै गे . नाख क दार न बटी स्याप क जस फुंकार छोडन बैठि गे . बिलौजाक बौंव मैलिकै समेरि हाल . कमर में धोति बादि बेर प्रचंड बेग में मेरि तरफ बढि . मेरि हालत चूदानि में फंसी मुसैकि जसि हैगे . मेकें लागणय आज अगर स्नान नि कर तो यो ज्यूनै बुकै हालैलि . आब मेैलि आत्मसमर्पण करणैकि सोचि और जसिके जज सैपनाक सामणि अपराधि आपुणि सजा कम करूणा लिजी दया कि अपील करौं , मैलि ले एक अपील करि . मैलि स्यैणि छैं कौय - चल नि माननी तो के बात नै . जरा पाणि तो गरम करि दे कम से कम भागी . जरा चुडकन जस बणाये .
स्यैणि - गरम पाणिली जै नाण भै तो स्नान करियोंक के पुण्य भै . भांग फुल जौ तस स्नान करै . ठंड पाणिली करो स्नान . तबै सुधरल अघिल जनम .
मैलि बिलकुल लाचार हैबेर दीन हीन कातर स्वर में अंतिम फरियाद करि -
जरा मनतात जस पाणि ले नि चलि सकनैं ??
स्यैणिलि आब मेर पाखुड पकड और घ्वैडि बेर बाथरूम भितक पछेटि दी और एक भयंकर चेतावनी दि - आफि हैबेर स्नान करछा या पाणि तौडयूं तुमार ख्वारन ??
मैलि लगभग किकाट करते हुए कौय - होय होय .. करुल .. आफि करुल स्नान .. छोडि दी छोडि दी .. त्यार खुटन पडूं ..
चलो फटाफट करो पैं .. स्यैणिलि कौय .. और स्नानाक मन्त्र जरा जोरैलि बुलाया . मोहल्ल पडौस वालन कें लागण चें कि तुम ले बामणाक प्वाथ छा .
आब मैलि नाणकि तैयारी करि . जल देवता कैं नमस्कार कर और कौय कि ,,हे जल देवता - अगर मैं साच्ची कैबेर आपुण स्यैणि छैं डरणी धर्मात्मा पुरुष छ्यूं तो तुम आपुण शीतलता और अरडपट्ट पना छोडिबेर जरा गरम हैजाओ ..
पर जल देवता मेरि क्यै सुणछी . उ तो मेरि स्यैणिलि बर्त करिबेर आपुण तरब करि भै पैलिये . पाणि बाकि जै अरड हई भै .एक एक लोट्टि पाणि आंग में डालण पर जीवन भरि करि पाप याद ऐग्याय . तब सोचि मैलि कि नैबेर पाप कसिके कटि जानन . और भुगतण के हैं कूनी कैबेर ले पत्त लागि गे . पैलि स्नान सम्पूर्ण हैगे . फिर यसि प्रकिया मध्यान स्नान में भै . तीसरि स्नानैकि बारि ऐ तो मेर हाड नाक भितर ठंड घुसि गे तब तक . हाथ खुटन में अरडी बेर खांकर जस बादि ग्याय . बस संतोष यो बातक हई भै कि आब जैबेर गरम कपड पैरुल और नानतिनैलि रजैं ततै राखि हुनेलि वी भीतर घुस जूल .
पर आजि भलीकै बबाल फिटि नि भै . भ्यैर आते ही स्यैणि एक धोति लिबेर ढाड हई भै . कूण लागि - कपड कां पैरनैछा ? आजि पैलि जन्यो बदलो . सूतकक जन्यो छ . मैलि मन्दिर में जन्यो बदलणी जुगत तैयार करि राखी . मेर दिमाग सुन्न हैगे . हे भगवान कां फंसि गेयूं
मेकैं जिन्दगी में पैल बार बामण कुल में पैद हुण में लाचारी क अहसास चिताय . आब ठन्ड में जन्यो बदलण में एकार धोति में आदु घण्ट आजि टणकीण पडौल .फिर मुख्य समस्या यो भै कि मैलि उ टैम पर जन्यो पैरियें नि भै . आज तो महाभारत तय लागण बैठ गे .
मैलि डरते डरते कौय - जन्यो कां बटी बदलू .. मैलि तो पैरि नि राख .
स्यैणिलि आपुण ख्वार में हाथ मार और पुछ - किलै कांहुं गो जन्यो ?
मैलि कौ - पोरु एक दिन झाड पिसाब जाण बखत कपडन में अल्जी गोछी . मेर कपड खराब होते होते बचन .. मैलि उसिके जन्यो पैलि लफै दे .
स्यैणि लि कौय .. तुमार तो लच्छणै तासै भै . चलो के बात नै . नई जन्यो पैरौ . द्वि चार जन्यो पैरणाक सकल्प ज्यादा कै लिया और सन्दि करण में आदू घन्ट ज्यादा लगै लिया . भगवान सब माफ कराल .
मरता क्या न करता . मैलि जन्यो पैर और गायत्री मन्त्र - ऊँ भूर्भुव स्व: तक तो ठीकै जप फिर - ओईज् . ओ बबा .. ओ आमा .. जाड हैगो . जाड हैगो .. हू वू वू वू .. क मन्त्र क जाप एक सौ आठ बार जपिबेर बबाल फेड . और हे भगवान यो जाडन में आब अघिक कै ग्रहण नै लगाया कैबेर द्याप्ता क थान बटी भ्यैय आयूं .
( विनोद पन्त 'खन्तोली '

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